समझौता

 *समझौता गमों से* *करलो...!!*

✍️ २८५६


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जब तुम दुखों में भी 

हॅंसना सिखोगे ?

तब समझ लेना तुमने,

जीना सीख लीया है !

गमों में भी तुम मुस्कुराना सिखोगे ?

तब समझ लेना की ,

जीवन की लडाई तुमने जीत ली है !

रोते हुए तो सब आते है ,

खुद का रोना और दुखदर्द जीवन भर के लिये भूलकर ,

हॅंसाना सिख लिया ? 

तो समझो तुम्हे जीना आ गया !


एक समय आयेगा जब तुम्हे जींदगी शांत रहना सिखायेगी ,

सब लोगों को सुनना तुम पसंद करोगे , वह दिन तुम्हारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण रहेगा और वही दिन से तुम्हारी जींदगी बदल जायेगी !


ना किसीसे कुछ बोलना 

ना कुछ बाते करना , ना किसीसे बहस करना , खामोशी से सबकुछ सुनते रहना , सहते रहना ही , जींदगी तुम्हे सबकुछ सिखा देगी और... जीवन का सही अर्थ भी बता देगी !


दुनिया बडी जालीम है ,

जालीम दुनिया में , विश्वास किसपर और कैसे करें ? यह समझकर भी तुम ?

मौन , शांत रहोगे...

हॅंसते हॅंसते जीना सीख लोगे तो ?

समझ लेना ?

तुम जीना सीख गये हो..


खुशिया बाॅंटने पर भी अगर तुम्हे जहर ही मिलता है और ? वही जालीम जहर हजम करके तुम ?

बडे खुशी से और आनंद से जी रहे हो तो ?

समझ लेना तुम जीना सीख गये हो...!


जालीम दुनियादारी का सही अर्थ समझकर भी तुम ?

उच्चतम स्वर्गीय सुख में ? आनंद में निरंतर नहा रहे हो...? तो ??

समझ लेना तुम जीना सीख गये हो...!


दुखदर्द में भी सिने पे पत्थर रखकर , हॅंसना तुमने सीख लिया , तो समझो ? उसी दिन जीना तुमने सीख लिया...!


समझौता ? इंन्सानों से नहीं ... समझौता गमों से करलो...!


 *राधेश्याम* 


 *विनोदकुमार महाजन*


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