राजनिती
*सिध्दांतों की राजनिती* *का विरोध* *क्यों ?* ✍️ २८७३ *विनोदकुमार महाजन* 🚩🚩🚩🚩 मोदिजी की राजनिती *सिध्दांतों की राजनिती* है ! मगर यही सिध्दांत कुछ चोर लुटेरे हेराफेरी करने वालों को चुभने लगी हैं ! और ? " *उल्टा चोर कोतवाल* *को टांडे "* की तरह चोर लोग ही गंदी राजनिती करके , सिध्दांतों का विरोध कर रहे है ! क्योंकी उन सब की चोरी की दुकाने धीरे धीरे बंद हो रही है ! इसिलिए पागल होकर , सांप सांप कहकर उल्टा जोर जोरसे चिल्लाने लगे है और ? सिध्दांतों का विरोध कर रहे है ! मोदिजी का एक ही जबरदस्त मंत्र , " *ना खाऊंगा , ना खाने* *दूंगा..."* के कारण ? सब के सब चोर , लुटेरे , उचक्के परेशान हो गये है ! उनकी सत्ता तो गई , चोरी करके कमाई भी धीरे धीरे समाप्त होती जा रही है , और अब आगे भविष्य में ? सत्ता मिलने की संभावना भी समाप्त होती जा रही है !? इसिलिए ? सब के सब लुटेरे पागल सी हरकते कर रहे है ! और सिध्दांतों की राजनिती का पूरजोर विरोध करने की लगातार कोशिश कर रहे है ! " *एक अकेला शेर* *सबको भारी पडता जा* *रहा है..."* यह उनकी असली समस्या है ! और समस्या के कारण ? उन ...