सावधान
*गुप्त रूप में रहकर कार्य* *आगे बढाना* *है...?* ✍️ २८५० *विनोदकुमार महाजन* 👓👓👓👓 समय बहुत कठीण है .. चारों ओर से गुप्त हितशत्रू घात लगाके बैठा हुवा है .. शत्रू की रणनीती तय है , शक्तिशाली भी है हमारे संपूर्ण बरबादी का गुप्त षड्यंत्र उसके पास है...उसके पास... संपूर्ण सहयोग करने वाला शक्तिशाली संगठन भी है ? वैश्विक सहयोग भी है ? और ? *उनकी ?* एकता भी है... और *हमारे* अंदर ? ना एकता है .. ना मुसिबतों में सहयोग करने वाला कोई व्यक्ती है ? ना कोई ? हमारे पिछे खडे रहनेवाला शक्तिशाली संगठन है ? राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय शक्तिशाली संगठन ?? अकेले लडो और ? मर जाओ...? यही लगभग चारों ओर की भयावह स्थिती है...? इसिलिए ? गुप्त रूप में रहकर कार्य आगे बढाना होगा... *नरो वो कुंजरो* की शक्तिशाली रणनीती बनाकर... एक एक कदम आगे बढाना होगा... और हर कदम बडी सावधानी से और ? फूंक फूंक कर चलना होगा... *अखंड सावधान...!* साप भी मरे लाठी ना टूटे यह रणनीती बनानी होगी... *यहाँ तो ?* हमारे अपनो का ही भरौसा नहीं है... कौन साथ देगा ? कौन ध...