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ईश्वर और कुदरत

 ईश्वर पहले लेता है  बाद में भरभरके देता है...कुदरत पहले लेता है बाद में भरभरके देता है... जैसे ? प्रेम हो या फिर बीज की बुआई हो...इसिलिए ? समर्पित भाव और प्रेम ईश्वर को प्यारा होता है... स्वार्थी भक्त और स्वार्थी मनुष्य को ईश्वर और कुदरत कभी नजदीक नही आने देता है...👍👍👍 विनोदकुमार महाजन

युगपुरुष

 क्या पुरी दुनिया को एक ही झटके में संपूर्ण विश्व का भयावह और विनाशकारी अराजक और उन्माद समाप्त करनेवाले किसी युगपुरुष की प्रतिक्षा है ?? विनोदकुमार महाजन

प्रेम

 हमने अगर सचमुच में ईश्वर पर, पशुपक्षीयों पर , सभी पर अगर सच्चा प्रेम ही किया है और निरंतर प्रेम ही बांटा है तो ? ईश्वर हमारा कभी भी बुरा नहीं होने देगा और ? हमारे सत्य की जीत करके ही रहेगा...!! विनोदकुमार महाजन

नियती

 एक कटुसत्य  विनोदकुमार महाजन  जैसा ईश्वर को हम देते है , ईश्वर भी हमें ठीक वैसा ही वापीस देता है. जैसा हम नियती को देते है , ठीक वैसे ही नियती भी हमें वापीस देती ही है... हरी ॐ 🙏🙏🙏🕉️

सो अहम्

 जिसके अंत:करण की शुध्दी हो गई है उसकी आत्मशुध्दी भी तुरंत हो जाती है और उसे फिर ? बाह्योपचार की जैसे माला , टीला की कोई जरूरत ही नहीं होती है ! जागृत स्वप्न में उसका निरंतर सो $$$ अहम् ध्यान शुरू ही रहता है !! यही ईश्वरी शक्तियों से एकरूप हो जाना है !! विनोदकुमार महाजन  🕉️🕉️🕉️🕉️

स्वाभिमान

 स्वाभीमान और अहंकार...? योग्य कौन और अयोग्य कौन ??स्वाभीमान आत्मसन्मान सिखाता है तो ? अहंकार सर्वनाश करता है... विनोदकुमार महाजन

नामुमकीन कुछ भी नहीं है

 क्या अति भयावह जीवन पर खडतर तपश्चर्या करके विजय प्राप्त करके सचमुच में नशीब बदल सकते है ? जी हाँ , बिल्कुल बदल सकते है... मेरा अनुभव है... और ? क्या एक नया इतिहास भी बना सकते है ? क्यों नहीं ?? नामुमकीन ऐसा भी कुछ है दुनिया में ? अंदर जीद्द और आत्मविश्वास चाहिए ! क्या इसी तरह से विश्व में फैला हुवा अधर्म का भयावह अंधेरा भी हम सब मिलकर हटा पायेंगे ?? सद्गुरू आण्णा की जय...!! विनोदकुमार महाजन