श्रेष्ठ कौन
*प्रेम श्रेष्ठ या पैसा ?* ✍️ २९०४ *विनोदकुमार महाजन* 🩷🪙🩷🪙🩷 साथीयों आपके हिसाब से प्रेम श्रेष्ठ है या पैसा ? शायद आपके हिसाब से पैसा श्रेष्ठ हो सकता है ! और कलियुग का न्याय भी यही है ! जिसके पास पैसा ? वह राजा... फिर पैसेवाला दुर्गुणी भी क्यों न हो ? मगर मान तो पैसेवालों को ही मिलेगा ! पैसा बोलता है ! और जिसके पास पैसा नहीं है मगर वह दिलवाला है , सच्चे मन का है , बुध्दीमान है , गुणवंत भी है और ? पुण्यवान भी है मगर निर्धन है तो ? उसे कौन पुछेगा ? पहले... " विद्वान सर्वत्र पूज्ययेत " ऐसी कहावत थी ! मगर अब ? " धनवान सर्वत्र पूज्ययेत " यही सामाजिक स्थिती बन गई है ! इतना ही नहीं , निर्धन को कोई लडकी तक नहीं देता है...क्यों ? क्योंकी गरीब सुदामा के पास आखिर क्या मिलेगा ? चाहे वह सच्चा दिलवाला हो या सच्चा कृष्ण भक्त हो...? यही तो दुनियादारी है ? इसिलिए दुनिया भी प्रेम से नहीं बल्की पैसो से चलती है ! जी हाँ...पैसों से ! " अमीर को रामराम...गरीब तेरा क्या काम...? " ऐसी ही आज की लगभग सामाजिक स्थिती है ! फिर धन पाप हो या पुण्य का... कौन देखता है...? मगर फिर ...