साधना
*सात्वीक साधना और* *अघोर साधना* ✍️ २८४७ *विनोदकुमार महाजन* 🌹🌹🌹🌹 उन्नत तथा यशस्वी जीवन के लिये हमारे ईश्वर निर्मित आदर्श सनातन संस्कृती में अनेक प्रकार की साधनाएं बतायी गयी है ! जिसमें सात्विक साधना सर्वक्षेष्ठ मानी और समझी जाती है ! जो भी कुछ चाहिए वह लगभग सभी प्राप्त करने के लिये तथा साध्य करने के लिये , खडतर तपश्चर्या द्वारा सात्विक साधना की जाती है ! इसमें अनेक देवीदेवताओं को प्रसन्न करने की अनेक साधनाएं होती है ! जपजाप्य , होमहवन , अनेक अनुष्ठानों द्वारा अनेक देवीदेवताओं को प्रसन्न किया जा सकता है ! इसके साथ ही , अघोर साधना भी इसमें बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है ! और अघोर साधनाओं की जटील क्रियाएं , अघोरीयों द्वारा स्मशानक्रीया द्वारा की जाती है ! जिसमें जारन , मारन , उच्चाटन , संमोहन , वशीकरण जैसी अनेक क्रियाएं की जाती है ! स्मशान से संबंधित क्रियाएं होने के कारण , साधारणतः ऐसी क्रियाएं महादेव , महाकाली तथा कालभैरव से संबंधित होती है ! क्योंकी महादेव स्वयं स्मशान में ही रहते है ! और महादेव , देवों के देव भी है , इसके साथ ही भुतपिशाचों के , नागो...