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समजुतदारपणा

 *समजुतदारपणा...* ✍️ २७९९  _विनोदकुमार महाजन_ 👍🌹👍🌹👍  समजुतदारपणा... जीवनातील यशाचे एक अजब शस्त्र. साधारणतः तरूण वयामध्ये तापटपणा व आक्रस्ताळेपणा जास्त प्रमाणात असतो. प्रत्येकाने आपले ऐकलेच पाहिजे अशी मनाची धारणा असते. पण जसजसे वय वाढत जाते तसतसे मनुष्य जागोजागी तडजोडी करत जातो आणी या तडजोडीतुनच समजुतदारपणाचा जन्म होतो. सहनशीलता , सोशीकता म्हणजेच समजुतदारपणा. पण अती समजुतदारपणा पण जीवनात ब-याच वेळा मारक ठरतो आणी प्रसंगावधान राखुन दाखवलेला समजुतदारपणा नेहमीच तारक ठरतो. समजुतदारपणा मुळे जीवनातील अनेक प्रश्न मार्गी लागतात तर ब-याच वेळा सहनशीलतेच्या अतीरेकामुळे अनेक गंभीर प्रश्न देखील निर्माण होऊ शकतात. म्हणजेच जीवनात नेहमीच समजुतदारपणाचा गुरूत्वमध्य काढून मार्गक्रमण करणे हीतकारक ठरते. समजा  आपण एखाद्यावर खूप प्रेम करतो पण त्याला , आपण ज्याच्यावर निरपेक्ष खरे निस्वार्थी प्रेम करतो याची त्याला त्याची शून्य कींमत वाटते... अशावेळी आपण त्याच्याशी इर्षा न करता अथवा समजावुन न सांगता अथवा हुज्जत न घालता मौनपणे , समजुतदारपणाने मनाचा मोठेपणा दाखवून तडजोड करतो व समजुतदारपणाने ...

मतलब की दुनिया

 मतलब की दुनिया में तुम्हारे सच्चाई और अच्छाई की कीमत शून्य होगी ! उल्टा यही दुनिया तुम्हे बारबार पीडा , नरकयातना ही देगी! मगर ईश्वर के दरबार में तुम अनमोल ही होगे ! अनेक महापुरूषों का उदाहरण !! विनोदकुमार महाजन

घर की अशांति

 *घरेलु विवाद और मन* *की अशांती...??* ✍️ २७९८  *विनोदकुमार महाजन*  ------------------------ लगभग हर घर में आज के भयंकर भागदौड के समय में प्रसन्नता गायब होती जा रही है और मन की बेचैनी अशांतता दिन बदिन बढती जा रही है ! आईये आज इसकी कारण मिमांसा करते है ! क्या आज लगभग ऐसा ही होता जा रहा है ? घरेलु विवाद आज अनेक नयी समस्याएं उत्पन्न करता जा रहा है ! क्या हो गया है मनुष्य प्राणी को ? हर घर में सामंजस्य खतम होता जा रहा है , और विनाशकारी अहंकार हर जगह पर निर्माण होता जा रहा है ! इसिलिए रिश्तेनातों में भी दूरीयां बनती दिखाई दे रही है ! एक दूसरे के प्रती उच्च कोटी का प्रेम , स्नेह , समर्पण भाव , आत्मियता समाप्त होती जा रही है ! इसकी जगह क्रोध, अहंकार बढता जा रहा है ! रिश्तों की मिठास खतम होती जा रही है और खटास बढती जा रही है ! एक दूसरे के प्रती प्रेम की जगह भयंकर कडवाहट बढती जा रही है ! सच्चे मन से प्रेम करनेवालों की कीमत नगन्य ही नहीं बल्की शून्य होती जा रही है ! इसी कारण रिश्तेनातों में दूरीयां भी बढती जा रही है ! कोई किसीके मन का विचार करने को ही तैय्यार नहीं है ! विभक्त कुटुंब...

मेरे कृष्णा

 *मुझे तो मेरा कृष्णा* *चाहिए*  ना भूक लगती है ना प्यास लगती है  कृष्णा तेरी याद में सारी जींदगी गुजरती है यही है प्रेम... दिव्य प्रेम.. स्वर्गीय शुध्द प्रेम... जन्म जन्मानंतर तक का.. यही प्रेम हर एक प्राणीयों में चाहिए  यही ईश्वरीय प्रेम मेरे प्राणप्रिय सद्गुरू आण्णा ने सिखाया... और स्वयं दिखाया... ना धन चाहिए ना वैभव चाहिए  ना यश चाहिए ना किर्ती चाहिए  ना मान चाहिए ना संन्मान चाहिए  कृष्णा मुझे तो बस तू ही तू चाहिए  मेरे सद्गुरू आण्णा चाहिए  एक तरफ जहर के प्याले हैं और दूसरी तरफ अमृत के कूंभ  मगर मेरे कृष्णा के लिये  मेरे आण्णा के लिये  मुझे अमृत कूंभ नहीं मिलेंगे तो भी चलेगा  जहर के प्याले हजम करने पडेंगे तो भी चलेगा  मगर मुझे मेरा कृष्णा चाहिए  मेरे आण्णा मुझे चाहिए  मेरे कृष्णा के बीना  मेरे आण्णा के बीना  मेरा जीवन अधूरा है  जनम जनम तक मुझे मेरा कृष्णा चाहिए  मेरे आण्णा चाहिए  मेरे आण्णा ने तो मुझे  *राधाकृष्ण* के दिव्य दर्शन दिए ... दिव्य दर्शन... दिव्य अनुभूती... जनम जनम...

ब्रम्हतत्व

 माझ्या आण्णांच्या कृपेने आज मी अती भयावह जीवनावर विजय मिळवला आहे आणी अशक्य ते शक्य करून दाखवले आहे व मला जे हवे ते सगळेच मिळवले आहे. ( अक्षय ब्रम्हतत्व ) विनोदकुमार महाजन

सुष्ट

 दुष्टों की संगत मतलब ? जान को खतरा...! सज्जनों की संगत मतलब ?? जीवन है प्यारा...!! विनोदकुमार महाजन

ठंडा दिमाग

 *सभी समस्याओं का एक* *ही इलाज ? ठंडा* *दिमाग ??* ✍️ २७९६  *विनोदकुमार महाजन*  ✅✅✅✅✅ ठंडा दिमाग  कूल माईंड... संपूर्ण समस्याओं का एक ही रामबाण इलाज... समस्या चाहे कितनी भी भयंकर हो...मुसिबत चाहे कितनी भी बडी हो...? बस्स्... दिमाग ठंडा रखिए और ठंडे दिमाग से समस्या का समाधान ढूंडिये... समाधान जरूर मिलेगा.. ठंडे दिमाग से लिये गये सभी निर्णय यशस्वीता की ओर ले जाते है  निश्चित ही ... और जब हम इसीमें माहिर हो जाते है तो ? समझो जीवन की लडाई हम जीत गये... आर्थिक समस्याओं के कारण... चिडचिडेपण होता है , शत्रू पीडा के कारण भी ऐसा होता है , बिमारीयों में भी ऐसा चिडचिडेपण होता है... जरूर होता है...जितनी समस्या गंभीर उतना दिमाग काम करना बंद होता है... मगर ...? चिडचिडेपण से जीवन की लडाई में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न हो जाती है...शायद हार भी होती है और ? हितशत्रूओं का बल भी बढता है... दिशाहीन जीवन...? किस काम का ?? मगर...? समस्या चाहे कितनी भी भयंकर हो.. ठंडा दिमाग और मौन रहने से ? सभी समस्याओं का हल मिलता ही है और ? इससे कितना भी भयंकर ताकतवर हितशत्रू भी हतबल होकर घुटने के...