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भव्यदिव्य जीवन

 *एक भव्यदिव्य जीवन* *जगावे...!!* ✍️ २८२३  *विनोदकुमार महाजन*  ✅✅✅🎯🕉️ अगदी प्रत्येकालाच असे वाटत असते की... आपण छान , सुखी , आनंदी जीवन जगावे. एक उत्तुंग , भव्यदिव्य जीवन जगावे.यशाची उत्तुंग गरूड भरारी घेऊन यशाची अनेक शिखरे काबीज करावी. कुणाला पैशाने मिळणारी श्रीमंती , पैशाने मिळणारी सगळी सुखे हवी असतात. तर कुणाला खूप मोठ्ठ , भव्यदिव्य नाव कमवावं असं वाटत असतं. कुणाला सिनेमातील हिरो हिरोईन व्हायचं असतं तर कुणाला मोठ्ठा महाराज होऊन समाज हित साधायचं असतं. कुणाला मोठ्ठा क्रीकेटपटू व्हायला आवडतं. तर कुणी गबरगंड उद्योगपती होणं पसंत करतो. कुणाला मंत्री , आमदार , खासदार व्हायचं असतं. तर कुणाला कांहीं. जीवनात प्रत्येकाचं एक स्वप्न असतं. सुखाचं स्वप्न , यशाचं स्वप्न. प्रत्येकाचं स्वप्न अगदी वेगवेगळं असतं. आणी प्रत्येकाचं स्वप्न , प्रत्येकाचं ध्येय पुरं होईलच असं ही नसतं. पण प्रत्येक जण अगदी आपापल्या स्वप्न पुर्तीसाठी स्वतःला अगदी झोकून देत असतो. ध्येयवादी राहणं , स्वप्न पाहणं कांहीं वाईट नाही.पण त्याची पुर्तता करणं , स्वप्न पुर्तीसाठी सतत त्याचा पाठपुरावा करणं कठीण असतं. प्रत्ये...

बैर

 कुछ रिश्ते ऐसे भी होते है की मानो पिछले जनम का बैर चुका रहे है !! 👆😂🤣😂😂🤣😜 विनोदकुमार महाजन

धर्मयुद्ध

 *श्रीकृष्ण को धर्म युद्ध* *क्यों करना* *पडा...था ??* ✍️ २८२२  *विनोदकुमार महाजन* 🕉️🕉️🕉️🚩   *श्रीकृष्ण...*  दशावतार में परीपूर्ण देवता !  स्थितप्रज्ञ... धूरंधर राजनितीज्ञ... अंतरर्यामी प्रभू परमात्मा ! फिर भी स्वयं ईश्वर को भी धर्म युद्ध करना पडा ? *क्यों ??*  जब कॅंस के कारागृह में उसके माॅं बाप को बंदी बनाया गया ? तब श्रीकृष्ण क्या शांत , स्थिर बैठ सकता था ?  *कॅंस...* श्रीकृष्ण का सगा मामा...हाहाकारी , उन्मत्त , दुष्ट ? क्या स्वयं ईश्वर सगे मामा को माफ करता ?  *दुष्ट हिरण्यकश्यपू ?*  अपने ईश्वर स्वरूप बेटे भक्त प्रल्हाद को नामशेष करने के लिये भयंकर षड्यंत्र करता ?  *सगा बाप ?*  क्या ऐसे समय में ईश्वरी शक्तियाॅं शांत बैठती ? पांडवों का भयंकर बनवास और नारकिय अज्ञात वास क्या परमात्मा ईश्वर स्वयं श्रीकृष्ण खुले आंखों से देखता रहता ? पांडवों की पागलों की तरह दर दर भटकने की दयनीय स्थिती...वह भी *साम्राज्य छोडकर ?*  क्या श्रीकृष्ण यह सबकुछ देखता रहता ?  *अभिमन्यू को* चक्रव्यूह में फॅंसाकर कौरवोंद्वारा तडपा तडपा कर मार...

पती पत्नी समन्वय

 *पती पत्नी समन्वय कैसे* *रहेगा...?* ✍️२८२१  *विनोदकुमार महाजन*  ✍️✍️✍️✍️ आज का गंभीर प्रश्न और गंभीर समस्या ? क्या सचमुच में पती पत्नी समन्वय समाप्त होता जा रहा है ? जी हाँ... बिल्कुल सही बात है ! क्यों ? क्योंकी दिन बदिन सुसंस्कृत समाज निर्माण के लिये आवश्यक होने वाला संस्कारों का धन धिरे धिरे विलुप्त होता जा रहा है ! एक जमाना भी था जब नर को नारायण तथा नारी को नारायणी का दर्जा दिया जाता था ! और लगभग हर घर में यही ईश्वरीय रिश्ता पती पत्नी द्वारा निभाया जाता था ! एक दूसरे के प्रती समर्पित भाव , उच्च कोटी का आपसी प्रेम , दोनों का सामंजस्य , श्रध्दा , विश्वास , प्रेम और एक दूसरे के लिये जान तक समर्पित करने का भाव... यह पावित्र्य पती पत्नी रिश्तों को आजीवन एक धागे में बांधकर रखता था ! मगर इस संस्कृती संपन्न देश में धिरे धिरे जानबुझकर अविश्वास तथा हर एक की मनमानी, स्वैराचार का माहौल षड्यंत्रो द्वारा फैलाया गया... परिणाम स्वरूप आज का विद्रोह तथा पती पत्नी कलह समाज में तेजिसे बढता गया ! यही कारण है की ,एक दूसरे के प्रती प्रेम की जगह नफरत बढती जा रही है ! दोनों में से एक संपूर्ण...

मृत्युदंड

 *मृत्युदंड और सामाजिक* *शांती....!!* ✍️ २८२०  *विनोदकुमार महाजन*  🔺🔺🔺🔺 समाज में जब दुर्जनों की संख्या बढती है और सज्जनों की संख्या घटती है तब... सामाजिक विद्रोह , अन्याय , अत्याचार बढने लगते है ! शासन व्यवस्था और कानून व्यवस्था ठप्प हो जाती है और समाज में अफरातफरी , हाहाकार मच जाता है ! ऐसे समय में सामाजिक न्याय एवं सामाजिक सौहार्द के लिये , दुष्ट शक्ती और दुर्जन व्यक्तियों को कठोर दंडीत करने से ही समाज व्यवस्था का संतुलन फिरसे कार्यान्वित हो जाता है ! मगर जब कानून व्यवस्था और शासन व्यवस्था ही ठप्प हो जाती है तो सामाजिक विद्रोह निर्माण करनेवाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश कौन और कैसे लगाएगा ? यह महत्वपूर्ण प्रश्न उपस्थित होता है ! दुष्ट दुर्जन शक्ती मतलब आसुरीक शक्तियों का समाज में जब हाहाकार फैलाने का काम बढता है और सज्जन शक्ती जब भयंकर मुसिबतों में फंस जाती है तब ? अदृश्य ईश्वरी शक्ती अथवा कुदरत का कानून इसमें हस्तक्षेप करता है और बिगडा हुवा सामाजिक संतुलन फिरसे स्थापीत करने की अदृश्य योजनाएं बनाता है ... तब...? दुष्ट दुर्जन शक्तियों को कठोर दंडीत करने के लिये मृत्यू ...

ईश्वर

 श्रध्दा विश्वास प्रेम व चिकाटी असेल तर ईश्वर नक्कीच भेटतो... विनोदकुमार महाजन

कथाकथन ग्रुप

 ग्रुप खूप छान सुंदर आहे  सुंदर लोकांचा आहे  माझ्या लेखाबद्दल मला व्यक्तीश: अनेक महात्मा संपर्क करून लेख आवडल्याचे कळवतात. त्या सगळ्यांचे मनापासून खूप आभार. असेच सगळ्यांचे निस्सीम प्रेम राहो. मराठी बरोबरच हिंदी लेखाचिही ग्रुप एडमिन करून परवानगी मिळावी ही अपेक्षा. विनोदकुमार महाजन  अंतरराष्ट्रीय पत्रकार  मुंबई  🙏🙏🙏🕉️