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आत्मचिंतन

 *आत्मचिंतन*  हजारो मनुष्य रूपी विषारी सापांच्या जालिम कलियुगी गराड्यात राहूनही तुम्ही छान सुखी समाधानी आनंदी रहात असाल , आनंदी जीवन जगत असाल, तर तुम्ही नक्कीच काळावर विजय मिळवून स्थितप्रज्ञ झालेला आहात आणी तुमच्या वर संपूर्ण ईश्वरी कृपेचे वरदान प्राप्त झाले आहे असे समजावे. आणी जर तुम्ही अशा वातावरणात सतत बेचैन , अस्वस्थ आणी अस्थिर रहात असाल तर तुम्हाला आणखी बराच आध्यात्मिक प्रवास करावयाचा बाकी आहे , असे समजावे. म्हणूनच संपूर्ण आंतरीक शांतीसाठी अंतर्मुख होऊन आत्मचिंतन करण्याची व ईश्वरी शक्तिशी एकरूप होण्याची आवश्यकता आहे. त्यासाठी *सो अहम्* ध्यान तुम्हाला नक्कीच या यशस्वी व अंतिम पायरीपर्यंत घेऊन जाण्यासाठी उपयोगी ठरेल. ( एखाद्या सिध्द पुरूषाने जर तुमच्या डोक्यावर वरदहस्त ठेवला तर अशी स्थितप्रज्ञता तर मिळेलच मिळेल, शिवाय आयुष्यात जे कांही हवे ते सगळेच प्राप्त होईल. पण अशा सिद्ध पुररूषांची भेट होणे पण भाग्यामध्ये असावे लागते.व गुप्त रूपाने समाजात राहणारे सिध्द पुरूष पण आपणास ओळखता आले पाहिजेत.... कर्म झोपलेले असेल तर देव तरी काय करणार ? तुझे आहे तुजपाशी परी जागा चुकलाशी...) ...

ईश्वरी सिध्दांत

 *ईश्वरी सिध्दांत...*  १ ) जब ईश्वर उसकी योजना के अनुसार किसी पवित्र आत्मा को धरती पर भेजता है तो प्रेम प्राप्त करने के लिये अथवा प्रेम बाॅंटने के लिये नहीं बल्की क्रूरता से अधर्म को सदा के लिये मसलने के लिये ही धरती पर भेजता है ! ईश्वर की कभी कभी ऐसी भी योजना होती है जो हमारे जैसे साधारण मनुष्य के समझने के बाहर होती है ! उदाहरण : अर्जुन... जय श्रीकृष्ण !! २ ) एक अंत से ही एक नया आरंभ होता है...,  " समस्त धर्मों का अंत भी यथार्थ सनातन धर्म में ही पुर्नस्थापित करेगा !!! " ३ ) जब देवीदेवता किसी पर निरंतर प्रेम करते रहते है मगर मनुष्य प्राणी उसे सदैव तडपाते रहते है तो समझ लेना वह कोई साधारण आत्मा नहीं है ! उदाहरण : अनेक संत महंत ! ४ ) जब कोई निरपेक्ष भाव से निरंतर ईश्वरीय कार्य करता रहता है और उसे अपने ही निरंतर नरकयातनाएं देते रहते है तब समझ लेना की निश्चित ही वह महापुरुष ही है ! उदाहरण : अनेक सिध्द पुरूष ! ५ ) जब सैतानी खेल और अधर्मी जहरीले साॅंपों के खेल समाप्त होने का समय आता है और ईश्वरी नवसृजन का समय शुरू होता है तब.. धरती पर भयंकर उथल पूथल आरंभ हो जाती है ! ६ ) जब कोई...

सनातन

 एक अंत से ही एक नया आरंभ होता है...,  " समस्त धर्मों का अंत भी यथार्थ सनातन धर्म में ही पुर्नस्थापित होगा !!! " विनोदकुमार महाजन

सुख म्हणजे नक्की काय असतं...??

 *तुमच्या साठी वेगळं*    *"पॅकेज " असेल ??* ✍️ २८०४  *विनोदकुमार महाजन* 💰💰💰💰   *पॅकेज...* तरतुदींच पॅकेज  आर्थिक लाभाच पॅकेज  भविष्यकालीन आनंदाचं पॅकेज  तुमच्या कुवतीनुसार , शिक्षणानुसार , तुमच्या निर्णयानुसार , मिळालेल आर्थिक वरदानाच पॅकेज...  *होय पॅकेज...* आर्थिक लाभ हानीच पॅकेज... घबाड...धनाच घबाड  आर्थिक लाभाच घबाड  प्रत्येकाच्या नशीबानुसार , कर्म गती नुसार  मिळालेल सुखदुःखाच पॅकेज... तसं पाहिलं तर आजचं जीवन सगळं पॅकेज वरच चालतं  आर्थिक लाभाच पॅकेज  आर्थिक विकास... तुमच काय माझं काय  अगदी सगळ्यांच्या आयुष्याच्या सुखदुःखाचं गणित या पॅकेज वरच चालतं. जेवढ पॅकेज मोठं तेवढं सुख सुध्दा मोठं अशी साधारण सामाजिक कल्पना असते. दहा लाखाच पॅकेज , पन्नास लाखाच पॅकेज , दोन कोटीच पॅकेज... असं वेगवेगळं आर्थिक पॅकेज... पण ज्याला पॅकेज आहे त्याच ठीक आहे हो... भलमोठ्ठ आर्थिक लाभाच पॅकेज... तशी दुनिया आणी दुनियादारी सरासरी या पॅकेज वरच चालते. पण ज्याला पॅकेज नाही तो ? शून्य ?? म्हणजे ?  एखाद्याचं हातावरच पोट आहे , ...

दुर्जनों से छूटकारा

 *दुर्जनं प्रथमं वंन्दे...* ✍️ २८०३  *विनोदकुमार महाजन*  🙏🙏🙏🙏 नफरत करनेवालों के सिने में प्यार भर दूं... मैं वो परवाना हूं पत्थर को मोम कर दूं... यह एक पुराना किशोर कुमार का गाना है...जो अमिताभ बच्चन पर शूट किया हुवा है...! मतलब ? नफरत करनेवालों के भी सिने में प्यार भरनेवाला...? क्या यह संभव है या होगा ...? और एक संस्कृत वाक्य भी है... दुर्जनं प्रथमं वंन्दे...! उपर के दो विरूद्ध विचार एक करके उसपर आज के लेख में विवेचन करते है !  *भगवान श्रीकृष्ण...*  विष्णू का आठवा अवतार  प्रेम को सर्वोच्च स्थान देनेवाला महान देवता  योगेश्वर... योगीयों का योगी सभी कलाओं में पारंगत  कुटिल राजनितीज्ञ... फिर भी जन्म से लेकर अवतार समाप्ती तक कठोर संघर्ष... भयंकर दुखदर्द झेलकर भी... स्थितप्रज्ञ... सुदर्शन चक्र धारी... अजेय... देहरुप धारण करके जब धरती पर अवतारी हुवा... तब...? क्या हुवा...? दुर्योधन ? दुष्ट षड्यंत्रकारी दुर्योधन ?? हाहाकार मचाने वाला दुर्योधन...? सर्वश्रेष्ठ श्रीकृष्ण को भी ललकारता था... क्यों...??? क्योंकी दुष्ट था... फिर भी श्रीकृष्ण ने  कृष्ण...

इस्राएल

 *इस्त्रायल इतना* *आक्रामक क्यों और कैसे* *हो गया....???* ✍️ २८०२  *विनोदकुमार महाजन*  🤺🤺🤺🤺🤺 यहुदी... एक जबरदस्त बुध्दीवादी तथा सर्वोच्च रणनीती बनाकर अपने अस्तित्व को विश्व पटल पर , यशस्वीतासे पुनर्स्थापित करने वाला एक लढवय्या समाज. संपूर्ण विश्व में कम आबादी तथा इस्रायल जैसा कम क्षेत्रफल वाला एक जबरदस्त शक्तिशाली झंझावाती समाज और देश. अपने अस्तित्व की लडाई यशस्वीता से लडनेवाला संपन्न सुखी समाज. जैसे हिन्दुओं पर अनेक सदियों से उसके नामोनिशाण मिटाने के तथा उसका अस्तित्व समाप्त करने के लगातार अनेक भयावह प्रयास किए गये ठीक वैसे ही यहुदियों पर भी अनेक सदियों से ऐसे भयावह प्रयास लगातार किए गये ! फिर भी आज हिंदू और यहुदी अपना अस्तित्व तथा अपनी संस्कृती लगातार आगे बढाने के लिये अथक प्रयास करते आ रहे है ! दोनों समाज ने अनेक स्थित्यंतरे देखी अनेक परिवर्तन देखे और समय के अनुसार खुद को बदलकर अपने संस्कृती को आगे बढाने की कोशिश की गई ! जिसका अस्तित्व ही बारबार खतरे में पड जाता है उसे अपना अस्तित्व कायम बनाये रखने के लिये हमेशा आक्रामक रहना ही पडता है ! हिंदू धर्म में ऐसी आक्रामक...

हमारा देश सुरक्षीत है

 *क्या मोदिजी के हाथ में* *हमारा देश सुरक्षीत* *रहेगा....??*✍️ २८०१  *विनोदकुमार महाजन*  🔥🔥🔥🔥🔥 मैं लगभग पंद्रह सालों से भी जादा समय से मेरे अनेक लेखों में आज के भयावह जागतिक स्फोटक स्थिती का लगातार जीक्र करता आया हूं ! जो आज की भयंकर जागतिक विस्फोट की स्थिती दर्शाती थी ! मैं हमेशा मेरे अनेक लेखों में यह लिखता आया हूं की , आसुरीक , राक्षसी , हाहाकारी और उन्मादी शक्तियों के विनाश का और संपूर्ण संहार का समय नजदिक है ! और सृष्टी निर्माता ईश्वरी इच्छा के अनुसार ही... " ब्रम्हांडिय शुध्दी प्रक्रिया " शुरू होगी... आज यह मेरा कहना भी सच साबित होता जा रहा है ! इतना ही नहीं तो मैं आगे यह भी लिखता आया था की... " गौमाताओं का आक्रंदन और उसके श्राप से संपूर्ण पृथ्वी पर हाहाकार मचेगा ! " यह भी मेरा कहना आज सत्य साबित होता जा रहा है ! इतना ही नहीं सृष्टी संतुलन तथा पशुपक्षीयों की तथा निष्पाप जीवों की रक्षा के लिये अदृश्य ईश्वरीय शक्तियों द्वारा संपूर्ण राक्षसी वृत्तियों का और शक्तियों का संहार हो जायेगा ! और इसके बाद सत्य का तथा ईश्वर निर्मित सत्य सनातन धर्म का राज्य संपूर्ण ध...