चाणक्य
अकेले को ही लडनी पडती है जीवन की लडाई यहाँ साहब... अपनों से भी अनेक धोके , घात , मजबुरीयाॅं , विश्वास घात और बेईमान लोगों से यहाँ पग पग लडकर आगे निकलना पडता है , हर जहर अकेले ही हजम करना पडता है , तभी जाकर तुम ? राजा बनते हो... नशीबवान...!! जो जीता वही ? चाणक्य !! विनोदकुमार महाजन