ईश्वर और कुदरत
ईश्वर पहले लेता है बाद में भरभरके देता है...कुदरत पहले लेता है बाद में भरभरके देता है... जैसे ? प्रेम हो या फिर बीज की बुआई हो...इसिलिए ? समर्पित भाव और प्रेम ईश्वर को प्यारा होता है... स्वार्थी भक्त और स्वार्थी मनुष्य को ईश्वर और कुदरत कभी नजदीक नही आने देता है...👍👍👍 विनोदकुमार महाजन