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भगवामय भारत

 *भगवामय भारत...*  ✍️ २८५४  *विनोदकुमार महाजन*  🪷🪷🪷🚩✅ तृण का ? जहरीला मूल ? हट गया...कट गया... अत्याचार का ? मूल ही ? उखाड के फेक दिया ? मोदी ने... और...किचड से ? कमल का फूल ? 🪷खिल उठा...खिल उठा... कमल का फूल...? हटा देगा सबके जीवन की धूल...🪷🪷🪷 साक्षात  महालक्ष्मी विराजमान है  कमल के फूल पर... 👆🙏🙏🙏🪷 अब अगली लोकसभा चुनाव ?? में ? बिजेपी ?? चारसौ पार...चारसौ पार...  हिंदुत्व जींदाबाद... बिजेपी जींदाबाद... मोदिजी जींदाबाद... योगीजी जींदाबाद.... भगवे का राज आया है  सनातन धर्म का सुर्योदय  हो गया है... भगवा मय भारत सनातन मय भारत  सनातन मय विश्व जय जय श्रीराम... हर हर महादेव... जय श्रीकृष्ण... *विश्व स्वधर्म सुर्ये पाहो*  👍🚩🚩🪷✅

मच्छर

 *मच्छर ? कान के* *नजदिक आकर क्यों* *चिल्लाते है...??* ✍️ २८५३  *विनोदकुमार महाजन*  🦟🦟🦟🦟 सोचनीय बात...? पापी पेट का सवाल ? वैसे तो हर सजीवों को , ईश्वर ने पेट दिया है और ? पेट भरने की कुछ कला भी अवगत करायी है ! और इसी के तहत पेट भरने के लिये , एक रणनीती बनाकर , अपने शिकार पर हमला करता है ! हर पशुपक्षीयों की यह रणनीती अलग अलग होती है ! इसमें भी कोई शाकाहारी है , कोई मांसाहारी है तो कोई ? रक्त पिपासू ? मच्छर , खटमल जैसा ! इतना सा छोटासा देह होता है मच्छर का ! और उसका दिमाग भी कितना छोटासा होगा ! और उसी छोटेसे दिमाग से , खून चुसने के लिये , रक्त पिने के लिये , पेट भरने के लिये , एक रणनीती बनाता है ! इसिलिए वह छोटासा जीव , हमारा अंदाज लेने के लिये , मतलब ? शिकार सोया है या फिर जागा है ? इसका अचूक अंदाज लेने के लिये , कान के नजदिक आकर जोर से... " गुंई....$$$ " ऐसा विचित्र आवाज निकालता है ! अगर हम जागे हुए है तो ? उसको फटकारते है ? और अगर सो गये है तो ? काम तमाम... मच्छर खून चूसकर चला जाता है और उपर से ? डेंग्यू , मलेरिया के व्हायरस हमारे अंदर छोड देता है ! एक मच्छर भी ? शा...

चिमणी परत आलीच नाही

 *चिमणी ? परत आलीच* *नाही...??* ✍️ २८५२  *विनोदकुमार महाजन* 🐥🐣🐥🐣  एक चिमणी... आपल्या इवल्या इवल्याशा दोन चिमण्या पिलांना , छोट्याशा जीवांना घरट्यात सोडून , बाहेर गेली. चारा आणायला. दोन इवल्याशा जीवांना चोचीने चोचीत चारा भरायला. दोन इवलीशी चीमणी पिलं , आई चारा घेऊन येईल म्हणून आतुरतेने तिची वाट बघत होती. माझी आई परत येईल या आशेवर. वेडी आशा होती त्या पिलांची. कारण ? त्यांना तरी काय माहीत होतं की आपली आई आता परत कधीच येणार नाही म्हणून ? त्यांची आई चारा आणायला म्हणून गेली ती परत आलीच नाही. कधीच परत आली नाही. दोन निष्पाप चिमणी पिलं , आपली आई येण्याची , आतुरतेने वाट बघत होती...तरी ती लेकराची माय , आई आलीच नाही. आई कुठे गेली , कशी गेली , हे त्या चिमुकल्या लेकरांना तरी काय समजणार ? आणी कोण सांगणार ? तिकडे ती चीमणी जाळ्यात अडकली. एका सराईत शिका-याने अचूक जाळं लावलं ते शिकार साधायला. काळाचंच जाळं ते ? त्यातून एक तरी सावज कसे सुटेल ? चीमणी जाळ्यात अडकली आणी तिचा जीव तडफडू लागला. तिची दोन चीमणी बाळं , आईची आतुरतेने वाट पाहत असतील , हे त्या निष्पाप चीमणीला माहित होतं. या शिका-याच्...

हिंदुओं को नामशेष करनेवाले का प्रयत्न

 *हिंदू ? षड्यंत्रों का* *शिकार... ??* ✍️ २८५१  *विनोदकुमार महाजन*  🚩🚩🚩🚩  *हिंदू...* इतिहास के पन्नों में एक परिपूर्ण तथा तेजस्वी समाज के रूप में गौरवान्वीत किया जाता है...! ऐसे तेजस्वी , परोपकारी समाज को सदीयों से , एक भयावह षड्यंत्रों द्वारा , कुछ ( ?? ) आक्रमणकारीयों ने , नामशेष करने की , आदर्श हिंदू संस्कृती को नेस्तनाबूत करने की , संपूर्णतः तबाह , बरबाद करने की अनेक योजनाएं बनायी गयी !  *अनेक लुटारू* और आक्रमणकारी इस देश में आये , देश का अपरीमीत धन वैभव भी लूटा , देश पर अनेक सालों तक राज भी किया और...? सबसे भयानक कार्य यह किया की , यहाँ की आदर्श हिंदू सनातन संस्कृती को , आदर्श जीवन पध्दती को , जमीन में गाडने की , संपूर्णतः तबाह करने की , नामशेष करने की , यहाँ अनेक षड्यंत्रकारीयों द्वारा हमेशा के लिये , जमीन के निचे की यशस्वी योजनाएं बनायी गयी ... परिणाम स्वरूप आज भी अनेक जगहों पर  ??  हिंदू समाज , घोर नारकिय जीवन जीने के लिये , मजबूर हुवा है ! सबसे पहले हिंदू संस्कृती नामशेष करने के लिये , उसके , हिंदुओं के , आत्मविश्वास पर हमले किए गये !...

सावधान

 *गुप्त रूप में रहकर कार्य* *आगे बढाना* *है...?* ✍️ २८५०  *विनोदकुमार महाजन* 👓👓👓👓  समय बहुत कठीण है .. चारों ओर से गुप्त हितशत्रू घात लगाके बैठा हुवा है .. शत्रू की रणनीती तय है , शक्तिशाली भी है  हमारे संपूर्ण बरबादी का गुप्त षड्यंत्र उसके पास है...उसके पास... संपूर्ण सहयोग करने वाला शक्तिशाली संगठन भी है ?  वैश्विक सहयोग भी है ? और ? *उनकी ?*  एकता भी है... और *हमारे* अंदर ? ना एकता है .. ना मुसिबतों में सहयोग करने वाला कोई व्यक्ती है ? ना कोई ? हमारे पिछे खडे रहनेवाला शक्तिशाली संगठन है ? राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय शक्तिशाली संगठन ?? अकेले लडो और ? मर जाओ...? यही लगभग चारों ओर की भयावह स्थिती है...? इसिलिए ? गुप्त रूप में रहकर कार्य आगे बढाना होगा...  *नरो वो कुंजरो* की शक्तिशाली रणनीती बनाकर... एक एक कदम आगे बढाना होगा... और हर कदम बडी सावधानी से और ? फूंक फूंक कर चलना होगा...  *अखंड सावधान...!*  साप भी मरे  लाठी ना टूटे  यह रणनीती बनानी होगी...  *यहाँ तो ?*  हमारे अपनो का ही भरौसा नहीं है... कौन साथ देगा ? कौन ध...

कार्य

 *गुप्त रूप में रहकर कार्य* *आगे बढना* *है...?* ✍️ २८५०  *विनोदकुमार महाजन* 👓👓👓👓  समय बहुत कठीण है  चारों ओर से गुप्त हितशत्रू घात लगाके बैठा हुवा है  शत्रू की रणनीती तय है , शक्तिशाली भी है  हमारे संपूर्ण बरबादी का गुप्त षड्यंत्र उसके पास है...उसके पास... संपूर्ण सहयोग करने वाला शक्तिशाली संगठन भी है और ? उनकी ? एकता भी है... और हमारे अंदर ? ना एकता है  ना मुसिबतों में सहयोग करने वाला कोई व्यक्ती है ना कोई ? हमारे पिछे खडे रहनेवाला शक्तिशाली संगठन है ? अकेले लडो और ? मर जाओ... यही लगभग चारो ओर की भयावह स्थिती है... इसिलिए ? गुप्त रूप में रहकर कार्य आगे बढना होगा... नरो वो कुंजरो की शक्तिशाली रणनीती बनाकर... एक एक कदम आगे बढना होगा... और हर कदम बडी सावधानी से और ? फूंक फूंक कर चलना होगा... साप भी मरे  लाठी ना टूटे  यह रणनीती बनानी होगी... यहाँ तो ? हमारे अपनो का ही भरौसा नहीं है... कौन साथ देगा ? कौन धोका देगा ? कौन घात करेगा ? यह पता नहीं है... हर जगहों पर  सत्ता और संपत्ती के लालची , धोकेबाज जयचंद बैठे हुए है... तो ? विश्वास भी किस...

ईश्वरोवाच

 *मेरा परिवार...!!!* ✍️ २८४९  *विनोदकुमार महाजन*  👆👆👆👆  *मेरा परिवार...* संपूर्ण ब्रम्हांड मेरा परिवार है... संपूर्ण सजीव सृष्टी मेरा परिवार है... सभी पशुपक्षी , सभी पेड पौधे , संपूर्ण मानव समुह , संपूर्ण साकार निराकार ब्रह्म , मेरा परिवार है... संपूर्ण चेतन अचेतन शक्तियां , मेरा परिवार है...  *आप सभी मेरे परिवार* *के ही सदस्य* *हो...*  *अनेक बार...* मेरे परिवार में  सात्विक राजस तामसी शक्तियों का कलह होता है...  *भयंकर कलह*  मैं सबकुछ चुपचाप देखता रहता हूं  न्याय अन्याय सबकुछ देखकर भी मौन रहता हूं... जब तामसी आसुरीक शक्तियां , सज्जन शक्ती को परेशान करती है , प्रताडीत करती है , अपमानित करती है , सज्जन शक्ती को नामशेष करने की , जमीन में गाडने की , निरंतर योजनाएं बनाती है तब भी ? मैं मौन , शांत , स्थितप्रज्ञ बनकर , क्रूर आसुरीक शक्तियों का तमाशा... दूरसे देखता रहता हूं...? आसुरीक शक्तियों को सुधारने का बारबार मौका भी देता हूं ... हमेशा साम दाम दंड भेद निती द्वारा , उन्हे असली रास्ता दिखाने का निरंतर प्रयास करता रहता हूं... अनेक मार्गों...