स्वर्ग
*जहाँ भी जायेंगे ?*
*स्वर्ग बनायेंगे...!!!*
✍️२८९९
*विनोदकुमार महाजन*
✍️✍️✍️✍️
कर्म गती का फेरा बडा अजीब होता है दोस्तों !
भलो भलों का बेडा गर्क कर देता है !
अनेक दुखदर्द , पीडा , यातनाएं दिलाता है !
कभी रूलाता है ,
तो कभी हॅंसाता है !
अनेक जगहों पर ,
बारबार घुमाता है !
अपनों से भी खून के आॅंसू रूलाता है !
नशीब का फेरा बडा अजीब सा होता है मेरे दोस्तों !
जीवन के इस सुखदुःख के मेले में...
नितदिन हॅंसते हुए गुजरना पडता है...
जहाँ भी जाएंगे वहाॅं ?
खुशहाल नंदनवन बनाना पडता है !
अजीबोगरीब दुनियादारी में यश को चारों ओर से खिंच कर लाना पडता है !
" *रोते हुए आते है सब*
*हॅंसता हूवा जो* *जायेगा..."*
यह गाना नितदिन
बडे खुशी से गाना पडता है !
" *कभी खुशी कभी* *गम..."*
कहते कहते जीवन का
बिगडा हुवा संगीत भी तालस्वरों से सजाना पडता है !
अनेक देवीदेवताओं को प्रसन्न करके
यहाँ बिगडा हुवा काम भी आसान बनाना पडता है !
नर्क से भी स्वर्गीय जैसा
खुशहाल , मस्त मस्त नंदनवन जैसा जीवन बनाना पडता है !
जहाँ भी जायेंगे वहाॅं ?
खुशी के दिन लाना पडता है !
हॅंसते खेलते , सबको हॅंसाते हुए , जीवन में सभी को खुशी से हॅंसाना पडता है !
बडे अजीबोगरीब दुखदर्द में भी ?
बडे जोर जोर के ठहाके
लगाकर ?
खुशी से हॅंसाना पडता है !
" *ये भी दिन जायेंगे प्यारे* *दोस्त, तेरे भी* *दिन आयेंगे..."*
ऐसा ? अपने ही उदास मन को ? बोलना पडता है ! बारबार बोलना पडता है !
" *व्यर्थ की चींता क्यों* *करता है ? "*
" *तेरा साथी तो है* *उपरवाला...! "*
ऐसा अपने ही मन को ?
कहना पडता है !
*फूल गुलाब का*
*मैंने भेजा है सबको...* 🌹🌹🌹🌹 ऐसा कहते कहते
मस्त,खुशी के जीवन की ओर नितदिन बढना पडता है !
चलो *दिव्य प्रकाश* की ओर !
चलो *नई जींदगी* की ओर !
*जय हरी विठ्ठल*
🙏🕉️🚩🌹
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