मच्छर राज
*मच्छर और काॅक्रोच : -*
*उत्पत्ती और प्रतिकार* *शक्ती....*
✍️ २८२९
*विनोदकुमार महाजन*
🦟🐝🐛🦋🪰
जब ईश्वर ने सजीव सृष्टी की रचना की तब अनेक आश्चर्यकारक जीवों का निर्माण भी किया !
इसमें भी उपद्रवी और निरूपद्रवी ऐसे दो विभागो में जीव सृष्टी को विभाजीत किया गया !
हमारे आसपास अनेक उपद्रवी , निरूपद्रवी जीवों का सुक्ष्म जीवों का वास्तव्य होता है !
जिसमें मच्छर ,खटमल , काॅक्रोच जैसे अनेक उपद्रवी किडे मकौडे हमें निरंतर परेशान करते रहते है !
मगर अब दिनबदिन मच्छर और काॅक्रोचों ( तेलचिट्टा या झुरळं ) की संख्या बहुत तेजी से बढती दिखाई दे रही है !
जिनकी प्रजनन क्षमता और प्रतिकार शक्ती भी तेजी से विकसित हो रही है और बढती जा रही है !
इनके सफाये के लिये अनेक प्रकार की दवाईयां , और दूसरे साधन भी बढ रहे है !
मगर फिर भी इनकी संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है !
*खैर...*
जैसे उपद्रवी और निरूपद्रवी जीव जंतू होते है ठीक वैसे ही उपद्रवी और निरूपद्रवी मनुष्य भी होते है !
और दिनबदिन निरूपद्रवी मानव प्राणीयों की संख्या कम होती जा रहे है और लगभग हर जगहों पर , उपद्रवी मानव प्राणी बहुत तेजी से बढते जा रहे है !
आखिर ईश्वर को भी क्या पडी थी की ? न जाने ऐसे कितने जहरीले , उपद्रवी जीव जंतू भी बना दिये ?
क्या यह भी सृष्टी संतुलन का ही एक भाग है ...?
मगर मनुष्य प्राणी तो ईश्वर ने केवल एक ही उद्देश से निर्माण किया था... परोपकारी मनुष्य प्राणी !
मगर धिरेधिरे परोपकारी मनुष्य प्राणी कम होता जा रहा है और जहरीला , उपद्रवी , परपिडा देने में ही जीवन का उद्देश्य मानने वाला और उससे भी आनंदीत हो उठने वाला , विकृत मनोवृत्ती के मनुष्य प्राणी की संख्या बहुत तेजी से बढ रही है ?
बढती जा रही है...??
हमेशा दूसरों का बूरा सोचना , दूसरों का बूरा देखना , दूसरों का बूरा करना ही इनके जीवन का उद्देश्य होता है !
और ऐसे जहरीले उपद्रवी मनुष्यों की प्रजनन क्षमता भी तेजी से बढती जा रही है और इनकी प्रतिकार शक्ती भी तेजी से बढती जा रही है !
मच्छर और काॅक्रोचों जैसी !
सभ्य समाज , सभ्य संस्कृती इनके लिए टार्गेट का विषय रहता है !
हमला...चौतरफा हमला...इनके दिमाग में चौबिसों घंटे रहता है ! हमले के सिवाय और सभ्य संस्कृती को नेस्तनाबूत करने के सिवाय दूसरा विषय ही इनके दिमाग में नहीं रहता है...!
और बेचारा सभ्य समाज , परोपकारी समाज , सुसंस्कृत समाज , पाप भिरू समाज , हमेशा प्रतिकार करने के बजाए हर जगहों से भागने में ही विशेष धन्यता और सुरक्षितता मानता है !?
ऐसे लोगों की हमेशा एक अहमियत होती है...की
जागते रहो नहीं बल्की भागते रहो...
आखिर कब तक भागोगे भई...आखिर भागोगे भी कहां...कहां ??
उल्टा उपद्रवी शक्तियों का विरोध करने पर ऐसे पुण्यात्मा ( ❓❗⁉️‼️ ) निरंतर सद् शक्ती को डांटते ही रहेंगे...डांटने में ही धन्यता मानेंगे ??
( नंपूसक समाज ऐसे ही बनता रहता है .. ?
एक गाल पर थप्पड मारने पर दूसरा गाल आगे करने वाला...❓🤫🫣🤔 )
तेजोहीन समाज ?
और उल्टा उपद्रवी शक्तियों को ही सदैव भाई मानकर , भाईचारा निभाने वाला , आत्मघाती और स्वयं का ही विनाश करने वाला ? हतोत्साहीत , हतबल , तेजोहीन समाज ...?
क्या समय की धाराओं में अपना अस्तित्व बचाये रखेगा ??
सदियों से ऐसा ही होता आ रहा है...
भागम् भाग और ?
और ? फिर भी भाईचारे की भयंकर जालिम नशा ...??? यह नशा है या फिर विनाशकारी जहर ?
" जाने भी दो ना यार...
हमें भी क्या लेना देना है ऐसे आत्मघाती समाज से ? डूब मरो...??? "
ऐसी भी गलत धारणा वाले लोग भी समाज में रहते है ?
शायद ?
ईश्वर भी इन्हे , ऐसे लोगों को ? नहीं बचा सकेगा !
स्वाभिमान शून्य और लाचार समाज को ईश्वर भी आखिर क्यों और कैसे बचायेगा ??
जहरीले किडे मकौडे की तरह जहरीले मनुष्य भी समाज में तेजी से बढ रहे है और ?
इनका अंतिम इलाज भी दिखाई नहीं दे रहा है...
उफ्... करें तो क्या करें ?
*हरी ॐ*
🙏🙏🙏🙏
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