संगठित नहीं होंगे
*हिंदू संगठीत कभी भी* ❓ *नहीं हो सकता* ⁉️
✍️ २१७२
*विनोदकुमार महाजन*
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साथीयों
आज का लेख का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है !
लगभग अनेक सालों से अनेक हिंदुत्ववादी संगठन संपूर्ण हिंदुओं को एक करने के लिये जी जान से प्रयास कर रहे है !
हिंदुओं को एक करने का प्रयास लगभग यशस्वी होता हुवा भी नजर आ रहा है !
*मगर* ❓⁉️
न जाने क्यों
मन में विचार आता है और अनेक आशंकाएं भी मन में आती है...
*क्या सचमुच में हिंदू* *समाज एक हो जायेगा ?* ❓⁉️
इसपर आज विस्तार से विश्लेषण भी करेंगे और हिंदुओं को सचमुच में एक करने का मंथन भी करेंगे !
भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रांतवाद , जातिवाद का जालिम जहर हिंदुओं के अंदर इतना भयंकर घुल गया है की , यह वास्तव देखकर ऐसा लगता है की ,
*क्या सचमुच में हिंदू एक* *हो सकेगा ?*
अस्तित्व शून्य होने का भयावह खतरा सामने दिखाई देने पर भी जो समाज जागता नहीं है , *उसे कौन बचायेगा ?*
आज हर जाती आपस में लड रही है और एक दूसरे से टकरा रही है !
और इसपर जालिम इलाज ना के बराबर दिखाई दे रहा है !
संत , महापुरूषों का भी हिंदुओं ने बॅंटवारा किया हुवा है !
उपर से सांस्कृतिक हनन भी विनाशकारी हो रहा है ! धर्म परिवर्तन के लिये भी अनेक विदेशी तथा घुसपैठी वृत्ती के संगठन , हिंदुओं को आपस में लडाने के लिये हर दिन नये तरीके ढूंड रहे है और वायुगती से यशस्वी भी हो रहे है !
और हिंदुओं के पास इसकी कानूनी यशस्वी काट नहीं है !
सख्त कानून और हिंदू द्रोहीयों को कठोर दंड यही इसकी यशस्वी काट है !
मगर जातिवाद के आधार पर सत्ता प्राप्त करने की होड में सख्त कानून बनायेगा कौन ?
और कब ? यह आज का अनुत्तरित और यक्ष प्रश्न है !
दूसरे धर्मों में लगभग सौ प्रतिशत लोग अपने धर्म के लिये जागृत भी रहते है और सचेत भी !चौबीसों घंटे !
इसी बारे में हमारे धर्म में जागृती और सचेत रहने का अभाव दिखाई देता है !
अनेक हिंदुओं को हिला हिलाकर जगाएंगे तो भी हिंदू जागेगा नहीं और उपर से धर्म के प्रति सदैव उदासीन ही रहेगा ! और समय समय पर झूटे भाईचारे में लटककर खूद का विनाश भी कर देगा !
ऐसे लालची , निद्रीस्त , अंध समाज को आखिर जगाएगा भी कौन और कैसे ?
फ्री के लालच में बंटनेवाले, खुद का आत्मा तक बेचनेवाले और सिध्दांत विहीन समाज को आखिर कौन जगा सकता है ?
शायद ईश्वर आयेगा तो भी समाज ईश्वर पर भी प्रश्न चिन्ह उपस्थित करेगा...तो ?
ईश्वर को भी निती बदलकर आना पडेगा ?
दूसरे धर्मीय अपने ईश्वर तथा श्रध्दास्थान के प्रति चौबिसों घंटे और निरंतर जागृत रहते है ! उनके श्रध्दास्थान पर कोई चोट पहुंचाने की कोशिश भी करता है तो उसका तुरंत सख्ती से उत्तर दिया जाता है और तुरंत कठोर दंडीत भी करता है !
*हमारे धर्म में इसकी* *कितनी प्रतिशत* *संभावना है ?*
संपूर्ण देश में क्रांती पर्व आरंभ करेंगे तो लोगों की ऐसी मानसिकता ही नहीं है ! और दूसरी महत्वपूर्ण बात यह भी है की , क्रांती पर्व आरंभ करने के लिये हमारे पास ऐसा व्यक्तित्व भी नहीं है और इसकी ठोस तथा शक्तिशाली निती भी हमारे पास नहीं है !
*शक्तिशाली रणनिती का* *अभाव*
कभी भी जीत नहीं दिला सकता, यह वास्तव है !
*हिंदू जागरण अभियान*
जैसे अंधेरे में तीर चलाने से कुछ भी साध्य नहीं होगा !
घर घर जाकर समाज मन को , व्यक्ती व्यक्ती को हिलाहिलाकर जगाना होगा !
साथ में धर्माचरण के लिये सख्ती भी करनी होगी !
और उपर से कठोर कानून भी होने चाहिए !
आत्मीयता से समाज मन को जोडना होगा !
सोशल मिडिया पर चार दो लोग दिनरात चिल्लाते रहते है , बोलते लिखते रहते है , ऐसे प्रयास से कुछ भी साध्य नहीं होगा !
ऐसे जागृत चार दो लोगों को हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा और हिंदुत्ववादी सरकारों द्वारा समय समय पर संन्मानीत तो करना चाहिए ही उपर से उनको अपेक्षित साधन देकर , संपूर्ण संरक्षण भी देना चाहिए !
मगर इसीमें भी हर जगहों पर, विशेषतः हिंदू संगठनों द्वारा जागृत लोगों के प्रति उदासिनता दिखाई देती है !
मेरे नजदिकी मित्र
अश्विनी कुमार उपाध्याय जी , पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी , सुदर्शन टीव्ही चैनल के जागृत पत्रकार सुरेश चव्हाण के जी ऐसे अनेक संन्माननीय हिंदू योध्दायों को समाज तथा हिंदू संगठनों द्वारा और विशेषतः हिंदू सरकारों द्वारा कितना सहयोग तथा समर्थन मिलता है ? यह भी एक अनुत्तरित प्रश्न उपस्थित होता है!
हिंदू समाज की चौबिसों घंटों की विनाशकारी उदासिनता , हिंदू संगठनों का योग्य निती का अभाव , हिंदुत्ववादी सरकारों द्वारा शिघ्रातिशिघ्र कठोर उपाययोजना का अभाव , हिंदू समाज का विनाशकारी लालच और भय , आपसी कलह, जातिवाद , प्रांतवाद , भाषावाद , क्षेत्रवाद ,
जाती पाती में एक दूसरे के प्रती विनाशकारी कलह , घृणा, आपसी लडाई झगडा,
ऐसी विनाशकारी समस्याओं का हमारे पास हल क्या है ?
समाज मन को वायुगती से एक करने की कौनसी यशस्वी रणनीती हमारे पास है ?
मुद्दे तो बहुत है , प्रश्न भी बहुत है मगर हल , उत्तर , अपेक्षित परिणाम कितने प्रतिशत है ?
यह भी अनुत्तरित प्रश्न है ?
आखिर सचमुच में हिंदू समाज का असली तारणहार कौन है ?
कोई युगपुरुष या अवतारी पुरुष आने का समाज को इंतजार है ?
क्रांती करनी है , महाक्रांती अभियान भी चलाना है , वैश्विक महाक्रांती अभियान भी तेज करना है और आदर्श सनातन संस्कृती को विश्व गुरू बनाकर , विश्व में यशस्वी रणनीती बनाकर पुर्नर्स्थापीत भी करना है तो ?
जबरदस्त रणनीती बनाकर ही आगे बढना होगा !
जगह जगह पर समस्या ही समस्या , हिंदू समाज की विनाशकारी उदासिनता , आपसी कलह , अंदर बाहर का भयावह विरोध , हर माध्यमों का जगह जगह का अभाव , हर पल और हर पग पग पर भयंकर आर्थिक परेशानीयों का सामना करते करते आगे बढना होगा ! बढना भी है ! मगर कैसे ?
साथीयों ,
केवल दियास्वप्न देखने से अथवा मनोराज्य देखने से कुछ भी साध्य नहीं होगा !
कठोर रणनीती और कठोर कदम ही अपेक्षीत परीणामों तक ले जा सकते है !
अन्यथा यह केवल एक मनोरंजन का और हंसी मजाक का विषय बन जायेगा !
एक मराठी लोकप्रीय कवी बा.सी.मर्डेकर जी की एक लोकप्रिय कविता है ,
" गणपत वाणी , बिडी पिताना , चावायाचा नुसतीच काडी , म्हणायचा अन् , या जागेवर बांधीन माडी "
ऐसी हमारी हिन्दुओं की आज की स्थिती है !
सपने बडे बडे है !
मगर कोई रणनीती नहीं है , यशस्वी योजना नहीं है , और आज के भयावह स्थिती की हमारे पास कोई यशस्वी काट आज नहीं है !
कहते तो है...
" *हिंदुराष्ट्र हम बनायेंगे*
*अखंड भारत बनायेंगे !*
केवल घोषणा बाजी से क्या होगा ?
ठोस रणनीती क्या है हमारे पास ?
अनेक सालों की ,
" उनकी निती " साफ और स्पष्ट है !
ऐसे भयावह समय में बडे ठंडे दिमाग से , एक एक कदम आगे बढना होगा ! सोच समझकर एक एक कदम फूंक फूंक कर चलना होगा !
आगे बढना होगा !
बाहरी शत्रूंओं से भी जादा शक्तिशाली हमारे अंदरुनी शत्रू , हमें नेस्तनाबूत करने के लिये *चौतरफा जाल बिछाकर* और यशस्वी गुप्त रणनीती बनाकर हमें बरबाद करने के लिये...
तुले हुए है ...!
*हमारे अपने ❓⁉️*
*हितशत्रू , गुप्तशत्रू...!* ❓⁉️
इसिलिए हमें यश भी मिले और धर्म द्रोही अंदर बाहर के शत्रुंओं का गुप्त इलाज भी हो...
ऐसी यशस्वी काट , गुप्त रणनीती हमें बनानी ही होगी !
*तभी हम जीतेंगे ...*
*भगवान श्रीकृष्ण की* *यशस्वी कृष्ण निती*
*राजे शिवबा की गनिमी* *कावा निती*
ही हमें यश की ओर तथा अंतिम उद्दिष्ट प्राप्ती तक ले जायेगी !
सभी मिलकर एक साथ एक एक कदम आगे बढना होगा !
तबतक के लिये बडे जोर शोर से बोलना ही पडेगा...
*हिंदुस्थान जींदाबाद*
हर गाव, नगर,गली में ताशे नगाडे के साथ समाज जागृती अभियान तेज करना होगा !
बोलो....?
क्या सोच रहे हो ....?
तबतक के लिये
*हर हर महादेव*
*भगवान श्रीकृष्ण की* *जय*
*छत्रपती शिवाजी* *महाराज की जय*
*जय भवानी जय* *शिवाजी*
*विश्व स्वधर्म सुर्ये पाहो*
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