हमारा जीवन

 *हमारा जीवन एक खुली* *किताब है...* 


✍️२७६०


सुख दुख से भरा हमारा जीवन 

एक खुली किताब की तरह चाहिए !


खूब हॅंसीए , खूब रोईये भी , खुलकर जीवन का आनंद लिजिए !


सुख कम और दुख जादा होता है जीवन में हमारे ,

फीर भी खुलकर जिये !


दोस्तों के साथ हॅंसिए , खेलिए !

खुद का जीवन मस्त आनंद से बिताईये !

मित्रों के साथ खूब और खुलकर गपशप किजिए !


फेसबुक , व्हाट्सअप , इंस्टाग्राम पर खुलकर बोलिए , लिखिए !

मन की भडास , मन का सारा सुखदुख हल्का किजिए !


दुनिया तो हॅंसती ही है !

अच्छा करेंगे , तो भी हॅंसती है , मौन रहेंगे तो भी हॅंसती है , 

दुनियादारी के पिछे मत भागीए !


जो अच्छा , नेक कार्य है वह कार्य किसीकी फिकीर करते बगैर आगे आगे बढाते रहिए !


खुली किताब की तरह हमारा जीवन मस्त रखिए !


जो मन में आये वह सबकुछ बिनधास्त बोलिए , लिखिए !

खूब दोस्त जमा किजिए !


सच्चा दोस्त अगर नहीं भी मिला तो ? ईश्वर से बोलिए !

उससे नाता जोडिए !


सभी पर सच्चा प्रेम किजिए !


प्रेम की कीमत नहीं रही तो ? सदा के लिये नाता तोड दिजिए !


फिर भी मस्त होकर बडे आनंद से सारा जीवन बिताते रहिए !


गाना गाईये , गुनगुनाते रहिए !

जीवन में सदैव चैतन्य की बहार लाते रहिए !


हमेशा छोटासा बच्चा बनकर एक आनंददायी जीवन जीते रहिए !


सनातन धर्म का भी कार्य निरंतर , नितदिन करते रहिए !

भला बूरा सबकुछ ईश्वर के चरणों में अर्पण करते रहिए !


मस्त अवलिया बनकर पूरा जीवन बडे आनंद से बिताते रहिए !


श्रीकृष्ण की तरह जीवनभर के लिये , झूमते गाते रहिए !


हो सके तो मुझसे भी सच्ची दोस्ती करते रहिए !


सुख हो या दुख, जीवन धूमधाम से बिताते रहिए !


खुल्लम खुल्ला रहिए !

फ्री माईंड रहिए !

टेंशन फ्री रहिए !

खुले दिल रहिए !


पशुपक्षीयों से प्रेम करिए !

ईश्वर से प्रेम करिए !

ईश्वर से , पशुपक्षीयों से खुलकर बाते करिए !


इससे तुम्हारा मन , मस्तिष्क भी हलका रहेगा !

दिल भी हलका रहेगा !


तुम्हारा आरोग्य भी उत्तम रहेगा !

तुम्हारी उमर भी बढेगी !


इसिका नाम जीवन है !

इसिका नाम आनंद है !


 *जय श्रीकृष्ण* 


 *विनोदकुमार महाजन*

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