बिना मांगे

 *किसीको कुछ भी ना माॅंगो* 

✍️२७९३


 *विनोदकुमार महाजन*

💰💰💰💰💰


बिना माॅंगे मोती मिले 

माॅंगे मिले ना भीक...

ऐसी एक पुरानी कहावत है ...


जो किसीको कुछ माॅंगता ही नहीं है खुद ईश्वर भी उसको प्रसन्न होता है !

इसिलिए स्वयं ईश्वर से भी कुछ ना माॅंगो !

अगर हमारी योग्यता होगी तो ईश्वर भी हमें भरभरके देगा !


इसके लिए समय का इंतजार तो चाहिए ही !

उतावलेपन सर्वनाश कर सकता है !


मेरे दादाजी हमेशा कहते थे , " *न मागे तयाची रमा* *( लक्ष्मी ) होय* *दासी ! "* 


इसिलिए घर में कुछ नहीं है तो घर में भूखे रहो , मगर किसीको कुछ ना माॅंगो !


जो किसी को कुछ भी माॅंगता नहीं है उसीका आत्मबल हमेशा उंचा रहता है ! और उसका जीवन भी स्वाभिमान से भरा हुवा तथा उंचा होता है !


इसिलिए जीवन में आगे बढना है , बहुत तरक्की करनी है तो हमेशा वृतस्थ और निरपेक्ष तो रहना ही पडेगा !


इसके साथ ही हमेशा मौन और एकांत भी ईश्वरी शक्तियों से जोड देता है !


कठीण मुसिबतों में मौन रहना ही उचित रहता है !


ऐसे समय में ईश्वर भी बहुत कडी परीक्षा लेगा !

चार चार दिन शायद भूखा भी रहना पडेगा !

मगर अंत में ? जो चाहिए वह सबकुछ देगा ही !


ईश्वर जितना कठोर है उससे हजारो गुना दयालू भी है !

वह परीक्षा जरूर लेता है मगर परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर जो भी चाहिए वह सबकुछ देता ही देता है !


मगर इसके लिए ईश्वर के प्रती अटूट श्रध्दा विश्वास और प्रेमभाव चाहिए !


 *मनी नाही भाव देवा* *मला पाव...* 

यह संभव नहीं है !


इसिलिए 

ईश्वर से एकबार प्रेम करके तो देखो ,

बारबार ईश्वर से प्रेम करने का मन होगा !

उसके साथ बोलने का , सुखदुख बताने का और उसके साथ जनम जनम तक रहने का मन होगा...


और ईश्वर भी...?

तुम्हारा दास , गुलाम हो जायेगा ! और तुम्हे समझने भी नहीं देगा !


। *श्रीकृष्ण: शरणं मम्* । 


🙏🙏🙏🙏🙏

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