प्रेम पूजारी
*प्रेम पूजारी...!!*
✍️ २८८५
*विनोदकुमार महाजन*
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जिसके मन में सदैव , निरंतर सभी के प्रती उच्च भाव रहता है...
जो सभी पर निरंतर प्रेम करता रहता है...
सदैव निष्कपट अंत:करण से जो सभी पर , पशुपक्षीयों पर , ईश्वर पर , उसकी अगाध लिलाओं पर ?
सच्चा , ह्रदय का , आत्मा का प्रेम करता रहता है...
वही प्रेम पूजारी होता है !
ईश्वर जैसा पवित्र प्रेमामृत सदैव जिसके ह्रदय से निकलता रहता है...
वहीं प्रेम का पूजारी होता है !
सभी पर दिव्यत्व देखने वाला , सभी पर दिव्य प्रेम करने वाला...उसे ही
प्रेम पूजारी कहते है !
सभी जाती धर्म पथ पथों पर समसमान दृष्टी रखकर , सभी में एक ईश्वर जैसा पवित्र आत्मा वसता है...
ऐसा समभाव रखने वाला ?
प्रेम पूजारी होता है !
सनातन के प्रती उच्च प्रेम भाव रखकर , सभी को ईश्वर स्वरूप सनातन से जोडनेवाला..
असली प्रेम पूजारी होता है...!
संत ज्ञानेश्वर भी बडे प्रेम भाव से सभी को कहते है....
" ज्योत से ज्योत जगाते चलो... प्रेम की गंगा बहाते चलो...
राह में आये जो दीन दुखी , सबको गले से लगाते चलो...! "
लता मंगेशकर जी ने यह लोकप्रिय भजन कितनी सुंदर आवाज में गाया है ना ?
सदा बहार गीत
सदा बहार दुनिया
सदा बहार जीवन
सदा बहार प्रेम...?
जीने को और क्या चाहिए ?
पवित्र प्रेम में , सच्चे प्रेम में एक अलौकिक , अद्भुत शक्ती होती है जो ? असंभव को भी ?
संभव में बदल देता ही है... और ? संपूर्णतः तबाह, बरबाद होनेवाला जीवन भी ? फिर से सॅंवारता है...
फिर वह प्रेम ?
सद्गुरू से हो , ईश्वर से हो अथवा किसी अन्य पर हो...!
*राधा रमण हरी बोल*
*जय राधाकृष्ण*
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