येळकोट येळकोट जय मल्हार
एक दिन मेरे सपनों में हमारा ग्रामदैवत खंडोबा के मंदिर में मैं गया था...तब...म्हाळसा मुझे रूद्राक्ष की माला पहना रही थी तब खंडोबा म्हाळसा को बोलता है..." रूक जा म्हाळसा , उसके लिये रूद्राक्ष की नहीं बल्की तुलसी की माला है " ऐसा कहकर खंडोबा ने मेरे गले में तुलसी की माला डाली थी ! तब मेरे आण्णा भी मेरे साथ थे ! अद्भुत संयोग है ये...तब से मेरा जीवन धीरे धीरे संपूर्णतः बदल गया !
येळकोट येळकोट जय मल्हार...🙏🙏🙏
विनोदकुमार महाजन
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