सिध्दी

 दूर दर्शन और ? दूर का सुनाई देना !!


विनोदकुमार महाजन 


जैसी जैसी तपश्चर्या बढती रहती है , वैसे वैसे अनेक सिध्दियाॅं प्राप्त होती जाती है !

परकाया प्रवेश से दूसरों का , सुखदुःख जानना , पशुपक्षीयों से बाते करना , दूर से ही बाते सुनना , देखना , भविष्य की अनेक अच्छी बुरी घटनाएं देखना ,अपने साथ कौन अच्छी बुरी बाते करता है , षड्यंत्र करता है ? यह देखना और उसकी अदृश्य काट निकालना, जैसी अनेक सिध्दियाॅं कार्यरत हो जाती है !

जय हरी विठ्ठल...

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