फेल लोकतंत्र ?

 *ऐसे लोकतंत्र का उत्तर* *क्या है ??* 

✍️ २८७४


इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? सत्य पर निरंतर प्रहार करता रहता है !

इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? सुसंस्कृत लोगों को तडपाता है !

इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? जो गंदी राजनिती पर अंकुश नहीं लगा सकता है !

इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? हिंदू देवीदेवता , साधुसंत , सत्पुरूषों को निरंतर बदनाम करता है और ?

बदनाम करने वालों को ? तुरंत कठोर दंडित करना तो दूर की बात ?

उन्हे ऐसे विपरीत कार्यों से ? रोकता नहीं है !

इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? राष्ट्र प्रेमीयों को न्याय नहीं देता है !

इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? राष्ट्र द्रोहियों को कठोर दंडित करता है !

इस लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं जो ? नंगानाच करने वालों को रोकता नहीं है !

ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? अजीबोगरीब लगता है !

ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? हिंदू धर्म को निरंतर बदनाम करता है ?

ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? सनातन संस्कृती को डेंग्यू मलेरिया कहनेवालों को तुरंत ? कठोर दंडीत नहीं करता है ?

ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? खुलेआम गाय काटनेवालों को भी ? तुरंत कठोर दंडित नहीं करता है ?

ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? हिंदू समाज को हमेशा बदनाम करता रहता है ?

ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? आदर्श हिंदू सभ्यताओं पर निरंतर ? प्रहार करता रहता है ?

ऐसा कैसा लोकतंत्र है जो ? न्याय के लिये ? आदमी तीन तीन पिढीसमोर तक ? तरसता रहता है ?


ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये जो ? बहुसंख्यक और सत्यवादी समाज पर हमेशा अत्याचार करता रहता है ? वह भी सदियों से ?


यह कैसा लोकतंत्र है जो ? पिढी दरपिढी गलत इतिहास सिखाता है ?

यह कैसा लोकतंत्र है जो ? हिंदू मठ मंदिरों को आज भी ? आक्रमणकारीयों से मुक्त नहीं कर सकता है ?

यह कैसा लोकतंत्र है जो ? आज भी आक्रमणकारीयों के नामों को गली , गांव , शहरों से नहीं हटा सकता है ? और ? भयंकर अत्याचार का और पाप का कलंक नहीं मिटा सकता है ?


यह कैसा लोकतंत्र है ? जहाँ सत्तालालची गद्दार जयचंदों को तुरंत कठोर दंडीत नहीं किया जा सकता है ? उल्टा ऐसे नमकहराम लोगों को भी ? सत्तास्थान पर बिठाता रहता है ?


ऐसा कैसा लोकतंत्र है ये ? कुछ समझ में नहीं आता है !


ऐसे समाज को बदल डालो...कहना आसान है मगर ? इसको अमल में लायेगा कौन और कैसे ?

इसका अचूक उत्तर भी देगा कौन ?


क्या सचमुच में ऐसे अन्याय कारक लोकतंत्र को कोई बदल नहीं सकता है ??


हाँ या ना ???

शायद ?

उत्तर देने की और सत्य ढुंडकर उसपर अमल करने की , चेतना ही समाज से मर गयी है ?


धिक्कार है ऐसे मृतप्राय और तेजोहीन समाज का जो ? सदीयों से भयावह अत्याचार सहने के बाद भी ? जागता नहीं है ??


हिंदुओं के देश में रहकर ? हिंदुओं को ही ? उल्टा बदनाम करने की आखिर ? हिंमत कैसे होती है ? ऐसे बेईमान , नमकसरामों की ?


 *विनोदकुमार महाजन*

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