साँप और साधू

 *साॅंप और साधू...*

✍️ २८८२


 *विनोदकुमार महाजन* 


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एक कथा 

साॅंप और साधू की...


साॅंपो का गुणधर्म होता है ? डसना और ?

साधू का गुणधर्म होता है 

निरंतर परोपकार करना !


साधू को साॅंप डसेगा ?

तो भी साधू साॅंप पर भी ? निरंतर परोपकार करेगा ही ?

और ?

साधुने परोपकार करने पर भी ? साॅंप उल्टा फिरसे साधू को डसेगा !?

जहर ही छोडेगा !


 *एक कृतज्ञ दूसरा कृतघ्न* 


दुष्ट लोग भी हमेशा साॅंपों जैसा ही जहरीला आचरण करते है और ?

सज्जन लोग हमेशा साधू जैसा ही आचरण करते रहते है !


दुष्टों पर कितना ही उपकार , सहयोग अथवा प्रेम करो वह हमेशा पीडा , नरकयातना , दुखदर्द ही देता रहेगा !

और ? सज्जनों को कितनी भी यातना , पीडा , दुखदर्द दो वह हमेशा परोपकार ही करता रहेगा !


साॅंपों को कितना भी अमृत पिलाओ ?

वह तो उगलेगा तो जहर ही !

और ? साधू को कितना भी ? नफरत का जहर भी पिलाओ ?

उसके मूंह से हमेशा निकलेगा तो ? परोपकारी अमृत धारा ही ?


मगर एक बात भी पक्की तय होती है की ,

साधू अत्याचार सहेगा, मगर ? स्वयं ईश्वर ही , संत सज्जनों का , साधू महात्माओं का और उसके भक्तों पर किए गये अत्याचारों को सहता नहीं है !


ईश्वर के भक्तों पर अगर कोई वार करता है तो ? कुछ समय तक ईश्वर मौन और शांत रहकर सबकुछ सहता और देखता रहता है !

और जब दुष्टों के पापों के घडे भर जाते है तो ? वही ईश्वर 

क्रोधायमान होकर , दुष्ट दुर्जनों पर , ऐसा प्रतिवार करता है की ,

वह दुष्ट संपूर्णतः समाप्त हो जाता है !


भक्त प्रल्हाद , हिरण्यकश्यपू और नारसिंव्ह इसका उदाहरण है !


खुद का यादव कूल भी जब उन्मत्त हुवा तब भी परमात्मा श्रीकृष्ण ने उन्हे नहीं बचाया !

आपस में लड झगडकर सभी यादव समाप्त हो गये , मगर फिर भी भगवान श्रीकृष्ण मौन और स्थितप्रज्ञ बनकर सबकुछ खुले आंखों से देखते रहे !


दुर्जन अपना हो या पराया ? ईश्वर की नजर समान होती है !


सत्य की रक्षा के लिये तथा न्याय के लिये , खुद परमात्मा भी खुद के कुलोत्पन्न लोगों को भी नहीं बचाता है !?


तो वही परमात्मा ?अपने परम भक्तों की रक्षा के लिये ? वह प्रभू क्या नहीं कर सकेगा ?


ईश्वर भी दुष्ट दुर्जनों को सबक सिखाने के लिये ,

समय का इंतजार करता रहता है !


आज की संपूर्ण धरती की स्थिती क्या है ?

सज्जन शक्ती की स्थिती क्या है ?


साधुसंतों के सत्य की जीत के लिये ?

ईश्वर आज ? कुछ तो भी करेगा ?


जहरीले साॅंपों जैसे दुर्जन और परोपकारी सज्जन ? दोनों का हिसाब उसके पास होता ही है !


मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है की ,

साधू का कोप और शाप भी भयावह होता है !

जब साधुसंत कोपीष्ट होकर , किसीको शाप देते है तो दुष्टों की संपूर्ण पिढी भी तबाह , बरबाद हो जाती है !


 *करपात्री महाराज जी !?* ने किसे शाप दिया था ? और उस परिवार की क्या दुर्दशा हो गयी ? यह सभी को...शायद...? पता है !


और साधू का आशिर्वाद भी जबरदस्त  शक्तिशाली होता है , जो किसीके सौ पिढीयों का परम कल्याण भी कर सकता है !


तो आपको क्या चाहिए ?

साधू का शाप ? या फिर आशिर्वाद ??

या फिर दुष्ट दुर्जनों का जहर ?


 *जय श्रीकृष्ण* 


🙏🙏🙏🙏

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