हिंदुओं से नफरत करने वाले

 हिंदुओं से नफरत करने वालों ?

✍️ २२७४


विनोदकुमार महाजन

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विनावजह हिंदुओं से नफरत करने वालों के लिए यह विशेष लेख !


हिंदु आस्था पर चोट पहुंचाने वाले, हिंदु संस्कृति को, देवीदेवताओं को,साधुसंतों को बदनाम करनेवाले, संस्कृति तबाह करने का सपना देखने वाले...यह बात पक्की ध्यान में रखना,

" भविष्य तुम्हें कभी भी क्षमा नहीं करेगा ! "


क्योंकि,

बहुसंख्यक हिंदुओं ने तुम्हें अपना समझकर, सच्चा प्रेम दिया ! सदोदित... विनास्वार्थ भाव से,सभी प्रकार की, सुखसुविधाएं दी ! तुम्हारे संपूर्ण विकास के लिए ,हिंदुओं द्वारा हमेशा सहयोग ही प्रदान किया !


" अपनी आत्मा पर हाथ रखकर कह दो की ", 

मैं सत्य ही लिख रहा हूं ! इसमें झूठ एक प्रतिशत भी नहीं है !


इतना होने के बावजूद भी,

अगर तुम हमें ही उल्टा नेस्तनाबूद करने का , समाप्त करने का दिनरात सपना देखते हो,उसीके अनुसार योजनाएं बनाते हो,उसीके अनुसार दिनरात लगातार प्रयास भी करते हो तो...?

सचमुच में तुम्हारी आत्मा ही मरी हुई है ? अथवा तुम्हारे अंदर आत्मा है ही नहीं ?


कृतघ्नता की भी परीसीमा होती है ! और ऐसी भयंकर कृतघ्नता ही दिखाकर, बारबार दुष्कर्म करके ,सभी प्रकार की परीसीमाएं भी " तुमने " लांघ दी है !


इसीलिए तुम्हें भविष्य भी ना कभी क्षमा करेगा, ना ईश्वर क्षमा करेगा, ना कुदरत का कानून भी क्षमा करेगा ! और नाही समय क्षमा करेगा !

तुम्हारे पापों से ही तुम्हारा पतन भी होगा ! और सर्वनाश भी होगा !


और ईश्वरी इच्छा से इसकी शुरुआत भी हो चुकी है !


हिंदुओं के प्रेम के बदले में जिन्होंने आक्रमण का ही रास्ता अपनाया है, और हिंदुत्व को समाप्त करने की, सदीयों से योजनाएं बनाई है तो...?


पक्का याद रखना,

एक दिन इतिहास के पन्नों से ही तुम्हारा नामोनिशान मिट जायेगा !


क्योंकि ईश्वर सबकुछ देखता है, जानता भी है !

और जब स्वयं ईश्वर ही क्रोधित हो जाता है तो...?

वो खुद के ,स्वयं के , आत्मघाती जयचंदो को भी नहीं छोडता है ,

तो...?? तुम्हें क्यों और कैसे छोडेगा !


इसीलिए आज भी और अभी भी समय हाथ में है...

अभी भी हाहाकार छोड दो !

इंन्सानियत से नाता जोड़ दो !

प्रभु से नाता जोड दो !


अन्यथा ?

सर्वनाश अटल है !

और नजदीक भी है !


"उस परम शक्तिशाली " 

ईश्वर ने,ना ही अपने ही उन्मादियों को छोडा है,

नाही सोने की लंका वाले,

लंकाधीश रावण को छोडा है, नाही उन्मत्त, उन्मादी, हाहाकारी दुर्योधन और दुर्योधनी सेना को छोडा है, ना कँस को छोडा है,नाही उन्मादी हिरण्यकश्यपु को छोडा है !


और समय के अनुसार ईश्वर तो जरूर आता ही है !


ईश्वर हरबार,समय का इंतजार करता रहता है ! और समयानुसार,उन्मादियों पर,

" प्रतिघात करके ",उनका

संपूर्ण नाश कर ही देता है !


इसिलिए मर्यादा पुरूषोत्तम के मर्यादाओं में रहोगे तो ?

जीवन का उद्दीष्ट सफल होगा !


अन्यथा ?


उन्मत्त, उन्मादी, हाहाकारी

रावण,कँस,दुर्योधन, हिरण्यकशिपु की तरह ??


समाप्त हो जाओगे !!


और संपूर्ण पृथ्वी से ही,

संपूर्ण " राक्षसी कुलों "

का ,संपूर्ण संहार का समय भी ...

" दरवाजे पर " खडा है !?


क्योंकि ईश्वर जितना दयालु है,

उतना ही भयंकर कर्तव्य कठोर और क्रूर भी है !


इसीलिए क्रौर्य को अपनाने वालों को,दूसरों की आदर्श संस्कृति समाप्त करने का ,तबाह करने का,दिनरात सपना देखने वालों को इसपर गहन चिंतन, मनन करना ही पडेगा !


और अपने जीवन का रास्ता बदलकर,प्रभुचरणों में लीन होना ही पडेगा !!


हरी ओम्


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