सो अहम्
जिसके अंत:करण की शुध्दी हो गई है उसकी आत्मशुध्दी भी तुरंत हो जाती है और उसे फिर ? बाह्योपचार की जैसे माला , टीला की कोई जरूरत ही नहीं होती है ! जागृत स्वप्न में उसका निरंतर सो $$$ अहम् ध्यान शुरू ही रहता है !! यही ईश्वरी शक्तियों से एकरूप हो जाना है !!
विनोदकुमार महाजन
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