ईश्वरी सिध्दांत

 *ईश्वरी सिध्दांत...* 


१ ) जब ईश्वर उसकी योजना के अनुसार किसी पवित्र आत्मा को धरती पर भेजता है तो प्रेम प्राप्त करने के लिये अथवा प्रेम बाॅंटने के लिये नहीं बल्की क्रूरता से अधर्म को सदा के लिये मसलने के लिये ही धरती पर भेजता है ! ईश्वर की कभी कभी ऐसी भी योजना होती है जो हमारे जैसे साधारण मनुष्य के समझने के बाहर होती है ! उदाहरण : अर्जुन...

जय श्रीकृष्ण !!


२ ) एक अंत से ही एक नया आरंभ होता है..., 

" समस्त धर्मों का अंत भी यथार्थ सनातन धर्म में ही पुर्नस्थापित करेगा !!! "


३ ) जब देवीदेवता किसी पर निरंतर प्रेम करते रहते है मगर मनुष्य प्राणी उसे सदैव तडपाते रहते है तो समझ लेना वह कोई साधारण आत्मा नहीं है !

उदाहरण : अनेक संत महंत !


४ ) जब कोई निरपेक्ष भाव से निरंतर ईश्वरीय कार्य करता रहता है और उसे अपने ही निरंतर नरकयातनाएं देते रहते है तब समझ लेना की निश्चित ही वह महापुरुष ही है ! उदाहरण : अनेक सिध्द पुरूष !


५ ) जब सैतानी खेल और अधर्मी जहरीले साॅंपों के खेल समाप्त होने का समय आता है और ईश्वरी नवसृजन का समय शुरू होता है तब.. धरती पर भयंकर उथल पूथल आरंभ हो जाती है !


६ ) जब कोई व्यक्ती चारों ओर भयंकर मुसिबतों की आग में जल रहा होता है तब ? उसे बचाने के बजाए उस आग में पेट्रोल डालने का काम निरंतर करते रहते है और उपर से क्रूरता से हॅंसते रहते है... मगर ? उस भयंकर आग में भी वह व्यक्ती मरता नहीं है बल्की सुरक्षीत रहता है और उस आग से पेट्रोल डालने वाले ही तडफ कर मरते हैं ? तब समझ लेना ? यह ईश्वर की कुछ अजीब ही योजना है...!

उदाहरण : भक्त प्रल्हाद और हिरण्यकश्यपू ...


 *आपको क्या लगता है ?* 


 *विनोदकुमार महाजन*

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