मेरे कृष्णा

 *मुझे तो मेरा कृष्णा* *चाहिए* 


ना भूक लगती है ना प्यास लगती है 

कृष्णा तेरी याद में सारी जींदगी गुजरती है

यही है प्रेम... दिव्य प्रेम..

स्वर्गीय शुध्द प्रेम... जन्म जन्मानंतर तक का..


यही प्रेम हर एक प्राणीयों में चाहिए 

यही ईश्वरीय प्रेम मेरे प्राणप्रिय सद्गुरू आण्णा ने सिखाया... और स्वयं दिखाया...


ना धन चाहिए ना वैभव चाहिए 

ना यश चाहिए ना किर्ती चाहिए 

ना मान चाहिए ना संन्मान चाहिए 

कृष्णा मुझे तो बस तू ही तू चाहिए 

मेरे सद्गुरू आण्णा चाहिए 


एक तरफ जहर के प्याले हैं और दूसरी तरफ अमृत के कूंभ 

मगर मेरे कृष्णा के लिये 

मेरे आण्णा के लिये 

मुझे अमृत कूंभ नहीं मिलेंगे तो भी चलेगा 

जहर के प्याले हजम करने पडेंगे तो भी चलेगा 

मगर मुझे मेरा कृष्णा चाहिए 

मेरे आण्णा मुझे चाहिए 


मेरे कृष्णा के बीना 

मेरे आण्णा के बीना 

मेरा जीवन अधूरा है 

जनम जनम तक मुझे

मेरा कृष्णा चाहिए 

मेरे आण्णा चाहिए 


मेरे आण्णा ने तो मुझे

 *राधाकृष्ण* के दिव्य दर्शन दिए ... दिव्य दर्शन... दिव्य अनुभूती...

जनम जनम का 

 *राधाकृष्ण* का अजरामर प्रेम भी

मुझे मिल गया 

मेरा जीवन धन्य हो गया 


 *और क्या चाहिए ?* 


 *विनोदकुमार महाजन*

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