धर्मयुद्ध
*श्रीकृष्ण को धर्म युद्ध* *क्यों करना* *पडा...था ??*
✍️ २८२२
*विनोदकुमार महाजन*
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*श्रीकृष्ण...*
दशावतार में परीपूर्ण देवता !
स्थितप्रज्ञ... धूरंधर राजनितीज्ञ...
अंतरर्यामी प्रभू परमात्मा !
फिर भी स्वयं ईश्वर को भी धर्म युद्ध करना पडा ? *क्यों ??*
जब कॅंस के कारागृह में उसके माॅं बाप को बंदी बनाया गया ?
तब श्रीकृष्ण क्या शांत , स्थिर बैठ सकता था ?
*कॅंस...* श्रीकृष्ण का सगा मामा...हाहाकारी , उन्मत्त , दुष्ट ?
क्या स्वयं ईश्वर सगे मामा को माफ करता ?
*दुष्ट हिरण्यकश्यपू ?*
अपने ईश्वर स्वरूप बेटे भक्त प्रल्हाद को नामशेष करने के लिये भयंकर षड्यंत्र करता ?
*सगा बाप ?*
क्या ऐसे समय में ईश्वरी शक्तियाॅं शांत बैठती ?
पांडवों का भयंकर बनवास और नारकिय अज्ञात वास क्या परमात्मा ईश्वर स्वयं श्रीकृष्ण खुले आंखों से देखता रहता ?
पांडवों की पागलों की तरह दर दर भटकने की दयनीय स्थिती...वह भी *साम्राज्य छोडकर ?*
क्या श्रीकृष्ण यह सबकुछ देखता रहता ?
*अभिमन्यू को* चक्रव्यूह में फॅंसाकर कौरवोंद्वारा तडपा तडपा कर मारा ? क्या श्रीकृष्ण ऐसे समय में शांत बैठता ?
*कृष्ण शिष्टाई के* बाद भी दुर्योधन प्रत्यक्ष परमात्मा श्रीकृष्ण को ही खुली चुनौतीयां देता रहता ? तब क्या श्रीकृष्ण मौन , शांत और स्थिर रहता ?
*नहीं...हरगिज नहीं !*
प्रभू परमात्मा भी समय का इंतजार करता रहता है ! आसुरीक , हाहाकारी , उन्मत्त , उन्मादी शक्तियों के संपूर्ण संहार के लिये , ईश्वर भी समय का इंतजार करता रहता है !
*धर्मयुद्ध ??*
क्या धर्म युद्ध करने की श्रीकृष्ण की खुद की इच्छा थी ?
भयंकर खून खराबा , रक्त पात , खून की नदीयाॅं बहना या बहाना स्वयं भगवान को मंजूर था ?
*हरगिज नहीं !*
फिर भी ईश्वर को यह सब कुछ करना पडा !
यादव वंश का विनाश भी उसे अपने आंखों से देखना पडा ??
खुद का अंत भी एक व्याध के बाण से करना पडा ?
क्या श्रीकृष्ण को यह सबकुछ मंजूर था ?
*नहीं !*
फिर भी श्रीकृष्ण को ऐसा करना पडा !
खुद के इच्छा के विरूद्ध !!
सबकुछ आजीवन भयंकर दुखदर्द सहना पडा !
*जन्म से लेकर अवतार* *समाप्ती तक* भगवान को सबकुछ अपने इच्छा के विरूद्ध ही करना पडा *...जी हाँ...!!*
*क्या आज का हिन्दुओं* का भयावह पलायन , भयावह *नरसंहार* ईश्वर अपनी खुली आंखों से देख सकता है !?
*सत्य को तडपता हुवा* *ईश्वर देख सकता* *है ?*
*गौलोक से आनेवाली*
*गौमाताओं का आक्रंदन* खुले आंखों से देख सकता है ??
*उसके ही आदर्श* सनातन धर्म पर गहरा संकट मंडरा रहा है ? क्या ईश्वर यह सबकुछ भयावह समय अपने खुले आंखों से देख सकता है ?
वह भी मौन और शांत रहकर ?
नहीं...
*हरगिज नहीं...!*
वो परमात्मा भी योग्य समय का इंतजार कर रहा होगा !
*स्वयं ईश्वर को भी समय* का इंतजार करना पडता है !
अधर्म के नाश के लिये...उन्मादीयों के संपूर्ण संहार के लिये...
*अपनी इच्छा के* *विरूद्ध..*
स्वयं ईश्वर को भी कठोर निर्णय लेने पडते है !
और इसिलिए क्या ईश्वर भी इसके लिए अदृश्य रूप से अनेक योजनाएं भी बनाता होगा...?
*हम जैसे अज्ञान जीव* उसकी अलौकिक रचना का *मर्मभेद* कैसे समझ सकते है ?
*ईश्वर कब आयेगा ?* *कहां से आयेगा ?*
और हाहाकारी , उन्मादीयों का संपूर्ण संहार कब करेगा ?
यह तो ईश्वर ही जाने !
*उसकी लीला हम क्या* *जानें ?*
*क्या समझे ??*
मगर वो आयेगा ...
*जरूर आयेगा ...*
और संपूर्ण धरती को फिरसे
स्वर्ग से सुंदर जैसी... फिरसे बनायेगा...
क्या यह समय भी *नजदिक ही है ?*
देखते है भविष्य में क्या लिखा हुवा है...??
तब तक के लिये
*श्रीकृष्ण: शरणं मम्*
🙏🙏🙏🚩
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