मोदिजी को पत्र ( १९ )

 मोदिजी का जलवा है ये

मोदिजी की उमंग है ये
मोदिजी का उत्साह है ये
मोदिजी का प्रकाश है ये
मोदिजी का चैतन्य है ये

मोदिजी का नितनया आविष्कार है ये


नई उमंग है
नई आशा है
नई दिशा है
नई उषा है

विश्व व्यापक रणनीती की ये पूकार है ये
नवभारत निर्माण का ध्यास है ये
चैतन्य दाई समाज निर्माण का विश्वास है ये

सुजलाम सुफलाम भारत का जयजयकार है ये

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