मानवता

 एक " वो...? " है जो अपने धर्म के लिये मर मिटने को तैय्यार है और ? एक " ये " है जो धर्म का भी हॅंसी मजाक बनाते है...

सोचो , समझो , जानो , जागो...

मानवता की जीत के लिये ? हैवानियत ?

हरानी होगी...

विनोदकुमार महाजन

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