संपूर्ण लेखांक भाग २८
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Papa: अब बोलो!!!
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मैं हमेशा मेरे लेख सांकेतिक भाषा में ही क्यों लिखता हुं,इसका सही अर्थ अब आपको थोडा थोडा समझ में आ रहा है ना?
"साँप भी मरे,लाठी भी ना टुटे",केवल और केवल यही निती से हम जीत सकते है।
संपुर्ण देश में ही नही तो संपुर्ण पृथ्वी पर अधर्म का विनाशकारी भयंकर संकट,जोर से बढ रहा है।सभी देश चिंतीत है।
तो....?अब....?
एक सैतान सौ ईश्वरपुत्रों को भारी पड रहा है।वजह....?
उनकी जबरदस्त निती...।
तो अब हमें भी केवल जीतने की जबरदस्त रणनीति बनानी ही होगी।
बल बुध्दी से एक ईश्वरपुत्र सौही नही,तो हजारों सैतानों को भारी ऐसा कुछ तो भी करना ही होगा।
हम सदैव बेफिकर, आपस में बैर-लडाई-झगडें में "लटकते"है,तब वह पुरा फायदा उठाकर जीतते है।हजारों सालों से यही चलता आ रहा है।
सभी तरफ सें,चारों तरफ से वह परिस्थिति नियंत्रण में रखते है,और ऐन मौके पर जब हम सोये हुए होते है या निद्रीस्त होते है,शक्ती से कमजोर होते है तो ,वो परीस्थीती का अचुक फायदा उठाते है,और जीतते है।
गौर से देखो,हजारों सालों से ठीक यही तरीका चलता आ रहा है।
जबरदस्त फाँर्मुला है यह उनका जीतने का।
अब हमें जीतने के लिए, उनसे भी बेहतर और संपुर्ण देश में भी और विश्व स्तर पर भी जबरदस्त शक्तीशाली तरीका अपनाना होगा।
और अपनाना ही होगा।
तो अब बोलो???
समय बहुत कम है।
वो दिनबदिन शक्तीशाली बनते जा रहे है।हमें विविध मार्गों से कमजोर बनाने की साजिश भी रच रहे है।और हम सदीयों से कमजोर भी बनते जा रहे है।तेजस्वी ईश्वरपुत्र होकर भी.....।
हाय राम.......!!!!!
अगर यह ऐसा ही सिलसिला चलता रहा तो राम,कृष्ण भी हमें नही बचा पायेंगे।
सोचो....समय की माँग,समय की निती,समय की गती,समय की पुकार और वास्तव पहचानो।
सोते रहेंगे, बेफिकीरी से रहेंगे तो भविष्य क्षमा नही करेगा।
आज ही समय है,भविष्य को अपने हाथ में खिंचकर लाओ।
संपुर्ण पृथ्वी के लिए योजना तैय्यार है।जरूरत है तो इसे सिरीअसली पढने की,लेने की और कार्यवाही की।आप सभी के संपुर्ण सहायता की।
सोचो....जागो....।
आप सभी "आत्मशक्ती",द्वारा पृथ्वी का "सुक्ष्म",से निरीक्षण करेंगे तो "अंदर का",चित्र भयंकर है,यही दिखाई देगा।
कहीं ऐसा ना हो की समय हाथ से छुट जाएं,और भविष्य में पछताना-रोना पडें।
ऐसा ही हुवा है भुतकाल में।और भविष्य भी इसी दिशा में जा रहा है।
"अंदर से",प्रचंड शक्तीशाली बनती जा रही सैतानी शक्तीयों को पहचानो।
संकट गहरा है।साजीश भयंकर है।जानो-पहचानो।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:54 pm] Papa: * विनाशकारी ठंडा खून।*
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भाईयों,आप सभी की क्षमा माँगकर आज आपको कुछ सत्य बताने जा रहा हुं।हो सके तो क्षमा करना।
विषय है,ठंडा खून।जी,बिल्कुल।विनाशकारी ठंडा खून।मैं मेरे निर्दीस्त समाज को जगाने के उद्दीष्ट से ही सत्य लिखने की कोशीश कर रहा हुं।आपकी द्रष्टि से शायद यह गलत भी हो सकता है।
मेरा समाज को,आपस में लड झगडकर,बेपर्वाई की वजह से,अज्ञान-अंधश्रध्द की वजह आजतक अनेक प्रकार की क्षती पहुंची है।नुकसान यह हुआ की,परदेशी आक्रमणकारीयों ने इसका पूरजोर फायदा उठाया।और यहाँ पर राज किया।हमारा नामोनिशान मिटाने तक की भी कोशीशें की गई।उदाहरण सामने है।हमारे संस्कृती-संस्कारों पर ही प्रहार होने लगे।
इतना ही नही हमारे देवी देवतांओं को भी बदनाम किया गया।हमारे स्वाभिमान पर भी हमले हुए।फिर भी दुर्देव वश हम जागृत और संगठीत नही हो सके।
इसिलीए राजे शिवाजी का,दिल्ली जीतकर हिंदवी स्वराज्य का सपना पुरा नही हो सका।महाराणा,गुरु गोवींद सिंह जी जैसे महात्मा एवं पुण्यात्माओं को भयंकर आत्मक्लैश भुगतने पडे।
सावरकर, सुभाषबाबु को भी अनेक यातनाएं झेलनी पडी।
विवेकानंद स्वामीजी को भी उनके अपेक्षानुसार यश नही मिला।
अनेक महात्माएं इस भूमी पर सत्य के लिए लडाते लडते धाराशायी हो गए।
अब मैं थोडा स्वार्थी बनकर निजी तौर पर आता हुं।
मैं अनेक सालों से समाज जागृती के लिए अनेक माध्यमों द्वारा जीस प्रकार से प्रयत्न कर रहा हुं,और जिस प्रकार से मुझे मेरे ही समाज से ठंडा-जि हाँ ठंडा प्रतीसाद मिलता है,उससे मन में नाराजी तो आती ही है।आत्मसन्मान, आत्मजागृति, चैतन्यजागृती ईत्यादी शब्दों का समय समय पर उल्लेख करके भी,शून्य प्रतीसाद देखकर हैरान होता हुं।और कभी कभी लगता है की,व्यर्थ समय गवाँ रहा हुं।इससे बेहतर है की,प्रभुचिंतन एवं एकांत में ही जीवन बिता दूं।
अगर प्रतीपक्ष में मैं होता और "उनके"लिए ऐसा लिखता ऐसी कल्पना किजीए, तो क्या होता?
उनके लिए मैं रातोरात हिरो बन जाता।संपुर्ण समाज तथा उनका विश्व मुझे सर पर लेकर नाचता।रातोरात मुझे प्रसार के लिए खरबों का धन भी प्राप्त होता।
और हमारे यहाँ???
सौ सौ मेसैज भेजने के बाद,अनेक मान्यवर इन्सानीयत के नाते उत्तर तक नही देते है।
"उनके"एकपर यदी कुछ हुआ तो पुरा समाज बाहर निकलता है।और हमारे यहाँ???
समाज बाहर निकलना तो दूर... छोटीसी प्रतीक्रिया देने को भी आगे नही आता है।
यही हमारे पतन का कारण है।यही हमारे पिछे हटते जाने का कारण है।
मैं कभी कभी ऐसी विचीत्र पोष्ट करता हुं की,अपेक्षा रहती है की कोई प्रतीक्रिया जरुर आयेगी।
कभी कोई प्रतिक्रिया ही नही मिलती तो,"धर्मग्लानी",देखकर दुख तो होता ही है।और स्वाभाविक भी है।
फिर भी कोई बात नहीं।
सब भगवान की इच्छा।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:54 pm] Papa: अब बोलो!!!
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मैं हमेशा मेरे लेख सांकेतिक भाषा में ही क्यों लिखता हुं,इसका सही अर्थ अब आपको थोडा थोडा समझ में आ रहा है ना?
"साँप भी मरे,लाठी भी ना टुटे",केवल और केवल यही निती से हम जीत सकते है।
संपुर्ण देश में ही नही तो संपुर्ण पृथ्वी पर अधर्म का विनाशकारी भयंकर संकट,जोर से बढ रहा है।सभी देश चिंतीत है।
तो....?अब....?
एक सैतान सौ ईश्वरपुत्रों को भारी पड रहा है।वजह....?
उनकी जबरदस्त निती...।
तो अब हमें भी केवल जीतने की जबरदस्त रणनीति बनानी ही होगी।
बल बुध्दी से एक ईश्वरपुत्र सौही नही,तो हजारों सैतानों को भारी ऐसा कुछ तो भी करना ही होगा।
हम सदैव बेफिकर, आपस में बैर-लडाई-झगडें में "लटकते"है,तब वह पुरा फायदा उठाकर जीतते है।हजारों सालों से यही चलता आ रहा है।
सभी तरफ सें,चारों तरफ से वह परिस्थिति नियंत्रण में रखते है,और ऐन मौके पर जब हम सोये हुए होते है या निद्रीस्त होते है,शक्ती से कमजोर होते है तो ,वो परीस्थीती का अचुक फायदा उठाते है,और जीतते है।
गौर से देखो,हजारों सालों से ठीक यही तरीका चलता आ रहा है।
जबरदस्त फाँर्मुला है यह उनका जीतने का।
अब हमें जीतने के लिए, उनसे भी बेहतर और संपुर्ण देश में भी और विश्व स्तर पर भी जबरदस्त शक्तीशाली तरीका अपनाना होगा।
और अपनाना ही होगा।
तो अब बोलो???
समय बहुत कम है।
वो दिनबदिन शक्तीशाली बनते जा रहे है।हमें विविध मार्गों से कमजोर बनाने की साजिश भी रच रहे है।और हम सदीयों से कमजोर भी बनते जा रहे है।तेजस्वी ईश्वरपुत्र होकर भी.....।
हाय राम.......!!!!!
अगर यह ऐसा ही सिलसिला चलता रहा तो राम,कृष्ण भी हमें नही बचा पायेंगे।
सोचो....समय की माँग,समय की निती,समय की गती,समय की पुकार और वास्तव पहचानो।
सोते रहेंगे, बेफिकीरी से रहेंगे तो भविष्य क्षमा नही करेगा।
आज ही समय है,भविष्य को अपने हाथ में खिंचकर लाओ।
संपुर्ण पृथ्वी के लिए योजना तैय्यार है।जरूरत है तो इसे सिरीअसली पढने की,लेने की और कार्यवाही की।आप सभी के संपुर्ण सहायता की।
सोचो....जागो....।
आप सभी "आत्मशक्ती",द्वारा पृथ्वी का "सुक्ष्म",से निरीक्षण करेंगे तो "अंदर का",चित्र भयंकर है,यही दिखाई देगा।
कहीं ऐसा ना हो की समय हाथ से छुट जाएं,और भविष्य में पछताना-रोना पडें।
ऐसा ही हुवा है भुतकाल में।और भविष्य भी इसी दिशा में जा रहा है।
"अंदर से",प्रचंड शक्तीशाली बनती जा रही सैतानी शक्तीयों को पहचानो।
संकट गहरा है।साजीश भयंकर है।जानो-पहचानो।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:54 pm] Papa: मेरे गुजराती भाईयों।
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उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनावों के नतीजे ने गुजरात विधानसभा चुनाव भाजपा के पक्ष में कर दिया है।और गुजरात राज्य का मतदाता भी अनेक सालों से जागरूक भी है।फिर भी भाईयों, यह गुजरात चुनाव की लडाई न केवल चुनाव की लडाई है तो संपुर्ण देश के लिए, विषेशत:हिंदु समाज के लिए महत्वपूर्ण लडाई है।
इसिलीए मेरे भाईयों, जिसटी,नोटबंदी,पेट्रोल, किसानों का कर्जा इससे भी बढकर मुद्दों की यह लडाई है। हमें एकबार महँगाई भी चलेगी।मगर भाजपा को ही साथ देना ही होगा।
राष्ट्रीय अस्मिता, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण, तथा हिंदु राष्ट्र निर्मीती के लिए यह लडाई अतीशय महत्वपुर्ण है।इसिलीए चाहे कुछ भी हो,गुजराती भाईयों, अब विधानसभा चुनाव में सभी सिटों पर केवल और केवल,भारी बहुमतों से,सिर्फ और सिर्फ़ भाजपा को ही जीताना है।
आज,अभी हमारा ये वादा रहा,"हमारा बहुमूल्य वोट केवल भाजपा को ही",हम देकर रहेंगे।और राष्ट्रीय अस्मिता सदा के लिए जागृत रखेंगे।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:56 pm] Papa: http://www.ajabgjab.com/2016/
[23/01 1:56 pm] Papa: आपके टी.व्ही.चैनल के लिए आपने जो मुझपर विश्वास किया उसके लिए धन्यवाद, आभार।
सत्य की जीत के लिए, बहुत कठोर तपस्या की है।
मुझपर हुई ईश्वरी कृपा,मेरी जादुई लेखनी और जादुई पहाड़ी आवाज से अब सत्य की जीत करने की कोशिश करूंगा।
बालासाहब ठाकरे जी ने अपनी पहाडी आवाज और मंत्रमुग्ध लेखन और भाषणों से लोगों के दिलों पर राज किया था।
मैं उनसे बहुत छोटा हुं।फिर भी समाज जागृती तथा राष्ट्रजागृती का छोटासा कार्य करने की कोशिश करूंगा।
इसके साथ ही,आपके टी.व्ही.चैनल को भी निरपेक्ष वृत्ती से संपुर्ण देश में लोकप्रीय बनाने की कोशिश करूंगा।
हरी ओम।
🙏🕉...
--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:56 pm] Papa: हमारे इस ग्रुपपर सन्माननीय श्री.शत्रुंजय सिंहजी भी मौजूद है।उनके नाम में ही,"शत्रुंजय",है।तो अब
उन्होने मुझे बडे विश्वास से उनके न्युजचैनल(एअर)के लिए नियुक्त किया है।दिल से उनका आभार।
आपके टी.व्ही.चैनल के लिए आपने जो मुझपर विश्वास किया उसके लिए धन्यवाद, आभार।
सत्य की जीत के लिए, बहुत कठोर तपस्या की है।
मुझपर हुई ईश्वरी कृपा,मेरी जादुई लेखनी और जादुई पहाड़ी आवाज से अब सत्य की जीत करने की कोशिश करूंगा।
बालासाहब ठाकरे जी ने अपनी पहाडी आवाज और मंत्रमुग्ध लेखन और भाषणों से लोगों के दिलों पर राज किया था।
मैं उनसे बहुत छोटा हुं।फिर भी समाज जागृती तथा राष्ट्रजागृती का छोटासा कार्य करने की कोशिश करूंगा।
इसके साथ ही,आपके टी.व्ही.चैनल को भी निरपेक्ष वृत्ती से संपुर्ण देश में लोकप्रीय बनाने की कोशिश करूंगा।
हरी ओम।
🙏🕉...
--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:56 pm] Papa: एक डाल के पंछी।
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याद करो वह बचपन।याद करो वह बचपन के दिन।
सुंदर!!!अप्रतीम!!!
लाजवाब!!!
ऐसे ही दिन थे वह।
याद करो वह भाईबहनों का प्यार।वह झुटा लडाई-झगडा,वह प्रेम का गुस्सा।
घर में हमेशा अनेक मेहमान आते जाते रहते थे।पडोसन से भी इतना प्यार, मानो वह पडोसन नही घर का ही सदस्य लगता था।
स्वर्गीय माहौल।स्वर्गीय आनंद।एक डाल पर बहुत आनंद से बेठे अनेक पंछी।
धिरे धिरे दिन बितते गए।उमर बढती गई।
रिश्ते नातों का प्यार, आना जाना,अनुभुती कम होती गई।रीश्तेनाते धिरे धिरे टुटते चले गए।
प्रेम-भाईचारा-दिव्यत्व समाप्त सा होता गया।
स्वार्थ-मोह बढता गया।मायावी पैसों के बाजार में,रूपया ही सबकुछ बनता गया।
वह बचपन चला गया।रह गई यादें।
एक डाल के सब पंछी खोसला छोडकर उड गए।वापीस कभी भी न आने के लिए।
डाल खाली हो गई।
हर एक पंछी ने अपना अपना नया खोसला बना दिया।
और वह पुरानी यादें,वह पुरानी डाली,वह पुरानी डाली,वह पुराने दिन सभ भुल गए।
एक डाल के सब पंछी उड गए।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:56 pm] Papa: गरुड और साँप।
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गरुड और साँप,सौतेले भाई।गरुड नम्र विष्णुभक्त।और साँप जहरीला।
गरूड की माँ विनीता और साँपों की माँ कद्रु।दोनों काश्यप ऋषी की संताने।
मगर.........
गरुड और साँप,
दोनों ही जानी दुश्मन।
अकेला गरुड हजार साँपो को भारी।
यह गरुड साँप का डि.पी.मुझे मेरे एक मित्र के व्हाटस्अप पर मिला।
ऐसी अच्छी और सांकेतिक डि.पी.जीसका परीस्थिती पर पुरा नियंत्रण है,ऐसे व्यक्ती ही लगा सकते है।
इस तस्वीर के निचे मराठी में लिखा है,"ज्याचे परीस्थितीवर मजबुत नियंत्रण असते,त्याचे विष ओकणारे कांहीही उखडु शकत नाहीत."
बिल्कुल सत्य है यह।
और उन्होने अपना स्टेटस रखा है,"देव तारी त्याला कोण मारी?"
बिल्कुल सत्य वचन।मित्रों,जिसका रखवाला खुद ईश्वर है,उसे कौन मार सकता है?
आलंदी के भागवत सांप्रदाय के,"भागवतजी महाराज जी का",यह डि.पी.और स्टेटस् हमें बहुत कुछ सिखाता है।
यह तस्वीर गौर से देखो भाईयों।
अब मैं असली मुद्दे पर आता हुं।
हम हर हिंदुओं को ठीक गरुड पक्षी की तरह सदैव सचेत एवं जागरूक रहना चाहिए था,और आज भी जागरूक रहना ही चाहिए।
हिंदु धर्म को अनेक जहरीले साँप हमेशा जकडने की कोशीश में लगे रहते है।
इस गरुड पक्षी की तरह हम सदीयों से जागरूक रहते और बडे बडे जहरीले साँपों को नियंत्रण में रखते,अर्थात ठीक इसी तरह पाँव के निचे दबे रखते ,तो क्या हमारे धर्म की इतनी क्षती होती?
आफगाणीस्तान, पाकिस्तान, बांग्ला और भी अनेक देश हातसे गए।वहाँ भी ईश्वरी राज्य अर्थात भगवान का भागवत धर्म ही था।वहाँ पर आज कौनसा धर्म है?वजह क्या है?
इस गरुड पक्षी की तरह हम समय समय पर जहरीले साँपों को नियंत्रण में नही रख सकें।क्यों...?
आज भी कश्मीर, केरला,बंगाल और भी अनेक प्रांतो में भगवान का "भागवत धर्म",खतरें में है।
क्यों?
कौन जिम्मेदार है इसको?
मेरे भाईयों,आज भी समय हमारे हाथ में है।
भागवत धर्म के भगवी ध्वजा की हमें जी जान से रक्षा ही नही करनी है तो ,हिंदुस्थान के नही तो विश्व के हर कोने में,कोने कोने में भगवान की और भागवत धर्म की भगवी ध्वजा हमें पहुंचानी है।
तभी तो संत ज्ञानेश्वर जी ने पसायदान में लिखा,"विश्व-स्वधर्म-सुर्ये-पा
संपूर्ण विश्व भगवान का था,है,और रहेगा।पापी आक्रमणकारीयों को अब हम साँप की तरह पैरों तले दबाके रखेंगे।और गरुड की तरह सदैव सजग एवं जागरूक रहेंगे।
विश्व के सभी हिंदु, गरुड जैसे परम विष्णुभक्त की तरह भगवत्शरण में जाकर,धर्म के प्रती सजग होंगे तो.....?
वह दिन दूर नही की,संपूर्ण देश में ही नही तो संपूर्ण विश्व में भगवे का राज्य अर्थात भगवान का राज्य, ईश्वरी राज्य आ जायें।
जागृत हो जाओ,सावधान हो जाओ,तैय्यार हो जाओ।
"विश्व-क्रांती",का बिगुल बज चुका है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:58 pm] Papa: सभी ब्राम्हण भाईयों,
जरुर जरूर पढो,
चलो क्रांती की ओर।
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मेरे प्यारे सभी ब्राम्हण भाईयों, मैं पुणे से पत्रकार,विनोदकुमार महाजन,सभी को नम्रतापूर्वक निवेदन करता हुं की,मेरा यह लेख शुरु से अंत तक सभी भाई बहन जरुर पढे।और चिंतन-मनन करें।और मुझे मेरे व्हाटस्अप नंबर पर अपनी राय दें।
लेख लंबा भी हो सकता है।तो भी जरूर पढे।
ब्राम्हण समाज की पार्श्वभूमि आध्यात्मीक और त्याग की है।संपुर्ण सृष्टी का कायापलट करने की क्षमता ब्राम्हण की तेजस्वी बुध्दी में होती है।
आचार्य चाणक्य जी ने अखंड हिंदुस्थान, निर्माण करके ब्राम्हणों की क्षमता विश्व को दिखा दी है।
अब फिरसे विश्व के समस्त ब्राम्हणों को अधर्म का नाश और धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए एक होना है,हरेक को चाणक्य बनना है।
काम कठीण है पर मुश्किल नही है।
तीव्र इच्छाशक्ती से नामुमकीन भी मुमकीन में बदल जाता है।
तो...अभी हमारे देश को और संपुर्ण विश्व को क्रांती की सख्त जरूरत है।और ब्राम्हण एह ईश्वरी कार्य पुरा करने की क्षमता रखता है।
अब आगे...सावधानी से पढो.....।
इसिलीए हमें तुरंत राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय ब्राम्हण संगठन बनाना है।जो नाममात्र न रहकर फास्ट एक्टीव हो।इसिलीए केवल ग्यारह सदस्य ही चुने जायेंगे।जो मुख्य संगठन होगा।और निचे ओर संगठन की शाखाएं विस्तारित की जाएगी।
जो मुख्य संगठन में जुडना चाहते है कृपया मेरे व्हाटस्अप नंबर पर अपनी पुरी जानकारी भेजना।जैसे की नाम,ऊमर, पता,व्यावसाय और संगठन के लिये क्या कर सकते हो---इसका तपशील।हरेक को संगठन शक्ती बढाने के लिए तुरंत तन-मन-धन से सक्रीय होने की जरुरत है।
दुसरी बात यह की,अपने ग्रुपपर कोई बिझनसमन,बिल्डर,फिल्म निर्माता, उद्योगपति है तो कृपया संगठन बढाने के लिए अपना आर्थीक सहयोग,जरूर करें।क्योंकी धन के बिना कार्य अधुरा है।
इसके बारें में मुझे मेरे व्हाटस्अप नंबरपर विचार जरूर रखें।
"राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कार्य को पुष्टी देने के मेरे अनेक जागृत लेख मैं ग्रुपपर डाल रहा हुं।कृपया विचारों की पुष्टी के लिए सभी लेख पढें।
कार्य सफलता के लिये मैंने तकरीबन बीस साल कठोर तपस्या की है।तेरह कोटी जाप पुरा किया है।अनेक देवी देवतांओं के आशीर्वाद, सिध्द पुरुषों के वरदहस्त प्राप्त कर चुका हुं।इसिलीए कार्य सफल तो होनेवाला ही है।
हरी ओम।
जय परशुराम।जय चाणक्य।
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-- निवेदक श्री.विनोदकुमार महाजन,पत्रकार,पुणे।
व्हाटस्अप नंबर
+91 98903 49751
[23/01 1:58 pm] Papa: जमीनी तौर पर।
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जो होता है वह भगवान की इच्छा से होता है।और जो होता है वह भी अच्छे के लिए ही होता है।पेड का पत्ता भी भगवान की ही इच्छा से हिलता है।खैर.....
कौन सच्चा,कौन अच्छा,कौन कितना पाणी में,किसका कौनसा मुखौटा,असली कौन-नकली कौन?
कौन काँच का तुकडा, कौन असली हीरा।?
कौन नाटक करने वाला,कौन कितना साथ देने वाला इसकी अनुभुती हम सभी को बारबार होती है दोस्तो।
विचार करना अलग होता है।प्रत्यक्ष कृती में लाना अलग होता है।सपना देखना अलग होता है,जमीनी तौर पर-वास्तव में सपना पुरा करना अलग होता है।
संकल्प और सिध्दी में अंतर तो बहुत होता है।मगर संकल्प किए बगैर सिध्दीयाँ तो नही मिल सकती।
हमने भी देखा सही क्या,गलत क्या?
संकल्प तो बहुत बडे बडे किए।
और अब प्रत्यक्ष रुप से-हकीकत में - जमीनी तौर पर सिध्दीयाँ प्रत्यक्ष रुप से हाथ में आने की अब शुरुआत हो जायेगी।
जमीनी तौर पर अब "शक्तीशाली",विश्व संगठन बनाकर प्रत्यक्ष कार्य की शुरुआत नजदीक है।
जिन्होंने सच्चे दिलों से साथ दिया उनका स्वागत,जिन्होने हँसी मजाक बनाई उनका भी स्वागत।जिन्होने संकल्प और सिध्दी के दिव्य रास्ते चलते समय धोके दिये,घाव दिये,छल कपट किया उनका भी स्वागत।
मैं हुं या और कोई,
निमित्त मात्र है।
"विश्व क्रांती, विश्व परीवर्तन",तो भगवान की इच्छा है।उसे कौन टाल सकता है?
इसीलीए तो मैंने पहले ही लिखा है की,पेड का पत्ता भी ईश्वरी इच्छा से ही हिलता है।
विधी का विधान कौन बदल सकता है भाईयों?
"पृथ्वी पर गुप्त रुप से वास करने वाले दिव्य देहधारी पवित्र ईश्वरी आत्माओं",अब सभी मिलकर चलो सिध्दीयों की ओर।
जमीनी तौरपर कार्य आरंभ हो चुका है।
बस्स...और कुछ क्षणों का इंतजार!!!!!
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 1:58 pm] Papa: बिवी को सब्जियों में नमक कम जादा है इस बात पर बिवी को बताने
से डरनेवाले भी व्हाटस्अप और फेसबुक पर मोदीजी को देश कैसा चलाया जाता है, इसपर सलाह देते रहते है।और ज्ञान बाँटते रहते है।
धन्य हो,धन्य हो।व्हाटस्अप फेसबुक पंडितों.....।
😀😜😜😜😜
V...K...M...
[23/01 1:58 pm] Papa: बहुत दिनों से फोन लगा रहा हुं भगवन्।फोन नही लग रहा है।चलो,
कोई बात नही।व्हाटस्अप तो है ही।
आपके अंदर की सच्चाई खुद भगवान जानता है।
मैं तो उस भगवान का छोटासा सेवक।
खैर...
अब हमें जल्दी ही हमारे मकसद की प्राप्ती के लिये चौफेर सक्रीय होना है।
समय और संपुर्ण विश्व हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।
मैं यह बात गंगेश चौबेजीसे नही कर रहा हुं।आपके अंदर छुपी सच्चाई और अच्छाई से कर रहा हुं।खुद आपकी ईश्वर स्वरूप आपके पवित्र आत्मा से कर रहा हुं।
करोंडों में एक ही हिरा होता है।और उसे परखने वाला रत्नपारखी भी सौ करोडों में एक होता है।
आपके अंदर की सच्चाई, अच्छाई, ईश्वरत्व भले ही यह कलीयुगी इंन्सानों की दुनीया,नही पहचानती है।
मगर खुद भगवान आपका मोल समझता है।तो चिंता क्यों और किस बात की?
परेशानीयाँ तो आती जाती रहती है।
सही है ना?
जल्दी ही हमें विश्व पटल पर सक्रीय होना है।
हरी ओम।
[23/01 1:58 pm] Papa: ।। एक बोधकथा,....
और भगवान स्वर्ग वापीस चला गया।।
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मेरे प्यारे सभी दोस्तों,मैं आज एक बहुत ही दिलचस्प और मनोरंजक कथा बताउंगा।जिसमें कलीयुग कितना भयंकर है ,यह दिखाई देगा।भगवान भी धरती पर रूप बदलकर आयेगा,तो यह कलीयुगी इंन्सान उसकी भी कैसी दशा कर देगा,इसकी कथा जरूर पढो।
वैसे तो हरएक घर में कोई न कोई व्यक्ती ऐसा होता ही की उसके घर में प्रवेश होते ही सारा घर आनंदीत हो जाता है।धनधान्य से भरपुर बन जाता है।सुबत्ता आ जाती है।यह सब किसके चरणकमल घर से लगने से होता है,इसका कोई अनुमान नही लगा सकता।
ऐसा ही एक व्यक्ती था।ईश्वरी कृपा प्राप्त।सभी को आनंदीत करनेवाला।
मगर......
उसकी सच्चाई, अच्छाई की किमत घर में कुछ भी नही थी।घर का हरएक सदस्य ऐसा समझता था की,मेरी ही वजह से घर में सब सुखशांती है।जैसा की आज भी ऐसा ही होता हैहर घर में।तो एक दिन घर में रहनेवाला वह दिव्यपुरुष महान मुसीबत में फँस गया,जिसकी पुण्याईसें घर का सभी सदस्य सुखी, समाधानी था।
कथा थोडी लंबी है,मगर उद्भोदक है।जरुर पढना।
घर में उस दिव्य पुरुष को सभी सदस्य कोई भी कीमत नही देता था।उसके शब्दों की कोई कीमत भी न थी घर में।वह बेचारा...सभी को समझाता,भलाबुरा बताता।घर के हर सदस्य को सुख का रास्ता बताता।
मगर उसके विचार किसी को भी पसंद नहीं आ रहे थे।उस गुप्त रुप से रहनेवाले दिव्य पुरुष को घर के सभी सदस्य पीडा देने लगे।
और एक दिन वह पुण्यात्मा ने तंग आकर सदा के लिए घर छोड दिया।
और घर से मानो भगवान गायब हुवा।उसके साथ लक्ष्मी भी चली गई।और सुखशांती भी उस घर से गायब हो गई।
होते होते वह पुण्यात्मा एक गरीब के घर पहुंचा।वहाँ के लोगों का उसके प्रती प्रेम-आगत-स्वागत देखकर घर छोडकर भागनेवाला वह पुण्यात्मा वहाँ के लोगों में घुलमिल गया।
और उसके चरण उस गरीब के घर लगते ही उस गरीब के घर में आबादी आबाद होने लगा।
अब उस घर के सदस्यों में भी कलीयुगी अहंकार
जाग गया।घर के हर एक सदस्य को ऐसा लगने लगा की मेरी ही वजह से घर में सब सुबत्ता आ गई है।
और उस दिव्यात्मा का उसी घर पर धिरे धिरे फिर से अपमान होना शुरू हो गया।
ईश्वरतुल्य पवित्र आत्मा बहुत दुखी हुवा इससे।
उसने नाराज होकर वह भी घर सदा के लिए छोड दिया।
इस भयंकर स्वार्थी दुनीया से वह पुण्यात्मा बहुत दुखी हुआ।
और उसके अंदर निराकार रुप से रहनेवाले सभी देवता भी नाराज हो गए।
पृथ्वी का भयंकर अनर्थ देखकर उस बेचारी की अब किसीके घर न जाने की स्थिती हो गई।
भुका प्यासा,उदास, थकाहारा,पुण्यात्मा चलता रहा,चलता रह।
क्या करें,कहाँ जाएं?
ऐसी विमनस्क स्थिती में रास्ते में भटकता रहा।अकेला ही।न साथी,न संगी।
चलकर थक गया।भूक लगी।नजदीक ही एक आश्रम में अन्नदान चल रहा था।उसने सोचा,"चलो,भूक तो लगी है।यहाँ पर खाना
खाते है।"
वहाँ जाकर उसने खाना खाने की इच्छा प्रकट की तो....एक कोने से आवाज आई,
"ऐ भिकारी,चल निकल यहाँ से।यहाँ केवल व्हिआयपी लोगों को ही प्रसाद दिया जाता है।दो-दो पाँच पाँच लाख देनेवाले वर्गणीदार है यह सभी पुण्यात्माएँ।"
ऐसा आवाज आते ही,वहाँ का खाना खाना दूर-वहाँ एक पल रूकने की भी इच्छा नही रही उस सच्चे पुण्यात्मा की।
भूक से तडपता वह बेचारा वहाँ से निकल गया।
चलते चलते रास्ते में प्यास लग गई।आत्मग्लानी और शरीर के कष्ट के कारण उसे अब बहुत प्यास भी लग गई थी।
दूर दूर तक पाणी का कोई स्र्तोत नही दिखाई दे रहा था।
और अचानक....
एक बैलगाड़ी में एक आदमी पाणी की बोटलें रखकर, पाणी बेचने को चला जा रहा था।
उस पुण्यात्मा ने उस बैलगाड़ी वाले को पाणी की याचना की।तो बैलगाड़ी वाला जोर से गुर्राया...."अबे भिकारी, तुझे में ऐसे ही पाणी की बोटल मुक्त में बाँटू तो क्या मैं भी तेरे जैसा भिकारी बनूं?धंदा है ये धंदा।चलहट यहाँ से।न जाने कहाँ कहाँ से आकर भिक माँगते फिरते है साले।"
और वह बैलगाड़ी वाला उस पुण्यात्मा को पाणी दिये बगैरे,उल्टा उसे ही गालीयाँ देकर चला गया।
दोस्तों,
वह पुण्यात्मा कोई साधारण पुरुष नही था।
महाज्ञानी, सिध्दयोगी था।उसके एक आशीर्वाद से अनेकों का जीवन संवर सकता था।या एक शाप से किसी का जीवन बर्बाद हो सकता था।मगर उसनें ऐसा नही किया।
घोर कलीयुगी इंन्सान से तंग आकर उसने योगशक्ति द्वारा उसी स्थान पर देहत्याग कर दिया।और वह पुण्यात्या स्वर्ग चला गया।
उसके साथ उसके अंदर रहनेवाले सभी देवत भी नाराज होकर,पृथ्वी का भयंकर पाप देखकर स्वर्ग चले गए।
तात्पर्य:-- भगवान किसी भी रुप में आ सकता है।हर एक को प्रेम दो।हर एक को पाणी दो।हर एक को अन्न दो।हर एक का सन्मान करों।हर एक को इज्जत दो।
(लंबी कहानी दिल से पढने के लिए धन्यवाद)
हरी ओम।
--------- लेखन एवं कल्पना,
श्री.विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:00 pm] Papa: अब हिंदु जाग गया है।
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जीहाँ भाईयों, हिंदु अब जाग नही रहा है,बल्कि हिंदु अब जाग गया है।
आजादी के पहले और बाद में भी हिंदुओं पर जीसने अती अत्याचार किये ,उनके अत्याचार, भोलाभाला-सिदासादा हिंदु सहता गया।उपर से कुनीती द्वारा हमारे धर्म पर प्रहार करनेवालों पर भी भरौसा करके उनसे भी सच्चा प्यार करता रहा।
विषेशत:आजादी के बाद हमारे ही मतों से सत्ता हडपर हमपर ही अती अत्याचार करने वालों की अब पोल खोल चुकी है।उनकी असलीयत हिंदु समाज जान चुका है।
"खाते हिंदुस्थान का और गाते पाकीस्तान को", ऐसे नमकहरामों की असलीयत हिंदु समाज अब जान चुका है।
अलग पाकीस्तान निर्माण करने के बाद भी इस देश में भी अनेक मिनी पाकीस्तान बनानेवालों की "गहरी चाल",अब हिंदुओं के समझ में आई है।
सर्वोच्च सत्ता स्थान काबीज करके भी,हिंदुमुक्त कश्मीर-केरला-बंगाल वालों के असली मुखौटे अब सभी के समझ में आ रहे है।
क्या इनकी निती हिंदु मुक्त हिंदुस्थान की भी नही हो सकती? इनपर हम क्यों और कैसे भरौसा करें?
जगह जगह पर हमें फँसाया गया है।जाती पाती में झगडे लगाकर, मतों की अत्यंत घिनौनी निती द्वारा जिन्होने देश का,समाज का विघटन करने की दुष्ट निती खेली उन्हे भविष्य कभी भी क्षमा नही कर सकता।
जिन्हे आदर्श समझकर हमने उनके पुतले खडे किए ,उन्होने ही हमारे पीठ में कपट से छूरे चला दिये।
मगर...अब...धिरे धिरे... हमें आस्तीन के साँपों की असलियत पता चल चुकी है।
कपटनिती द्वारा जिन्होने हिंदु मुक्त हिंदुस्थान का सपना देखा था,भविष्य में इस देश में उनके पुतले भी नही रहेंगे।जीहाँ....।
इतना ही नही,हमारे साथ गद्दारी हुई है।प्रेम का नाटक करके हमें फँसाया गया है।और...अनेक भुप्रदेशों से कुनीती द्वारा हमारा ही अस्तित्व मिटाने की साजिश की गई है।जहाँ हिंदु अल्पसंख्यक बनता जा रहा है।
भविष्य में हम भी वहाँपर अल्पसंख्यक नही बहुसंख्यंक होंगे और हमारी संस्कृती, हमारे मंदीर हम फिर से वहाँ खडे भी करेंगे।
कश्मीर-केरल-बंगाल-मिझोराम-नागा
पाकव्याप्त कश्मीर ही नही तो हम पाकीस्तान, बांग्ला, तिबेट,मानससरोवर(हिमालय)भी भविष्य में वापस छिन लेंगे।
यह सब हमारी आदर्श देवभूमि है।जब तक"अखंड हिंदुस्थान",की देवभूमि हमें वापिस नही मिलती और हम वहां पर ईश्वरी राज्य की पुनर्स्थापना नही करते तब तक हम स्वस्थ नही बैठेंगे।
यह सपना नही,हकीकत है-वास्तव है।करोडो भारतीयों की यह दबी हुई इच्छा है।हम पर हुए अती अन्याय अत्याचारों का हम सभी हमारी भुमी वापीस लेकर,एक दिन"आनंदोत्सव",जरूर मनायेंगे।और....
"विश्व-राजनीति",पर हम ऐसी निती बनायेंगे की,सभी विश्व को एक होकर हमें यथोचित न्याय देने के लिए, सभी एकमत के साथ मान्यता दें।
और...यह समय भी दूर नही है।भविष्य इसका इंतजार कर रहा है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:00 pm] Papa: मजा आ गया।😂👍
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दोस्तों,
जब से ये मोबाइल फोन, इंटरनेट, व्हाटस्अप, फेसबुक शुरू हुवा है ना,तभी से बहुत ही मजा आ रहा है।
सब सबकुछ भुलकर, खानापिना भूलकर आदमी केवल इंटरनेट चला रहा है।दुनिया मानो पागल सी बना डाली है इस इंटरनेट ने।
घर हो,दार हो,सफर हो,बस हो,ट्रैन हो-जहाँ देखो वहाँ, मोबाईल फोन, इंटरनेट, कानों को हेडफोन।
कौन क्या कर रहा है,कहाँ जा रहा है किसीको कुछ पता नही।
बाप बेटे पर चिल्लाता है,बेटा बाप पर।माँ बेटी पर तो बेटी भाई पर।
चिल्लाओ,चिल्लाओ।किसीके चिल्लाने से नेट थोडे ही हाथ से छुटेगा?🤔😜😂।
कोई कविता करता है,कोई लेख लिखता है।कोई चुटकुले तो कोई पोर्न फिल्मे।
ग्रुपपर तो देखो।एक मेसैज आनंदीत करनेवाला तो उसके ही निचे किसकी निधन वार्ता।
कोई गम छुपाता है,तो कोई खुशीयाँ मनाता है।कोई राजनीति करता है,तो कोई समाजसेवक है।
अनेक विचारों की,अनेक मतों की "खिचडी",मतलब व्हाटस्अप, फेसबुक ग्रुप।
कोई ग्रुप से ही मैत्री करता है।तो कोई प्रेमसंबंध भी बनाता है।कोई जीवन के लिए साथीदार ढुंढता है,चुनता है।
चाहे सुख हो या दुख।कोई साथी मिले या ना मिले।व्हाटस्अप, फेसबुक तो अपना साथी है।हमे सुख में भी और दुख में भी साथ देनेवाला।
कोई भडास निकालता है,तो कोई गाना गाता है।
दोस्तों है ना मजे की बात?
और ऐसी कल्पना किजीए की,एक दिन व्हाटस्अप, फेसबुक, इंटरनेट इतना ही नही मोबाइल भी सदा के लिए बंद हो जायेगा।तो...तो...???...
तो क्या दुनीयादारी बंद हो जायेगी?
बिल्कुल नही।
दुनीयादारी तो चलती ही रहेगी।
सालों साल।पिढी दर पिढी।युगेयुगे।
क्यों दोस्तों...मजा आया ना मेरा यह लेख पढकर?हँस भी रहे हो ना मेरा यह लेख पढकर।
हँसो,हँसो।नाचो गावो,हँसो खेलो।मस्त मजेसे,मस्त कलंदर बनकर,मस्त आनंद से-मस्ती से,खुशींयों से जीवन जी लो।जीवनभर के लिए मस्त रहो,स्वस्थ्य रहो,खुशहाल रहो।
मजा आ गया ना...???
हरी ओम।😂😜👍
💐💐💐
🙏🙏🙏
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-- आप सभी का...
विनोदकुमार महाजन।
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🌹🌹🌹🌹🕉
[23/01 2:00 pm] Papa: हिंदुभुषण शामजी महाराज...
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ज्ञानेश्वर महाराजांच्या पवित्र, पावन भुमी मध्ये अर्थात आळंदीमध्ये(देवाची),सद्गुरु श्री.सदानंदजी महाराज यांचे आध्यात्मीक सहवासामध्ये श्री.शामजी महाराज यांनी आपली आध्यात्मिक साधना पुर्ण केली,व हिंदुत्व आणी हिंदुराष्ट्र या ईश्वरी कार्याची सुरुवात विविध माध्यमातून त्यांनी सुरु केली.किर्तन, प्रवचन,पुस्तक लेखन ,हिंदुधर्म सभा,संत संमेलन इत्यादी अनेक मार्गाने ईश्वरी कार्य करून त्यांनी संपूर्ण देश पिंजून काढला आहे.हिंदुराष्ट्र निर्मिती या उत्तुंग ध्येयाने प्रेरीत होवून त्यांनी अनेक जीवंत कार्यकर्ते संपुर्ण देशात निर्माण केले आहेत.
त्यांच्या कार्याचा यथोचित गौरव हिंदुह्रदय सम्राट श्री.बाळासाहेब ठाकरे यांनी केला आहे.व शामजी महाराज यांना अतिशय गौरवपूर्ण,"हिंदुभुषण",हा पुरस्कार स्वतः बाळासाहेब ठाकरे यांनी च महाराजांना दिला आहे.
शामजी महाराजांचे अनेक मान्यवरांशी अतीशय जवळचे व जिव्हाळ्याचे संबंध आहेत.
हिंदुत्वाचे धगधगते तेज व सुदर्शन वाहीनीचे प्रमुख श्री.सुरेशजी चव्हाण के यांच्यशीही त्यांचे अतीशय जवळचे संबंध आहेत.
त्यांच्या हिंदुत्ववादी कार्याची दखल घेऊन महाराज यांना मौरीशस येथे हिंदुत्ववादी संघटनेने ,हिंदुत्वाचे कार्य वाढवण्यासाठी शामजी महाराज यांना आमंत्रित केले होते.
मौरीशस येथे हिंदु हाऊस चे प्रेसीडेंट श्री.विरेंद्र रामधुन व चिफ एक्झीक्युटीव्ह ओफिसर श्री.देवेंद्र साली यांच्या अथक प्रयत्नाने मौरीशस येथे हिंदु समाज जागगृतीचे कार्य चालु आहे.
विषेश आनंदाची गोष्ट म्हणजे,मौरीशस येथे महाराज जी यांची उत्तर प्रदेश चे सन्माननीय मुख्यमंत्री श्री.योगीजी यांची भेट झाली. योगीजी यांनी शामजी महाराजांच्या कार्याचा यथोचित गौरव करून त्यांना याप्रसंगी अनेक शुभेच्छा दिल्या.
सत्य सनातन धर्माचे कार्य अतीशय वेगाने संपुर्ण जगात महाराजांकडुन पोचावे हिच ज्ञानेश्वर माऊलींच्या चरणी विनम्र प्रार्थना.
हरी ओम.
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श्री.विनोदकुमार महाजन,पत्रकार,आळंदी.(पुणे)
[23/01 2:00 pm] Papa: जल्दी ही हमें विश्व संगठन खडा करना है।
"ज्ञानेश्वर माऊली",ने आशीर्वाद और फल दिया है।
मैं अब सामान्य नही,महासिध्द बन गया हुं।
मगर दुनीया को दिखाना नही है।
सिदा सादा भोलाभाला बनकर रहना है।
आपकी उच्च योग्यता जानकर सच्चाई बता दी।
सुरेश जी को भी संगठन में लेना है।
उनका चैनल भी विश्व में लोकप्रिय बनाना है।
टीम बनाईयें।
सिर्फ़ मैं,इप मिलके ग्यारह लोगों का प्रथम रजिस्ट्रेशन करते है।
हरी ओम।
🙏🕉🌹💐💐
[23/01 2:04 pm] Papa: *।। ओम ह्रीं श्रीं ठं ठं ठं
नमो भगवते
मम सर्व कार्याणी साधय
साधय,मां रक्ष रक्ष शिघ्र मां धनीनं कुरु कुरु हुं फट् श्रीयं देही प्रज्ञां देही ममापत्तीं निवारय स्वाहा ।।
*चंदन चावल बेल की पतीया शिवजी का ध्यान धरो रे,हे प्रभो मेरा काम करो रे।
*ओम जं जेटेश्वराय नम:
*कैलासराणा शिवचंद्रमौळी,फणींद्र माथा मुकुटी झळाळी कारुण्यसिंधो भवदु:खहारी तुजविण शंभो मज कोण तारी।
*ओम नम:शिवाय।
*ओम कालभैरवाय नम:।
*बम भोले।हर हर महादेव।
*ओम हं हनुमते नम:।
*ओम ह्रो ज्युं स:ओम भुर्रभु:स्वाहा ओम त्र्यंबक यजामहे सुगंधीं
पुष्टीवर्धनम् उर्वारुक्मीव बंधनात् मृत्योमुक्षीय मामृतात।
ओम स:ज्युं ह्रौं ओम।
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:04 pm] Papa: भाईयों, सावधान हो जाईये।हमारे धर्म को मिटाने की जी जान से कोशिश की जा रही है।
धर्म मिटेगा तो अध्यात्म मिटेगा। अध्यात्म मिटेगा तो मंदीर नष्ट होंगे मंदीर नष्ट होंगे तो संस्कृती समाप्त होगी।
जैसे......
पाकीस्तान, बांगला और भी अनेक देश.....।
जागो.....।
[23/01 2:04 pm] Papa: आप खुद बनें सम्पादक
ग्रामीण क्षेत्र में अनेक ऐसे पत्रकार हैं, जो प्रतिभावान होने के बावजूद एक सही मंच नहीं मिलने के अभाव में अपनी प्रतिभा के अनुरूप ख्याति नहीं प्राप्त कर पाते। अपने क्षेत्र की समस्याओं को हल करवाने का उनका जज्बा होता है, लेकिन वे इस बारे कुछ नहीं कर पाते। वहीं अनेक दशकों से पत्रकारिता में जुटे हुए हैं और अब एक सम्मानजनक पद चाहते हैं।
इस तरह के सभी पत्रकार बंधुओं के लिए 'सोशल मीडियाÓ नामक संस्था ने पत्रकारों के लिए एक सर्वोत्तम योजना लाँच की है। इस योजना के तहत उसकी खुद की वेबसाइट, जिसको वे अपने स्मार्टफोन पर अपडेट कर सकेंगे। उनका खुद का एप होगा, जिसका देश-विदेश में वे कहीं भी अपना एप गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से डाउनलोड करवा सकेंगे। अगर जीएसटी नंबर हुआ तो उनको उनकी वेबसाइट पर विभिन्न कंपनियों के विज्ञापन भी मिल सकते हैं, जिससे वे घर बैठे कमाई कर सकते हैं।
अपनी वेबसाइट-अपना एप बनवाने वालों को समाचार अपडेट करने के लिए दो दिन का प्रशिक्षण सेमीनार भी आयोजित किया जायेगा, इस शिविर में उनको कम्प्यूटर, वेबसाइट, एप की पूरी जानकारी दी जायेगी। वे इस वेबसाइट पर समाचार-फोटो-वीडियो भी अपलोड कर सकेंगे। सरकार ने अखबार के पेपर पर 20 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। इससे हर आदमी को अपना अखबार प्रकाशित कर पाना आसान नहीं होता। वे अपनी वेबसाइट के जरिये जीरो खर्चे पर अपनी खबर अपडेट कर सकेंगे। वहीं जो प्रदेश-देश और जिले की प्रमुख खबरों को अपनी वेबसाइट के लिए चाहेंगे, उनको वह सुविधा भी उपलब्ध करवा दी जायेंगी। अगर कोई भी पत्रकार टाइपिंग नहीं करना चाहता, वह अपने क्षेत्र की न्यूज और खबर प्रकाशित करवाना चाहता है तो उनके लिए यह भी सुविधा उपलब्ध होगी। समस्याएं हैं अनेक, समाधान है एक।
सम्पर्क करें : 97825-93973
[23/01 2:05 pm] Papa: Dear sir,
I.G.M.S.V.F.
I chandrashekhar phulshankar declare that I am resident of Jogapur ,post Jamalpur,dist.Jonpur.
At 18-01-17 I have send receipt no.01325898 of Future Gen insurance solution.The sum of this receipt should be given to Kedarnath Gupta,son of Shivprasad Gupta.I am not related to this receipt.
Thank you
Yours faithfully ,
Chandrashekhar.
[23/01 2:05 pm] Papa: विकास पागल कैसे होगा भई?????
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क्या विकास पागल हो सकता है?आखिर ये विकास है कौन?कोई व्यक्ती का नाम है क्या?
नही नही भाई।यह विकास नाम का कोई व्यक्ती वगैरह नही है।मोदीजी के नाम से डरनेवाले अब पागल हो चुके है।
दिनरात उन्हे अब मोदी मोदी ही दिख रहे है।उनका विकास देखकर येभौंचक्का गए है।और इनकी हालात पागल कुत्ते जैसी हो गई है।
सो इनको अब मोदीजी का विकास भी पागल दिख रहा है।वास्तव में आजादी के बाद इन्होने इतनी भयंकर पाप की माया कमाई की पुछो मत।मोदीजी अब यह सारी माया और इनके सारे मायावी खेल धिरे धिरे बाहर निकाल रहे है।इसिलीए अब इनको मोदीजी का विकास भी पागल लग रहा है।
बेचारे!!!!!!!!!
बौखला गए है!!!!!!
इसिलिए विकास पागल नही हुवा है।पागल तो लुटारु हो गए है।मोदी नाम से भी अब ये डर रहे है।
सो इन्हे विकास भी पागल नजर आ रहा है।
पागल बेचारे!!!!!!!
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: मुर्तीपुजा क्यों जरुरी?
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एक ग्रुपपर मुर्तीपुजा के बारें मे एक सदस्य बोल रहा था।कह रहा था,मुर्तीपुजा ढोंग है,पाखंड है,अंधश्रद्धा है।
मुर्तीपुजा ढोंग,पाखंड, अंधश्रद्धा नही है।यह एक उच्च कोटी की श्रध्दा ही है।जैसे की मेरे सामने मुर्ती के रुप में साक्षात प्रभु परमात्मा ही बैठे है।और मैं उनकी सेवा कर रहा हुं।
इससे उच्च कोटी की आत्मशांती मिलती है।
और कर्ममार्ग के यह उच्चतम साधन है।
कर्म मार्ग के आगे भक्तीमार्ग जागृत होता है।मतलब प्रभु के प्रती भक्ती,प्रेम।
धिरे धिरे इसी माध्यम द्वारा ज्ञान मार्ग की जागृती होती है।मतलब सही और सच्चा आध्यात्मीक तथा आत्मज्ञान प्राप्ती में दिनबदिन प्रगती होती रहती है।
और आखिर में समाधी अवस्था यानी आज्ञाचक्र जागृती होती है।मतलब राजयोग जागृती।"सो अहम्।सो अहम्।"
मतलब मुर्तीपुजा से शुरू होनेवाला सफर ईश्वरस्वरुप बनने में मदद करता है।तो यह अंधश्रध्दा कैसे होगी?
मुर्तीपुजा में कक्षा एक में प्रवेश होता है।और पोष्ट ग्रेज्युएशन पुर्ण कराता है।मतलब सामान्य व्यक्ती भी इसी माध्यम द्वारा नर का नारायण होता है,तो यह अंधश्रद्धा कैसे होगी?
अज्ञानी तो वह है जो अभ्यास किए बगैर ही मुर्तीपुजा के बारे में गलत धारणा रखता है।
जब सामान्य व्यक्ती को असामान्य बनाने की क्षमता अगर मुर्तीपुजा में है तो मुर्तीपुजा गलत कैसे होगी?
क्या लाखों करोडों भक्तीभाव से मुर्तीपुजा करनेवाले मुर्ख हो सकते है? क्या हमारे पुर्वजों नें हमें गलत ज्ञान दिया???
बिल्कुल नही।मुर्तीपुजा का विरोध करनेवाले ही गलतविचार धारा के,अज्ञानी तथा अहंकारी हो सकते है।अथवा श्रध्दालु समाज को धिरे धिरे बहकाकर गलत रास्ते पर ले जाना ही उनका उद्दीष्ट हो सकता है।श्रध्दालु समाज को श्रध्दा से हटाकर धिरे धिरे अधर्म को बढाने की और अधर्म की ओर खिंचने की यह ऐक गहरी साजीश भी हो सकती है।अतएव सावधान।
मुर्तीपुजा करते करते जब सो अहम् जागृती हो जाती और वह व्यक्ती ईश्वरस्वरुप बन जाती है,तो उस महात्मा को बाहरी उपचारों की जरूरत ही नही होती।जैसे माला पहनना, गंध लगाना,विशिष्ट पोशाक परीधान करना।या नाम की भी कोई विशिष्ट उपाधी लगाने की भी जरूरत नही रहती।
वह पावन आत्मा तो ईश्वरी शक्ती से संपुर्ण एकरुप होही जाता है।और...।
उसके जीवन का एक ही महत्वपूर्ण मकसद होता है की,अनेक मार्गों से अनेक प्रकारों से भगवान की धरती को और ही सुंदर तथा पवित्र बनाना।
फिर चाहे वह व्यक्ती सूटबूट में ईश्वरी कार्यपुर्ती हेतु अमेरिका अंग्लैड में घुमे,या फिर भगवे कपडे पहनकर ईश्वरी कार्य बढाने के लिए भारतभ्रमण करें।या रामदास स्वामी जैसा केवल एक ही लंगोटी लगाकर घुमें।या फिर शेगांव के महान संत श्री गजानन महाराज की तरह संपुर्ण विवस्त्र होकर आजीवन ईश्वरी कार्य करता रहे।
उसे दो वक्त की रोटी भी मिले या ना मिले।उसको इसकी भी चिंता नही होती है।नाम,मान-सन्मान, धन-वैभव सभी से मुक्त होकर अपमान को भी प्रभु का प्रसाद समझकर ऐसे पवित्र आत्मे विचरण करते रहते है।बस्स...वह पुण्यात्मा तो ईश्वरी कार्य करते अपने ही मस्ती में तथा समाधी अवस्था में अष्टोप्रहर घुमता रहता है।
तो कभी एकांत में ही रहकर केवल ईश्वरी साधना ही करता रहता है।
ऐसा सामर्थ्य, शक्ती तथा कमाल मुर्तीपुजा में है।तो दोस्तों यह ढोंग कैसे हो सकता है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: ग्रुप एडमिन को खबरदार होना होगा।
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व्हाटस्अप के नित्यदिन अनेक व्हाटस्अप ग्रुप बनते है।सदस्य बढाने के लिए अनेक ग्रुपपर लिंक भेजी जाती है।इसी समय में ग्रुपपर अनेक झुटे लोग भी लिंकद्वारा आ सकते है।इसिलीए ग्रुप एडमिन को खबरदार रहने की जरूरत है।क्योंकी ग्रुपपर अनेक असामाजिक तत्व भी घुस जाते है।पुणे में ऐसे ही एक ग्रुपपर एक आतंकवादी पकडा गया है।
कौन पुरुष है कौन स्र्ती है कुछ समझ में नही आ सकता।आतंकवादी तो हिंदु नाम भी धारण कर सकते है।
अभी मैंने देखा है की अनेक हिंदुत्वावादी ग्रुपपर कुछ गलत पोष्टस् आते है कोई हिंदुत्व की खिल्ली उडाता है,तो कोई मोदीजी पर भयंकर टिका टिप्पणी करता है।समाज में संभ्रम तथा अशांती फैलाना भी इनका मकसद हो सकता है।या कोई मोबाईल नंबर द्वारा डाटा भी हैक कर सकता है।
इसिलिए ग्रुप एडमिन से मैं अनुरोध करता हुं की,एक तो ग्रुपपर परीचीत को ही एड करें।अथवा कोई सदस्य अगर गलत पोष्ट करता है तो उसे तुरंत ग्रुप से हटा दें।इसिलिए सभी के पोष्ट पर नजर रखना भी जरुरी है।मैंने अनेक ऐसे गलत पोष्ट अनेक ग्रुप एडमिन को बता दिए है।
और एक बात..हिंदुस्थान का कंट्री कोड +91 है।
मगर अनेक बार ग्रुपपर+92(जो की पाकीस्तान का कंट्रीकोड है),+97,+96,+94,+15 इस प्रकार के परदेशी कोड के भी व्यक्ती ग्रुपपर जुड जाते है।
देशविघातक शक्तिंयाँ अनेक प्रकार से कार्यरत हो रही है।इसलिए सभी ग्रुप एडमिन को मैं नम्र निवेदन करता हुं की कृपया ग्रुप के बारे में अधिक जागरूक रहे।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: मेरे हिंदु भाईयों।
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मेरे प्यारे सभी हिंदु भाईयों, अगर हमें सचमुच में हिंदुओं को न्याय दिलाना है और हम बहुसंख्यकों को हिंदुस्थान को हिंदुराष्ट्र जल्दी बनाना है तो सभी हिंदु जात-मत-पथ-पंथ भुलकर एक हो जावो।और राष्ट्रद्रोहीयों का जमकर विरोध करो,और बहिष्कार भी करो।
बस हमें इसके लिए बहुत ही छोटी छोटी बाते नित्यदिन करनी है।
अगर हमारा कोई दुकान है,ओफिस है,सलुन है,टपरी है,या और भी कोई नया व्यावसाय है तो हमें सिर्फ एक बात करनी है।
नित्यदिन माथेपर तिलक लगाना है।इससे ईश्वरी कृपा भी होगी ।और धर्मजागृती भी होगी।
दुसरी बात हमारा जहाँ व्यावसाय होता है वहाँ केवल एक भगवा ध्वज हमें लगाना है।और दुकान के बाहर,"जय श्रीराम,"का बडा फलक लगाना है।
और अंदर श्रीराम की सुंदर ,अच्छी तस्बीर लगानी है।
जहाँ हमें तिलक,भगवाँ ध्वज,जय श्रीराम अक्षर का मंत्र और रामजी की तस्बीर दिखेगी वही दुकान पर हमें हमारी नित्यदिन की वस्तुएं खरीदनी है।
जहाँ उपरी चार चिन्ह नही दिखाई देंगे वहाँ हमें बिल्कुल भी जाना नही है।
देशद्रोहीयों के खिलाफ यह शांती से क्रांती का बहुत ही शक्तीशाली हथियार है।
गलत न्युज देनेवाले चैनल और अखबारों को भी हमें ठीक इसी तरह से बहिष्कृत करना है।
इससे होगा यह की सभी हिंदु समाज जातीयवाद भुलकर भगवे के निचे एक हो जायेगा।सभी की एक वज्रमुठ होगी।आध्यात्मीक शक्ती भी बढेगी।
और राष्ट्रद्रोही गद्दारों का धंदा भी बंद हो जायेगा।फिर तो ये सभी धिरे धिरे ठिकाने पर आ जायेंगे।
वंदे मातरम् और जय श्रीराम का नारा लगाने का विरोध करनेवाले भी ठिकाने पर आ जायेंगे।
हम जो उन्हे पैसा देते है वही बंद होगा तो इनका ड्रामा खतम हो जायेगा।
और एक बात...हम जो बहुसंख्यंक शासन को कर देते है,वही पैसा सभी को समान तरीके से वितरित किया जाय,इसके लिए हम सरकार को भी बाध्य करेंगे।हमारे ही पैसों से हम अब हमारा योग्य विकास करेंगे।मतलब समझ गए ना?
हमारा पैसा..केवल हमारा विकास।
इसी तरह से देश में जबरदस्त तरीके से क्रांती होगी।और देश का खाकर देशविरोधी नारे लगाने वालों के भी होष ठिकाने पर आ जायेंगे।
है ना जबरदस्त माध्यम दोस्तों?किसीको भलाबुरा भी नही कहना,ना कोई लडाई झगडा करना।
केवल आर्थीक नाकाबंदी।आर्थीक बहिष्कार।
फिर देखो कमाल।ना रहेगा बास,ना बजेगी बांसुरी।नाही लगेंगे देशविरोधी नारे।
तो शुरु करो आज से और अभी से यह निशस्त्र मुहीम।
(1)माथे पे तिलक।
(2)भगवा ध्वज
(2)जय श्रीराम का नारा
और.......
(4)श्रीराम की सुंदर तस्बीर।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: पाप का कलंक धो डालेंगे।🕉🚩✅
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हमारे दिव्य भव्य संस्कृती पर परकीय आक्रमणकारीयों ने अनेक सालों से अन्याय अत्याचार किए और हमारी संस्कृती-धर्म को तहस नहस करने की कोशीश की।
फिर भी खुद भगवान ने बनाया आदर्श कानुन को और सत्य को कौन मिटाएगा?
फिर भी.....
मुगल,अंग्रेज जैसे परकीय आक्रमणकारीयों ने यहाँ आकर संस्कृती तबाह करने की जो कोशीश की,उसमें हमारे अनेक मंदीर तोड दिये गए।हमारा इतीहास बदलने की कोशीश की।अनेक गाँवों के,गली के,शहरों के नाम तक बदल दिये।
झुटा इतीहास घुसा दिया।
उन्होंने संस्कृती नामशेष करने का बिडा जो उठाया था,उससे अनेक अन्याय अत्याचार किए।अनेक हत्याएँ की।हमारे अनेक प्रदेशों पर अत्याचार से,निघृण से,पाप से अवैध कब्जा कर लिया।हमारे ही अनेक लोगों का परीवर्तीत किया गया।
और....
जैसे की इस पवित्र देवी देवताओं की,ऋषीमुनीयों की,साधुसंतों की,महात्माओं की,महापुरुषों की भूमि को "पाप का कलंक",सा लग गया है।
अब हमें यह सब बदलना है।बदलना ही होगा।और हम सभी एक होकर यह भयंकर पाप का कलंक ,अती ठंडे दिमाग से धो डालेंगे धो ही डालेंगे।
काम आसान नहीं है।मगर....अगर....
ईश्वरीइच्छा प्रबल हो तो....मुश्कील भी नही है।इसके लिए अब हम सभी को तैयार भी रहना है।और कार्यरत भी होना है।
इस ईश्वरी कार्य के लिए हमें संपुर्ण विश्व में मौजूद जितने भी राष्ट्र है और जो सच्चाई और अच्छाई के,सत्य के-इंन्सानीयत के रास्ते से चलने की कोशीश कर रहे है,उन सभी राष्ट्रप्रमुखों को मिलकर एक जबरदस्त शक्तीशाली, तगड़ी निती बनानी है।जो निती केवल कामयाबी ही दे सकें।
इसके लिए ईश्वरीयोजना और रचना भी शायद स्वर्ग से ही तय की गई होगी।
ईश्वरी योजना कुछ भी हो,हमें तो हमारी दिव्य मंजील की ओर बढना भी है और कामयाब भी होना है।
क्योंकी....अब हमें पाप का कलंक धो डालना ही है।और हम सभी मिलकर कार्य सफलता करके ही रहेंगे।
समय की यही माँग है।और समयचक्र भी उसी दिशा में जा रहा है।
हरी ओम।🕉🚩✅
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: अन्नपूर्णा योजना की सख्त जरुरत है।
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मोदीजी, अगला लोकसभा चुनाव आपको देश की और संस्कृती की रक्षा के लिए किसी भी हालात में जीतना अती आवश्यक है।सारी विरोधी शक्तीयाँ चाहे एक भी हो जाए,तो भी अभी अस्तित्व और अस्मीता के लिए चुनाव जीतना अती आवश्यक है।
इसके लिए अभी से जोरदार तैय्यारी करनी तो होगी ही।
गरीब,मध्यम वर्ग और अमीर वर्ग सभी को एकसाथ फायदेमंद होनेवाली अनेक योजनाएं शुरु करने की आवश्यकता है।
सभी नागरीकों को पेट का प्रश्न सबसे जादा महत्वपुर्ण होता है।अगर इसके बारे में सोचसमझकर कुछ योजनाएं बनाई जायेगी ,तो जनता जनार्दन मोदीजी, आपको सदा के लिए सर पर लेकर नाचेगी।
आर्थीक विकास तो जरुरी है ही।इसके साथ अती अत्यावश्यक चिजों का भी विचार होना चाहिए।जैसे की देहात हो या शहर---हर एक को नितदिन खाना तो लगता ही है।
इसिलीए नागरिकों के लिए सभी जगह पर,या जगह जगह पर काम दाम में भोजन,नाष्टा,चायपानी इसकी सुविधा कायमस्वरूपी की जायेगी,जैसे की---योगीजी ने उत्तरप्रदेश में शुरु की है।"अन्नपूर्णा",नाम से।ठीक इसी तरह देश के हर कोने में ऐसी सुविधा सभी नागरिकों को तुरंत उपलब्ध की जाए अथवा सभी को जी भर के खाना कम दामों में मिल जाए तो--निश्चित स्वरूप से जनता आपके पिछे बहुत विश्वास से सदा के लिए खडी हो जाएगी।
आखिर अन्नदाता को सभी हमेशा के लिए तृप्त मन से ही आशीर्वाद देते ही है।
"अन्नदाता सुखी भव",ऐसी कहावत भी है।क्योंकी,"अन्न ही पुर्णब्रम्ह",है।
तो इसिलीए तुरंत सभी देश में,"अन्नपूर्णा",योजना की सख्त जरूरत है।
यह योजना तुरंत शुरु हो जाएगी ऐसी आशा करता हुं।और यही उम्मीद भी है की,मेरा यह लेख तुरंत पढकर कार्यान्वीत भी होगा।तभी मैं मेरा लेख सार्थक हुआ ऐसा मैं समझूंगा।
हरी ओम।
🙏🕉🚩
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: चलते चलते।
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चलते चलते इधर उधर
देखता हुं तो क्या
दिखता है।
सुक्ष्म और तिक्ष्ण नजर
चारों ओर घुमाता हुं
तो क्या दिखता है???
"उनकी",संख्या बहुत
तेजी से बढ रही है।
बच्चे से बुढे तक
बहुत ही चालाक और
तिक्ष्ण कौवे की नजर वाले.......
केवल एक ही नजर में
चारों ओर का
"सही अंदाज",लेनेवाले
किसीकी छोटी हरकत
पर भी सावधान होनेवाले...
अत्यंत दक्ष और जागरूक नजर।
और"हम ....???"
हमारे "अनेक",बेवकूफी से किसीका कुछ अंदाज
लिए बगैर चलनेवाले।
आप सभी भी,
चलते चलते नजरीयाँ
घुमाके देखो।
सब पता चल जायेगा।
ऐसी निती से ही
हम सालों से हार रहे है
और....वह.....
सालों से जीत रहे है।
हम भाग रहे है और...
वो हमें भगा रहे है।
जागो।।।जागो।।।
गहरी निंद से जागो।
पाणी कंठ तक आ रहा है..........।
समय कठीण है।
निंद में रहेंगे,झगडते ही
रहेंगे तो.....
बचाने वाला कोई भी नही आयेगा।
"ईश्वरी कृपासे",एक आया है...उसकी किमत करो।
"अनमोल हिरा",हमें सदीयों बाद मिला है।
उसकी किमत जानो पहचानो और....
शक्ती बढाओ......।
आया कुछ समझ में
चलते चलते...???
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: चलते चलते।
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गहराई से सोचो,
दिमाग लगाकर सोचो,
आजादी के बाद....
कुछ लोगों ने......
जानबूझकर......
ऐसी नितीयाँ बनाई गई
की,हिंदु बहुसंख्यंक
होकर भी......
शक्तीहीन बन सके।
व्युहरचना ही ऐसी बनाई गई की....
हिंदु बहुसंख्यंकं होकर भी...."गेंद.......",
कैसी भी फेंकें...।।।
"गोल तो सिर्फ"....,
उनकी ही बनेगी और..
हिंदु हमेशा आरोपों के
कटघरे में ही खडा रहे
घिरा रहे..अत्यंत शातिर दिमाग से...
खेली गई गहरी चाल.
हिंदुओं का जगह जगह
मानसिक खच्चीकरण
मानसिक उत्पीडन।
न्याय के लिए अगर
कोई हिंदु आगे आयेगा
तो उसे जानबूझकर
गुनहगार शाबीत किया
जायेगा...समाज में..
संभ्रम फैलाया जायेगा।
"सत्य को समाप्त "करने की निंदनीय और
घृणास्पद"कु-निती।"
अती भयंकर षड्यंत्र।
इसके लिए"जगह जगह"
खास आदमी बिखेर दिये गए थे।
इसीलीए आज भी हमे सत्ता मिलने पर भी
उनकी"शातीर"योजनाएं
हमें परेशान कर रही है।
इसिलीए.....
केवल और केवल....
"व्यवस्था परीवर्तन",ही
हमें योग्य न्याय दे सकता है।
जब तक व्यवस्था परीवर्तन नही होता
तब तक हमें और
"सत्य",को योग्य न्याय
नही मिलता।
तोबा..तोबा..तोबा..
हमारी संस्कृती, धर्म
समाप्त करने के लिए
इतनी गहरी चाल???
मगर सत्य को कौन मिटायेगा???
आखिर सत्य का रखवाला खुद भगवान ही होता है।
तो...सत्य को कौन मिटायेगा????
मिट जायेगी उनकी हस्तीयाँ जो.....
सत्य को डुबानेपर
तुले हुए थे।
मिटा देगा खुद भगवान उनका नामोनिशान जो.
सत्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
सत्य परेशान जरूर था
मगर पराभुत नही था।
और...भविष्य में भी
सत्य कभी भी पराभुत
नही होगा।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:05 pm] Papa: *सावधान आपके अन्न और दवाओं में साइनाइड प्राणघातक जहर मिलाया जा रहा है*
चौंकिए मत ..यह बिलकुल सत्य है , आजकल आपने देखा होगा के एक पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति कुछ काम करते करते अचानक मर जाता है और मृत्यु का कारण पता नहीं चलता , ऐसी घटनाएं आम हो रही है ।
आइये देखते है ऐसे खाद्य पदार्थ और दवाएं जिसमे साइनाइड विष मिलाया जा रहा है ।
1) नमक .. आपके नमक के पैकेट को ध्यान से देखिये यदि उस पर crystal modifier या E-536 लिखा हुआ है तो नमक में *पोटेशियम फेरो साइनाइड* मिला हुआ है जिसके एक केमिकल अनु में 6 साइनाइड के परमाणु है जिसका केमिकल फार्मूला (K4Fe(CN)6) है .
यद्यपि यह अल्प मात्रा में होता है जैसे ही यह हमारे पेट में पहुँचता है उदर में उपस्थित पाचक अम्ल hcl से रिएक्ट कर के पोटेशियम और फेरोसाईनाइड के पोसिटिव और नेगेटिव आयन बनाता है
और फेरोसाइनाइड पेट में उत्पन्न hcl से रिएक्ट कर के फेर्रस क्लोराइड और हाइड्रोजन साइनाइड बना सकता है जो अत्यंत जहरीला विष है
इस विष को डीटॅक्सीफाई या प्रभावहीन बनाने के लिए लिवर पर अत्यधिक दबाव पडता है
प्रतिदिन इस धीमे जहर मिले हुए नमक खाने से कुछ महीनो या वर्षो में आप मृत्यु के निकट पहुँच सकते है
2) विटामिन बी सबसे ज्यादा खाया जाने वाला विटामिन है इस बी काम्प्लेक्स विटामिन में एक जहरीला पदार्थ है साईनाकोबलामिन या b12
(cyanocobalamin) ये आपके पेट या खून में पहुँच कर साइनाइड के अनु छोड़ता है ..सावधान यदि आपके बी काम्प्लेक्स कैप्सूल टैबलेट या इंजेक्शन में b12 सैनकोबाल्मिन है तो मत लीजिये चाहे डॉक्टर कितना भी आश्वासन दे ।
मार्किट में 99% बी काम्प्लेक्स विटामिन में बी12 cyanocobalamin होता है
केवल 1 % दावा कम्पनियाँ ही *methylcobalamin* b12 बनाती है जो खाने में सेफ है सुरक्षित है , इसीलिए विटामिन बी खरीदते समय केवल methylcobalamin b12 युक्त ही ख़रीदे
3) पिछले महीने मार्च 2017 में सरकार ने नया फरमान जारी किया है अब गेहूँ के आटे जैसे आशीर्वाद पिल्सबरी पतंजलि आदि में साइनाइड मिला हुआ b12 cyanocobalamin विटामिन डालना अनिवार्य कर दिया है (फोर्टिफाइड आटा)
सरकार ने सुरक्षित b12 methylcobalamin को प्रस्तावित क्यों नहीं किया ?
क्या सरकार को नहीं मालूम के गर्म तवे पर गेहू की रोटियाँ सेकने पर गर्मी से विटामिन बी पूरी तरह नष्ट हो जाता है और बचते है सिर्फ जहरीले साइनाइड के अनु जो गर्मी से नष्ट नहीं होते ..तो आटे के फोर्टीफिकेशन का क्या फायदा और उपयोग है ?
... या सरकार जानबूझ कर अन्न पदार्थो में जहर मिला रही है ? चौकिये मत सरकार पर छुपी हुई अंतरराष्ट्रीय वैश्विक दानवी सरकार (hidden world government) का दबाव है भारत की जनसँख्या कम करने के लिए ये एक कोवर्ट डीपापुलेशन प्रोग्राम है जिसे विस्तारपूर्वक बताऊंगा पढ़ कर होश उड़ जाएंगे , आइये देखते है कुछ और डी-पापुलेशन केमिकल पदार्थ
*आयोडीन नमक विश्व का सबसे बड़ा जंनसंख्याविहिनिकरण (डीपापुलेशन) षड्यंत्र*
आज से लगभग 30-40 साल पहले जनता को आयोडीन नमक के बारे में बिलकुल पता नहीं था , जनता में आयोडीन की कमी नहीं थी , यदि मानव इतिहास देखे जीसस क्राइस्ट काल या उससे भी पहले पाँच हज़ार वर्ष पूर्व महाभारत या दस लाख वर्ष पूर्व रामायण पुराण आदि में एक भी उदहारण प्राप्त नहीं होता जहां आयोडीन के कमी के लक्षण दिखाई दे , सभी पूर्ण स्वस्थ थे किसी को भी आयोडीन की कमी नहीं थी ।
अचानक ही लागभाग 30 साल पहले सरकार ने लाखों करोडो का टीवी और समाचार पत्र में विज्ञापन दे दे कर ब्रेनवाश शुरू किया के भारत में आयोडीन की कमी है बच्चो के मानसिक विकास के लिए आयोडीन युक्त नमक ही खाये और भोली भारत की जनता ने इसे आदर्श मान लिया , तब भारत में बर्थ रेट 40 प्रति 1000 था
यही प्रोपेगंडा पकिस्तान में किया गया लेकिन पाकिस्तानी जनता होशियार थी उसने सरकारी आयोडीन नमक को नही ख़रीदा और बाजार में खुला समुद्री नमक ही खरीदने लगी जिसमे आयोडीन जहर नहीं मिलाया गया था, नतीजा पापिस्तान में सरकार द्वारा प्रायोजित आयोडीन नमक प्रोग्राम फेल हो गया ।
आज तीस वर्ष बाद भारत में आयोडीन नमक के कारण बर्थ रेट लगभग 8 प्रति 1000 है
ठीक है जनसँख्या कम होनी चाहिए लकिन ये तरीका ??
भारत में आयोडीन की बिलकुल कमी नहीं है और इसकी पूर्ति दूध और शाखदार हरी सब्जियों से पूरी हो जाती है
आवश्यकता से अधिक आयोडीन खाने से कंठ में स्थित थाइरॉइड ग्रंथि अधिक हार्मोन बनाती है जिससे स्त्रियों में बाँझपन pco अनियमित मासिक स्राव इत्यादि रोग होते है
*आज भारत में 90% स्त्रियों में बाँझपन और बच्चे नहीं होने का कारण आयोडीन नमक से उत्पन्न थाइरॉयड समस्या है*
वहीँ पुरुषों में भी आयोडीन नमक से hyperthyroidism के कारण उच्च रक्तचाप मानसिक तनाव अनिद्रा ह्रदय में तेज़ धड़कन नपुंसकता आदि रोग होते है आज भारत की जनता को गिनी पिग बना कर आयोडीन नमक के एक्सपरमेन्ट के कारण कई परिवारों के अस्तित्व समाप्त हो गए है
जनता अब जागरूक हो रही है और धीरे धीरे सब पता चल रहा है इसीलिए अब सरकार सारा दोष टाटा कंपनी पर डाल रही है के टाटा कम्पनी ने सरकार पर दबाव बना कर टाटा नमक में आयोडीन जहर मिलाया
वास्तव में इसे एक फाल्स फ्लैग आपरेशन कहते है जिससे जनता का गुस्सा सरकार से हट कर टाटा पर जाए और जनता टाटा को ही दोषी समझे लेकिन अब सत्य का पता चल गया है सरकार ने आयोडीन जहर के एक्सपरमेन्ट के लिए टाटा को बलि का बकरा बनाया ।
*यदि भारत में आयोडीन नमक (इसका विकल्प सादा खुला बिकने वाला समुद्री नमक और सेन्धा नमक है) , रिफाइंड तेल (इसका विकल्प मूंगफली सरसो जैतून तिल आदि खरीद कर तेल निकलवाए) फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट , अंग्रेजी दर्दनिवारक दवाएं जैसे ब्रूफिन डिक्लोफेनेक असेक्लोफेनेक, आटे और ब्रेड में ब्रोमाइड ,पेप्सी कोला आदि कूलड्रिंक ,पानी में क्लोरीन ब्लीच (इसका विकल्प ओज़ोन है)और एंडोसल्फान जैसे कीटनाशक बन्द हो गए तो भारत में कैंसर ह्रदय थाइरॉइड और किडनी रोग ख़त्म और भारत के 80-90% अस्पताल बन्द हो जाएंगे ..ओउम*
अब आते है छुपी हुई विश्व दानव सरकार की ओर विश्व के लगभग सभी देश इस परम नीच hidden world government के कठपुतली मात्र है और उसके इशारो पर नाचते है , विश्व में कौनसे देश में कौन प्रधानमंत्री या प्रेसिडेंट होगा ये विश्व सरकार ही तय करती है सारे देशो की अर्थ व्यवस्था वर्ल्ड बैंक आईएमएफ वीसा मास्टर कार्ड आदि इन्ही के द्वारा नियंत्रित की जा रही है इसका एशिया का हेडक्वार्टर लन्दन और विश्व का मुख्यालय वाशिंगटन है इस संघटन का नाम मैं नहीं बताना चाहूंगा आप ही खोज लीजिये ।
अन्य डी-पापुलेशन केमिकल है
1) फ्लोराइड जो टूथपेस्ट में मिलाया जाता है , केवल बिना फ्लोराइड के टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल कीजिये
2) ओरल पोलियो वेक्सीन जिसमे sv40 नामक कैन्सर उत्पन्न करने वाले वाइरस को मिलाया गया है (गूगल कीजिये) पोलियो की दो बुँदे अमृत की नहीं दो बुँदे गर्भाशय कैन्सर की जो पोलियो ड्राप्स में मिलाया गया है , इसका विकल्प यह है के आप घर घर जा कर फ्री में who unicef के पोलियो ड्राप्स बिलकुल न ले जिसमे sv40 वायरस मिलाया गया है , बल्कि उन कम्पनियों के पोलियो ड्राप्स खरीद कर पिलाए जिनका who और unicef से कोई सबन्ध नहीं है !
3) टेटनस टैक्सओइड वेक्सीन (टीटी इंजेक्शन) में स्त्रियों को बाँझ बनाने की दवा की मिलावट .. अपनी लाडली बेटियों को कभी भी टीटी का इंजेक्शन न दिलाये शायद वे जिंदगी में कभी माँ न बन पायेगी क्योकि उसमे anti -HCG antibody की मिलावट की गयी है , विश्वास नहीं हो रहा है tetanus HCG Kenya लिख कर गूगल कीजिये अभी तो केन्या की रिपोर्ट आई है लेकिन भारत में बीस पच्चीस साल पहले यह प्रयोग हो चुका है और अब भी जारी है नीचे दिए हुए लिंक देखिये
1) https://rationalcatholicblog.
2) https://www.lifesitenews.com/…
क्या आपने कभी गौर किया है ज़रा सी मामूली चोट खरोच पर आपको बार बार टीटी का इंजेक्शन लगाया जाता है ? जबकि दो तीन बार टीटी इंजेक्शन देने से जिंदगी भर टिटेनस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो जाती है (lifetime immunity) और फिर कभी टीटी की कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ती ...
मित्रो साँसे थाम के इंतज़ार किजिए , जल्द ही एक ऐसा उपाय के बारे में लिख रहा हूँ जिससे भारत विश्व के नंबर वन गोमाता के माँस के निर्यातक के पोज़िशन से शून्य गौमांस निर्यातक बन जाएगा अर्थात भारत में गौवध ही नहीं होगा , गौमाता को काटने के लिए छूने से पहले म्लेच्छ हज़ार बार सोंचेगा.
राजीव भाई के विडियो पाने के लिए link पर click कर चैनल subscribe करें ..
LINK https://goo.gl/wUYVXe
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[23/01 2:06 pm] Papa: मुझे सवाल का जवाब चाहीए।
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मैं एक जागरूक भारतीय नागरिक हुं।
मुझे भारतीय संवीधन ने अन्याय के विरुद्ध
लडने का मौलीक
अधिकार दिया है।
इस अधिकार से मैं
यह पुछना चाहता हुं की
जब....कश्मीर में हिंदुओं के साथ बर्बरता
पुर्वक अत्याचार किये
जा रहे थे,हिंदुओं की
हत्याएं हो रही थी...
हिंदुओं को भगाया जा
रहा था तब...
देश पर अनेक सालों तक राज्य करनेवाली
काँग्रेस कहाँ थी???
अत्याचार के खिलाफ काँग्रेस ने कदम उठाकर
हिंदुओं का रक्षण क्यों
नही किया???
क्या आगे भी काँग्रेस
देश में किसी राज्य में
कश्मीर जैसी हालात
उत्पन्न हो गये तो..
काँग्रेस फिर से मौन और शांत रहकर
दूरसे तमाशा देखेगी??
या हिंदुओं का रक्षण करेगी???
मुझे उत्तर चाहिए।
ये मेरा हक है।
और अगर कश्मीर जैसी बुरी हालत पुरे
देश में हिंदुओं की
काँग्रेस करना चाहती है
तो...काँग्रेस को
हिंदुओं से मत माँगने का
अधिकार भी नही है।
हिंदुओं सावधान हो जाओ।
कश्मीर में जो हमारी रक्षा न कर सके
वो देश में हमारी रक्षा कैसे करेंगे।
सच या झुट आप ही बोलो।
और अगर सच है तो
मेरा कहना मानो।
काँग्रेस मुक्त भारत।
मेरा कहना आपको गलत लगता है तो
कश्मीर जैसी बुरी हालत देश की देखने को तैय्यार रहो।जानो,पहचानो।
जो हमें कश्मीर में नही बचा सके वो हमें देश में
सुरक्षीत रखेंगे इसपर
कैसे भरौसा किया
जा सकता है।
जाग हिंदुस्थानी जाग।
बात कडवी है मगर..
सौ प्रतीशत सच्ची भी है
जागो प्यारे जागो।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:06 pm] Papa: महाराष्ट्रात आता 55 वर्ष पुर्ण असणाऱ्या शेतकऱ्यांना पेन्शन म्हणून 3000 रुपये मिळणार आहेत. सोबत जी.आर. देत आहे.
आपण आपल्या ओळखीच्या शेतकऱ्यांना माहीती द्याल ही अपेक्षा व विनंती 🙏🏻
[23/01 2:06 pm] Papa: कश्मीर माँगोगे तो चिर देंगे।
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भाईयों,"कश्मीर माँगोगे तो चिर देंगे।"
यह वाक्य मेरा नही है।परम वंदनीय अटलजी बाजपेई का है।अब देखो तो जरा.....🤔।
कश्मीर को आजादी कौन माँग रहा है???
पाकीस्तानी या कश्मीरी?नही भाईयों, हम हिंदुओं को मत माँगकर हिंदुस्थान पर राज करने वाला चिद-बर माँग रहा है कश्मीर के लिए आजादी।अब बाजपेई जी की भाषा में इसको क्या उत्तर देना चाहिए?
हमारा ही खाकर हमारी ही थालीमें छेद करनेवाले को इस भुमी पर रहने का भी अधिकार नही है।इसे तो पाकीस्तान भेजना होगा।
नही तो बाजपेई जी की भाषा समझाने होगी इसे।अरे हमारी भुमी तुझ जैसे निकम्मे से कहनेपर हम छोड देंगे?
नमकहरामी।।।
भारतभुमी हमें केवल भुमी या जमीन का तुकडा नही है।ये तो देवभूमि है।इसके तुकडे होना तो दूर उल्टा अब हम पाकीस्तानी भूमी को भी इस देवभूमि को जोडेंगे।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:06 pm] Papa: रोहीतजी, ये शेरनी नही,ये तो भेडिया है।
हिंदु मुक्त कश्मीर, हिंदु मुक्त बंगाल, हिंदु मुक्त केरल और हिंदु मुक्त भारत बनाने की इसकी गहरी साजीश है।और दुर्भाग्य......
गद्दार हिंदु इसका साथ दे रहे है।
और....
मोदीजी का विरोध कर रहे है.....।
अब आगे........???
[23/01 2:06 pm] Papa: किस उद्दैश्य से ग्रुप बनाया है।
सिर्फ गायत्री माता का महीमा या फिर आध्यात्मीक लेखन?
मुझे मेरे सद्गुरु ने सपनों में गायत्री मंत्र दिया है।
विश्व-विजेता,.....
सनातन धर्म यही जीवन का अंतिम उद्दैश्य है।
कृपया पुरी जानकारी देना।
🙏🕉🚩💐💐💐
[23/01 2:06 pm] Papa: 🕉 श्री गणेश ऋण मुक्ति स्तोत्र ..🕉🙏
अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए हर व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी कर्ज लेना ही पड़ता है। कई बार व्यक्ति कर्ज को जल्दी चुकाना चाहता है, लेकिन कर्ज का अंत ही नहीं होता है। ऐसे समय में ऋणमोचन हेतु 'ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र' का निरंतर पाठ करने से कर्ज शीघ्र ही चुकता होता है, साथ ही धन पाने के अन्य कई रास्ते भी निकल आते हैं। आइए पढ़ें...
ध्यान..
ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्।
ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणामि देवम्।।
।।मूल-पाठ।।
सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजित: फल-सिद्धए।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
हिरण्य-कश्यप्वादीनां वधार्थे विष्णुनार्चित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
महिषस्य वधे देव्या गण-नाथ: प्रपुजित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छवि-सिद्धए।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं पूजितो गण-नायक:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।।
पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजित:।
सदैव पार्वती-पुत्र: ऋण-नाशं करोतु मे।l
इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं तीव्र-दारिद्र्य-नाशनं,
एक-वारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं सामहित:।
दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेर-समतां व्रजेत्।।
🔱⚜🚩🕉🙇🕉🚩⚜🔱
[23/01 2:06 pm] Papa: 2019 के बाद का हिंदुस्थान।
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भारी बहुमतों से मोदीजी और उनकी पुरी टीम लोकसभा चुनाव जीत गई है।अब लोकसभा और राज्यसभा में भी पुरा बहुमत है।राष्ट्रपती भी भाजपा के ही है।
तो अब........
सारे नामुमकीन काम मुमकीन हो रहे है।राष्ट्रभक्ती की जागृत समाज द्वारा लहर सी आ गई है।
सबसे पहले का वार,भयंकर क्रुर दुश्मन पाकीस्तान पर किया जायेगा।पाकीस्तान की ऐसी दुर्दशा होगी की पुछो मत।साथ में चिन का भी सिरदर्द हमेशा के लिए बंद हो जायेगा।
और.... विश्व पटल पर हिंदुस्थान एक जबरदस्त शक्तीशाली, सामर्थ्यसंपन्न राष्ट्र बन जायेगा।
हिंदुस्थान में रहकर पाकीस्तान जींदाबाद के नारे लगाने वाले ,हिंदुस्थान जींदाबाद के नारे लगाएंगे।वंन्दे मातरम् और जय हिंद बोलेंगे।
राष्ट्रद्रदोही, गद्दार चैनल और शक्तिंयाँ समाप्त।भारत तेरे तुकडे होंगे बोलने वाले-नेस्तनाबुत।
पाकीस्तान का सिरदर्द सदा के लिए बंद।
देश सही अर्थ से"रामराज्य",की ओर।
चंगु,छंगु,मंगु- आलु,भालु,कालु की गंदी राजनीति बंद।
कश्मीर की धारा370 समाप्त।केरल,पश्चीम बंगाल और भी अल्पसंख्यक बन रहे हिंदुराज्यों में हिंदुओं की,मंदीरों की बढती संख्या।
भ्रष्टाचार, अत्याचार,अन्याय समाप्त।
भाईयों, कैसा लगता है आपको ऐसा बेहतरीन नजारा देखने में?
दिल को,आत्मा को शांती मिलती है ना?
जी हाँ मेरे प्यारे भाईयों।जरुर ऐसा होगा।होकर रहेगा।
मगर..........
इसके लिए.........
आज से........
अभी से.......
हर पल......
आप सभी को.......
मोदीजी की.......
शक्ती हर तरफ से,हर प्रयास से,हर रास्तों से बढानी ही होगी।
अगर आपको और आपके अगली पिढी को आनंद से रहना है तो- ऐसा होना अनिर्वार्य है।और होना ही चाहिए।और हम सब बनाके ही रहेंगे।
देश बचाने के लिए, धर्म बचाने के लिए, संस्कृती बचाने के लिए, संस्कार बचाने के लिए, आध्यात्म बचाने के लिए, मंदीर बचाने के लिए, इंन्सानीयत बचाने के लिए.....
ईश्वरी सिध्दांतो की जीत करने के लिए.....
असुरी शक्तीयों का नाश करने के लिए....
भगवान को आनंदीत करने के लिए.....
यह सब होना अती आवश्यक है।
मतभेद भुल जाव।एक हो जाव।शक्ती बढाव।ईश्वरी शक्ती की जीत करो।असुरी शक्तीयों की सदा के लिए हार करो।
उठो,जागृत हो,सावधान हो।कदम कदम बढाते चलो।
हरी ओम।
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[23/01 2:06 pm] Papa: चलते चलते।
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ना मुझे धन चाहिए,
ना मुझे मान चाहिए।
ना मुझे ऐशो आराम चाहीए,
ना संपत्ती चाहिए।
ना हार तुरे ना माला चाहीए,
ना मान सन्मान चाहिए।
ना सुख चाहिए ना दुख।
दोस्तों,मुझे तो
सदा के लिए
"सत्य की जीत चाहिए।"
मुझे तो धर्म की जीत चाहिए।
मुझे तो इंन्सानीयत और.....
ईश्वरी कानुन की जीत
चाहिए।
मुझे तो संस्कृती, संस्कार, आध्यात्म
और मंदीरों की रक्षा चाहिए।
और भी मुझे चाहिए।
मुझे चाहिए असत्य की
सदा के लिए....हार।
असुरी शक्तीयों की हार।
दुसरों का जीना हराम करने वालों की
सदा के लिए करारी हार
भगवान की पृथ्वी पर
ईश्वर की धरती पर
हाहाकार मचाने वाले
दुष्ट,क्रुर, महापातकी
हैवानीयत से पाप का
आतंक फैलाने वालों की
सदा के लिए हार।
बस्स....इतना सा मेरा
छोटासा मेरा सपना है।
जीसे मैं पुरा करके ही
रहुंगा।
यही जीवन का मकसद है मेरा।
जो मैं मेरा मकसद
पुरा करके ही रहुंगा।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:06 pm] Papa: 💐🕉🚩परमपुज्य शामजी महाराज जी का प्रशंसनीय कार्य।💐🕉🚩
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परम वंन्दनीय श्री बालासाहब ठाकरे जी ने बहुत ही आनंद से जिन्हे" हिंदुभुषण",पदवी देकर गौरवान्वीत किया था, ऐसे महान व्यक्तीत्व को मौरीशस जैसे सनातन धर्म अभिमानी देश ने और वहाँ के हिंदु धर्म प्रेमी माँरीशस के,हिंदु हाऊस के प्रेसिडेंट श्री.विरेंद्र रामधुन जी,और देवेंद्र साली जी ने शामजी महाराज जी के हिंदु कार्य को माँरीशस में बढावा देने के लिए प्रेमपूर्वक आमंत्रित किया था।
संयोगवश वहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सन्माननीय श्री योगीजी भी तीन दिन के दौरे पर थे।
ईश्वरी कृपा से शामजी महाराज जी और योगीजी की माँरीशस में आननंदाई भेंट हो गई।योगीजी ने हर्षोल्लास के साथ शामजी महाराज जी के कार्यों का बहुत ही गौरव किया।
हिंदु धर्म विश्व के कोने कोने में पहुंच सके,इसिलीए महाराष्ट्र आलंदी के महान विष्णु अवतारी पुरुष,"संत श्री ज्ञानेश्वर जी"ने सदीयों पहले पसायदान लिखा था।
उसमें ज्ञानेश्वर महाराज जी ने लिखा था,"विश्व-स्वधर्म-सुर्ये पाहो।"
मतलब जहाँ भी सुरज की किरण पहुंचेगी वहाँ पर स्वधर्म मतलब सनातन धर्म, मतलब हिंदु धर्म का ही भगवा मतलब भगवान का राज्य हो।मतलब ईश्वरी राज्य विश्व के कोने कोने में पहुंचे।
संयोगवश शामजी महाराज जी की साधना भी आलंदी में ही हुई हैं।और......
यह लेख भी मैं आलंदी के ही वास्तव्य में लिख रहा हूं।
शायद,"विश्व विजेता-हिंदु धर्म।"बनने का योग ईश्वरी कृपा से नजदीक ही आया है।
दुसरा संयोग यह भी है की,मैंने जो,"विश्व विजेता-हिंदु धर्म।"ग्रुप बनाया है उसपर भी अनेक महात्माएं तथा पुण्यपुरुष देश विदेश में से है,उसपर भी शामजी महाराज भी मौजूद है।
अब ईश्वर को यही प्रार्थना करता हुं की,मेरे ग्रुप के सभी सन्माननीय सदस्य और शामजी महाराज भी विश्व के हर कोनें में पहुंचकर, "सत्य सनातन",की "भगवान का भगवा ध्वज",विश्व के हर कोने में,विश्व के कोने कोने में जरूर पहुंचायेगा।
शामजी महाराज जी को माँरीशस के "हिंदवी",कार्य के लिए बहुत बधाई।अभिंनदन।
आपके हाथों से ऐसा ही भगवे का महान ईश्वरी कार्य संपुर्ण विश्व में पहुंचे और खुद"विष्णु भगवान",इस कार्य के लिए आपको शक्ती,चेतना, प्रेरणा तथा यश दें।
माँरीशस ने जो शामजी महाराज जी को आत्मीय प्रेम दिया, उन सभी पुण्यात्माओं को प्रेमपूर्वक प्रणाम।इसके लिए सभी पदाधिकारियों का अती प्रसन्नतापूर्वक मन से प्रेम से आभार।
शामजी महाराज जी जैसे पुण्यात्माएँ इस पावन भुमी पर करोंडो की संख्या में भगवान पैदा करें।और संपूर्ण विश्व में पाप का,अधर्म का,आतंक का कलंक मिटाकर संपुर्ण पृथ्वी पर ईश्वरी राज्य की स्थापना हो,ऐसा परम दयालु विष्णुजी को प्रेमभरा मनोगत।
"विश्व-स्वधर्म-सुर्ये-पाहो।"
हरी ओम।🙏🕉🚩💐🌞🌞🌞
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:06 pm] Papa: 💐🕉🚩परमपुज्य
हिंदूभूषण श्याममहाराज जी का प्रशंसनीय कार्य।💐🕉🚩
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परम वंन्दनीय हिंदूहृदयसम्राट श्री बालासाहब ठाकरे जी ने बहुत ही आनंद से जिन्हे" हिंदुभुषण",पदवी देकर गौरवान्वीत किया था, ऐसे महान व्यक्तीत्व को मॉरीशस जैसे सनातन धर्म अभिमानी देश ने और वहाँ के हिंदु धर्म प्रेमी माँरीशस के,हिंदु हाऊस के प्रेसिडेंट श्री.विरेंद्र रामधुन जी,और देवेंद्र साली जी ने श्यामजी महाराज जी के हिंदु कार्य को माँरीशस में बढावा देने के लिए प्रेमपूर्वक आमंत्रित किया है।
संयोगवश वहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सन्माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी भी तीन दिन के दौरे पर थे।
ईश्वरी कृपा से श्यामजी महाराज जी और योगीजी की माँरीशस में आननंदाई भेंट हो गई।योगीजी ने हर्षोल्लास के साथ श्यामजी महाराज जी के कार्यों का बहुत ही गौरव किया।
हिंदु धर्म विश्व के कोने कोने में पहुंच सके,इसिलीए महाराष्ट्र आलंदी के महान विष्णु अवतारी पुरुष,"संत श्री ज्ञानेश्वर जी"ने सदीयों पहले पसायदान लिखा था।
उसमें ज्ञानेश्वर महाराज जी ने लिखा था,"विश्व-स्वधर्म-सुर्ये पाहो।"
मतलब जहाँ भी सुरज की किरण पहुंचेगी वहाँ पर स्वधर्म मतलब सनातन धर्म, मतलब हिंदु धर्म का ही भगवा मतलब भगवान का राज्य हो।मतलब ईश्वरी राज्य विश्व के कोने कोने में पहुंचे।
संयोगवश श्यामजी महाराज जी की साधना भी आलंदी में ही हुई हैं।और......
यह लेख भी मैं आलंदी के ही वास्तव्य में लिख रहा हूं।
शायद,"विश्व विजेता-हिंदु धर्म।"बनने का योग ईश्वरी कृपा से नजदीक ही आया है।
दुसरा संयोग यह भी है की,मैंने जो,"विश्व विजेता-हिंदु धर्म।"ग्रुप बनाया है उसपर भी अनेक महात्माएं तथा पुण्यपुरुष देश विदेश में से है,उसपर भी श्यामजी महाराज भी मौजूद है।
अब ईश्वर को यही प्रार्थना करता हुं की,मेरे ग्रुप के सभी सन्माननीय सदस्य और श्यामजी महाराज भी विश्व के हर कोनें में पहुंचकर, "सत्य सनातन",की "भगवान का भगवा ध्वज",विश्व के हर कोने में,विश्व के कोने कोने में जरूर पहुंचायेगा।
श्यामजी महाराज जी को माँरीशस के "हिंदवी",कार्य के लिए बहुत बधाई।अभिंनदन।
आपके हाथों से ऐसा ही भगवे का महान ईश्वरी कार्य संपुर्ण विश्व में पहुंचे और खुद"कृष्ण भगवान",इस कार्य के लिए आपको शक्ती,चेतना, प्रेरणा तथा यश दें।वर्तमान में महाराजश्री भगवान श्रीकृष्ण की नगरी श्री धाम वृंदावन में रहेकर देश विदेश में हिंदुत्व का कार्य निरंतर कर रहे है।हिंदूस्थानीओंका संपूर्ण स्वदेशी चैनल सुदर्शन न्यूज से भी महाराजजी जुड़े है।प्रखर राष्ट्रवादी पत्रकार सुरेश चव्हाणके जी के साथ रहेकर राष्ट्रनिर्माण का अपना कर्तव्य भी निभा रहे है।
माँरीशस ने जो श्यामजी महाराज जी को आत्मीय प्रेम दिया, उन सभी पुण्यात्माओं को प्रेमपूर्वक प्रणाम।इसके लिए सभी पदाधिकारियों का अती प्रसन्नतापूर्वक मन से प्रेम से आभार।
श्यामजी महाराज जी जैसे पुण्यात्माएँ इस पावन भुमी पर करोंडो की संख्या में भगवान पैदा करें।और संपूर्ण विश्व में पाप का,अधर्म का,आतंक का कलंक मिटाकर संपुर्ण पृथ्वी पर ईश्वरी राज्य की स्थापना हो,ऐसा परम दयालु विष्णुजी को प्रेमभरा मनोगत।
"विश्व-स्वधर्म-सुर्ये-पाहो।"
हरी ओम।🙏🕉🚩💐🌞🌞🌞
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:06 pm] Papa: सर जी आपका मै आपका बहुत आभारी हूँ। हम भलेही विदेश में कार्य कर रहे होंगे लेकिन आप भी अपनी कलम के द्वारा राष्ट्र जागरण का महान कार्य कर रहे हो।आपको बहुत साधुवाद
💐💐💐💐💐💐💐
[23/01 2:07 pm] Papa: मेरे प्यारे सभी दोस्तों,
मेरे सद्गुरु की परम कृपासे और ईश्वरी कृपा से मैंने हिंदु संस्कृती को विश्व गुरु बनाने के ईश्वरी कार्य के लिए, मैंने लगभग बिस सालों से जादा खडतर तपश्चर्या की है।और मैं मेरा मकसद पुरा करके ही रहुंगा।
मेरे दादाजी(विश्वनाथ नारायण महाजन)ने,(मेरे आण्णा)मुझे उनके स्वर्ग जाने के बाद,अर्थात देह त्यागने बाद भी मुझे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से सदैव सहायता की है।
सपनों मुझे उन्होंने गायत्री मंत्र दिया था।जिसका मैं आजतक पाँच करोड ईक्कीस लक्ष जाप कर चुका हुं।
वैसे तो बचपन से ही मुझे सपनों में अनेक देवी देवता दर्शन देते है।आज भी यही सिलसिला चालु है।मेरी माँ ने भी मुझे मेरे बचपन में उसके मृत्यु के बाद भी,देह धारण करके दर्शन दिये थे।
मेरे दादाजी के गुरु ने मुझे सबसे पहले कुलदेवता का मंत्र सपनों में ही दिया था।जिसका एक करोड जाप मैं कर चुका हुं।सोनारी(परांडा) के कालभैरवनाथ मेरे कुलदेवता है ,जो की बहुत जागृत है।मेरे हाथों पर उन्होने धन दिया था।तभी से मेरी आर्थीक समस्या सदा के लिए समाप्त हो गई।
जागृत हनुमान(भानसगांव),जागृत नारसिंव्ह(कोळे नृसिंहपुर)ऐसे अनेक देवताओं ने मुझे पहले ही सपनों में दर्शन दिये थे।कुछ कारण वश इन देवतांओं के मुझे प्रत्यक्ष दर्शन हो गए।
शेगांव के गजानन महाराज जी का भी मैंनें,"गण गण गणात बोते",यह मंत्र दो कोटी जाप पुरा किया है।गजानन महाराज जी ने मुझे,मेरे सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया है की,"विश्व में तु बहुत ही बडा नाम कमायेगा।"
सज्जनगड के रामदास स्वामीजी ने भी,उनके शिष्य, कल्याण स्वामीजी को मेरे सर पर हाथ रखने को कहा था।उनका हाथ सरपर रखने से ही,मैं बहुत देर तक घुमता था।(दृष्टांत)।
मेरे गाँव की ग्रामदेवता, खंडोबा की पत्नी मुझे मेरे गले में रुद्राक्ष माला डाल रही थी।मगर खंडोबा म्हाळसा को बोला,"उसे रुद्राक्ष नही तुलसी माला चाहिए।यह विष्णु है।"ऐसा कहकर खंडोबा ने मेरे गले में तुलसी माला डाली थी।
कोल्हापूर की माता महालक्ष्मी जी का भी मैंने दो कोटी जाप पुरा किया है।तब माँ ने मुझे मेरे घर रहने को आने का,मेरे हाथ में हाथ देकर वचन दिया था।
माँ मुझे बोली थी,"क्यों चिंता करता है?क्यों रोता है?क्यों परेशान होता है?अब मैं तेरे घर रहने को आई हुं।"बहुत ही मंजुल स्वर में मुझे मेरी माँ बोली।
और भी अनेक देवी देवताओं के जाप मैंने किए है।अत्यंत खडतर जीवन बिताकर मैंने मेरी तपस्या पुरी की है।लगभग तेरा कोटी जाप करके,अनेक देवी देवताओं के,सिद्ध पुरुषों के आशीर्वाद प्राप्त कर चुका हुं।
अब समय आ गया है,प्रत्यक्ष फलप्राप्ती का,और ईश्वरी विश्व कार्य आरंभ का।
विश्व परीवर्तन और ईश्वरी राज्य की स्थापना।सत्य सनातन की विश्व पटल पर जीत।
और मैं मेरे मकसद में कामयाब होकर ही रहुंगा।
यह लेख केवल,"माय मंदीर",के श्रध्दालु भक्तों को समर्पीत है।
क्योंकी,"माय मंदीर",संस्कृती वाहक भी है और संस्कृती रक्षक भी है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:07 pm] Papa: दिव्यत्व की कीमत।
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शालीनता से,सछभी को
हाथ जोडके नम्रतापूर्वक
प्रणाम- नमस्कार करके
सभी के दिल हम सभी
जीत सकते है।
क्योंकी, प्रेम- सच्चाई
अच्छाई में बहुत शक्ती
होती है।
सभी के दिल हम प्रेमपूर्वक जीत सकते है
और उसके आत्मा को भी परमानंद और...
परम शांती दे सकते है
बहुत शक्ती होती है
नम्रता और शालीनता में।
पशुपक्षीयों के ह्रदय भी हम प्रेम से जीत सकते है।
शुध्द मन-शुध्द ह्रदय और शुध्द आत्मा।
प्रयास करके तो देखो।
सभी पर दिव्य प्रेम करने का....।
अहंकार शुन्य पवित्र
पावन ह्रदय ,छोटे बच्चों
जैसा निष्पाप मन।
प्रेम से तो हम....
दुनिया भी जीत सकते है..और प्रभु का
कोमल ह्रदय भी जीत सकते है।
और नफरत-द्वेष-ईर्ष्या
जलन-हिंसा से....??
इंन्सान ही क्या?पशुपक्षी और खुद भगवान भी.....
सदा के लिए दूर भाग
जाते है।
सभीसे प्रेम करना,पवित्र-निष्ककपट-निष्पाप।
यही हमारी दिव्य संस्कृती है...यही हमारे
दिव्य संस्कार और
सभ्यताएं है।
यही असली इंन्सानीयत
भी है..और...
यही असली धर्म भी है।
मगर...अगर...
प्रेम करके भी जो विनावजह हमसे सदैव
नफरत ही करेगा,
हमारे दिव्यत्व पर
अखंड हमले ही करेगा
हमारे ह्रदय पर कुनीती से वार ही करता रहेगा
तो....???
तो .........
"।।अहिंसा परमो धर्म:।।
।।धर्म हिंसा तथैव च:।।"
समझे????
या...ना समझे???
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:07 pm] Papa: बार्शी का मेरा भगवंत और माता लक्ष्मी।
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बार्शी में बहुत ही पुराणा
विष्णु का ,भगवंत मंदीर है।
बार्शी....।।।।
बहुत ही अच्छे लोगों का गाँव।अनेक जागृत मंदीर।मेरा बचपन भी यहाँ पर ही गया।
वह बचपन की यादें आज भी आँखों के सामने जैसी की तैसी है।
मेरे दादाजी, मुझे वहाँ के प्रसिद्ध भगवंत के दर्शन के लिए ले जाते थे।बहुत प्रेम था उनका भगवंत पर।
सुंदर,सुबक मुर्ती।उसके पिछे माता लक्ष्मी जी की सुंदर मुर्ती।जो पिछे रखे आईने में दिखाई देती है।
राजा अंबरीष और दुर्वास मुनी की एकादशी और द्वादशी की(बारस = बार्शी )बहुत रोचक कथाहै यह।
अंबरीष वरद श्री भगवान।
मेरे दादाजी और मुझे मेरे प्राणों से भी जादा प्रिय मेरे आण्णा, बहुत देर तक भगवंत के सामने खडे रहते थे।
मैं जब उन्हे पुछता था की,"आण्णा, इतनी देर भगवंत को क्या माँगते हो?"
तो मुझे कहते थे,"मैं मेरे लिए नही,तेरे लिए भगवंत को माँगता हुं।"
उन अमृत शब्दों की किमत आज समझ में आती है।
और आज भी उनके शब्द कानों में गुंजते है।
धन्य है उनका प्रेम।स्वर्गीय दिव्य प्रेमामृत।दिव्यत्व।
देह त्यागने बाद भी मुझे उन्होने ही गायत्री मंत्र का जाप करने को कहा।
धन्य है मेरे सद्गुरु।मैं तो उनके चरणों की धुल।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:07 pm] Papa: मैं सत्य हुं।
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मैं सत्य हुं।ईश्वर का दूसरा रूप।
सत्ययुग में मेरी कीमत अच्छी थी।द्वापार,त्रेता में भी मुझे अच्छा मान सन्मान था।
और भगवान की योजना अनुसार कलीयुग प्रकट हो गया।अती भयंकर,घोर,पाप का कहर और अती भयंकर आतंक।और मेरी कीमत समाप्त हो गई।
यहाँ तो सिर्फ असत्य को ही महानता मिलने लगी।
और मुझे???
मेरे साथ छल-कपट-कारस्थान होने लगा।मेरी घोर निंदा होने लगी।असत्य द्वारा मुझे जगह जगह पर बदनाम किया गया।
मैं ईश्वर के,मैं पुण्यवंतो के ह्रदय में रहता था।इसलिए असत्य ने ईश्वरी लिला को,पुण्यवंतो को ही बदनाम करना आरंभ किया।
मैं मंदीरों में भी रहता था।बहुत शक्ती, सामर्थ्य, ईश्वरी शांती थी वहाँ।
मगर......
वहाँ भी भयंकर षड्यंत्र किया असत्य ने मेरे साथ।असत्य ने केवल भूभाग ही कब्जे में नही किया, तो वहाँ के पवित्र मंदीरों पर भी कब्जा किया।मंदीर गिराए,जमीनदोस्त किए।और भगवान के साथ मुझे भी जमीन में दफनाया गया।आज भी अनेक मुर्तीयाँ और सत्य पापी, उन्मत्त कली द्वारा जमीन में दफनाया हुवा है।
असत्य के भयंकर प्रहार से भगवान भी चिंतीत होने लगे।क्योंकी उसने सत्य को सिर्फ जमीन में दफनाया ही नही ,तो निचे निचे धकेल दिया।और मैं अनेक सालों तक लाव्हा रस में उबलता रहा।
फिर भी मैं मरा नही।वहाँ से रास्ता निकालते निकालते धिरे धिरे जमीन फाडकर मैं उपर आ गया।तो...???
कली का चारों ओर घोर साम्राज्य।
कली और असत्य तो मेरे पिछे हाथ धोकर पडे थे।इसीलीए मैंने अलग अलग रुप धारण करके पृथ्वी पर संचार शुरू किया।
लाव्हा में मैं क्षीण और शक्तीहीन हो गया था।
फिर भी मरा नही था।क्योंकी चाहे कुछ भी हो सत्य कभी भी मरता नही है।परेशान जरूर हो सकता है।
गुप्त रुप से मैं पृथ्वी पर घुमता था।क्योंकी कली की नजर मुझपर न पड जाए।नही तो वो मुझे फिर से दफनाएगा।
फिर भी एक बार कली ने मुझे पहचान ही लिया।और क्रोध और भयंकर गुस्से से मुझे उबालते तेल की कढाई में फेंक दिया।मैं अनेक साल वहाँ की भयंकर आग झेलता था।अती भयंकर यातनाएं।
फिर भी मैं मरा नही क्योंकी मैं सत्य हुं।
एकदिन कढाई से भी मैं बाहर आ गया।
उबलते तेल में बहुत सालों से जलने से भी मैं बहुत थक गया था।शक्तीहीन तथा क्षीण भी हो गया था।
अब मैं पृथ्वी पर खुलेआम घुमता हुं।क्योंकी कली की शक्ती अब थोडी थोडी क्षीण होती जा रही है।
फिर भी मैं सावधान हुं।
मैं सत्य याने की,मैं ही ईश्वर का दूसरा रुप याने की मैं ही ईश्वर निर्मीत सत्य सनातन हुं।मैं ही सच्ची मानवता हुं।क्योंकी मैं ही पशुपक्षीयों सहीत सभी पर प्रेम करने को सिखाता हुं।और मैं ही हिंदुत्व हुं।और अंतीम सत्य भी मैं ही हुं।
मैं ही हिंसा को विरोध सिखाता हुं।मैं ही ईश्वरी कानुन का महत्व सभी को बताता हुं,समझाता हुं।
कली के अनेक बडे बडे जहरीले साँप मुझे आज भी बहुत पिडा, तकलिफें देते है।मेरे सत्य के रास्ते बंद करने का प्रयास करते है।मुझे आगे जाने में अनेक रुकावटें ये जहरीले साँप पैदा करते है।फिर भी मैं इनसे रास्ता निकालकर थंडे दिमाग से मुझे आगे जाना है।और मुझे ही सत्य की-धर्म की-सत्य सनातन की-ईश्वरी कानुन की-इंन्सानीयत की जीत सदा के लिए करनी है।
गिराए गए मंदीर फिर से खडे करने है।फिर से वहाँ पर संस्कृती के,संस्कारों के,आदर्शों के,सत्य के बीज बोने है।
संपुर्ण विश्व पटल पर मुझे मेरी जीत करनी है।
संपुर्ण विश्व पर मुझे ईश्वरी राज्य लाना है।भगवान का भगवाँ मुझे अब संपुर्ण विश्व में लहराना हैं।और मैं मेरा मकसद पुरा करके ही रहुंगा।
क्योंकी मैं सत्य हुं और...
मैं कभी भी मरता नही हुं।
------------------------------ --विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:07 pm] Papa: अब हिंदु जाग गया है।
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जीहाँ भाईयों, हिंदु अब जाग नही रहा है,बल्कि हिंदु अब जाग गया है।
आजादी के पहले और बाद में भी हिंदुओं पर जीसने अती अत्याचार किये ,उनके अत्याचार, भोलाभाला-सिदासादा हिंदु सहता गया।उपर से कुनीती द्वारा हमारे धर्म पर प्रहार करनेवालों पर भी भरौसा करके उनसे भी सच्चा प्यार करता रहा।
विषेशत:आजादी के बाद हमारे ही मतों से सत्ता हडपर हमपर ही अती अत्याचार करने वालों की अब पोल खोल चुकी है।उनकी असलीयत हिंदु समाज जान चुका है।
"खाते हिंदुस्थान का और गाते पाकीस्तान को", ऐसे नमकहरामों की असलीयत हिंदु समाज अब जान चुका है।
अलग पाकीस्तान निर्माण करने के बाद भी इस देश में भी अनेक मिनी पाकीस्तान बनानेवालों की "गहरी चाल",अब हिंदुओं के समझ में आई है।
सर्वोच्च सत्ता स्थान काबीज करके भी,हिंदुमुक्त कश्मीर-केरला-बंगाल वालों के असली मुखौटे अब सभी के समझ में आ रहे है।
क्या इनकी निती हिंदु मुक्त हिंदुस्थान की भी नही हो सकती? इनपर हम क्यों और कैसे भरौसा करें?
जगह जगह पर हमें फँसाया गया है।जाती पाती में झगडे लगाकर, मतों की अत्यंत घिनौनी निती द्वारा जिन्होने देश का,समाज का विघटन करने की दुष्ट निती खेली उन्हे भविष्य कभी भी क्षमा नही कर सकता।
जिन्हे आदर्श समझकर हमने उनके पुतले खडे किए ,उन्होने ही हमारे पीठ में कपट से छूरे चला दिये।
मगर...अब...धिरे धिरे... हमें आस्तीन के साँपों की असलियत पता चल चुकी है।
कपटनिती द्वारा जिन्होने हिंदु मुक्त हिंदुस्थान का सपना देखा था,भविष्य में इस देश में उनके पुतले भी नही रहेंगे।जीहाँ....।
इतना ही नही,हमारे साथ गद्दारी हुई है।प्रेम का नाटक करके हमें फँसाया गया है।और...अनेक भुप्रदेशों से कुनीती द्वारा हमारा ही अस्तित्व मिटाने की साजिश की गई है।जहाँ हिंदु अल्पसंख्यक बनता जा रहा है।
भविष्य में हम भी वहाँपर अल्पसंख्यक नही बहुसंख्यंक होंगे और हमारी संस्कृती, हमारे मंदीर हम फिर से वहाँ खडे भी करेंगे।
कश्मीर-केरल-बंगाल-मिझोराम-नागा
पाकव्याप्त कश्मीर ही नही तो हम पाकीस्तान, बांग्ला, तिबेट,मानससरोवर(हिमालय)भी भविष्य में वापस छिन लेंगे।
यह सब हमारी आदर्श देवभूमि है।जब तक"अखंड हिंदुस्थान",की देवभूमि हमें वापिस नही मिलती और हम वहां पर ईश्वरी राज्य की पुनर्स्थापना नही करते तब तक हम स्वस्थ नही बैठेंगे।
यह सपना नही,हकीकत है-वास्तव है।करोडो भारतीयों की यह दबी हुई इच्छा है।हम पर हुए अती अन्याय अत्याचारों का हम सभी हमारी भुमी वापीस लेकर,एक दिन"आनंदोत्सव",जरूर मनायेंगे।और....
"विश्व-राजनीति",पर हम ऐसी निती बनायेंगे की,सभी विश्व को एक होकर हमें यथोचित न्याय देने के लिए, सभी एकमत के साथ मान्यता दें।
और...यह समय भी दूर नही है।भविष्य इसका इंतजार कर रहा है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:16 pm] Papa: मुर्तीपुजा क्यों जरुरी?
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एक ग्रुपपर मुर्तीपुजा के बारें मे एक सदस्य बोल रहा था।कह रहा था,मुर्तीपुजा ढोंग है,पाखंड है,अंधश्रद्धा है।
मुर्तीपुजा ढोंग,पाखंड, अंधश्रद्धा नही है।यह एक उच्च कोटी की श्रध्दा ही है।जैसे की मेरे सामने मुर्ती के रुप में साक्षात प्रभु परमात्मा ही बैठे है।और मैं उनकी सेवा कर रहा हुं।
इससे उच्च कोटी की आत्मशांती मिलती है।
और कर्ममार्ग के यह उच्चतम साधन है।
कर्म मार्ग के आगे भक्तीमार्ग जागृत होता है।मतलब प्रभु के प्रती भक्ती,प्रेम।
धिरे धिरे इसी माध्यम द्वारा ज्ञान मार्ग की जागृती होती है।मतलब सही और सच्चा आध्यात्मीक तथा आत्मज्ञान प्राप्ती में दिनबदिन प्रगती होती रहती है।
और आखिर में समाधी अवस्था यानी आज्ञाचक्र जागृती होती है।मतलब राजयोग जागृती।"सो अहम्।सो अहम्।"
मतलब मुर्तीपुजा से शुरू होनेवाला सफर ईश्वरस्वरुप बनने में मदद करता है।तो यह अंधश्रध्दा कैसे होगी?
मुर्तीपुजा में कक्षा एक में प्रवेश होता है।और पोष्ट ग्रेज्युएशन पुर्ण कराता है।मतलब सामान्य व्यक्ती भी इसी माध्यम द्वारा नर का नारायण होता है,तो यह अंधश्रद्धा कैसे होगी?
अज्ञानी तो वह है जो अभ्यास किए बगैर ही मुर्तीपुजा के बारे में गलत धारणा रखता है।
जब सामान्य व्यक्ती को असामान्य बनाने की क्षमता अगर मुर्तीपुजा में है तो मुर्तीपुजा गलत कैसे होगी?
क्या लाखों करोडों भक्तीभाव से मुर्तीपुजा करनेवाले मुर्ख हो सकते है? क्या हमारे पुर्वजों नें हमें गलत ज्ञान दिया???
बिल्कुल नही।मुर्तीपुजा का विरोध करनेवाले ही गलतविचार धारा के,अज्ञानी तथा अहंकारी हो सकते है।अथवा श्रध्दालु समाज को धिरे धिरे बहकाकर गलत रास्ते पर ले जाना ही उनका उद्दीष्ट हो सकता है।श्रध्दालु समाज को श्रध्दा से हटाकर धिरे धिरे अधर्म को बढाने की और अधर्म की ओर खिंचने की यह ऐक गहरी साजीश भी हो सकती है।अतएव सावधान।
मुर्तीपुजा करते करते जब सो अहम् जागृती हो जाती और वह व्यक्ती ईश्वरस्वरुप बन जाती है,तो उस महात्मा को बाहरी उपचारों की जरूरत ही नही होती।जैसे माला पहनना, गंध लगाना,विशिष्ट पोशाक परीधान करना।या नाम की भी कोई विशिष्ट उपाधी लगाने की भी जरूरत नही रहती।
वह पावन आत्मा तो ईश्वरी शक्ती से संपुर्ण एकरुप होही जाता है।और...।
उसके जीवन का एक ही महत्वपूर्ण मकसद होता है की,अनेक मार्गों से अनेक प्रकारों से भगवान की धरती को और ही सुंदर तथा पवित्र बनाना।
फिर चाहे वह व्यक्ती सूटबूट में ईश्वरी कार्यपुर्ती हेतु अमेरिका अंग्लैड में घुमे,या फिर भगवे कपडे पहनकर ईश्वरी कार्य बढाने के लिए भारतभ्रमण करें।या रामदास स्वामी जैसा केवल एक ही लंगोटी लगाकर घुमें।या फिर शेगांव के महान संत श्री गजानन महाराज की तरह संपुर्ण विवस्त्र होकर आजीवन ईश्वरी कार्य करता रहे।
उसे दो वक्त की रोटी भी मिले या ना मिले।उसको इसकी भी चिंता नही होती है।नाम,मान-सन्मान, धन-वैभव सभी से मुक्त होकर अपमान को भी प्रभु का प्रसाद समझकर ऐसे पवित्र आत्मे विचरण करते रहते है।बस्स...वह पुण्यात्मा तो ईश्वरी कार्य करते अपने ही मस्ती में तथा समाधी अवस्था में अष्टोप्रहर घुमता रहता है।
तो कभी एकांत में ही रहकर केवल ईश्वरी साधना ही करता रहता है।
ऐसा सामर्थ्य, शक्ती तथा कमाल मुर्तीपुजा में है।तो दोस्तों यह ढोंग कैसे हो सकता है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:16 pm] Papa: ग्रुप एडमिन को खबरदार होना होगा।
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व्हाटस्अप के नित्यदिन अनेक व्हाटस्अप ग्रुप बनते है।सदस्य बढाने के लिए अनेक ग्रुपपर लिंक भेजी जाती है।इसी समय में ग्रुपपर अनेक झुटे लोग भी लिंकद्वारा आ सकते है।इसिलीए ग्रुप एडमिन को खबरदार रहने की जरूरत है।क्योंकी ग्रुपपर अनेक असामाजिक तत्व भी घुस जाते है।पुणे में ऐसे ही एक ग्रुपपर एक आतंकवादी पकडा गया है।
कौन पुरुष है कौन स्र्ती है कुछ समझ में नही आ सकता।आतंकवादी तो हिंदु नाम भी धारण कर सकते है।
अभी मैंने देखा है की अनेक हिंदुत्वावादी ग्रुपपर कुछ गलत पोष्टस् आते है कोई हिंदुत्व की खिल्ली उडाता है,तो कोई मोदीजी पर भयंकर टिका टिप्पणी करता है।समाज में संभ्रम तथा अशांती फैलाना भी इनका मकसद हो सकता है।या कोई मोबाईल नंबर द्वारा डाटा भी हैक कर सकता है।
इसिलिए ग्रुप एडमिन से मैं अनुरोध करता हुं की,एक तो ग्रुपपर परीचीत को ही एड करें।अथवा कोई सदस्य अगर गलत पोष्ट करता है तो उसे तुरंत ग्रुप से हटा दें।इसिलिए सभी के पोष्ट पर नजर रखना भी जरुरी है।मैंने अनेक ऐसे गलत पोष्ट अनेक ग्रुप एडमिन को बता दिए है।
और एक बात..हिंदुस्थान का कंट्री कोड +91 है।
मगर अनेक बार ग्रुपपर+92(जो की पाकीस्तान का कंट्रीकोड है),+97,+96,+94,+15 इस प्रकार के परदेशी कोड के भी व्यक्ती ग्रुपपर जुड जाते है।
देशविघातक शक्तिंयाँ अनेक प्रकार से कार्यरत हो रही है।इसलिए सभी ग्रुप एडमिन को मैं नम्र निवेदन करता हुं की कृपया ग्रुप के बारे में अधिक जागरूक रहे।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 2:16 pm] Papa: सोनिया गांधी का भाषण 'समझने' के लिये आपके पास इन शब्दों की सूची होना अति आवश्यक है :
चातिसघर > छत्तीसगढ़
नर-मादा > नर्मदा
गर्भ > गर्व
तेल लगाना > तेलंगाना
मैला..वो > महिलाओं
सीको > सिक्खो
मादध्य प्रदिश| > मध्यप्रदेश
सिरप > सिर्फ
भून अत्या > भ्रूण हत्या
बजे से > वजह से
पराज > फर्ज
किलाप > खिलाफ
गिलोत > गहलोत
नेता गन > नेता गण
कुशी > खुशी
मशुर > मशहूर
पाबावी > प्रभावी
हमें गर्भ है > हमें गर्व है
और अंतिम है : मेरे पेटी का बटन मेरा है।
("मेरे पति का वतन मेरा है।")
लोकहित में जारी। 😋😛😀
बहुत कम लोग जानते है ....
की सोनिया गाँधी को हिंदी सिखाने वाला कोई और नहीं ...
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वो बांगर सीमेंट वाला अंग्रेज़ बुड्ढा है
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शाश्टा नाई साबसे आच्चा 😜😝
(सस्ता नहीं है सबसे अच्छा)
[23/01 2:18 pm] Papa: चलते चलते।
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गहराई से सोचो,
दिमाग लगाकर सोचो,
आजादी के बाद....
कुछ लोगों ने......
जानबूझकर......
ऐसी नितीयाँ बनाई गई
की,हिंदु बहुसंख्यंक
होकर भी......
शक्तीहीन बन सके।
व्युहरचना ही ऐसी बनाई गई की....
हिंदु बहुसंख्यंकं होकर भी...."गेंद.......",
कैसी भी फेंकें...।।।
"गोल तो सिर्फ"....,
उनकी ही बनेगी और..
हिंदु हमेशा आरोपों के
कटघरे में ही खडा रहे
घिरा रहे..अत्यंत शातिर दिमाग से...
खेली गई गहरी चाल.
हिंदुओं का जगह जगह
मानसिक खच्चीकरण
मानसिक उत्पीडन।
न्याय के लिए अगर
कोई हिंदु आगे आयेगा
तो उसे जानबूझकर
गुनहगार शाबीत किया
जायेगा...समाज में..
संभ्रम फैलाया जायेगा।
"सत्य को समाप्त "करने की निंदनीय और
घृणास्पद"कु-निती।"
अती भयंकर षड्यंत्र।
इसके लिए"जगह जगह"
खास आदमी बिखेर दिये गए थे।
इसीलीए आज भी हमे सत्ता मिलने पर भी
उनकी"शातीर"योजनाएं
हमें परेशान कर रही है।
इसिलीए.....
केवल और केवल....
"व्यवस्था परीवर्तन",ही
हमें योग्य न्याय दे सकता है।
जब तक व्यवस्था परीवर्तन नही होता
तब तक हमें और
"सत्य",को योग्य न्याय
नही मिलता।
तोबा..तोबा..तोबा..
हमारी संस्कृती, धर्म
समाप्त करने के लिए
इतनी गहरी चाल???
मगर सत्य को कौन मिटायेगा???
आखिर सत्य का रखवाला खुद भगवान ही होता है।
तो...सत्य को कौन मिटायेगा????
मिट जायेगी उनकी ह
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