संपूर्ण लेखांक भाग २६
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Papa: बालासाहब ठाकरे जैसा
महान योध्दा बनो।
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बालासाहब ठाकरे।
नाम ही काफी है।संपुर्ण विश्व के हिंदुओं में परीचीत,लोकप्रिय और
सबके ह्रदय में निवास करने वाले विश्व के महान हिंदु नेता।"शिवसेना"के संस्थापक।और उनकी कार्यकर्ताओं की फौज भी बे-मिसाल।
उनका भाषण,लेखन?पुछो मत।दधकती तोप जैसे शब्द।"शत्रु"भी काँपते थे उनके उनका नाम लेने से।
शब्दफेक ऐसी बेहतरीन।व्वा।
एक बार निखील वागले उनका टि.वी.के लिए इंटरव्हीव ले रहे थे।तो निखिल वागलेजी ने,बालासाहब को पुछा- "साहब आप कहीं भी हो बहुत ही बिनधास्त होते हो।आपको इस अनुरोध में एक प्रश्न पुछता हुं,आप हमेशा,"येडझव"ऐसा बोलते हो-इसका मतलब क्या है?"
इस प्रश्न पर बालासाहब थोडेसे मुस्कुराँए थे।
मेरे सभी हिंदु बांधवों को मैं निवेदन करता हुं की,आप सभी बालासाहब नही बन सकते मगर उनके सिध्दांतो पर तो चलों।
मैं तो उनका आदर्श सामने रखकर,"लेख लिखने में,बोलने में" बिनधास्त रहता हुं।
मैं उनकी बराबरी का नही हुं।एक सामान्य कार्यकर्ता हुं।फिर भी लिखते समय उनको सामने रखता हुं।
दै.सामना और दूसरे अनेक अखबारों में मैंने उन्हीको ही सामने रखकर लिखान किया है।
अब इसी संदर्भ में एक और बात।अब बाबा राम रहीम के माहौल के कारण,अनेक हिंदुद्वेषी सभी संतो की बदनामी कर रहे है।
मेरे एक व्हाटस्अप ग्रुप पर भी ऐसी ही एक बाबा रामदेवजी के खिलाफ एक व्यक्ती ने गंदी पोष्ट की।
उस विषय पर मेरे और उसके झगडे हो गए।मैंने उसे साफ शब्दों में कहा,"पुण्यपुरुषों की बदनामी विनावजह करते हो,बहुत पछताओगे।"
और इसी कारण मैंने अनेक व्हाटस्अप ग्रुपपर ,फेसबुक पर ऐसे गंदे लोग जो बुरी पोष्ट कर रहे है,उनके खिलाफ बडे सख्त शब्दों में लेख लिखा था।
शब्द थोडे कडवे थे इसिलीए मैंने सबकी क्षमा भी माँगी थी।
मगर फिर भी मेरे उस लेख से अनेक व्यक्ती मुझसे नाराज हो गए थे।कुछ महात्माओं ने तो फेसबुकपर अपनी नाराजी भी जताई।
मेरे अनेक लोकप्रिय हिंदुत्ववादी लेख मैं अनेक मार्गों से देश और विदेश के कोने कोने में पहुंचाने की कोशीश में रहता हुं ताकी हिंदु समाज की"चैतन्य जागृती"हो।
अब मुल विषय पर आता हुं।केलीफोर्नीया,अमरीका से एक"जबरदस्त आध्यात्मीक शक्तीशाली,देवीस्वरुप"एक देवी मेरे फेसबुक पर है।जो संपुर्ण विश्व में और विश्व के कोने कोने में,"शिव-धर्म"का कार्य बहुत ही ईश्वरीय शक्ति से चलाती है।अनेक अमेरीकन तथा विश्व के अनेक व्हि.व्हि.आय.पी,हाँलीवुड के स्टार्स उस महान देवी के ईश्वरीय"शिव"कार्य में सहभागी है। उनके कँलीफोर्नीया मे शायद कुछ इनस्टीट्युट भी है।
मेरे फेसबुक के अनेक लेख पढकर वह महान देवी मुझसे वक्त निकालकर चर्चा भी करती है।
कल के लेख के बारें में भी एक विस्तृत विवेचन उन्होने मुझे उनके लेख द्वारा भेजा था।धन्यवाद अनुजी।
अनेक व्हाटस्अप ग्रुप पर भी मैंने उपरी कडवा मेरा लेख दिया था।
एक जागृत पत्रकार,श्री.दया कुमावतजी भी एक हिंदुत्वावादी पत्रकारों का व्हाटस्अप ग्रुप चलाते है।उनके ग्रुप में भी अनेक महात्माएं,पुण्यात्माएं
,आमदार-खासदार-मंत्री मौजुद है।खुद्द रामदेव बाबाजी जैसे युगपुरुष,सुदर्शन चैनल के अनेक पदाधिकारी भी मौजुद है।उस महान ग्रुप पर दयाजी ने मुझे मेरे सौभाग्य से एड किया है।
उनके इस ग्रुप पर भी मैंने यह लेख दिया था।
दयाजी ने वैयक्तीक स्तर पर मेरा इस लेख के बारें में अभिनंदन भी किया था।
इतना लंबा लेख लिखने की वजह भी है।क्योंकी अनेक महात्माओं को मेरी भाषा पसंद नही आयी थी।एक ग्रुप के पत्रकार महोदय ने मुझे लिखा था की हम पत्रकार है।ऐसी भाषा नही होनी चाहीए।
मन में थोडा दुख हुआ।क्यों की कश्मीर,केरल,बंगाल में मेरे हिंदु भाईयों के साथ जो हो रहा है,क्या ठीक हो रहा है???उन्हें कौनसी भाषा चाहिए??
क्या उनका चरणस्पर्श करके बताएं की अत्याचार मत करों।या उनको गाली दें?
खैर।आनंद भी हुआ की अपने लेख सिरीअसली पढे जाते है।और उसपर तुरंत प्रतीक्रिया एं भी आती है।चाहे भाषाशैली अच्छी हो,सच्ची हो या थोडी कठोर।
और एक किस्सा....
हर ग्रुप के सदस्यों को शायद वैचारीक मतभेदों का सामना करना पडता है।मेरे साथ भी ऐसा हुआ तो इसमें कोई विशेष नहीं।
एक अंतरराष्ट्रीय भगवत्स्वरुप महान संत ने भी मुझे उनके अनेक ग्रुप पर लिया था।मेरी बिनधास्त लेखनी की वजह से शायद वह महात्मा के दिल को भी ठेंस पहुंची थी।उन्होने मुझे ऐसा एक-दो बार बोल भी दिया था।
उनके भी सभी ग्रुप पर मैंने मेरा उपरी लेख दिया था।और मेरा अती संवेदनशील मन बाद में पछता रहा था।शायद...
मुझे ग्रुप पर वह लेख देना नही चाहिए था।मेरी अंतरात्मा की आवाज सुनकर सभी की क्षमा माँगकर मैंने उनके सभी ग्रुप तत्काल छोड दिये।किसीका,विशेषतः मेरे ही अच्छे हिंदु भाईयों का मेरी वजह से दिल दुखाना नही चाहता।
इतना लिखने उद्देश्य पवित्र है।किसीका दिल दुखाने का नही है।चुकभुल क्षमस्व।
चाहता तो हुं की,"विश्व क्रांती हिंदु संगठन।"बनाकर,हिंदुओं की जीत केलिए,"विश्व-विजेता हिंदु धर्म।"बनाने के ईश्वरी कार्य में छोटासा योगदान दुं।यश देना न देना मेरे प्रभु के हाथ में है।
अगर मेरा उद्देश्य पवित्र है तो,उसे मुझे यश देना ही होगा।
और"विश्व-पटल"पर मैं धिरे धिरे कामयाब भी हो रहा हुं,ऐसा मुझे लगता है।
साम-दाम-दंड-भेद निती को भगवान को भी अपनाना पडा था।सत्य की जीत के लिए हम ऐसी थोडी कोशीश करते है।उसमें मैं भी छोटीसी कोशीश में हुं।शायद मेरे विचार किसीको पसंद भी नही आ सकते है।अपनी अपनी विचार धारा है।
अब लेख पुरा करता हुं।
हरी ओम।
जय हिंद।
वंन्दे मातरम्।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:22 pm] Papa: ना भगवान कभी मुर्ख और अज्ञान होते है।ना वो कभी पछताते है।
मुर्ख और अज्ञानी वो होते है जो अर्धज्ञानी होते होते है।ऐसे अर्धज्ञानी भगवान को और उसकी विचित्र लिला को क्या समझें?
हरी ओम।
[23/01 8:31 pm] Papa: बोधकथा
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बहुत दिनों से मैं कृष्ण भगवान को ढुंढ रहा हुं।संपुर्ण पृथ्वी का चक्कर लगाया मैंने।मगर पृभु तो मिल ही नही रहे थे।
येक दिन चमत्कार हुआ।
मैं कृष्ण के बारे में ही मन ही मन सोच रहा था,तो भगवान ही मुझे ढुंढते ढुंढते आ गये।और मुझे पुछ बैठे,"हे मेरे प्यारे भक्त,तुने मेरी राधा किधर देख ली है क्या?उसे बहुत ही ढुंढ रहा हुं,मुझे मिल ही नही रही है।"
मैंने कहाँ "हे मेरे भगवान,मैं तो तुझे ही ढुंढ रहा था।चलो तु तो मिल ही गया।मगर तु तो मेरा प्रेम समझे बगैर ही राधा राधा रट लगा रहे हो?बडा आश्चर्य है?"
"ये कोई स्वर्ग नही है भगवन।यह पृथ्वी है।तेरी नही इंन्सानों की पृथ्वी।यहाँ तुने ही बनाये सुंदर मनुष्य नें,सुंदर पृथ्वी का अती स्वार्थ और हैवानीयत से नरक किया है रे बाबा।
तु भी यहाँ नही रुक सकता।तो राधा कैसे आयेगी यहाँ?जा,उसे स्वर्ग में ही ढुंढ ले।उधर ही होगी किधर तो भी।"
मेरा और कृष्ण का संवाद चल ही रहा था की तभी हम दोनों को राधा दिखाई दी।और आश्चर्य हुआ।न जाने क्यों,राधा को ढुंढनेवाले कृष्ण अचानक गायब हो गये।मैं अवाक रह गया।ये कैसी लिला उसकी?
राधा को ढुंढते मेरे पास आयें?और राधा देखी तो गायब हो गये?
तभी राधा मेरे पास आई और बोली,"तुने मेरे भगवान को देखा क्या?कितने देर से उनको ढुंढ रही हुं।मिल ही नही रहे है?"
मैंने राधा से कहाँ,"माते,कृष्ण तो तुझे ढुंढते ढुंढते यहाँ तक आये थे।मुझे तो तेरे ही बारे में पुछ रहे थे।और हम दोनों ने तुझको देख लिया।और अचानक गायब ही हो गये।मैं भी तो हैरान हुं।"
मैंने इतना कहां की राधा भी गायब हो गई।फिर से मैं हैरान हो गया।आखीर ये चल क्या रहा है?
तभी फिर से कृष्ण परमात्मा हाजीर हुए और बोले,"हे भक्त,पृथ्वी पर क्या चल रहा है,ये देखने के लिए हम दोनों एक बहाना बनाकर यहाँ आये थे।मगर यहाँ का मनुष्यों द्वारा किया हुआ नरक देखकर हम स्वर्ग वापीस जा रहे है।यहाँ हम नही रह सकते।"
तात्पर्य:-अगर भगवान भी स्वर्ग से पृथ्वी पर आयेंगे तो,यहाँ नही ठहर सकते।
इतना भयंकर पाप का आतंक यहाँ फैल गया है।
कौन है इसको जिम्मेदार?
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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जब जींदा होते है हम
तो नितदिन रुलाते है
अपने ही कुछ लोग।
तडप तडप कर
मर रहे होते है तो
और भी बहुत तडपाते है
अपने ही लोग।
आनंद देने की बजाए
दुख देकर रुलाते है
कुछ लोग।
दुसरों का दुख-दर्द देखकर
खुश होते है कई लोग।
पाणी पाणी करके
चिल्लाने वालों के मुंह में
हँसहँसकर विष
डालते है कुछ लोग।
और मौत के बाद...
चिल्ला चिल्लाकर रोने का
ढोंग रचाते है यही लोग।
मृत्यु के बाद
मंदीर बाँधकर पुजा
करते है यही लोग।
साधु संतो की भी
ऐसी हालात-दुर्शशा
बनाते है कई लोग।
बात तो कडवी है
मगर सच्चाई है।
वाह रे दुनीया तेरी
हद हो गई।वाह रे जमाना..
तेरी हद हो गई।
जीते जी जीना हराम
कर देते है अपने ही लोग।
मौत के बाद हमें भगवान
समझते है लोग।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: बापरे बाप।अरे बाप।
इतना भयंकर षड्यंत्र???
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हाँ भाईयों,ऐसा पढने को आया की हमारे देश में कुछ लोगों ने नाम बदलकर राज किया।
कुछ लोग आफगाणीस्तान से नाम बदलकर आये।क्या यह सच्चाई है?अगर सच्चाई है तो,तोबा तोबा।इतना भयंकर षड्यंत्र कोई कर भी सकता है?
वजह ???
यहाँ की संस्कृती,सभ्यता
समाप्त करके अपना राज्य स्थापन करने के लिए सचमुच में कोई इतना गिर सकता भी है?
ऐसे पापी को भगवान तो क्षमा नही करेगा।मगर ऐसे लोगों को नरक में भी जगह मिल नही सकती।
देवी देवताओं को बदनाम करना,महापुरुष,संत-सत्पुरुषों को बदनाम करके,एक अच्छी संस्कृती मिटाने की कोशीश करना,क्या भगवान के दरबार में भयंकर गुनाह नही है?अगर यह हकीकत सच्ची है तो भविष्य में ऐसी हरकतों करने वालों को वह समाज कभी भी क्षमा नही करेगा,जीस महान संस्कृती तबाह करने का जीसने यह भयंकर षड्यंत्र रचा-खेला है।
खुद ईश्वर ने निर्माण की हुई संस्कृती को आखिर कौन समाप्त करेगा?कोई भी नही।फिर चाहे कितने भी षड्यंत्र वो करें।
उसका तो चार दिन का खेला।और जब सभी को इसका सत्य ज्ञान होगा,तो उसका असली मुखौटा सामने आयेगा।तभी असत्य वालों की बहुत ही बुरी स्थिती हो जायेगी।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: दोस्ती दिन।🦋
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यारों,दोस्तों,मित्रों
आज तो दिन है
दोस्ती का।
सुख दुख में जींदगीभर
साथ देने का
वादा करने का।
कृष्ण-सुदामा जैसे गहरे
दोस्ती का।
सिर्फ आज का एक
दिन ही क्यों???
दोस्ती तो रहेगी जनमभर के लिए।
इसीलीए तो कहते है
"आँस का बाप.....
निरास की माँ....
होते की बहन....
जोरु साथ....
पैंसा गाँठ....और....
निदान का दोस्त।"
कोई साथ दे ना दे...
सच्चे दोस्त कभी भी साथ छोडते नही।
"कसम दोस्ती"की कभी
तोडते नही।
"मित्र-दिवस",की
लाखलाखशुभकामनाएं
🦋👍💐🙏
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-- विनोदकुमार महाजन,पत्रकार,पुणे।
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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संकटों से हम कभी
डरते नही।
अपयश से भी हम
कभी रोते नही।
दुखों से हम कभी
रोते नही।
आत्मविश्वास हम कभी
छोडते नही
संघर्ष करने के लिए
हम पिछे हटते नही।
चाहे दुनीया भी सारी
एक हो जाए हमारे खिलाफ...
तो भी हम हारते नही।
दम है मेरी आत्मा में
सभी चुनौतीयों का
स्विकारने का।
दम है मेरेअंदर हिंदुस्थान को हिंदुराष्ट्र
बनाने का।
दम है मेरे अंदर इस देश को...विश्व गुरु
बनाने का।
दम है मेरे अंदर,
"सत्य को जीताकर,असत्य को
हराने का।"
कोई हँसे या कोई निंदा करें
ये सपना नही मेरा हकीकत है यारों
"विश्व-विजेता",हिंदुधर्म
बनाने का।
आदर्श संस्कृती को
विश्व के कोने कोने में
पहुंचाने का।
फिर आने दो कितनी भी
मुसीबतें,या फिर तुफान।
हम कभी थकते नही
हम कभी रूकते नही
हम कभी हारते नही।
क्योंकी,हम हम है।
जहर के अनेक प्याले
पिकर भी हम जींदा है।
और हम एक दिन
जीतकर ही रहेंगे।
जीतकर ही रहेंगे।
मन में है विश्वास।
पुरा है विश्वास।
हम केवल और केवल
जीतने के लिए ही तो
पैदा हुए है।
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(-- तो हम है कौन?🤔😀)
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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डाँलर कमाने के
उन्माद में इंन्सानीयत
मर गई।
बुढी माँ को अकेले
घर में छोडकर
पुरी फँमीली परदेश
चली गई।
मुंबई के आलीशान फ्लैट में
माँ अकेली तडप तडप कर मर गई।
पाणी के बुंद बुंद को
तरस कर उसने
जान अपनी छोड दी।
इस घोर कलयुग में
रीश्तों नातों की नैया
डुब गई।
पैसा बन गया भगवान
और पैसों के
लालच में इंन्सान
बन गया हैवान।
हे मेरे भगवान
कैसे तुने ये दुनीया
बनाई?
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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अनेक जहर के प्याले
पीकर भी हजम किये
हमने।
बचपन से यही आदत है मेरी।
बहुत विष के प्याले पिये
और हजम भी किये।
अपनों ने भी दिये
अपना समझकर जान
हथेलीपर ली उन्होने भी
दिये।
पराये ने भी दिये।
और समाज ने भी।
फिर भी हम मरे नही।
हम आज भी जींदा है।
मह मरेंगे भी नही,
क्योंकी सत्य की जीत
और असत्य की हार
करके ही रहना यही
आदत है मेरी।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: अब समझ में आया।
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अब धिरे धिरे सब कुछ
समझ में आ रहा है।
अब समझ में आया की
कुछ सिध्द पुरुष
हिमालय में अकेले ही
मनुष्य बस्ती से दूर
अकेले ही क्यों रहते है।
कंदमुल खाकर क्यों
गुजारा करते है।
इंन्सानों से दूर और
सापों में,बाघों में भी
क्यों रहते है।
कुछ सिध्द महापुरुष
जानबुझकर,"पागल",
बनकर क्यों जीते है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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कुछ सिध्दपुरुष जानबुझकर
पागल बनकर रहते है।
तो कहीं इंन्सानों की
बस्ती से दूर ही
रहते है।
कोई महात्मा बाघ,सिंव्ह
साँप बिच्छु के पास भी
हिमालय में बडे आनंद से रहते है।
मगर इंन्सानों से दूर दूर
भागते है।
कंदमुल खाकर जंगल में
गुजारा करते है।
इंन्सानों के हाथों का
खाना भी नही खाते है।
संपुर्ण आयु अपनी
एकांत में और तपश्चर्या में ही बिताते है।
समाजहित का व्यर्थ का
डांगोरा भी कभी
नही पिटते है।
मस्त होकर समाधी में ही रहते है।
आशा -निराशा और
सुख दुख से हटकर
"स्तितप्रज्ञ",बनकर आनंदसागर में डुबे
रहते है।
तो कोई गृहस्थी भी
संन्यासी बनकर जंगल में चले जाते है।
प्रभुचरणों में ही सारा जीवन अपना बिताते है।
मिल गया करोडों में एक
असली हिरा कोई मनुष्यों में तो उसकी भी परीक्षा लेकर जनम जनम का
कल्याण भी उसका करते है।उसे "मतलबी",दुनीयावाले
अवलीयाँ कहते है।
कई अवलीयाँ गुप्त रुप से कभी कभार
मनुष्यों में भी घुमते है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: सर्वबाधा प्रशमनम्,
त्रैलोस्याखिलेश्वरी,
एवमेव त्वया कार्य,
मसमद्वैरी विनाशनम्।।
[23/01 8:31 pm] Papa: कृष्णंवंदे जगद्गुरूम।
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हँसता खेलता,नाचता गाता
अमृतसागर,अखंड चैतन्य
सर्वगुणसंपन्न,मुरलीधर
मिरा का भी प्रेमी
राधे का भी प्यारा।
रूक्मीणी सत्यभामा का भी प्यारा।
अर्जुन सुदामा का भी
प्यारा।
और..दुष्ट पापीयों का
संहारक
गोमाता,पशु पक्षीयों पर
भी आत्मा का प्रेम करने
वाला परमआत्मा
धर्म पुनर्स्थापक ,संतों का पुजक,हे मेरे कृष्ण
तेरा एक अंश मुझे दे।
बस्स..जीवन मेरा
धन्य हो जायेगा।
कृष्णंवंदे जगद्गुरुम।
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[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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जीवन में हमें मिलते है
कई लोग चलते चलते।
कोई प्रेम बाँटता है तो
कोई नफरत करता रहता है,विनावजह।
कोई अमृत पिलाता है
तो कोई जहर पिलाता
रहता है,दिनरात।
अपना अपना नजरीयाँ
होता है।
कोई हँसता खेलता,मुस्कुराता रहता है।और दुसरों को भी मुस्कुराता देखकर
खुश रहता है।
तो कोई रोता रहता है
और रुलाता भी रहता है।
करता है कोई चरण स्पर्श तो कोई..
लात भी मारता है।
प्रेम करके भी कोई
हमेशा रूलाता ही रहता
है।
कोई"दिव्यत्व तो कोई
चैतन्य",बाँटता फिरता है।
तो कोई "जहर का भी",
ब्यापार करता है।
कोई यहाँ "स्वर्ग"बनाने की कोशीश में रहता है
तो नितदिन कोई यहाँ "नरक"बनाता फिरता है।
अंदाज हर एक का
यहाँ निराला हे।
मैं तो नितदिन हर जगह हर इंन्सान में भगवान ढुंढता रहता हुं।
उसकी "आत्मचेतना"
जगाने की कोशीश में
रहता हुं।
मगर यहाँ तो इंन्सान में
भगवान "दुर्लभ"होते है।
मिलते है कभी कभार।
इंन्सान में"इंन्सानीयत
को पुजने वाले "भी
शायद मिलते रहते है
कभी कभार।
जादा मिलते रहते है
समय समय पर स्वार्थ
के लिए "मुखौटा"बदलने
वाले ही भारंभार।
खैर,"कलयुग"की महीमा भी है अपरंपार।
स्वार्थ के इस बाजार में
मिलेंगे इंन्सानों में भी जरुर राम और कृष्ण भी कभी कभार।
मगर मिलेंगे हम सभी को यारों यहा इंन्सानों
के अंदर के,
"रावण-कंस-दुर्योधन"
ही जादा।
इस"मायावी"दुनीया में सभी भी,मेरे प्यारे दोस्तों बचके रहना रे
बाबा,बचके रे ना रे।
यहाँ तो है सब झुटा
माया का ही बाजार।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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स्मार्ट फोन इंटरनेट के
जमाने में,
इस फास्ट फुड के फास्ट जमाने में,
फ्री आँफ काँस्ट और
फोकट के मुक्त जमाने में
इस रंगबिरंगी और
रंगीली दुनीया में
हर पल रंग रंग बदलती
है ये दुनीया।
वक्त वक्त पर अपना
असली रंग रुप
दिखाती है ये दुनीया।
मायावी दुनीया का रचियेता भगवान भी है
अनेक रंगो से भरा,
मगर परोपकार और
परमार्थ का सही ज्ञान देने के लिए।
और भगवान ने ही बनाया इंन्सान भी है
अनेक रंगो का,मगर ज्यादा तो निजी स्वार्थ के लिए।बात तो है सच्ची
फिर है कडवी।
बस...जमाने की ओर देखने का अपना अपना
तजुर्बा है और नजरीयाँ भी।
कौन क्या सोचे,वो भी
अपना अपना नजरीयाँ ही है यारों।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: इंन्सानियत मर गई।
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एक ग्रुप पर विडीओ देखा,"इंन्सानियत
मर गई "नाम से।
एक बच्चा,रास्ते से जा रहा था।अकेला...
कोई वाहन ने उसे ठोंक दिया और....ह्रदय शुन्य तरीके से वहाँ से
देखता देखता वही
वाहनचालक वहाँ से
चला गया।ह्रदयशुन्य..
तरीके से।
एक,दो,तीन,चार...
अनेक व्यक्ती और वाहन चालक आ गए
तडप तडप कर रोने वाले बच्चे को,
तडपता देखकर कुछ करें बगर ही वहाँ से
निकल गए।
इंन्सानियत सचमुच में
मर गई।इंन्सान...
इंन्सान न रहा।
इंन्सानियत मर गई।
क्या यही "कलियुग"है?
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-- V..K..M..😭
[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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जगत में कोई प्यारे
ना कोई तेरा है ना कोई
मेरा है।
ना रिश्ता है,ना नाता है
मोहमाया का सब
झमेला है।
ना सगा है ना संबंधी है
सुख के सब साथी
दुख में न कोई तेरा है।
दुनीया की रीत यही है
प्यारे...बस्स...
एक सद्गुरु और भगवान ही सबका है।
बाकी सब माया का
भुलभुलैय्या है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: 🕉सभी समस्या का एक ही उत्तर:-" हिंदुराष्ट्र।"🕉🚩🚩
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🕉आज देश में अनेक समस्याएँ है।सभी समस्याओं का केवल एक ही उत्तर है,हिंदुराष्ट्र।जी हाँ,फिर से दोहराता
हुं,हिंदुराष्ट्र।
क्या समस्या है हिंदुराष्ट्र घोषीत करने में?यहाँ की अस्सी प्रतीशत आबादी हिंदुओं की है,तो यहाँ हिंदुराष्ट्र ही चाहिए।क्यों नही होना चाहिए?जरूर होना चाहिए।
जिस देश में जिसकी आबादी ,लोकसंख्या जादा होती है,वहाँ का राष्ट्र भी उनका ही होता है।उन्हीका ही होता है।
इसिलीए यहाँ हिंदुत्व ही राष्ट्रीयत्व है।और ,सभी को यह सत्य स्विकारना ही होगा।क्योंकी कानुन भी बहुमत की व्याख्या को ही प्राधान्य देता है।
और जब सभी यहाँ का राष्ट्रीयत्व हिंदु ही है ऐसा मानेंगे ,और हिंदुराष्ट्र बनाएंगे तभी देश में चल रही सभी समस्याएं भी खत्म
हो जायेगी।
अतएव मैं सरकार को अनुरोध करता हुं की,तुरंत इस महान हिंदुराष्ट्र को,निधर्मी से बदलकर "हिंदुराष्ट्र"घोषीत करें।
और अगर सरकार ऐसा नही करती है तो हम सभी बहुसंख्यक हिंदु इसे बनाकर ही रहेंगे।
और.....समय के अनुसार कुछ दिनों बाद,ईश्वरी इच्छा से और निसर्गनियम के अनुसार ये राष्ट्र हिंदुराष्ट्र होनेवाला ही है।
भगवान की इच्छा कौन टाल सकता है?
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।🕉🚩🚩
[23/01 8:31 pm] Papa: निर्भया सेना।
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काम तो बहुत ही नेक
कर रहे है ये सब लोग।
देश में डरी हुई,सहमी
औरतों को न्याय दिलाने
आ गई अब सच्चे लोगों की,"निर्भया सेना।"
देश में नाम बढता जायेगा तो लोगों में निर्भया के प्रती विश्वास
भी बढता जायेगा।
नेक ईश्वरीय कार्य में
धिरे धिरे लोगों का काफीला भी बढता ही
जायेगा।
बढते चलो,बढते चलो।
कदम कदम बढते चलो।
निर्भया के साथ साथ
इंन्सानियत की भी
जीत करो।
यही है उम्मीद आप सभी से।
दिन-ब-दिन संगठन
शक्ती बढाते रहो।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: आप सभी को,क्षमस्व।
मैं जल्दी ही एक राजकीय संगठन बना रहा हुं।इसीलीए यह ग्रुप मैं स्व-इच्छा से छोड रहा हुं।
क्योंकी राजकारण और समाजकारण अलग है,ऐसी मेरी निजी धारणा है।
हरी ओम।
🕉🙏
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:31 pm] Papa: 🕉चलो सत्य की ओर।
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धिरे धिरे हम सभी शुध्द,पवित्र और पुण्यात्माएँ उन्मत्त कली पर विजय प्राप्त करके,सत्य की ओर,सत्ययुग की ओर बढ रहे है।
आप सभी आप खुद की अंतरआत्मा की आवाज सुनो,मैं जो कह रहा हुं,यही आवाज आप सभी के अंदर से जरुर आयेगी।
क्यों???
क्योंकी उन्मत्त कली का उन्माद,हाहा:कार,थैमान,अंध:कार अब बहुत हो चुका है।संपुर्ण विश्व अपने कब्जे में लेने की कोशीश करने के बावजुद भी,कली इस पवित्र भारत भुमी पर,देव भुमी पर,ऋषी मुनी,साधुसंतो की भुमी पर,सिध्द पुरूषों की भुमी पर,महात्माओं की पावन भुमी पर,उन्मत्त कली अपना साम्राज्य फैलाने में विजयी नही हुआ है।
मगर इसिलीए,सत्य की रक्षा के लिए,इस पवित्र भुमी पर अनेक पुण्यात्माओं ने समय के अनुसार अपना बलीदान दिया है।जिन्होने धर्मरक्षा के लिए,बलीदान स्विकार किया है,वह व्यर्थ नही गया है।वह सभी पुण्यात्माएं स्वर्ग में गए है।
मोक्ष।मुक्ती।
"पुनरपी जननं,पुनरपी मरणं।पुनरपी जननी जठरे शयनं "से भी मुक्त।
दिव्य स्वर्गीय आनंद एवं चैतन्य।
तो चलो सत्य की ओर।
अब इस पवित्र भारतभुमी को फिर से संपुर्ण विश्व में,"विश्व-गुरु।"का स्थान देने के लिए,अब तैय्यार भी हो जाओ।आवो सब मिलकर सत्य की जीत करें।
हरी ओम।🕉🚩🚩
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[23/01 8:31 pm] Papa: चलते चलते।
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गरीबी दिखाएंगे तो
मुखौटे वाले दोस्त
भाग जाएंगे।
अमीरी दिखाएंगे तो
दूर दूर के भी
रीश्ता जोडने की
कोशीश में लगेंगे।
होड लगाएंगे।
अगर परखना है
दुनीया को और दुनीयादारी को यारों तो
चाणक्य निती को
अपनाओ।
दूध का दूध और
पाणी का पाणी हो जायेगा।
असली नकली का भी
पता चल जायेगा।
काँच के टुकडे और
असली हिरे की पहचान
हो जायेगी।
तभी जींदगी का सफर
आसान हो जायेगा।
परखकर दोस्त बनाओ,
परखकर गुरु बनाओ,
परखकर बनाना है अगर कोई शिष्य
तो कोई शिष्य भी बनाओ।
भगवान भी अनेक परीक्षाँएं उत्तीर्ण होने बगैर नही मिलता।
अनेक कठोर अग्नीपरीक्षा एवं सत्व-
परीक्षा पास हुएबगैर
भगवान भी नही मिलते
और सद्गुरु भी
परखने बगैर कृपा नही करते।
यही तो जीवन है,
यही तो असलीयत है।
रंगबिरंगी दुनीया को
कली के साम्राज्य को
परखना है तो,
कौटील्य बनो।फिर...
"दिव्य मंजील",के सभी
रास्ते आसान बन ही जायेंगे।
यही तो "निती शास्र्त"है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:34 pm] Papa: कुत्ता फिर भौंक गया।
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आक्रमण कारीयों की हड्डी चाटने वाला
एक पागल कुत्ता
फिर भौंक गया।
राम,सिता,हनुमान
और विष्णुजी के बारें मे
उल्टा सिधा बोल गया।
वोटों का लाचार कुत्ता
सत्ता-संपत्ती की लालच
में फिर बेईमान बन गया।
जयचंदों की ये औलाद है
गद्दारों की टोली का
नायक है।
हम चार दिन धिक्कार
ही करते रहेंगे।
इधर उधर विरोधी मेसैज
घुमेंगे।
कानुनन हम ऐसे
गंदगी फैलानेवाले नाली के
किडे को सजा नही
दे पायेंगे।
हर दिन हर पल ऐसे कुत्ते
भौकेंगे।
इसीलीए प्यारे भाईयों
एक हो जाओ।
और ऐसा सक्त कानुन बनाओ की
आइंदा ऐसा कुत्ता कभी भी
नही भौगेका।
देवी देवताओं को
बदनाम करने की
कभी हिम्मत नही करेगा।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:34 pm] Papa: चलते चलते।
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हमारे देश के पैसों से
अच्छी अच्छी फिल्म
बनाते है कुछ लोग।
अब्जावधी का धन
कमाते है इस देश में।
वो भी हमारा ही पैसा।
और दान में पैसा
देते है शत्रुराष्ट्र पाकिस्तान को।
पाकिस्तान क्या करेगा?
उसी पैसों से बम बारूद
खरीदेगा ...और...
जीसने पाकिस्तान को मदद दी और रहता
मुंबई में है,तो
उस मुंबई में ही बम बारुद
लगाएगा।
जीसने पाक को पैसा दिया
उसको भी उडायेगा।
और ये पाकिस्तान प्रेमी
हमारा पैसा उधर ही
लगायेगा।
अब ऐसे हमारे शत्रुपर
प्रेम करने वालों का
बहिष्कार करो।
उसकी
फिल्म देखना बंद करो।
जब ये कंगाल होगा तो
नाही पाक को पैसा भेजेगा
और नाही पाक बम बारूद
खरीदेगा।
जो पाकिस्तान जैसे
शत्रुदेश को मदद करेगा
उसे सख्त सजा देने के लिए
कठोर कानुन भी बनाओ।
हिंदुस्थानीयों का
नमक खाकर उनसे
गद्दारी करने वालों को
अब सभी मिलकर
सबक सिखाओ।
बहिष्कार।बहिष्कार।
गद्दारों का करो बहिष्कार।
जय हिंद।वंन्दे मातरम्।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:34 pm] Papa: चलते चलते।
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"वो"मुठ्ठीभर होकर
भी हमें भगाते रहे।
"हम"भारी मात्रा में
होकर भी भागते रहे।
आखिर क्यों???
"वो"आक्रामक है,हिंसक भी
"हम"भाई-भाई का
जाप करने वालें और
प्रमाण से जादा सहिष्णु।
"वो"एक है और"हम"??
आपस में झगड झगड कर
खुद को ही शक्तीहीन बना रहे है।
"वो"हमेशा हत्यारबंद और
"सावधान"है।
"हम"लाठी लेने को भी
डरते है और हमेशा के लिए बेसावध भी।
"वो"चौबीसो घंटे कुट निती से ही चलते है।
"हम "हमेशा सिदे सादे
भोलेभाले ही रहते है।
भगाने के लिए"वो"हमेशा
मौके की तलाश में ही
रहते है।और हम....??
"उन्हे"भगाने का मौका देते है।और "हम"भागने के मौके ढुंढते है।
"हम"तेजहीन बनते जा
रहे है।
और "वो"हमें "अनेक तरीके
से तेजोहीन बना रहे है।
"वो"भयंकर षड्यंत्रकारी
तो "हम"बहुत ही अज्ञान है।
"वो"सभी सजग है।"हमारे"
अनेक सोये हुए है।
"हमारे"यहाँ उनको बडा
करनेवाले अनेक गद्दार
जयचंद है।
"उनके "यहाँ एक भी जयचंद नही है।
आयी कुछ बात समझ में?
"हम" जगह जगह से
भागते क्यों है?
और"वो"हमें भगाते क्यों है?
"हम"एक एक करके
पलायन वाद का स्विकार कर रहे है।
और "वो"संगठीत होकर
"हमें"पलायन करने
पर विवश कर रहे है।
और ""अंदर ""!!! का मामला भी
अती गंभीर है।
"प्रणाली"भी कुछ ऐसी बनाई है की
"हम"भागने पर ही विवष हो।
"वो"भगाने में कामयाब हो।
"हम"सभी भुजाओं से
मजबुर शक्तीहीन हो
"वो"सभी मार्गों से सशक्त
और आक्रामक हो।
"उनकी "संख्या बढें और
"हमारी"संख्या घटें।
सोचो।जागो।
यह सिलसिला जारी रहा
तो "हम"एक दिन
अस्तित्वहीन हो जायेंगे।
समय और भविष्य का
सोचकर,सोच समझकर
"रणनिती"बनाओ।
होशीयार हो जाओ।
"भागने"का सिलसिला बंद करों।
"शक्तीमान"बनो,सशक्त बनो,संगठीत हो जाओ।
"आक्रमण कारीयों से"
सावधान रहो।
"अखंड सावधान।"
और कितने दिनों तक
बेफिक्र एवं सोते रहेंगे?
सोचो,समय तेजी से
बढ रहा है।
कालचक्र कभी भी रुकता
नही है।और ना ही किसीको कभी क्षमा करता है।
अब "हमें" ही"काल"पर
"विजय"प्राप्त करनी है।
जय हिंद।
वंन्दे मातरम्।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:35 pm] Papa: 🌞।।ईश्वर पुत्रों।। 🌞
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🌞सभी ईश्वर पुत्रों अब
तुम जाग जाओ।
उन्मत्त कली का
तम हटाने के लिए
एक हो जाओ।
👹असुरी शक्ती का
बिमोड करने के लिए
आपसी मतभेद छोडकर
संगठीत हो जाओ।
⏰समय की यही
पुकार है,यही समय की
माँग है।
🌞अब ना हम रूकेंगे
दुष्टों के सामने हम कभी
ना झुकेंगे।
ना अटकेंगे,ना हमारे
कोई भाई को अटकने देंगे।
🌞ना कानुन हाथ में लेंगे
ना अन्याय अत्याचार
हम अब सहेंगे।
👹अन्याय अत्याचार का
हम जमकर विरोध करेंगे।
🌞और ना ही हम किसी
पर,कभी भी अन्याय
अत्याचार करेंगे।
✅अब सब मिलकर
एकसाथ,"नवराष्ट्र,"
निर्माण हम करेंगे।
🚩अब नवराष्ट्र निर्माण
हम करके ही रहेंगे।
🕉हिंद की इस पावन भुमी
पर हम,"ईश्वरी राज्य,"
लाकर रहेंगे।
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🌞 -- विनोदकुमार महाजन।🌞
[23/01 8:35 pm] Papa: सुंबरान मांडल गा!!!
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होय,माझ्या खेड्यातुन लोकप्रीय अन लोकप्रीय लोकगीत.धनगरी ओव्या.
"सुंबरान मांडल गा,सुंबरान मांडल".
तो रात्रीच्या वेळी ओव्या गातानाचा,धनगर नाचतानाचा अन हलगीच्या तालावर धुंद करणारा,ईश्वरी आनंद देणारा,आत्मा जागवणारा तो आवाज,आजही गानात गुंजतो आहे.आज पुण्यात रहायला आलो तरीसुध्दा,ते धुंद खेड्यातल बालपण नाही विसरु शकत.
खेड्यातल एक अवर्णीय जीवन.अठरा पगड जाती म्हणजे जणु एक कुटुंब.सुख दु:ख वाटुन घेणार.जातीपातीच्या भिंतीपलीकडच.
बामण वाडा,धनगर वाडा,कुंभार वाडा,लव्हार वाडा,सुतार वाडा,वडर वाडा,मांग वाडा,महार वाडा.सगळे आत्मीयतेमध्ये रुतलेले प्रेमळ वाडे?प्रत्येक वाड्यात माझा घरगुती अन आत्मीयतेचा संबंध.भेदभाव नाही,भांडण कटकट नाही,जातीयवाद नाही.सगळी कशी एका भगवंताची सारखी लेकर.
सगळीकडे माझा,बामण गडी असलो तरी प्रेमळ राबता.
सगळ्या जातींच्या लोकांचा मी लाडका.
धनगराची इटुबा-बिरुबा दैवत तर जणु माझीच दैवत.
मुसलमान मित्र पण तेवढेच.माझ्यावर जीवाभावाच प्रेम करणारे.माझ्याबरोबर पांडुरंगाचे बारीने दर्शन घेणारे,मला पदर खर्च करुन देहु आळंदीला देवदर्शनाला नेणारे,चंद्रभागेत स्नान करणारे,एखाद्या हिंदु जागृत देवाला मला घेवुन जाणारे,मुसलमान .त्यांच्या आठवणी आजही दाटुन येतात.
लांब दाढी मिश्या-केस वाढवलेले धनगराचे देवबप्पा,जे माझ्यावर पुत्रवत प्रेम करायचे,"सुंबरान मांडल गा",अशी वोवी गायचे, ते "देवबप्पा",स्वर्गवाशी झाले तरी आज ही नजरेसमोर जशेच्या तशे तरळतात.
ती शेती,त्या माझ्याशी बोलणा-या गाई म्हशी,ती बैल,ती बोलणारी कुत्री मांजर,ते"भलगरी गाणं,
ला व। ला व ।च गाणं.
जणु स्वर्ग.
धन्य ते बालपण.धन्य तो स्वर्ग.धन्य ती खेडी.अन् धन्य ती जुनी खेडवळ प्रेमळ माणस!!!!!
एकमेकावर जातीपातीच्या पल्याड जावुन भरभरुन प्रेम करणारी ती जुणी माणस।
आता फक्त त्या बालपणीच्या दिव्य आठवणीवर जगायच।असा काळ खरंच पुन्हा येईल?
"सुंबरान मांडल गा,सुंबरान मांडल.
शेकोटीच्या ऊबीला गा,
रातभर जागल".
-----------------------------
लेखक,
श्री विनोदकुमार महाजन,
प्रतीनिधी,
लाईव्ह महाराष्ट्र.
[23/01 8:35 pm] Papa: क्रुर और अती ठंडे दिमाग का,आध्यात्मीक,हिंदु
"युगपुरुष,"विश्व पर राज करेगा।और धर्म और ईश्वरी कानुन की पुर्नस्थापना करेगा।
(नोस्त्रोदमस की भविष्यवाणी)
【कौन है वह युगपुरुष,और कहाँ है】
[23/01 8:35 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
एक,"लाल बंदर",इस
देवी देवताओं के
महान देश में आ गया।
उसे,"निधर्मी",नाम का
सिध्दांतहीन,"किडा",
भी मिल गया।
समाजवाद नाम लेकर
और एक,"बंदर",
उसमें घुस गया।
उस "टोली",में मिल गए
और भी"अधर्मी",बंदर।
सभी ने मिलकर
देवताओं की भुमी पर
हाहा:कार मचाया।
तभी देवताओं ने भेजा
उनपर मात करने के लिए
एक दुत।
जो आज इन पापीयों के पिछे,हाथ धोकर पडा है।
एक एक का,"हैवानी किला" वो
ध्वस्त करके,सभी पर
विजय प्राप्त करके
अपनी,"दिव्य मंझील",
की ओर,नित दिन
बढता ही जा रहा है।
बढता ही जा रहा है।
---------------------–--------
🦋V...🦋K...🦋M...
[23/01 8:35 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
कुछ हमारे ही मुरख लोग
कहते है,"रामदेव",ने
बहुत बडा ब्यापार लगाया।
ये मुरख एह बात नही सोचते की,
"बाबाजी",ने तो परदेश में
जानेवाला ,
अनेक कंपनीयों का धन
रुकवाकर देश का
स्वाभीमान जगाया।
इस देश में ही अनेक लोगों
को,रोजी रोटी का साधन
दिलवाया।
देश का पैसा देश के ही
विकास में लगवाया।
मेरे ही कुछ मुरख लोग
कहते है की,"संन्यासी को",
क्यों चाहिए धन संपदा?
अरे मुर्खों वो तो,"देवदुत",
है,जो तुम्हें और तुम्हारे
संस्कृती,सिध्दांतो को
बचाने को है आया।
वो तो बस्स...एक ही...
"भगवे वस्र्त",में ही
रहता है।
एक "लाल बंदरीनी",कहती है,
बाबा तो मिलावट करते है।
अरे "लाल बंदरीनी",
मिलावट तो तेरे जैसे
मक्कार के दिमाग में है
जो दिन रात,"संस्कृती"
समाप्त करने का दिन रात
सपना देखती है।
सत्य को मिटाने का
सपना देखने वालों
तुम क्या मिटाओगे
सत्य को?
एक दिन ऐसा आयेगा
की,"सत्य ने असत्य का",
देश से ही नही
दुनीया से भी
नामोनिशान मिटा दिया।
हरी ओम।
------------------–----------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:35 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
कभी मिलेगा मान
होगा कभी अपमान।
होगा कभी सुख
तो आयेगा कभी दुख।
सुख और मान में तो
हम बहुत आनंदीत
होते है और....
अपमान और दुख से
हमें दिल को ठेस लगती है।
गलत फहमीयाँ भी
होती रहती है
हर एक के जीवन में।
कभी सच लगता है झुट
तो कभी झुट भी
लगता है सच।
कभी तो हमें दानव भी
देव लगता है।
और कभी हमें देव भी
बुरा लगने लगता है।
समय समय की बात है।
और...कभी कभी नजरीयाँ की भी बात है।
इसीका नाम जीवन है।
जो हम सब को
नित दिन चलते ही
रहना है।
चलते चलते,"धुंप-छाँव"भी
हमें सहना है।
कोई क्या सोचे
ये हमारे बस की बात नही।
बस...अपना अपना ही तो
नजरीयाँ है।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:35 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
जब हमारी कोई
स्तुती करता है तो
हमें बहुत ही अच्छा
लगता है।
और..अगर कोई हमारी
निंदा करता है तो
हमें बुरा लगता है।
और अगर हम अच्छे कर्म
कर रहे है और
हमारी कोई अगर
विनावजह ही निंदा
करता है तो हमें
और भी बुरा लगता है।
सज्जनों द्वारा हमारी स्तुती
और दुर्जनों द्वारा
हमारी अख़ंड निंदा
यही खेल तो जीवन भर
चलता ही रहता है।
इसीलिए स्तुती निंदा के
खेल में मत अटकों।
भला बुरा मानना भी
छोड दो।
क्योंकी जो सच्चाई के
रास्ते पर चलते है...
उन्हे संकटों का सामना
तो करना ही पडता है।
फिर भी उसके सत्य का
रखवाला...खुद ईश्वर
होता है।
इसिलीए दोस्तों चिंता छोडो,चिंतन करो।
"सत्य परेशान हो सकता है
परास्त कभी भी नही।"
ये पंक्तीयाँ याद करों।
यही पंक्तियाँ सबको
अत्याचार-अन्याय-असत्य -झूट के खिलाफ
लडने में शक्ती देगी।
हरी ओम,तत् सत्।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:35 pm] Papa: चलते चलते।
-----------------------------
अन्याय का जमकर
विरोध करों।
पुण्यवानों के पिछे
शक्ती खडी कर दो।
अत्याचार के विरूध्द
एक हो जाओ।
राष्ट्रचेतना जगाओ,
राष्ट्रप्रेम बढाओ।
जागृत आत्मशक्ती द्वारा
नया युग,नया समाज
बनाओ।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:35 pm] Papa: चलते चलते।
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ईन्सानीयत बचाओ
ईन्सानीयत बढाओ।
हैवानीयत और असुरी
शक्तीयों का जमकर सभी
विरोध करो।
सभी पर पवित्र,दिव्य
स्वर्गीय,ईश्वरी प्रेम करो।
पशु पक्षीयों में भी बसे
आत्माओं को पहचानो।
उनपर भी सभी
सच्चा प्रेम करो।
सब इंन्सान एक हो जाए।
आवो सब मिलकर
पृथ्वी का स्वर्ग बनाओ।
सब को जगाओ,
सभी के अंदर का
"दिव्य चैतन्य",जगाओ।
हम सब प्रभु की
प्यारी संतान,सभी मिलकर
प्रेम के अमृत सागर में
आनंद से नहाओ।
ईंन्सानीयत बचाओ,
ईंन्सानीयत बढाओ।
हरी हरी:ओम।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:37 pm] Papa: टेंन्शन वेंन्शन छोड भी दो।
------------------------------
मानव देह भगवान ने
दिया है.....सो......
टेंन्शन नही लेने का।
बुढा हो या नौजवान
हँसते खेलते रहने का।
छोटा बच्चा बनकर
आनंद से जीवन जीने का।
सदा हँसना खेलना
नाचना गाना
नित भगवान के भजन में
बडी खुशी से
जीवन बिताने का।
कभी टेंन्शंन नही लेनेका।
एक मुरत बनकर
कभी नही रहने का।
खुश होकर सारा जीवन
बिताने का।
हुफ्फ....मुँह बनाकर
नही रहने का।
बडे ही आनंद से सभी को
चैतन्य बाँटने का
काम करने का।
मस्त मस्त खुशीयों से
सभी को हँसते खेलते
सदा रखने का।
कभी भी किस बात का भी
टेंन्शन नही लेने का।
आई समझ में मेरी बात?
यारों,जीवन में कभी
मत रहो उदास।
सुख हो या दुख
सदैव"चैतन्यमय"ही रहने का।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:37 pm] Papa: चायना का मोबाईल मत खरीदें।जिसने लिए है तुरंत उसकी बैटरी निकाल के फेंक दो।शायद बैटरी में बारुद जैसा कोई भरा है।मोबाईल ब्लाष्ट हो रहे है।
शायद चायना का युध्द जितने का,और देशवासींयों को अंदर से खोकला करने का ये चायना का प्लान हो सकता है।
ऐसे ढोंगी चायना के सभी वस्तुओं आ तुरंत बहिष्कार करें।देश बचाओं।
---जनहीत में जारी।
V.K.M.
[23/01 8:37 pm] Papa: घणाघात।
----------------------------–-
थोडे दिनों बाद मैं अधर्म पर घणाघात करने वाला हुं।प्रहार।
लेखन से,वत्कृत्व से,कर्तृत्व से।पुरा देश एवं पुरा विश्व मैं हिलाने वाला ही हुं।
और.......
हिलाकर ही रखुंगा।बस्स......थोडा इंतजार बाकी है।
नेतृत्व,वक्रृत्व और कर्तृत्व।...........
------------------------------
[23/01 8:37 pm] Papa: #महत्वपूर्ण #सूचना
"Hate Speech Act"
यदि कोई व्यक्ति हिंदुओ के श्रद्धास्थान आस्था के प्रतीक देवी देवता साधू संत महंत के बारे में सोशल मीडिया जैसे Facebook, WhatsApp, Twitter इत्यादि पर अपशब्द कहता है तो उस पोस्ट का प्रिंट लेकर नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर *"IT Act Section 66,153(A),295IPC "* के तहत उस पर FIR दर्ज की जा सकती है |
उस व्यक्ति पर "Non-Bailable" (गैर जमानती) वारंट जारी होगी ।
सभी हिंदु साथियों को फारवर्ड करे ।
*जय हिन्दुराष्ट्र*
[23/01 8:37 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
आजादी के बाद
किसीने कैसा मंतर चलाया।
जाती पाती में बैर
लगाया।
"हिंदु धर्म को"बदनाम
करने का अती भयंकर
घोर षड्यंत्र चलाया।
साधु संतो को
बदनाम किया।
उन्हे जेलों में भरकर
धर्म को ध्वस्त करने का
भयंकर पाप किया।
मगर,सत्य कभी भी
हारता नही।
सत्य परेशान जरुर
हो सकता है।
मगर..हमेशा सत्य
जीतता ही है।
और जब सत्य जीतता है
तो पापीयों का
नामोनिशान भी
सदा के लिए
मिटा ही देता है।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:37 pm] Papa: 🌞हम और👹वो।
🤔😳🤔😳🤔😳
🌞हम बहुत ही सिदे सादे
भोले भाले होते है रे बाबा।
🙏सभी को प्रणाम,रामराम
कहते है रे बाबा।
पशु पक्षीयों सहीत सभी पर हम सच्चा प्रेम
करते है रे बाबा।
👹और वो
मिठी मिठी बातें करके
हमें फँसाते है रे बाबा।
😫सही वक्त का इंतजार
करके,वक्त आने पर हमें
रूलाते है रे बाबा।
🤔हमारा नामोनिशान
मिटाने का अंदर ही अंदर
नित दिन सोचते है रे बाबा।
😳और हम आपस में ही
लड झगडकर
उनको ही बडा
करते है रे बाबा।
⛳असलीयत पहचान जाव,जल्दी सुधर जाव
⏰समय बडा कठीण
चल रहा है रे बाबा।
🆗राम राम।
👍👍👍👍👍👍👍
V🦋K🦋M🦋
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
[23/01 8:37 pm] Papa: इसीका नाम जीवन है यारों।
------------------------------
इंन्सान का जीवन भी क्या है आखिर?मेरा,तुम्हारा,आप सभी का जीवन क्या है आखिर यारों?
सुख दुख का मेला।उसमें भी दुख जादा और सुख कम।इसीका नाम ही तो जीवन है।
चाहे हम कितनी भी कोशीश करें,दुख हटता नही।सुख आता नही।
अनेक समस्याओं से भरा जीवन।पग पग पर संघर्ष।पग पग पर परेशानीयाँ।
कभी आर्थीक समस्याएं तो कभी बिमारीयों की परेशानीयाँ।कभी अपना मन साफ,स्वचछ होने के बावजुद भी,सभी का कल्याण करने की,देखने की इच्छा होकर भी ,पग पग पर हमारे ही रीश्तेदारों द्वारा,हमारे ही अपनों द्वारा,समाज द्वारा सतत हमारे इच्छेविरुध्द की घटनांएं हो जाना।इससे भी हम बहुत दुखी होते है।
मन कहता है या फिर हम भी उस रिश्तेदार को कहते है,"अरे,मेरा सुन लिया होता-मेरा थोडा कुछ मान लिया होता तो तुझे आज संकटों का सामना नही करना पडता।"
हमने तो उसे प्रेम से कह दिया।मगर..........
जीसके कल्याण के लिए हम उसे कहते है,तो वही व्यक्ती हमारी सुनने के बजाए हमें ही उल्टी सिधी सुनाता है।और हम मन ही मन जादा दुखी होते है।
ऐसा ही होता है हर मनुष्य प्रणीयों के साथ।उसके इच्छा अनुसार घटनांएं कभी भी नही होती।बल्की सब इच्छेविरूध्द ही होता रहता है।
और हम अंदर ही अंदर दुखी होते है।
मनुष्य देह में चाहे राम आये या कृष्ण।उन्हे भी भगवान होकर भी सब उनके इच्छेअनुसार कब होता है?
उनके ही इच्छेविरूध्द सब कुछ होता रहता है।
रामजी को बनवास जाना पडता है,इच्छेविरूध्द सिता का हरण होता है।
राम को रावण,कृष्ण को कंस-दुर्योधन पिडा देता है।सबकुछ भगवान के इच्छाविरुध्द।
अर्जुन को युध्दभुमी पर अपने इच्छेविरुध्दही लडना पडता है।
नित दिन,हर पल हम सभी यही समस्यांओं से घिरे रहते है।है ना भाईयों?ऐसा लगता है की सबकुछ छोडकर हिमालय में जाकर,तपस्या में ही जीवन बिताएं।मगर ऐसा भी हम नही कर सकते।हरगीज नही।सब माया का खेला।चाहकर भी हम विपरीत स्थिती,घटनाओं को टाल नही सकते।
मन तो बहुत दुखी होता है।और यही दुखी स्थिती में मन फिर से सुख की तलाश में,नित दिन आगे निकलता है।सोचता है,"आगे मुझे सुख जरुर मिलेगा।"
सुख आगे भागता है।और हम बडी आशाएं लेकर-बडी उम्मीद लेकर ,जीवन भर के लिए,उसके पिछे भागते रहते है।
कभी हताश होकर,कभी ऊदास होकर।
करते करते,बचपन,तारुण्य समाप्त हो जाता है।
बुढापा सामने दिखता है।
और फिर मन कहता है"अरे,मैंने जीवन में क्या पायां?"
"कुछ भी तो नही।"मन की दुसरी आवाज यही आती है।
इसीलिए प्यारे,अगर चाहीए सुख दुख से-खुशी गम से मुक्ती,....तो...
रट ले प्यारे तु प्रभु का नाम।नित दिन ,हर पल।
यहाँ कोई नही है किसीका।
कोई नही है किसीका सुनने वाला।
रावण-कंस-दुर्योधन भी,"भगवान का भी,जी हाँ---भगवान का भी।"
कहना नही मानते।
तो हमारा कौन मानेगा?
और अगर मानते भी,तो रामायण -महाभारत भी कैसे होती?
आखिर सब भगवान की माया,सब उसीका खेला।
सुख के पिछे मत भाग प्राणी,यह तो दुखों का मेला है।हमारे ही प्रारब्ध गती अनुसार,दो दिनों का ये सारा खेल है।
जन्म मृत्यु का फेरा तो निरंतर चलता ही रहेगा।
बस्स...इसमें...
सत्य-निरंतर-शुध्द-पवित्र-सदैव आनंददाई एवं अमृतमई एक ही चिज है..
"माँ का निष्पाप प्रेम..सद्गुरु का दिव्य प्रेम..और....ईश्वर का निष्ककपट,निष्कलंक प्रेम।"
छोटा बच्चा बनकर बुढापे तक रहेंगे-जीयेंगे,तो
यह प्रेम का अमृत निरंतर
मिलता ही रहेगा।और इसी अमृत सागर के आनंद में हम सभी तैरते रहेंगे ही।
तो मेरे प्यारे दोस्तों ,हँसते रहिए-मुस्कुराते रहीए।छोटा सा बच्चा बनकर
मस्त मस्त खुशींयों से जीवन बिताएंगे।हम कभी किसी को दुख नही देंगे।
पशु पक्षीयों सहीत सभी पर दिव्य-पवित्र प्रेम ही करेंगे।सभी को खुश मस्त रखेंगे।
डन?वादा रहा?ओके।डन।
खुश रहों।मस्त रहो।👍
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:37 pm] Papa: चलते चलते।
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रामनाथ के साथ
"राम "है।
कोविंद को "गोविंद "की
छाया है।
हाथ में लक्ष्मी जी का
"कमल"है।
पुरी "भारतीय जनता"भी
साथ है।
तो जीत तुम्हारी
पक्की है।
कोविंद नही तु
गोवींद है।
अब तु लेले
सुदर्शन चक्र हाथ में।
हटा दे 370 धारा
कश्मीर से।
अधर्मी को सजा दे
बंगाल में।
"हिंदुराष्ट्र"का तु ही
कर जयकारा।
हे मेरे गोविंद
अब कर दे तु ही
सत्य धर्म का उजीयारा।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:37 pm] Papa: चलते चलते।
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रामनाथ के साथ
"राम "है।
कोविंद को "गोविंद "की
छाया है।
हाथ में लक्ष्मी जी का
"कमल"है।
पुरी "भारतीय जनता"भी
साथ है।
तो जीत तुम्हारी
पक्की है।
कोविंद नही तु
गोवींद है।
अब तु लेले
सुदर्शन चक्र हाथ में।
हटा दे 370 धारा
कश्मीर से।
अधर्मी को सजा दे
बंगाल में।
"हिंदुराष्ट्र"का तु ही
कर जयकारा।
हे मेरे गोविंद
अब कर दे तु ही
सत्य धर्म का उजीयारा।
हरी गोवींद।हरी गोवींद।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:37 pm] Papa: साजीश।!!!!!!!
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गहरी साजीश।!!!!!!!!
जी हाँ,बहुत ही गहरी साजीश।
हिंदुओं को,हिंदु धर्म को,हिंदु संस्कृति को,देवी देवतांओं को बदनाम करने की साजीश।आजादी के बाद बहुत सोच समझकर की गई गहरी साजीश।
हिंदु धर्म के जाती पाती में झगडे लगाना,साधु संतों को बदनाम करना,उन्हे जेल भेजना,राष्ट्रप्रेमीयों का हमेशा गुढ मृत्यु होना।यह सभी घटनाएं आखिर क्या दर्शाती है?किसने किया यह षड्यंत्र?क्यों?क्या वजह?यहाँ के बहुसंख्यकों पर भयंकर अन्याय,अत्याचार किये गये।क्यों?किसने?राजा को ही गुलाम बनाया गया?क्यों?किसने किया यह भयंकर पाप?
केवल पढकर बात मत छोडीये यारों।गहराई से सोचो।और सोचकर कुछ तो भी सिखो।और अगली रणनिती बनाओ।साजीश के जड तक जाकर,पर्दाफाश करो।किसने और क्यों रची,खेली यह गहरी चाल?
परकीय आक्रमणकारीयों को राजा बनाने के लिए?उनको एक जमीन का टुकडा अलग देकर भी हमारे यहाँ भी स्थान दिया।उनको हद से जादा अधिकार भी दिये।हमारे ही पैसों से।हमारे ही मंदीरों के पैसों से।
और उपर हम पर ही अत्याचार किये।सोचो।
हमारे ही महापुरुषों की गुढ मृत्यु कैसे हो गई?
अरे बापरे।ये तो अंदरूनी मामला अती भयंकर दिखाई दे रहा है।
आज देश में गृहयुध्द की स्थिती पैदा हो रही है।मतलब तो साफ हो सकता है।जब अंदर का गृहयुध्द ताकदवर बनेगा,तब बाहर के भी आक्रमणकारी तैय्यार रहेंगे।
भयंकर।अती भयंकर।कौन है ऐसा षातीर दिमाग वाला?
और हम?षातीर दिमाग वालों की,हमे बर्बाद करने वाले षड्यंत्र को रचने वालों की भी,देवता समझकर पुजा कर बैठे।और उपर से उनके योजना अनुसार आपस में लड लडकर शक्ती कम करते रहे।और वो धिरे धिरे शक्ती बढाते रहे।
आई बात कुछ समझ में?
अब भी सुधर जाओ।एक हो जाओ।मतभेद छोड दो।शक्ती बढाओ।
हमारे महापुरुषों का जाती पाती में बँटवांरा करना छोडकर,सभी की पुण्यात्माओं को आनंद देने के लिए एक एक छत,एक ध्वज के निचे आ जाओ।
बिल्कुल यही निती से हमारे जन्मसिध्द अधिकारों के अनेक जगह की भुमी पर उन्होने कब्जा कर लिया है।
और भी,आज भी उनके अंदरूनी इरादे खतरनाक,भयंकर,उग्र और डेंजरस है।
और हम जादा तो सोये हुये या आपस में झगडने में आनंदीत होनेवाले है।
तो कुछ अज्ञान मे जी रहे है।कुछ रोजी रोटी में,तो कुछ धन वैभव,मान सन्मान कमानें में जुटे है।
समय कठीण है भाईयों।नफरतों का बाजार छोडकर एक हो जाओ।
संस्कृती बचाओ।देश बचाओ।
और सबसे महत्वपुर्ण बात,हमारे ही कुछ जयचंदो से,दोगलों से,आस्तीन के सापों से भी अखंड सावधान रहो।
बडे ही गहरे साजीश वाले है ये हरामी।खुद की माँ बहनों को भी बेचने वालें औलाद है ये।बहुत गद्दार है।इनकी मिठी मिठी बातों में मत फँसना।
ये तो हमारा ही ,अंदर से सर्वनाश करने पर तुले हुए है।ईतीहास गवाँ है यारों।
अतएव सावधान रहो।हमारे जन जन तक पहुंचकर उनका,सत्य की रक्षा के लिए रोम रोम जगाओ।
शत्रु सावधान है,षड्यंत्रकारी भी है।और मौके की तलाश में भी है।और शैतानी,हैवानी दिमाग का भी है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:44 pm] Papa: 🌞!!! । हिंदुराष्ट्र।!!!🌞
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हिंदुराष्ट्र।जी हाँ,हिंदुराष्ट्र।
कुछ ज्ञानी कहते है की २०२३ में हमारा देश हिंदुराष्ट्र बनकर रहेगा।और २०३६ में हिंदुमय विश्व बनेगा।
इससे पहले संपुर्ण विश्व में अनेक आश्चर्यजनक घटनाएं घटी जायेगी।और सभी घटनांओं का केंद्रबिंदु रहेगा हिंदुस्थान।
हिंदुस्थान का अध्यात्म ही संपुर्ण विश्व को तारक रहेगा।
अभी जो संपुर्ण विश्व पर नजर डाले तो क्या दिखता है?संपुर्ण विश्व का ध्रुवीकरण हो रहा है।सत् शक्तीयाँ बुराईयों के खिलाफ संपुर्ण विश्व में एक हो रही है।असुरी वृत्तीयों का जमकर विरोध हो रहा है।और धिरे धिरे यह विरोध बढता ही जायेगा।तभी विश्व मानव ईंन्सानीयत और कुदरत का कानुन अर्थात ईश्वर का कानुन बचाने में एक हो जायेंगे।अभी से एक होना भी शुरु हो रहा है।
और एक दिन ऐसा भी आयेगा की संपुर्ण मानव जाती को सनातन अर्थात हिंदु धर्म ही सही,सच्चा,अंतीम सत्य और ईश्वरी नियमों के अनुसार चलने वाला एकमात्र धर्म है इसका पुरा यकीन संपुर्ण मानव समुह को हो जायेगा।और संपुर्ण मानव समुह हिंदु धर्म को आदर्श मानकर उसमें एक हो जायेगा।और संपुर्ण विश्व ही एक दिन अवश्य हिंदुमय हो जायेगा।
क्या यह भविष्य वाणी है?तर्कशास्त्र है?या कोई भ्रम है?या कोई सच्चाई है,वास्तव है?इन सभी प्रश्नों के उत्तर के लिए बस् हमें थोडा इंतजार ही करना पडेगा।
एक बात तो निश्चीत तय है की नोस्ट्रोदमस जैसे अनेक भविष्य वेत्ताओं की अचंबित करने वाली अनेक आश्चर्यकारक भविष्यवाणीयाँ सही होने का समय बिल्कुल नजदीक आया है,यह बात तो पक्की है।
कोई मुझे पुछेगा की किस आधार पर या किस प्रमाण पर आप यह सब कहते हो?तो दोस्तों,सही उत्तर के लिए बस हमें कुछ इंतजार ही करना पडेगा।
मगर एक बात तो पक्की है की,जिसे भविष्य देखना आता है,उनकी नजरों से और संपुर्ण विश्व में जो घटनाएं हो रही है उससे जाहीर है की,समय....
करवट बदल रहा है।क्योंकी परीवर्तन ही सृष्टी का नियम है।
और संपुर्ण विश्व परीवर्तन की ओर बढ रहा है।सृष्टी,कुदरत करवट बदल रहे है।
आसमान में एक नया तारा उभरकर आ रहा है।जो इस सृष्टी के करवट का मसीहा बन जायेगा।
नही आ रहा है ना कुछ भी समझ में?चलो,और थोडा ईंतजार करते है।
समय,नियती,निसर्ग,कुदरत और खुद ईश्वर इसके लिए स्वर्ग से क्या योजना बना रहे है,वह बात तो ईश्वर ही जाने। योग्य समय पर ही सब पता चलेगा।
ईश्वरी इच्छा से मैं एक छोटासा जीव सिर्फ लिखने का ही काम कर सकता हुं।क्या सही क्या गलत भगवान ही जाने।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:44 pm] Papa: जी हाँ,
मेरे अंदर आग है।
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जी हाँ मेरे प्यारे भाईयों,
मेरे अंदर सचमुच में आग है।असत्य के खिलाफ,अन्याय अत्याचार के खिलाफ मेरे अंदर धधगती आग है।यही ज्वाला मुझे अंदर ही अंदर नित्य दिन जलाती है।ये क्रोध नही है।अत्याचार,अधर्म के खिलाफ ज्वाला है मेरे अंदर।
जो मेरे धर्म को,मेरे देवी देवतांओं को,मेरे सभ्य संस्कार-संस्कृती को,मेरे महापुरूषों को विनावजह बदनाम करते है,उनके खिलाफ मेरे अंदर आग है,ज्वाला है।जो मुझे कभी स्वस्थ नही बैठने देती है।
जिसने मेरे राम-कृष्ण को,मेरे राजे शिवाजी,महाराणा प्रताप,गुरु गोविंद सिंहजी को बदनाम किया,जिन्होने सत्य होकर भी सावरकर,सुभाष जैसे प्रखर राष्ट्र भक्तों को तडपाया उन सभी के खिलाफ मेरे अंदर आग है।
मगर क्या करुं?आज इसी वक्त उन अत्याचारीयों के खिलाफ जिन्होने सत्य को सदैव तडपाया ,कुछ लिखने के सिवाय,या निंदा करने के सिवाय मैं कुछ भी नही कर सकता हुं।
अत्याचारीयों को तो कठोर दंडीत ही कर देना चाहिए।
मगर कैसे?
कानुन की लडाई तो बहुत ही लंबी होती है।इस कानुन की लडाई में मेरे आदर्श पुरुष रामजी के जन्मस्थल के बारे में भी लंबे अर्से से न्याय नही मिल रहा है।आखिर क्यों और कब तक चलेगा यह सिलसिला?
ठीक इसी तरह मेरे धर्म को,देवी देवताओं को विनावजह बदनाम करने वाले षड्यंत्रकारीयों के खिलाफ भी आज मैं आज कुछ भी नही कर सकता हुं।वास्तव में ऐसे पापीयों को तो तुरंत कानुनन ही कठोर दंडीत ही कर देना चाहिए।
मेरे देश को आजादी दिलाने के लिए जिन क्रांतीकारीयों ने अपना खुन बहाया क्या उनके सपने आज सच में पुरे हो गए?क्या उन्हे अपीक्षीत यह आजादी है?क्या उन क्रांतीकारीयों का यह अपमान नही है,जो देश की भलाई के लिए फांशी पर हँसते हुए गए?
आज भी मेरे संत महापुरुषों को जेलों में बंद कर रखा गया है।
अट्टल गुनहगार इस देश में खुले आम घुमते है।और साधु संतों को जेल में भरकर भयंकर यातनाएं दी जाती है।क्यों हो रहा है यह सब?कौन जिम्मेदार है इसको?
न्याय चाहिए न्याय।सत्य को न्याय चाहिए।
जब तक न्याय नही मिलता,पुण्यात्माओं के आत्माओं को शांती कैसे मिलेगी?
मेरे प्यारे देशवासीयों,रामजी प्रत्यक्ष देहरुप में आये थे,तब उन्होने आदर्श सिध्दांतो के लिए बनवास खुद होकर स्विकार किया था।वह भी चौदा साल का ही था।
मगर अब उनके जन्म भुमी के बारे में जो उनका बनवास आज चल रहा है,वह और कितनें दिनों तक चलेगा?कब न्याय मिलेगा?और कितना इंतजार करना पडेगा?
हमारे आदर्श अवतारी पुरुष का,वह भी उनके ही जन्म स्थल पर परकीय आक्रमणकारीयों ने जो विनावजह विवाद खडा किया है,वह कब थमेगा?
अरे एक राम मंदीर हम इज्जत से,प्रेम से माँग रहे है।वह भी नही मिल रहा है।तो अब क्या खुद रामजी को ही फिरसे आकर न्याय की लडाई लडनी पडेगी?
मेरे राम के पवित्र स्थल के लिए हमें मत परेशान करों मेरे भाईयों।
हमारे ही भुमी में हम हमारे हक के लिए और यथोचित न्याय के लिए अनेक सालों से हमें लडना पड रहा है।
सोचो,अपना समझकर हमने तुमपर कितना सच्चा प्रेम किया?और तुम?हमारे आदर्श सिध्दांतो के न्याय के लिए भी हमें तडपा रहे हो।
ईश्वरी कानुन के अनुसार यह सब ठीक नही चल रहा है।
सोचो।
सोचो,मेरी और देश विदेश के सभी हिंदुओं की आग अगर मैंने एक की तो?और उपर से सभी धर्मों के न्याय प्रेमी,सत्य प्रेमी और इसमें सभी हिंदु धर्म प्रेमीयों की आग मैंने ही मिलाई तो?
क्या होगा?
सोचो।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:44 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
ऐ दूर के मुसाफिर
मंझील का रास्ता तु
चलता जा।
बिना थक के बिना हार के
मंजील की ओर तु
बढता जा।
पता है तुझे की जब...
तु चलने कोशीश करेगा
तो चंद महात्मा ही
तेरे पिछे खडे हो जायेंगे।
तुझे प्रोस्ताहीत करेंगे
तुझे आत्मबल,चेतना
उर्जा दे देंगे।
तेरा सन्मान बढायेंगे।
और......
जादा तो तुझे तेरे ही लोग
बार बार अपमानीत करेंगे
हतोत्साहीत,नाउमेद करेंगे।
तुझे हँसेंगे।
तेरा मंझील का रास्ता
बंद करने की कोशीश
तेरे ही कुछ लोग जरुर
करेंगे।
तेरे पाँव में बेडीयाँ डालकर
तेरे ही लोग तुझे
हँसेंगे,थुकेंगे।
तुझे गिराने की कोशीश
बार बार करेंगे।
इतीहास गवाँ है भैय्या।
फिर भी तु हार ना जाना।
हताश उदास मत बनना।
मंझील की ओर बढते ही रहना।
चाहे सभी दिशाओं पर,
दस दिशाओं पर
जीवन की लडाई अगर
लडना पडे अकेले ही तो....
लडते ही रहना।
लडते ही रहना।
तेरी किस्मत तो तेरे ही
हाँथ में है प्यारे।
क्षण क्षण तु लडते ही
रहना।
आँखरी सांस चले तब तक
तु लडते ही रहना।
जरूर एक दिन तु प्यारे
जीतकर ही रहेगा।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:44 pm] Papa: व्हाटस नंबर हैक हो रहे है।सावधान रहीये।महाराष्ट्र के नाशीक में ऐसी अनेक घटनाएं हो गई है।व्हाटस्अप अकाउंट हैक करके अनजान व्यक्ती अनेक अश्लील मेसैज भेज रहे है।साईबर क्राईम में शिकायत दर्ज हो चुकी है।
अपने व्हाटस्अप ग्रुप पर केवल परीचित को ही ले।कोई अनजान व्यक्ती को ना ले।
+96,+92,+98 आदी कंट्री कोड के नंबर अगर अपने ग्रुप पर है तो चेक किजीए और डिलीट किजीए।यह नंबर पाकीस्तान,अफगानीस्तान के कोड नंबर है।
अत:एव सभी सावधान रहे।किसी को ओटीपी ना बताए।
-- विनोदकुमार महाजन,पत्रकार,
पुणे।
[23/01 8:44 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
मंदीर हो या मस्जीद?
इसके लिए व्हाटस्अप
ग्रुप पर जोरों से
चलाया जा रहा है
एक मेसैज।
वोटींग करो,वोटींग करो।
अरे मेरे भाईयों
वहाँ केवल और केवल
राम मंदीर ही है
तो वोटींग किस लिए??
नो वोटींग,नो सेटींग।
ओन्ली राम मंदीर।
हमें लडाने की साजीश जानो
वोटींग का असली चेहरा
जानो पहचानो।
युगों युगों से वहाँ है
हमारा रामलला बिराजमान।
वहाँ वोटींग का क्या काम?
गहरी साजीश को तोडो
रामलला का वहाँ
शिघ्र भव्य मंदीर बनाओ।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:44 pm] Papa: हँसता हुआ जो जायेगा।
------------------------------
हे हे,
रोते हुए आते है सब
हँसता हुआ जो
जायेगा।
ओ हिंदुओं के दिलों का
राजा
कहलाएगा।
मेरे हिंदुओं ने
जीता है सदा,
प्यार से सब
जमीं और आसमाँ।
वो हिंदुओं के दिलों का...
हे हे....
जींदगी तो
बेवफा है,
एक दिन ठुकराएगी।
मौत तो सभी को
एक दिन गले
लगाएगी।
मरने से पहले
जीत ले प्यारे
सभी के दिलों दिमाग।
पुरे जमीं पर
कर दे अब
सत्य और सनातन की
प्रभात।
हे हे........
रोते हुए.......
------------------------------
-- रचना,
विनोदकुमार महाजन।
(फिल्म:मुक्कदर का सिकंदर,गीत:रोते हुए आते है सब,गायक:किशोर कुमार..इस अमिताबजी पर फिल्माया गया गीत पर आधारीत।
चाल:हे हे,रोते हुए....)
[23/01 8:44 pm] Papa: मोदीजी,
आगे बढो;देश तुम्हारे
साथ है।
------------------------------
जब से मोदीजी सत्ता में आये है,कुछ उपद्रवी शक्तीयाँ बेचैन हो गई है।विशेषत:भाजपा ने यु पी चुनाव जबरदस्त तरीके से जीतने के बाद,और यु पी के मुख्यमंत्री योगीजी बनने के बाद तो, कुछ राष्ट्रद्रदोही ताकदें हैरान हो गई है।
मोदी जी,और योगी जी जिस प्रकार से कार्य कर रहे है उससे ये शक्तीयाँ तो और भी परेशान हो रही है।
जिनके विषैलै दाँत देखकर भारतीय जनता भी हैरान और स्तिमीत हो गई है।
मोदी जी बिना हिचकिचाहट से आप आगे बढीये।संपुर्ण राष्ट्र आपके पिछे संपुर्ण शक्ती से खडा है।बस्स,और कार्यशक्ती बढाईये।
अगर जरूरत पडे तो इन देशद्रोही शक्तीयों को कुचलने के लिए सख्त से सख्त कानुन बनाईयें।भारतीय संविधान ने समय समय पर घटना दुरुस्ती का मौलीक अधिकार सांसदों को दिया है।अगर जरूरत पडे तो उस अधिकार का भी जरूर इस्तेमाल किजीए।
एक,"युगपुरुष",के रुप में देश और संपुर्ण विश्व भी आप की ओर बडी आशा से देख रहा है।
विशेषत:इस देश में रहकर,पाकीस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले,और उनके पिछे खडे रहनेवालों को तुरंत कठोर शासन द्वारा दंडीत करने के लिए ऐसे कानुन की सख्त जरूरत आ पडी है।
ठीक इसी तरह देश में विविध माध्यमों द्वारा राष्ट्रविघातक शक्तीयाँ ,हर प्रकार से देश में अराजक फैलानी की कोशीश में जो बुरी शक्तीयाँ दृश्य-अदृश्य रुप से कार्य में जुटी है,उनका पुरा बंदोबस्त तुरंत किजीए मोदीजी।आजादी के बाद पहली बार संपुर्ण देश आपसे अनेक अपेक्षांएं ले बैठा है।
देश में रहकर हमारे सैनीकों पर जो बुरी टिप्पणीयाँ कर रहा है,या उनका आत्मबल कम करने की कोशीश कर रहा है,ऐसे नपुसंक-गद्दार-राष्ट्रद्रोही शक्तींयों का कानुनन पुरा बंदोबस्त किजीए मोदीजी।
आगे चलो।देश आपके साथ है।किसान आपके साथ है।जवान आपके साथ है।गरीब आपके साथ है।अमिर आप के साथ है।
संपुर्ण देश आपके साथ है।जनता को न्याय चाहिए।
उन्नीस का चुनाव तो आप आज ही जीत गए हो समझो।फिर भी सावधान रहना।गाफिल नही रहना।देश के लुटारु,भेडीयें,किस भी हद तक जा सकते है।
और एक बात,मोदीजी आप सभी को साथ लेकर चल रहे हो।"सबका साथ-सबका विकास",ये जो मंत्र आपने दिया है,वह मंत्र भेदभाव विहीन एवं सभी धर्म-जात-पंथ को आगे ले जाने के लिए ही किया है।
इसिलीए सभी जनता ही नही तो संपुर्ण राष्ट्र और खुद ईश्वर भी आपके साथ चौबिसो घंटे है।
ये कोई धर्म-जात-मजहब की लडाई नही है।यह तो इन्सानियत की लडाई है।यह तो ईश्वरी कानुन की लडाई है।यह तो सत-असत की,देव-दानव की लडाई है।
और इस लडाई में संपुर्ण देवता एवं सभी दैवी शक्तीयाँ आप के सथ अदृश्य रुप से मौजुद है।
सो-गो अहेड,मोदीजी।
नवराष्ट्र निर्माण के ईश्वरी कार्य को अनेक अनेक शुभेच्छा।
हरी ओम।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
पत्रकार।
पुणे।
[23/01 8:44 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
प्रसन्न व्यक्ती सदा
खुश रहता है,
दुसरों को भी सदा
खुश रखता है।
दुखी व्यक्ती सदा
दुखी रहता है,
और दुसरों को भी
सदा दुखी ही रखता है।
सो,मेरे सारे प्यारे दोस्तों
सदा खुश रहो,मस्त रहो।
सदा हँसते रहो
सभी को प्रेम से हँसाते रहो।
मस्त कलंदर बनके जीओ।
मस्त दरीया दिलवाला
बनके जीओ।
बुढे हो या बच्चे हो,
चाहे हो नौजवान।
नाचो गांवों हंसो खेलो
छोटा बच्चा बनकर
प्यारे दोस्तों सभी
मस्त मस्त जीओ।
प्रेम दे दो,प्रेम ले लो।
खुशी से जीवन
सारा बिता लो।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
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