संपूर्ण लेखांक भाग २४
मोदीजी,
समय की जरूरत।
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जी हाँ,आज देश को मोदीजी जैसे महान प्रधानमंत्री की सख्त जरुरत है।
जब भाजपा दिल्ली और बिहार बाद में पश्चीम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा के लिए हारी थी,तो मैं बहुत दुखी हुआ था।
जब धिरे धिरे भाजपा जीतने लगी तो मैं बहुत आनंदीत हुआ था।सभी देशप्रेमी भी इसीलीए आनंदीत हो गए है।
मेरी जागृत लेखनी की वजह से मुझे एक राष्ट्रीय पार्टी ने,पार्टी बढाने के उद्देश्य से मुझे,उस पार्टी ने,मिडीया शक्ती का,ओल इंडीया प्रेसीडेंट नियुक्त किया था।
मगर अलग विचार धारा और मोदीजी का विरोध जानकर मैंने उस पार्टी का कार्य नही बढाया।
दुसरी भी पार्टीयों ने,जो मोदी का विरोध करते थे,मुझे अनेक ओफर्स किए थे।
मैंने ये भी उचीत नही समझा।एक कट्टर हिंदुत्ववादी पार्टी निकालकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का विरोध करने की रणनिती भी मैंने बनाई थी।
मगर जाहीर है,हिंदु मतों का विभाजन हो जाता।इसिलीए यही विचार भी मैंने छोड दिये।
अब मोदीजी जो कुछ कर रहे है वह बिल्कुल योग्य और सही कर रहे है।कोई भी जागृत राष्ट्राभिमानी व्यक्ती उनका विरोध नही कर सकता।और यह योग्य भी नही होगा।
मोदीजी आज देश की और समय की माँग है।
देशहीत को सामने रखते,मुझे और मेरे जैसे अनेक राष्ट्रप्रेमीयों को,ना चाहीए सत्ता,ना संपत्ती,ना मान ना सन्मान।ना बडप्पन,ना हार तुरे।निजी स्वार्थ के लिए मोदीजी का विरोध करना हैवानीयत की हाव है।
चाहे मैं छोटा रहुं तो चलेगा,अंधेरें में रहुं तो भी चलेगा।मुसीबतों में रहुं वो भी चलेगा।मगर राष्ट्रहीत और राष्ट्रसम्मान के बारें में कोई भी समझौता नही।
मेरे जैसे अनेक प्रखर राष्ट्राभिमानी देश का हित चाहते है।जो जरूरत हो तो अंधेरे में रहना पसंद करेंगे,मगर निजी स्वार्थ के लिए,मोदीजी का विरोध नही करेंगे।
आज परमपुज्य दिवाकर श्री जी ने मुझे,मोदी वाहीनी का,मिडीया शक्ती के लिए,जो राष्ट्रीय प्रभारी होने का जो अच्छा पद दिया है,तो और मान-सन्मान क्या चाहीए?
फिर भी मुझे आज भी ना पद की अपेक्षा है,ना प्रतीष्ठा की।राष्ट्र पुनर्निर्माण में मर मिट जाऊं,या राष्ट्रहीत के लिए संपुर्ण समर्मीत भी हो जाऊं तो भी कम है।पंचमहाभुतों का देह तो निमित्यमात्र है।
मेरी भारत माता को,और प्रभु के सुंदर धरती माता को दुष्टों से मुक्त करते करते प्राण भी चले जाएं तो भी दुख नही तो आनंद ही होगा।
मेरे राष्ट्रप्रेमी क्रांतीकारी हँसते हँसते राष्ट्र के लिए,समर्पीत हो गए।
उनके आदर्श सिध्दांतो पर चलने वाला मैं भी और मेरे जैसे अनेक व्यक्ती भी आज भी इस देश में मौजुद है।मैं भी इसमें एक सौभाग्यशाली हुं।मगर...
आज मेरे ही कुछ हिंदु भाई निजी स्वार्थ के लिए,मोदीजी का विरोध कर रहे है,इससे तो मैं सौ प्रतीशत दुखी हुं।
हमारी संस्कृती,परंपरा स्वार्थ की नही है।समर्पण की है।आज का मोदी विरोध हमारे ही लोगो द्वारा देखता हुं,तो इन स्वार्थी और राक्षसी वृत्ती से हैराण रह जाता हुं।परेशान हो जाता हुं।
समर्पीत भाव से चलने वाले मेरे देशवासींयों को आज हो क्या गया है?
मोदीजी भी तो संपुर्ण समर्पित भाव से राष्ट्र का पुनर्निर्माण एवं नवनिर्माण कर रहे है।उनका सभी मिलकर साथ तो दें?कम से कम उनका विरोध तो ना करें?
यही निती सभी राष्ट्राभिमानीयों को अपनानी होगी।तो ही राष्ट्र का भविष्य स्वर्णीम है।
जय हिंद।वन्दे मातरम्।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: मोदीजी,
समय की जरूरत।
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जी हाँ,आज देश को मोदीजी जैसे महान प्रधानमंत्री की सख्त जरुरत है।
जब भाजपा दिल्ली और बिहार बाद में पश्चीम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा के लिए हारी थी,तो मैं बहुत दुखी हुआ था।
जब धिरे धिरे भाजपा जीतने लगी तो मैं बहुत आनंदीत हुआ था।सभी देशप्रेमी भी इसीलीए आनंदीत हो गए है।
मेरी जागृत लेखनी की वजह से मुझे एक राष्ट्रीय पार्टी ने,पार्टी बढाने के उद्देश्य से मुझे,उस पार्टी ने,मिडीया शक्ती का,ओल इंडीया प्रेसीडेंट नियुक्त किया था।
मगर अलग विचार धारा और मोदीजी का विरोध जानकर मैंने उस पार्टी का कार्य नही बढाया।
दुसरी भी पार्टीयों ने,जो मोदी का विरोध करते थे,मुझे अनेक ओफर्स किए थे।
मैंने ये भी उचीत नही समझा।एक कट्टर हिंदुत्ववादी पार्टी निकालकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का विरोध करने की रणनिती भी मैंने बनाई थी।
मगर जाहीर है,हिंदु मतों का विभाजन हो जाता।इसिलीए यही विचार भी मैंने छोड दिये।
अब मोदीजी जो कुछ कर रहे है वह बिल्कुल योग्य और सही कर रहे है।कोई भी जागृत राष्ट्राभिमानी व्यक्ती उनका विरोध नही कर सकता।और यह योग्य भी नही होगा।
मोदीजी आज देश की और समय की माँग है।
देशहीत को सामने रखते,मुझे और मेरे जैसे अनेक राष्ट्रप्रेमीयों को,ना चाहीए सत्ता,ना संपत्ती,ना मान ना सन्मान।ना बडप्पन,ना हार तुरे।निजी स्वार्थ के लिए मोदीजी का विरोध करना हैवानीयत की हाव है।
चाहे मैं छोटा रहुं तो चलेगा,अंधेरें में रहुं तो भी चलेगा।मुसीबतों में रहुं वो भी चलेगा।मगर राष्ट्रहीत और राष्ट्रसम्मान के बारें में कोई भी समझौता नही।
मेरे जैसे अनेक प्रखर राष्ट्राभिमानी देश का हित चाहते है।जो जरूरत हो तो अंधेरे में रहना पसंद करेंगे,मगर निजी स्वार्थ के लिए,मोदीजी का विरोध नही करेंगे।
आज परमपुज्य दिवाकर श्री जी ने मुझे,मोदी वाहीनी का,मिडीया शक्ती के लिए,जो राष्ट्रीय प्रभारी होने का जो अच्छा पद दिया है,तो और मान-सन्मान क्या चाहीए?
फिर भी मुझे आज भी ना पद की अपेक्षा है,ना प्रतीष्ठा की।राष्ट्र पुनर्निर्माण में मर मिट जाऊं,या राष्ट्रहीत के लिए संपुर्ण समर्मीत भी हो जाऊं तो भी कम है।पंचमहाभुतों का देह तो निमित्यमात्र है।
मेरी भारत माता को,और प्रभु के सुंदर धरती माता को दुष्टों से मुक्त करते करते प्राण भी चले जाएं तो भी दुख नही तो आनंद ही होगा।
मेरे राष्ट्रप्रेमी क्रांतीकारी हँसते हँसते राष्ट्र के लिए,समर्पीत हो गए।
उनके आदर्श सिध्दांतो पर चलने वाला मैं भी और मेरे जैसे अनेक व्यक्ती भी आज भी इस देश में मौजुद है।मैं भी इसमें एक सौभाग्यशाली हुं।मगर...
आज मेरे ही कुछ हिंदु भाई निजी स्वार्थ के लिए,मोदीजी का विरोध कर रहे है,इससे तो मैं सौ प्रतीशत दुखी हुं।
हमारी संस्कृती,परंपरा स्वार्थ की नही है।समर्पण की है।आज का मोदी विरोध हमारे ही लोगो द्वारा देखता हुं,तो इन स्वार्थी और राक्षसी वृत्ती से हैराण रह जाता हुं।परेशान हो जाता हुं।
समर्पीत भाव से चलने वाले मेरे देशवासींयों को आज हो क्या गया है?
मोदीजी भी तो संपुर्ण समर्पित भाव से राष्ट्र का पुनर्निर्माण एवं नवनिर्माण कर रहे है।उनका सभी मिलकर साथ तो दें?कम से कम उनका विरोध तो ना करें?
यही निती सभी राष्ट्राभिमानीयों को अपनानी होगी।तो ही राष्ट्र का भविष्य स्वर्णीम है।
जय हिंद।वन्दे मातरम्।
(मेरे सभी मोदी विरोधक दोस्तों से दुखपुर्ण मन से मेरा छोटासा मनोगत समर्पित।
दोस्तों भले ही मैं सामाजीक दृष्टी से छोटा हुं,फिर भी आत्मशक्ती से सामर्थ्यशाली हुं।पंचमहाभुतों के छोटेसे देह में कैद हुं,फिर भी दुनीया हिलानी की शक्ती रखता हुं।यह आत्मस्तुती नही आत्मगौरव है।
फिर भी एक छोटासा जीव,एक[अमृत]बुंद,
शक्तीविभाजन नही करना चाहता।
आप सभी को नम्र निवेदन:-बुंद बुंद द्वारा "हिंद"की शक्ती बढाओ।
हिंद के "विश्व-महासागर" में आनंद से विहार करों।
आखिर:-छोटा मुंह,बडी बात हो गई,
हो सके तो भाईयों,
क्षमा भी करना।)
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: कसम से...कसम है।
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मेरे प्यारे देशवासियों,
कसम खाते है हम रामकी,
कसम खाते है हम
भारत माता की,
कसम खाते है हम
गंगा माता और गौमाता की।
हम हिंदु अब जाती पाती में
कभी भी ना लडेंगे।
राष्ट्रद्रोहीयाँ का हम
बहिष्कार करेंगे।
देश में रहकर पैसा कमाकर,
पाकीस्तान को आर्थीक
मदद करनेवालों का
हम बहिष्कार करेंगे।
चिनी वस्तुओं का हम बहिष्कार करेंगे।
राष्ट्रद्रोही मिडीया का
हम सभी बहिष्कार करेंगे।
पाकिस्तान प्रेमी वालों की
फिल्मे हम कभी भी
ना देखेंगे।
इस भारत भुमी में रहकर
पाकिस्तान जींदाबाद
कहने वालों का हम
तन-मन-धन से
बहिष्कार करेंगे।
जो हिंदुहितों का ही केवल
विचार करेगा उसको ही
केवल मतदान करेंगे।
यह सभी पढकर,हँसकर
हम सभी कसम
कभी भी ना तोडेंगे।
खुद जागेंगे,सभी को
जगाएंगे।
हर व्यक्ती का देश प्रेम हम
जगाएंगे।
रोम रोम में राम की धुन
गाएंगे।
मंदीर भी वहींपर बनायेंगे
जहाँ हमारे रामलला ने
जनम लिया था।
अब केवल जीतेंगे।
परकीय आक्रमणकारी
अत्याचारीयों का
कलंक अब हम
सब मिलकर धोयेंगे।
कसम से...कसम है।
कसम हम निभाएंगे।
सब बोलो,
सियावर रामचंद्र की जय।
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विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: *मित्रो आज मै इजरायल के बारे मे छोटी सी जानकारी देना चाहता हूॅ।*
जी हाॅ कुल 75 लाख आबादी वाला एक छोटा सा देश जो दुनिया की दूसरे नम्बर की सबसे बडी आबादी लगभग
160 करोड शांतिदूतो को हर समय अपने जूते की ठोकर पर रखता है
*भारत के शांतिदूतो की भी यह हालत है अगर इजरायल का नाम लेकर थोडी तारीफ कर दो
अपना पाजामा फाडकर- चिल्लाना शुरू कर देते है।
*यह देखिए अपने देश मे वोटबैंक की लालची काग्रेसी सरकारे इजरायल को हमेशा बायकाट कर हर प्रकार के रिश्ते खत्म कर रखे थे केवल इसलिए कि इनके दामाद नाराज न हो जाय वर्ना इनकी बेटियो को तलाक दे देते*।
*एक बहुत इम्पोर्टेन्ट खबर पढी है
मोदी जी ने इजरायल से ऐसे सम्बन्ध बना लिए है* *कि यदि चीन पाकिस्तान की तरफ से भारत के लिए कोई युद्धक कार्यवाही करता है तो उसी क्षण इजरायल पाकिस्तान पर अपनी मिसाईले दागने शुरू कर देगा।*
*और यह बात अमेरिका की नोटिस मे है सहमति मे है।*
यह इन्टरनेशनल खबरो मे से है।
*अपने जन्म के समय से ही इजरायल अनेक लडाइया लडी जिसमे सभी मुस्लिम देश शामिल रहे और हर बार जीत दर्ज किया*
*क्योकि वहाॅ का प्रत्येक नागरिक ही अपने को सेना का एक अंग मानता है* *और दुश्मन के खिलाफ केवल एक स्वर मे बोलता है।*
*मै अपने मित्रो को बता दूॅ भारत जैसी ही हालत इजरायल की है*
जैसे छःसौ साल मुगलो आदि ने भारत पर राज्य किया तो क्या भारत शँतिदुतो के बाप का हो गया।*
*ठीक यही हालत इजरायल की है पहले यहूदियो का ही देश था जिसे बाद मे शांतिदूतो ने आक्रमण कर अपने आत्याचार और बर्बरता के बल पर यहूदियो को मुसलमान बनाया और उनका देश छीन लिया अब एक छोटे से हिस्से को यहूदियो ने वापिस ले लिया जो इजरायल है इसको ये शांति दूत अपना बताकर छीनने मे लगे है पर उसी इजरायल ने मार मार कर इनको सूवर बना रखा है* *बगदादी बडे ताकतवर है तो चले जाय इजरायल----अपने देश के शांतिदूत भी इजरायल के खिलाफ खूब जहर उगलते है पर सारी नेतागीरी और ताकत यही है*
*और केवल हरामजादे वोट के भूखे भेडिए नेताओ के कारण ।*
*इस संदर्भ मे बताते चले कि आज जो पाकिस्तान परमाणु बम की धौस देता है* *यह केवलकाग्रेस सरकार की देन है वर्ना इजरायल को केवल नैतिक समर्थन भर देना था उसके परमाणु रिएक्टरों को धूल मे मिला दिया होता लेकिन यह काग्रेस नही यह इस्लामी शासन का एक छद्म नाम भर है*
*इस्लामी देशो के साथ मिलकर इन्दिरा गाधी इजरायल को अछूत बनाए हुए थी केवल भारत के शाँतिदुतो के वोट के लिए।*
*एक और वाक्या सुनो इसी इजरायल ने सद्दाम हुसैन के परमाणु कार्यक्रम को 1981 मे धूल मे मिला दिया था*
मेरे पास आज भी vdo है जिसका लिक दूॅगा खुद देख लेना
बिस्तार से समझो
**************
*नि. राघवेन्द्र हिन्दू अधिवक्ता,महामंत्री जिला बार एसोसिएशन लखनऊ*
7 जून 1981, 3.55 PM _🌼 https://youtu.be/zWA2pthTBiM
*इज्रायल का बेहद महत्वाकांक्षी, और अपने अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए जीवन मरण की तुला पर झूलता हुआ आपरेशन ओपेरा (बेबीलोन) ।*
*सद्दाम हुसैन ने इज्रायल को नेस्तनाबूद करने के लिए परमाणु बम हासिल करने के लिए फ्रांस की मदद से बगदाद के पास एक न्यूक्लियर रिएक्टर बना लिया था, पूरा काम कम्प्लीट था सिर्फ परमाणु ईंधन लोड करना बाकी था, इज्रायल ने कूटनीतिक स्तर पर इस रिएक्टर को बनने से रोकने के लिए पूरे असफल प्रयास कर लिए थे, इज्रायल के पास वायुसेना की मदद से इसे उड़ाने का बेहद कठिन विकल्प ही शेष बचा था ! इस रिएक्टर तक पहुंचने के लिए इज्रायली जहाजों को साऊदी अरब और जार्डन के हवाई क्षेत्र से बिना पहचाने गुजरने की दुर्गम चुनौती थी, जिसे पायलटों ने सिर्फ 100 फिट की ऊँचाई पर उड़ कर, और ग्राउंड कंट्रोल से अरबी भाषा में बात कर के पूरा कर लिया*,
*दूसरी चुनौती 1000 मील की यात्रा और वापिसी बिना दुबारा ईधन भरे पूरा करना था जिसे भी अधिकतम ईधन भर कर पूरा कर लिया*,
*इस पूरे आपरेशन में दो जगह इज्रायली लड़ाकू विमानों को भगवान या भाग्य का साथ मिला ! पहला मौका था जब जार्डन के शाह हुसैन अकाबा में छुट्टी मना रहे थे और उनके ठीक सिर के ऊपर से 14 लड़ाकू हवाई जहाज एक साथ निकले, उन्हे तुरंत इज्रायल का ईराक पर लक्ष्य-भेदन का शक हो गया, तत्काल ईराक को सूचना दी लेकिन संचार तंत्र की गड़बड़ी के चलते ईराक तक यह सूचना नहीं पहुंच पाई ।*
*दूसरा मौका था जब इज्रायली जहाजों के पहुंचने से ठीक 30 मिनट पहले ईराक वायु प्रतिरोधक और प्रतिरक्षा प्रणाली के इन्चार्ज का रेडार बंद करके भोजन के लिए चले जाना,* *इज्रायली प्रतिरोधक विमानों ने 1 मिनट 20 सेकंड में ईराकी महत्वाकांक्षी परमाणु रिएक्टर को धराशायी कर दिया और ईराक के हवाई प्रतिरोधक तंत्र से, साथ चल रहे 8 F15 विमान निपटते रह 90 मिनिट में इज्रायली जंगी जहाज सद्दाम हुसैन के परमाणु सपनों को धराशायी करके सुरक्षित इज्रायल वायुसेना की हवाई पट्टी पर लैंड कर चुके थे, इज्रायल के सेना प्रमुख ने सभी 14 विमानों के पायलटों को एक मार्मिक और भावुक संदेश के साथ विदा किया था कि आप लोगो की एक छोटी सी चूक इज्रायल के दुर्भाग्य का कारण बनेगी ! आर्मी चीफ ने प्रधानमंत्री बेगिन को आपरेशन की सफलता और सभी विमानों की सुरक्षित वापिसी की सूचना दी तो बेगिन के लिए फिर से जवान होने जैसी खुशी हुई, लेकिन जब अमेरिका को इस सफल आपरेशन की सूचना दी तो राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन हक्का-बक्का और अचंभित थे उनके मुँह से एक ही शब्द निकला था* *"What !!!"*
*पूरी दुनिया ने निंदा की थी इस हमले की लेकिन 10 साल बाद 1991 में जब ईराक के कुवैत पर कब्जा कर लेने के बाद जब पूरी अरब बिरादरी ने ईराक पर हमला किया तब अमेरिकी उपराष्ट्रपति डिक चेनी और रक्षामंत्री कास्पर बाइनवर्गर ने इज्रायल का इस बात के लिए शुक्रिया अदा किया कि यदि 1981 में इज्रायल ने ईराकी रिएक्टर न उड़ाया होता तो इस युद्ध में अमेरिका को परमाणु शक्ति संपन्न ईराक का सामना करना पड़ता और बहुत संभव था कि सैन्य कार्रवाई का विकल्प खत्म करना पड़ता* ।
*लेकिन तत्कालीन इज्रायली प्रधानमंत्री बेगिन के ऊपर ईराक द्वारा थोपी जाने वाली परमाणु बिभीषिका का मनोविज्ञान हावी था और सभी विरोधी तर्क और तथ्य इस मनोविज्ञान के आगे तिनके बन कर उड़ गए तथा इज्रायल का यह सफल आपरेशन उसकी सुरक्षा की अभेद्ध दीवार बन गया तथा अरब जगत में इज्रायल के प्रति एक अजेय और दुस्तर दुस्साहसी दुश्मन की छवि बन गई जिसने भविष्य में संभावित हमलों को हतोत्साहित किया ।*
*आज इस्लामी जगत कूद रहा है कि उसके पास एटम बम है*
*और पाकिस्तान को लाख रोकने की कोशिस की जाय कभी भी किसी समय यह एटमबम के जखीरे इस्लामी देशो को दे सकता है* *सम्भवतः उसे रोकने के लिए ही अमेरिका न चाहते हुए भी पाकिस्तान को आर्थिक सहायता करता रहता है।*
*यह केवल और केवल इन काग्रेसी लुच्चो की देन है* *केवल शासन मे बने रहने के लिए इन कांग्रेसी ने पूरे विश्व के सर्वनाश की नीव रख दिया*
*इन्दिरा उस समय यासिर आराफात जो फिलीस्तीन का नेता था अपना भाई बनाए हुए थी*
*केवल भारत के शांतिदूतो की वोटो की खातिर और इजरायल को दुश्मन नम्बर एक जबकि हमारा क्या नुकसान किया था इस इजरायल ने।*
लेख बडा हो गया लेकिन आखे खोलने के लिए काफी है
जय जय श्रीराम जय देश
जय भारत
जय इजरायल जय इजरायल वासी
[23/01 8:45 pm] Papa: काम शुरु ,रस्ता बंद।
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दोस्तों,
एक बात मेरी समझ में नही आ रही है?🤔इतना सा छोटासा राष्ट्र ईस्रायल?सभी मुस्लीम देशों के बीच?
कमाल हो गया?सारे मुस्लीम राष्ट्र एक होकर भी ईस्रायल का बाल भी बांका नही करते?
और मेरा देश?इतना विशालकाय,बडा होकर भी एक छोटासा,मामुली पाकिस्तान हमें परेशान करता रहता है?
सच कहुँ तो हैरान हुं मित्रो।
पर सोचो,
आखिर ऐसा होता ही क्यों है?🤔
बात सही है।मगर कारण भी जानते हो?
हमारे देश के कुछ गद्दार आस्तीन के साँप।नमकहराम।जो खाते हिंदुस्थान में है।और गाते पाकिस्तान को है।
और मतों के लिए लाचार होनेवाले दोगले।
आई कुछ बात समझ में?
जी हाँ।बिल्कुल सही।
तो पहले अब इन दोगलों का बंदोबस्त किजीए।वो भी कानुन से।इन्हे सख्त से सख्त सजा हो जाएं ऐसा पहले कानुन बनाना होगा।
फिर आस्तीन के साँप और पाक,दोनों का युंही बंदोबस्त हो जायेगा।
फिर देखते है,हमें पाकिस्तान कैसे परेशान करता है।
आई बात समझ में दोस्तों?
तो कर दो,"काम शुरू,रस्ता बंद।"
वह भी तुरंत।✅
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: चलते चलते।
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पाकिस्तान में
पादने पर फाँशी?
और यहाँ?हिंदुस्थान में?
चाहे कोई कुछ भी करें।
चाहे करें बम धमाके,
या चाहे कर ले दंगल।
या कर दे खून मारामारी।
यहाँ इन्हे कुछ भी
नही होता।
क्या गजब का लोकतंत्र
है ना यहाँ का यारों?
इन नीच दोगलों की
वजह से सब कुछ
उलटा पुलटा हो रहा
यहाँ तो।
और उपर से यह
भाँड मिडीया।उलटा चोर......
कोतवाल को डांटे।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: आओ जाओ घर तुम्हारा।
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भाईयों,
एक बात गौर से देखो,और गौर से सोचो।क्या हमारे देश को,"आओ जाओ घर तुम्हारा",बना दिया है?
अब देखो न,बांग्ला से घुसपेठीये देश में घुसते है।पश्चीम बंगाल में उन्हे मानो जमाई राजा बनाया जाता है।
उन्हे तुरंत राशन कार्ड मिलता है।उन्हे तुरंत वोटर आय डी कार्ड मिलता है।और ये घुसपेठीये तुरंत भारतीय नागरीक बनाया जाता है।
फिर इनको सबसिडी भी दि जाती है।हज के लिए।वो भी हमारे ही पैसों से।हम टैक्स भरते है,उससे।हमारे मंदिरों में जो पैसा जमा होता है,उससे।
आगे की मजा देखो।एक फटके में तीन तलाक।और तीन बिवींयों के बच्चे।वह भी हमारे ही पैसों से ऐश करेंगे।
हम दिनभर कष्ट करके मरेंगे।टैक्स भरेंगे और टैक्स का पैसा सबसिडी के लिए।वह भी घुसपेठीयों के लिए।
कमाल का और गजब का माहौल बना दिया रे बाबा देश का,इन दोगलों ने।
केरल में रोहंग्ये घुस गए।उन्हे भी हमारा ही पैसा।कश्मीर में पत्थरबाज।ऐश हमारे पैसों से।कैसे?
अडे बाबा,इनका विकास निधी ही बंद करो ना।न होंगे पत्थरबाज।न होगा अत्याचार।
अब तो लोकसभा,राज्यसभा हमारे हाथ में।राष्ट्रपती भी हो रहे है।हटाओ 370 धारा।घुसांओं धडाम से वहाँ कश्मीरी पंडीत और भारतीयों को।बनाव निती।
हमारा पैसा हमारे ही काम आयेगा।ना घुसपेठीयों को जायेगा,ना रोहंग्याईयों को।और ना ही कश्मीर पत्थरबाजों को।
देश में भी कर दो आर्थीक बहिष्कार देशद्रोहीयों का।तन-मन-धन से उनसे नाता तोडो।बहुत ही ताकदवर हथीयार है ये बहिष्कार का।
ना ही गाँय खरीदने को पैसा मिलेगा इन्है।ना ही गाँय को काटने की हिम्मत रहेगी।
हमारे ही पैसों से,हम पर ही हथीयार दाग रहे है रे बाबा ये लफंगे।
पाकिस्तानी,बांग्ला देशी घुसपेठीयों को भी चुनचुन कर निकालो रे बाबा देश के बाहर।हकाल दो इन्हे इनके देश।बहुत तमाशा कर रहे है यहाँ रहकर।बहुत पिडा दे रहे है हमें।अब हमको ऐसे हरामीयों को सदा के लिए सबक सिखानी तो होगी ही।
तभी तो हमारा पैसा हमारे ही विकास में लग जायेगा।
बहुत प्यार किया रे बाबा हमने इनपर,अपना भाई समझकर।मगर ये तो हमारा राम मंदीर भी नही बनवां दे रहे है।
तोबा तोबा।सब गजब हो गया रे बाबा।सब अजब हो गया रे बाबा।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: बचके रहना रे बाबा।
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बचके रहना रे बाबा
बचके रहना रे।
भारत तेरे टुकडे होंगे
कहने वालों से
बचके रहना रे।
देश तोडने की भाषा
बोलने वालें गद्दारों से
बचके रहना रे।
पाकिस्तान जींदाबाद
बोलने वालों से
उनका समर्थन करने
वालों से
बचके रहना रे बाबा।
इस देश के दोगलों से
देशद्रोही न्युज देनेवालों से
बचके रहना रे।
आस्तीन के साँपो से
हमारे देश का खाकर
देश के टुकडे करने की
भाषा बोलने वालों से
बचके रहना रे बाबा।
बचके रहना रे।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: चलते चलते।
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हँलो हाय छोडो
राम राम बोलो साथीयों
राम राम बोलो।
राम-तु भी राम
राम-मैं भी राम।
राम-राम।
अंग्रेजों की गुलामी
अब छोडो
हिंदु संस्कृती का
सन्मान करो।
विनोदकुमार महाजन का
😀कहना मानो।
राम राम बोलो यारों
राम-राम बोलो।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: चलते चलते।
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बहुत मिल गए दोस्त, यार
फेसबुक व्हाटस्अप ने
दिए हमें यारों के भी यार।
मगर करें तो क्या करें?
दुर से ही दोस्ती निभाना
सुख दुख में ना साथ निभाना।
ना किसीका किसीके घर
ना आना ना जाना।
दूर से ही दोस्ती का
रीश्ता निभाना।
फास्ट हो गया है
सारा जमाना।
नेटपँक खतम्,दोस्ती भी
खतम्,
क्या यारों इसीका नाम है
बदल गया जमाना?🤔
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: 7/7/17
(साथ साथ एक साथ)
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ये क्या मौका आया है यारों
आज की तारीख है
7/7/17
सात सात नही बल्की
ये तो है
साथ साथ,एक साथ।
दोस्तों का साथ,
मित्रों का साथ,
यारों का साथ,
एक साथ।
फेसबुक के सभी
दोस्तों का साथ।
व्हाटस्अप के सभी
मित्रों का साथ।
आओ मिलकर सब
साथ साथ
करते है हम अब मिलकर
"अखंड हिंदुस्थान",
की बात।
साथ साथ एक साथ।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: हे मेरे कृष्णा।
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हे मेरे कृष्णा,मुरलीमनोहर
अब तुझे तेरा गीता का वचन निभाने के लिए आना ही पडेगा।
देख तेरी आँखों से देख।स्वर्ग से पृथ्वीपर देख।कम से कम सिर्फ एक बार देख।
कितनी बुरी हालत कर दी है स्वार्थी इंन्सान ने इस धरती माता की।
देख भगवन्,देख प्रभु ,आँखें खोलकर देख।
तुने ही बनाया था सत्य धर्म?तुने ही बनाया था सनातन धर्म?
चौबिस लक्ष योनीयों के लिए तुने ही बनाया था ना,ईश्वरी कानुन?
कृष्णा,अब तेरे कानुन की इंन्सान ने ऐसी की तैशी बना दी है।तुझे हमेशा प्रिय रहनेवाली गौमाता अब पापी इंन्सान का भोजन बन गया है।स्वादीष्ट भोजन है उसका मेरे कान्हा।अरे,हैवान को भी शरम आयेगी इतना भयंकर दुष्ट,क्रुर ये आदमी बन गया है रे मेरे भगवन।
अरे कन्हैया तु तो सर्वज्ञ,सर्वज्ञानी,सर्वव्यापी है।सबकुछ तु देख सकता है।
फिर इतने भयंकर अन्याय,अत्याचार तु देख भी कैसे सकता है रे प्यारे?
तु यह सब सहता भी कैसे है?
क्या गीता का वचन भी भुल गया रे तु मेरे कृष्णा?
अरे यहाँ तो सत्य तडप तडप कर मर रहा है।ईंन्सानीयत मर रही है।अधर्म ही अधर्म है रे बाबा यहाँ।संत सज्जन कैसे जीयेंगे रे इस दुर्गंध में?इस बदबु में?दिल तो चाहता है मृत्यु को स्विकार कर तेरे पास चलां आंवुं।मगर सद्गुरु को दिया वचन कैसे भुल सकता हुं ,मैं मेरे मोहन प्यारे।तुझे तो पता है मेरे सद्गुरु ने मुझसे क्या वचन लिया है?
अब तु ही मेरा दिया हुआ वचन पुरा कर।प्राण कंठों में आ रहे है।आग लगी है मेरे अंदर,ये अन्याय अत्याचार देखकर।मगर करुं तो क्या करुं?
🙏🕉⛳🚩🕉
🙏🕉⛳🚩🕉
ऐसा लगता है की भोले को अभी के अभी बुलावुं,और उसे ही कह दुं की,"हे भोले खोल तेरी तीसरी आँख,जला दे सारे पापी।एक क्षण की भी देरी मत कर।"
🕉 🕉 🕉 🕉
अब तो तु ही कुछ कर।चमत्कार वमत्कार मत कर।गोवर्धन उठाने के लिए अब वापीस भी मत आना कन्हैया।मगर....फिर भी....तुझे अब कुछ तो भी जरूर करना ही पडेगा।
सत्य की रक्षा के लिए।तुने ही बनाये हुये सत्य सनातन की रक्षा के लिए,अब गोविंदा,तुझे कुछ कर दिखाना ही होगा।
गोपाला गोपाला रे।प्यारे नंदलाला।मोहन मुरली वाला।
हरी हरी:ओम।
ओम तत् सत्।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: कुछ तो भी जल्दी करो।
------------------------------
भाईयों,
पाकीस्तान,बांग्ला देश से हिंदु भगाया गया।जो अब बचा है उनपर नित्यदिन अत्याचार शुरु है।
कश्मीर से हिंदु भगाया गया।आज जो बचा है,उनपर अत्याचार शुरु है।
आज फिर से केरल,पश्चीम बंगाल से हिंदुओं को भगाया जा रहा है।तडपाया जा रहा है।
मैं और सारे देशप्रेमी इस घटनांओं से बेहद दुखी है,परेशान है,बेचैन है।
कुछ तो भी करो,कुछ तो भी करो।हिंदु तडप रहा है।सत्य तडप रहा है।
कब तक इंन्तजार करोगे?कब तक अन्याय,अत्याचार सहोगे?
चाहे मिलीट्री भेजो,चाहे राष्ट्रपती शासन लगवावो।
चाहे सैन्यदल भेजो।या फिर सत्य की रक्षा के लिए कोई,शिवाजी महाराज बन जाओ।मगर सत्य की रक्षा करो।मेरे हिंदु भाईयों की रक्षा करो।
कोई तो भी बोल दो मोदीजी से,की तुरंत कोई तो भी ठोस उपाय निकालो,रास्ता निकालो।अत्याचारीयों का,दंगाफसाद करने वालों का,शिघ्र अती शिघ्र बंदोबस्त कर दो।कही देर न हो जाए।और केरला,बंगाल कही कश्मीर न बन जाए।चाहे तो देश एवं धर्म की रक्षा के लिए तुरंत सख्त कानुन बनाओ।
जागो हिंदुस्थानी भाईयों जागो।सत्य की रक्षा के लिए संगठीत और कार्यरत हो जाओ।जात पात का झगडा छोडो।आपस में लडना छोडो भाईयों।समय हाथ से निकल जाने से पहले जागो।
संगठन बढाओ,शक्ती बढाओ।दुष्ट शक्ती का जमकर विरोध करों।समय की यहीं माँग है,समय की यही पुकार है।
तुरंत कार्यतत्पर बन जाओ।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: _*ये मेरे एक शादीशुदा मित्र ने भेजा है, मुझे दोष मत दीजियेगा....तथ्य हैं कि*_ 🌿🌿
_सभी सम्बन्ध...भाई-बहन,मॉ-बाप,चाचा-
_चाची,ताऊ-ताई,दोस्त-दोस्ती सच्चे हैं!_
_झूठा सम्बन्ध एक ही हैं: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सारे सम्बन्ध प्राकृतिक हैं, बने-बनाये मिलते हैं!_
_अप्राकृतिक सम्बन्ध एक ही हैं जिसे बहुत प्रयासों से बनना पड़ता हैं: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सारे सम्बन्ध बिना किसी विधि के हैं!_
_कानूनी सम्बन्ध एक ही हैं: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_भाई-बहन, ताई-ताऊ,चाचा-चाची, माता-पिता आदि सम्बन्ध मुफ्त में मिलते हैं!_
_५-१० लाख रूपये लगाकर एक ही सम्बन्ध खरीदा जाता हैं: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सारे सम्बन्धों में किसी गवाह की जरूरत नहीं होती!_
_एक ही संबंध हैं जिसमें सभी रिश्तेदारों की गवाही चाहिये: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सारे सम्बन्धों की बहुत सार-सम्भाल नहीं करनी पड़ती!_
_सम्बन्ध एक ही जिसमें बात का बतंगड़ बनने में देर नहीं लगती: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सभी संबंध प्रेम के हैं!_
_लाचारी का सम्बन्ध एक ही हैं: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सारे सम्बन्ध अटूट हैं, मृत्यु भी उन्हें नहीं तोड़ सकती!_
_एक ही सम्बंध हैं जिसमें तलाक संभव हैं: पति-पत्नि का_
🌿🌿
_सारे सम्बन्धों में अविश्वास का कोई स्थान नहीं होता!_
_और विश्वास करते-करते भी जहॉ विश्वास नही होता वह सम्बन्ध एक ही हैं: पति-पत्नि का_
_इसका कारण हैं........सभी सम्बन्ध भगवान ने बनाये हैं!_
_इंसान का बनाया संबंध एक ही हैं: पति-पत्नि का_
_संसार में तीन तरह के ग्रहण होते है_
🌞🌏🌚
_*1) सूर्य ग्रहण :*_
_यह 2-3 घंटों में छूट जाता है_
🌕🌏🌑
_*2) चन्द्र ग्रहण :*_
_यह भी 2-3 घंटों में छूट जाता है_
👬
_*3) पाणिग्रहण :*_
_यह एक बार लग जाये_
_तो 7 जन्मों तक नहीं छूटता ।_
[23/01 8:45 pm] Papa: जन आंदोलन।
------------------------------
मेरे प्यारे सभी देशवासीयों
एक हो जाओ,सत्य की
शक्ती बढाओ।
मंदीर में जाओ,प्रभु को
जगाओ।
जोर जोर से घंटी बजाओ।
प्रभु शक्ती को जागृत करो।
मंदीरों में बैठकर सभी..
विचारों की अदान प्रदान
करो।
सत्य की रक्षा के लिए
अब.......
संगठन बनाओ,संगठन बढाओ।
सत्य बचाओ,देश बचाओ
अधर्मी पापीयों से
पृथ्वी बचाओ।
धर्म बचाओ,ईंन्सानीयत
बचाओ।
भाईयों,एक हो जाओ।
राक्षसी वृत्ती के
विनाश के लिए एक हो जाओ।
ना चिंता करो धन की
ना मान सन्मान की।
ना चिंता करो यश और
किर्ती की,ना भविष्य की।
समय को,काल को
और.....साक्षात...
मृत्यु को भी पिछे हटाओ।
आओ दोस्तों मेरे साथ
सब मिलकर,
"तेजस्वी,ओजस्वी",
"विश्व क्रांती संगठन,"
बनाओ।
विशाल विश्व-जन आंदोलन से अब हम सभी
"सत्य-सनातन",की
जीत करायें।
हम सब मिलकर,व्यापक
विश्व-जन आंदोलन बनायें।
अब रुकना नही
अब हमें दुष्टों के सामने
झुकना भी नही।
तो चलो अभि से इसी वक्त
से.......आंदोलन की
ओर बढायें।
हो गए तैय्यार,साथीयों?
हो जाओ तैय्यार।
(व्वा,क्या बात बन गई?
सभी की आत्मशक्ती
जाग गई)
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: चलते चलते।
-------------------–----------
श्रीलंका में सत्य जल गया।
आफगाणीस्तान में भी
सत्य जल गया।
पाकिस्तान,बांगला में भी
सत्य की होली हो गई।
कश्मीर जल रहा है।
जगह जगह कैराना बन
रहा है।
अब केरल में आग लगी है।
बंगाल में आग लगी है।
सत्य को असत्य जला
रहा है।
संपुर्ण विश्व को यह आग
क्रुरता से जला रही है।
देश में भी यही हो रहा है।
संकट तो गहरा है।
आग हरेक को चपेट में
लेने के लिए
धिरे धिरे अपना उग्र रुप
दिखा रही है।
क्या ईश्वर भी मौन,शांत
और हताश है?
क्या हर एक ईश्वर भक्त
मजबुर है?
क्या साक्षात ज्वाला स्वरूप ,ज्वाला नारसिंव्ह
भी उदास है?
क्या रावण की लंका जलाने वाला उग्र
हनुमान भी नाराज है?
क्या कलियुग का यही
महीमा मंडन है?
क्या उग्र,उन्मत्त कली ने
सत्य को बाँध के रखा है?
जो जल रहे है,
जो भाग रहे है
उनकी तडपन भी तु
भगवन,नही जानता?
नही पहचानता?
जेलों में सत्य बंद होकर
तडप रहा है
ये भी भगवान तु नही जानता?
चार सत्यवादी एक होकर
असत्य को हराने की
लगातार कोशीश में है।
जान जोखीम में डालकर
सत्य के लिए जो
मर मिटने को तैय्यार है
उन भक्तों की परवाह
भगवन्,तु नही करता?
प्रारब्ध गती के अनुसार
चक्रव्युह में फंसकर अकेला अभिमन्यु लड रहा था।
मौत को गले लगा रहा था।
अर्जुन भी पुत्र मोह से
रो रहा था।तोभी तु....
केवल देखता ही रहा था।
ये कैसी तेरी माया?
यह गजब का कैसा तेरा खेल?
आँखे खोल मेरे भगवन्
आँखे खोल।
सत्य की रक्षा के लिए
सुदर्शन लेके आ।
भगवन्,देर ना कर।
सत्य तडप रहा है।
कश्मीर,कैराना,केरल
बंगाल में सत्य दिन दहाडे
जल रहा है,मोहन प्यारे।
क्या रामदास स्वामी को भी,हनुमान अवतारी
साक्षात अग्नी तेज
उनको भी
यही कहना पडा था,
"तुझा दास मी व्यर्थ--
जन्मास आलो।"
क्या राजे शिवाजी की
तेजस्वी तुलजाभवानी
(साक्षात जगदंबा महाकाली का रुप)ने
दि भवानी तलवार भी
असुरों का पुरा नाश
नही कर सकी?
आखिर तुने ये माया ही
क्यों रची?अगर.....
सत्य जलाना ही था तो?
सिर्फ बंन्सी मत बजा
आज तो मुझे तुझसे
उत्तर चाहिए ही चाहिए।
अब पिछे नही हटुंगा।
नही तो....मुझे.....
"शक्ती दे"..और देनी ही
पडेगी।
बस्स...मैं भी देख लुंगा।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: जन आंदोलन।
------------------------------
मेरे प्यारे सभी देशवासीयों
एक हो जाओ,सत्य की
शक्ती बढाओ।
मंदीर में जाओ,प्रभु को
जगाओ।
जोर जोर से घंटी बजाओ।
प्रभु शक्ती को जागृत करो।
मंदीरों में बैठकर सभी..
विचारों की अदान प्रदान
करो।
क्योंकी मंदीर में जाने से
समाज में ईश्वर के प्रती
आस्था निर्माण होगी।
धर्मवृध्दी होगी।
अगली पिढी सुसंस्कारीत
एवं आस्थावान बनेगी।
और सत्य के लिए
समाज में जागृती आयेगी।
भगवान को कुछ माँगने
को नही,तो धर्मरक्षा
के लिए मंदीर जाना होगा।
सत्य की रक्षा के लिए
अब.......
संगठन बनाओ,संगठन बढाओ।
संगठीत बनकर कडा
मुकाबला करने की
क्षमता बढेगी,शक्ती बढेगी।
सत्य बचाओ,देश बचाओ
अधर्मी पापीयों से
पृथ्वी बचाओ।
धर्म बचाओ,ईंन्सानीयत
बचाओ।
भाईयों,एक हो जाओ।
राक्षसी वृत्ती के
विनाश के लिए एक हो जाओ।
ना चिंता करो धन की
ना मान सन्मान की।
ना चिंता करो यश और
किर्ती की,ना भविष्य की।
समय को,काल को
और.....साक्षात...
मृत्यु को भी पिछे हटाओ।
आओ दोस्तों मेरे साथ
सब मिलकर,
"तेजस्वी,ओजस्वी",
"विश्व क्रांती संगठन,"
बनाओ।
विशाल विश्व-जन आंदोलन से अब हम सभी
"सत्य-सनातन",की
जीत करायें।
हम सब मिलकर,व्यापक
विश्व-जन आंदोलन बनायें।
अब रुकना नही
अब हमें दुष्टों के सामने
झुकना भी नही।
तो चलो अभि से इसी वक्त
से.......आंदोलन की
ओर बढायें।
हो गए तैय्यार,साथीयों?
हो जाओ तैय्यार।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: आक्रमक बनो।
------------------------------
मेरे सभी सत्यप्रेमी भाईयों,अब सभी आक्रमक बनो।वैचारीक आक्रमण।कानुन का भी पालन करो।क्योंकी कानुन हाथ में लेंगे तो अटक जाओगे।
"साँप भी मरे,लाठी ना टुटे",यही निती अपनाओ।
संस्कार,संस्कृती,सभ्यता,राष्ट्
शत्रुओं में घुस जाव,अज्ञानीयों में घुस जाव,किसानों में,ब्यपारीयों में,शहरों में,ग्रामीण इलाकों में,कस्बो में,गली में,बुध्दीवादीयों में,राजनेताओं में,फिल्मस्टारों में,अबाल-वृध्दों में,देश में-विदेश में,देश -विदेश के कोने कोने में घुंस जावं।
खुद समय निकालो,दुसरों को प्रोस्ताहीत करो।आक्रमक तरीके से लोगों को सच्चाई,ईश्वरी कानुन बताओ।
शत्रुओं का भी भेदन करों।उनमें भी घुंसकर उन्हे सत्य की ओर धिरे धिरे खिंच लाव।
इसी विषय पर प्रबोधन के लिए,अच्छी अच्छी हो सके तो फिल्मे बनाओं,गीत लिखो,किताबे लिखो।
हर तरह से,हर रास्ते से सत्य को जीताने की और धिरे धिरे असत्य उन्हे समझाकर,सत्य की ओर खिंचने की कोशीश में लग जाव।
इसी कार्य के लिए हमारे "विश्व-व्यापक "संगठन से जुड जाओ।हम आपको संकटों में आधार देंगे,बल देंगे,शक्ती देंगे,नया जोश देंगे।नई नितीयाँ देंगे।
हमारे कार्यकर्ताओं की विशाल फौज आपको हर प्रकार की सहायता करेगी।
प्रभु कार्य के लिए,राष्ट्रकार्य के लिए समर्पीत भाव से कार्य आरंभ करो।
इसी के लिए आप सभी का अंदर का चैतन्य जगाओ,अंदर के ईश्वर को आवाज दो,आत्मशक्ती,आत्मसंयम जगाओ।
आपको बारंबार आपकी पवित्र आत्मा ईश्वरी कार्य की ओर ले जानेवाला रास्ता बतायेगी,दिखायेगी।
सदैव उत्साहीत,आनंदी,हँसते खेलते रहना।आत्मविश्वास निरंतर बढाना।हताश,उदास,निराश कभी भी मत होना।
तुम सभी ईश्वरपुत्र हो।सभी को जगाने तुम आये हो।दृढ संकल्प करके,मंझील का रास्ता तय करके ,सुख दुख की पर्वा किये बगैर मंझील की ओर बढ जाना।बढते ही रहना।
आत्मशक्ती बढाओगे तो नामुमकीन भी मुमकीन में बदल देंगे।
चलो मेरे प्यारे साथीयों क्रांती की ओर।शांती से चलो।धैर्य से चलो।एकसाथ चलो।हाथ से हाथ-कंधे से कंधा मिलाकर चलो।समय की पुकार पहचानकर चलो।
"नयेयुग निर्माण "की ओर चलो।
अब इसके सिवाय तुम्हारे सामने रास्ता नही है।ईन्सानीयत,सच्चाई,संस्कृती खतरे में है।
"मुझे क्या करना है?ईश्वर देख लेगा",ऐसा बहाना अब मत बनाओ।तुम सभी खुद तेजस्वी,ओजस्वी विर ईश्वरपुत्र हो।खुद को जानो।खुद को पहचानो।अब कोई भी बहाना नही।रोना नही।चिंता नही।भय नही।दृढ संकल्प करके सत्य की ओर एक एक कदम बढते ही जाना है।
अब रुकना नही,अब थकना नही,अब हारना भी नही।अब केवल जीतना है।और......
हम सभी जीतकर ही रहेंगे।
अरे मेरे प्यारे यारों यही तो जीवन है।संघर्ष में ही जीवन की असली मजा है।
क्या पढते पढते बोअर तो नही हो रहे हो?मुझे हँस तो नही रहे हो?
चलो,कोई बात नही।आखिर आज मेरी आत्मा की और आप सभी के आत्मा की आवाज तो एक हो गई।
अरे यारों,गाँय म्हैस को भी आत्मा की आवाज देकर देखो।वह भी सुनेंगे।और प्रतीसाद भी देंगे।तो हम सब अपनों के आत्मा की आवाज क्यों नही सुनेंगे।खैर,अब तो "शांती से क्रांती"की लडाई शुरु हो चुकी है।अगला रास्ता भगवान दिखाएंगे।
हरी ओम।
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
जीधर जाऊं उधर
ढुंढता हुं कृष्ण को।
शेअर चँट में
झाँककर देखा तो
गजब हो गया।
ये कैसा अजब हो गया।
राधा कृष्ण की सुंदर
मुरत दिख गई।
सबको सेंड कर दी।
और देखा तो......
राधा कृष्ण के तस्वीर के
निचे लिखा था,शेअर चँट
और उपर देखा तो?
सब गजब हो गया।
भगवान को भी क्या क्या
लिखते है लोग?
मैं तो हैरान रह गया।
उपर लिखा था,
"नही चाहिए परी,
नही चाहिए स्वप्न सुंदरी",
हाय मेरे राम,हाय मेरे शाम
"भक्ती",का भी कैसा
जमाना आ गया?
उफ् -- -- -- -- -- --
क्या जमाना भी आ गया?
------------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: मुझे कुछ लेना देना नही है।
-–----------------------------
जी हाँ,यही सोच "हमें "डुबा रही है।
"वो"?सबकुछ ,जानतक गँवाने को तैय्यार।
"और हम",?हमे इससे कुछ लेना देना नही है।
"मेरे पास धन है,ऐश्वर्य है,सुख समृध्दी है,बेटें भी बहुत कमाते है।और मैं सुरक्षीत हिंदु बहुल एरीया में रहता हुं।तो मैं चिंता क्यों करूं?बस्स...मैं सुख में हुं।देश से - समाज से मुझे कुछ लेना देना नही है।"
भाईयों यही वास्तव है हमारे अनेक हिंदुओं का,यही विचारधारा मैं अनेक हिंदुओं में देखता हुं।जो अती भयंकर है।घातक भी है।
और "वो",?आया कुछ समझ में?धन तो क्या?ऐशोआराम भी नही,जान भी देने को,सभी के सभी,तैय्यार रहते है।और जान दे भी देते है।
और"हम।"??????
आफगाणीस्तान,पाकीस्तान,बांग्ला में ठीक ऐसी ही गलत विचार धारा की वजह से हमारा वहाँ से नामोनिशान मिट गया।
संस्कृती वहाँ से नामशेष हो गई।
ठीक ऐसा ही गहरा संकट कश्मीर,केरला,पश्चीम बंगाल ,युपी जैसे अनेक ठिकाणों पर मँडरा रहा है।
सोच बदलो।विचार बदलो।एक हो जाओ।संगठीत हो जाओ।
पैसा कमाना,ऐशोआराम का जीवन जीना,ये सब बाते कुछ हद तक ठीक है।
मगर......
हमेशा समाज के प्रती,धर्म के प्रती,देश के प्रती उदासीन रहना,अज्ञान में रहना ठीक नही है।
सौ साल पहले का भूतकाल और ईतीहास देखकर अगले सौ साल तक रणनीती बनाकर चलेंगे,तो ही धर्म बचेगा,सत्य बचेगा,संस्कृती बचेगी।निद्रीस्त,बेफिकर रहेंगे,केवल खुद का ही सोचेंगे तो भविष्य क्या होगा?आफगाणीस्तान,पाकिस्तान का भुतकाल क्या दर्शाता है?अत एव सावधान हो जाईये मेरे हिंदु भाईयों।"अखंड सावधान"रहना ही जागरुकता का लक्षण है।
और......चाहे कुछ भी होने दो,निद्रीस्त ही रहेंगे,
ऐसी वृत्ती से केवल अध:पतन ही नही तो सर्वनाश भी है।
सोचो।जागो।धर्म के प्रती उदासीन मत रहो।जागरुक रहो।
सोचो,
"उनकी यात्रायें "हमारे ही पैसों से और बिल्कुलसुरक्षीत होती है।और हमारी यत्रायें ? फौज के निगरानी में होती है।क्यों भाईयों क्यों???
"वो"मुठ्ठीभर होकर और हम बल,बुध्दी,धन से और संख्या से भी कितने भी ताकदवर होकर भी,हमेशा "वह"हमपर हमेशा हावी होते है।वजह?हमारी बेफिकीरी।और आँखो का अज्ञान।
आज भी समय अपने हाथ में है।आत्मकेंद्रीतपन से बाहर आईये।हमारे लिए न सही।हमारे अगली पिढी के लिए।संस्कृती के लिए।
ईश्वर के लिए।
मंदीर,मठ,देवालय से जाकर भी हम भगवान को भी नही समझेंगे,तो....इससे बडा दुर्भाग्य क्या होगा?ऐसी,"स्वार्थी और आत्मकेंद्री,गलत विचारधारा से",भगवान भी दुखी होगा।
खुद का छोड प्राणी संस्कृती का और ईश्वर का भी कुछ सोच।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: कितने लोग जाग रहे है?
------------------------------
सत्य वार्ता देनेवाले चाहेवह प्रिंट हो या इलैक्ट्रोनीक्स मिडीया,समाज को जगाने
वाले ,सनातन धर्म में रूची
रखने वाले कितने प्रतीशत
लोग है?
जादातर असत्य फैलानेवा
ले,सत्य को बदनाम करने वाले ही जादा दिखेंगे।
तो सत्य कैसे जगेगा?इसप
र ठोस उपाय क्या है?कानु
नन इसपर क्या किया जाए?
दुसरी बात,
सोशल मिडीया में शक्ती जरुर है।मगर "सत्य",कथन द्वारा कितने
लोग यहाँ प्रबोधन करते है?कितने प्रतीशत असत्य
फैलाते है।
सत्य विचार कितने प्रतीश
त लोगों तक जाते है?
कितने पढते है,जागते है,
सजग होते है?कितने प्रतीशत कार्यरत होते है।
बहुत अज्ञान है लोगों में।उनका अज्ञान दुर करने के लिए,उनतक सत्य विचार पहुंचाने के लिए,सही माध्य
म कितने प्रतीशत है?
देहात में रहनेवाले,सुबह से शाम तक कष्टों में डुबने वा
ले अनेक लोग है इस देश में।जीन्हे केवल रोजी रोटी की ही चिंता रहती है।
इनके पास ना मोबाईल है,ना इंटरनेट है।अनेक लोग आज भी ना पढना जा
नते है ना लिखना।
तो उनतक कैसे पहुंचे?विचार उनतक कैसे पहुंचा
येंगे?
सभी पर उपाय जरूर है।
हमारी भले कम लोगों की हो,सत्यवादीयों की शक्ती
संगठीत तो होनी ही चाहिए।शक्तीशाली भी होनी चाहिए।और उन सभी में एकवाक्यता,एकमत चाहिए।आंतरीक झगडा,मतभेद,बैर,लालसा,अहंकार,स्
चाहिए।
एक शक्तीशाली अंतरराष्ट्रीय संगठन।
"तुरंत कृती-तुरंत गती।"
------------------- अब,
दुसरी ओर चलते है।
"उनकी"ओर............
चाहे कोल्हापुर हो,पुणें हो,मुंबई हो,शहर हो या ग्रा
मीण इलाका,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक नजर डालो,
क्या दिखता है?
बहुत ही संगठीत है,शक्तीशाली है।बहुत ही कम समय में प्रचंड शक्ती बढा रहे है,एक हो रहे है,सबको तेजी से जगा रहे है।गलत विचार आग की तरह फैला रहे है।"कुछ भी करने को" तैय्यार हो रहे है।
अत्यंत भयावह कुटनीती द्वारा सभी रास्तों से,हमारे मनोमष्तिष्क पर हावी होने के लिए,शक्तीशाली संगठीत शक्तीद्वारा लगाता
र कोशीश में है।
ठीक इसी तरीके से उन्होने हमसे पाक-बांग्ला छीन लिया।और भी इस देश में
पुरजोर कोशीश में है।
और"हम?"---------
अज्ञान और सोये हुये।
और उपर से,"भाई-भाई",का नारा।हमारे ही लोगों द्वारा।
गुप्त रुप से भयंकर हो रहा है।षड्यंत्र।......जिसकी "चेतना-अतींद्रीय शक्ती जागृत" है उसको सब "अंदर का मामला",दिख रहा है।मुठ्ठी
भर होकर,बहुमात्राओं का जीना ही हराम कर रहे है।
उनकी"कुटनीती एवं षड्यंत्र "द्वारा हमारे इलाके
भी,हमारी बहुबेटीयाँ भी सुरक्षीत नही है।उफ्...
भयंकर षड्यंत्र।।!!!!!!
एक बहुत
पुराना
शक्तीशाली
अमृत वृक्ष का पेड
अंदर से अनेक जहरीले
किडों ने अंदर ही अंदर खोकला बनाने की भयंकर कु-निती जारी है।
बंगाल,केरल में पेड खोकला हो रहा है।देश में भी यही स्थिती है।और हमारे ही कुछ-चंद जयचंद
उन्हे साथ दे रहे है,अनेक अज्ञान है,अनेक सोये हुए है......।
तो अनेकों ऐषोआराम में
मदमस्त बनकर जी रहे है।
तो सोचो।"हम"कहाँ है?
"वो"कहाँ है?
अगर एक होकर हमने सत्य का साथ नही दिया,समय पर जागरुक और कार्यान्वीत नही हुए
सोचते और सोते ही रहे
तो............
भविष्यकाल निश्चीत ही
अंध:कारमय है।
"अंडरग्राउंड"से अनेक मिनी पाकिस्तान बनाने की कृती और कुनीती जारी है।
"सत्य"खतरे में है।
और किस बात का और कितने दिनों का इंतजार बाकी है?
तो सत्य को साथ दो....
सत्य के रास्ते से चलने वालों का साथ दें।देश विदेश में घुम घुमकर,सत्य की रक्षा करने वाले,खुन पसीना दिन रात एक करने वाले का साथ दे।उनकी शक्ती बढाओ।
उस महानायक,"प्रधान",की
बुंद बुंद से शक्ती बढांयें।
तो ही,"भविष्यकाल",उज्वल है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:45 pm] Papa: ये भी तो महत्वपुर्ण है।क्योंकी भगवान ने चौ-यांसी लक्ष योनी यों में पिशाच भी बनाये है,यह सभी को अवगत हो।ताकी हमारी महान संस्कृती का सबको पता चले।
ये भ्रम नही है।सत्यज्ञान है भैय्या।और जब तक सत्य लोगंंगों को नही सक्षझता समाज जागृत नही होगा ।
बोलो।🙏
[23/01 8:50 pm] Papa: मोदी वाहीनी!!!
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गुरूजनों को प्रणाम।दोस्तों,मित्रों,यारों नमस्कार।भगवत्स्वरुप वंदनीय श्री दिवाकरजी ने जो एक बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय ग्रुप बनाया है,"मोदी वाहीनी",जो हिंदुत्व को संपुर्ण विश्व में पहुंचाने के लिए ही बनाया है।
अब हम सभी का उत्तरदायीत्व है की,जितना शिघ्र हो कार्य को बढाना ही चाहिए।समय की यही जरुरत है।
दिल्ली,गुजरात,झारखंड,मध्य प्रदेश,माँरीशस,जनरल ऐसे अनेक व्हाटस्अप ग्रुप बनाकर कार्य आरंभ भी कर दिया गया है।
इस संगठन के लिए परम श्रध्देय दिवाकर जी ने मुझपर जो भरौसा करके,मुझे संगठन का,मिडीया शक्ती के लिए राष्ट्रीय प्रभारी बनाया है,उससे मैं आनंदीत भी हुं।और जीस विश्वास से मुझे चुना है,राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैं कार्य को जरूर बढाने की कोशीश करूंगा।
इस पद के लिए मेरी योग्यता है भी या नही,मुझे तो पता नही है।फिर भी संगठन शक्ती बढाने के लिए सभी और यथायोग्य,सही रास्ते से जाकर संगठनशक्ती बढाके ही रहुंगा।
"विश्व-मानवता अभियान",के तहत हम सभी साथीयों को अब संपुर्ण विश्व में पहुंचकर,सत्य की जीत,सभी रास्ते तथा मार्ग अपनाकर,हमें करनी होगी।
तो अब सभी मान्यवरों को कृती और कार्य आरंभ करने की,जरुरत अभी शुरु हो रही है।
हमें सभी देशों में जाकर पुर जोर से,जोश और होष से कार्य को गती देनी होगी।
ग्रुप पर सभी सदस्यों के विचार,लेख मैं इसिलीए पढता हुं की सभी मान्यवरों को आगे की रणनीती बनाने के लिए क्या किया जाय।
कृपया सभी ग्रुप के सभी मान्यवर खुलकर,इस विषय में अपने विचार रख दें।ताकी आगे,भविष्य में हम सभी ,अपेक्षीत यश की ओर बढ सके। अज्ञानवश कुछ गलत पोष्ट हो गई है तो क्षमस्व।आप सभी के विचारों की अपेक्षा।
हरी ओम।🙏
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:50 pm] Papa: चलते चलते।🤔
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अच्छा,एक बात बताता
हुं प्रिय मित्रों।
लिखने को तो बहुत कुछ
लिख सकता हुं दोस्तों।
एक दिन में दस लेख भी।
ईश्वर ने प्रतिभा तो दि है।
मगर कोई पढता भी है
या नही क्या पता?
जमाना तो फास्ट है।
अगर सचमुच में कोई
पढता भी है तो भी
विचार उसे पसंद आते है या नही ये भी
क्या जानुं यारों?
है तो हम सभी के यार
यारों के भी यार,दिलदार।
अगर पढनेवाला नही है
दिलदार,तो मैं अकेला ही
व्यर्थ की बकबक
क्यों करता रहुं।
अगर किसीको अपनी
दोस्ती ही पसंद नही
तो क्यों लिखुं मैं
व्यर्थ ही भारंभार?😂
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-- विनोदकुमार महाजन।
🙏🚩🕉
[23/01 8:50 pm] Papa: चलते चलते।
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लाठीवाले की कमाल,
चाचा की धमाल,
दोनो ने मिलकर
हिंदुओं का काम किया तमाम।
क्रांतीकारी बनाए बदनाम।
खून की नदीयाँ बहाई
अंग्रेजों ने।
फिर भी हमे आजादी
मिली कैसे बाबा?
बिना खड्ग बिना ढाल??
लोगों की भी हद हो गई,
क्रांतीविरों ने अपनी
जानें गंवाई।
तो चरखे ने आजादी
कैसे रे बाबांनो दिलाई?
अभी तो भी कुछ
दिमाग लगावो,
असलीयत का पता चलाव
क्रातीकारीयों के खून की
किमत व्यर्थ न गवांओं।
उनकी आत्माएं
करती है अब भी
न्याय की पुकार।
सच को जानो,झुटों को
पहचानो।
शकुनी मामा के दुष्कर्मों
का अब पर्दा उठाव।
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--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:50 pm] Papa: चलते चलते।
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हम तो सभी के
दिलों पर राज
नही करते।
सभी के दिलों में भी
हम नही बसते।
हम तो सभी के
आत्मा में निरंतर ही
वास करते है।
क्योंकी,हम हम है।
हम मतलब?व्हि.के.एम.
मतलब........?
विश्व गुरु (व्हि.)कृष्ण(के.) मुरलीवाला।(एम.)👍😀
समझे या ना समझे?
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विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:50 pm] Papa: चलते चलते।
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सत्य की जीत के लिए,
सत्य सनातन को पुन:
गौरवान्वीत करने के लिए
संपुर्ण विश्व पर सत्य....
सनातन की ......
भगवी पताका लहराने के
लिए........
नाना मार्गों से,नाना ढंगो से
हंसी मजाक से,
हंसते हंसाते....
नाचते गाते कभी...
जल्लोश करते...
सभी को आनंदीत करके
सभी का चैतन्य जगाके
हर रंगों से,हर रास्ते से
हमे अब सभी को...
आगे आगे जाना ही होगा।
विश्व के कोने कोने में
अब हमें पहुंचना ही होगा
कोई हंसे,कोई मजाक उडाये.....
चिंता कभी भी नही करके
एकेक कदम हमें...
आगे बढना ही है
बढना ही होगा।
जाग मनुजा जाग
नरदेह का सार्थक करने
"'सत्य प्रेमी",तुझे अब
"सनातन",की जीत...
करनी ही है।
यही अंतीम सत्य है।
सत्य सनातन ही "ईश्वरी...सच्चा "
कानुन है।
जो अब हम सभी को ...
स्विकारना होगा।
पशु पक्षी सहीत सभी जीव
भी तो.....
इसी कानुन से चलते है
इसी कानुन से जीते है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:57 pm] Papa: 🕉सद्गुरु।💐
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जो सद्गुरु के चरणों में,
सबकुछ समर्मीत करता है
उसकी सभी मनोकामनाएं
सद्गुरु पुरा करते है।
सद्गुरु भगवान भी मिला के देते है।
आत्मज्ञान,ब्रम्हज्ञान भी
देते है।
योगशक्ती,योगसिद्धि भी
देते है।धन-मान भी देते है।
पर सद्गुरु चरणों पर...
पुरा चाहीए विश्वास।
जिसे मिल गए सच्चे सद्गुरू...समझो....
उसके जनम जनम के
भाग्य खुल गए।
प्रेम,श्रध्दा,विश्वास,भरोसा
ही......
मिला देते है....
🕉 ।। सद्गुरु चरण।। 💐 🕉
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विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:57 pm] Papa: चलते चलते।
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गुनहगारों को पालनेवाला
देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
आजादी के बाद भ्रष्टाचारी
घोटालेबाजों को
सत्ता में बिठानेवाला
देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
साधु संतो को जेल में
भिजवानेवाला
उनके खिलाप षड्यंत्र
करनेवाला देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
सत्य को दबाने वाला
हिंदु बहुसंख्यंक होकर भी
उनपर ही अत्याचार
करनेवाला देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
सत्य को परेशान,लाचार
हिन,दिन बनानेवाला
देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
सत्यमेव जयते कहकर
असत्य को जीतानेवाला
देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
हिंदुस्थान में रहकर
पाकिस्तान पर
प्रेम करनेवाले गद्दार
यहाँ छिपाये जानेवालों का
देश कौनसा?
हिंदुस्थान?
हाँ..हाँ..हिंदुस्थान।
यहाँ सत्य तडपा तडपा कर मरवाया जाता है।
और पडदे के पिछे से
असत्य को पूजा जाता है।
इसिलीए तो यहाँ लुटारु
सिकंदर महान है।
और भुमीपुत्र शिवाजी
महाराणा चोर है,
ऐसा किताबों में पढाया जाता है।
और हम हिंदु भी
हमारे महात्माओं को
साधु संतो को बदनाम करते है।
और सिकंदर ग्रेट कहते है।
अकबर ग्रेट बताते है।
वाह रे हिंदु तेरी तो
हद हो गई।
झुटे चंगुल में फंसकर तुने
सत्य की ही हार कर दी।
और असत्य की ही पुजा आरंभ कर दी।
हमारा भगवान लाठीवाला नही है।
सिकंदर या औरंगजेब नही है।
हमारा भगवान तो सुभाष है,सावरकर है।
हमारा भगवान तो
शिवाजी और महाराणा है।
आया कुछ समझ में प्यारे?
अब तो जाग।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:57 pm] Papa: *** काश ***
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ईश्वरी कृपा से या प्रारब्ध गती अनुसार कुछ व्यक्तीयों को जागृत अतिंद्रय शक्ती प्राप्त होती है।आध्यात्मीक साधना,मंत्रोपचार,योगसाधना,कठोर तपश्चर्या द्वारा भी यह अद्भुत ईश्वरी शक्ती कम अधिक मात्रा में मिल सकती है।इसके द्वारा
अगाध चमत्कारी ईश्वरी शक्ती उस व्यक्ती में मौजुद रहती है।कुछ व्यक्तीयों में कुछ समय के लिए ही यह दिव्य शक्ती मौजुद होती है।
ईश्वर बडा दयालु है।अपने सभी संतानों पर चाहे वह ईन्सान हो,गाय ब्हैंस हो,साप बिच्छु हो,बाघ सिंह हो।सभी पर प्रेम करता ही है।दिव्य प्रेम।
दिव्य शक्तीयाँ प्राप्त करके मनुष्य इस भगवत् प्रेम को समझ सकता है।दुसरी योनीयाँ तो अज्ञान रहती है।फिर भी उन्हे प्रेम की भाषा समझती ही है।
इस अतिंद्रीय शक्ती द्वारा ,दिव्य शक्ती द्वारा हर एक व्यक्ती अगाध ज्ञान प्राप्त कर सकती है।भुत भविष्य का ज्ञान भी इसके अंतर्गत ही आता है।
अंतीद्रीय शक्ती द्वारा परकाया प्रवेश जैसी अनेक सिध्दीयाँ भी प्राप्त हो सकती है।पशु पक्षी सहीत सभी के आत्मा में प्रवेश करके उनकी भाषा,सुख दुख ज्ञात करने की शक्ती हमें प्राप्त हो सकती है।अतींद्रीय शक्ती जागृती अथवा परकाया प्रवेश के लिए अभ्यास की भी जरुरत होती है।
.सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की,सद्गुरु कृपा के बिना सारा ज्ञान,धन,मान,सन्मान प्राप्त हो ही नही सकता।ईश्वर प्राप्ती भी सद्गुरु कृपा के सिवाय नही हो सकती।
जिसे सद्गुरु चाहिए और मिल नही रहे तो,कुलदेवता की उपासना इसमें सहायभुत होती है।कभी खडतर उपासना भी करनी पडती है।तो कभी युंही गुरुकृपा हो जाती है।
ईशप्राप्ती तो कोई सहज साध्य हो ही नही सकती।कदाचीत जनम जनम भी इसके लिए घुमना पडता है।अथक खडतर एवं कठोर तपश्चर्या ही अनेक असाध्य बातों को भी साध्य बना देते है।
काश !!!!
सभी ईश्वरभक्तों को तुरंत ज्ञान प्राप्ती ,ईश्वर प्राप्ती हो जाती तो.......
खुद ईश्वर भी आनंदीत हो जाते।मगर यह तो संचित का खेल है सारा।इस नियम के अधिन खुद भगवान भी अगर मनुष्य योनी में आ गए तो टाल नही सकते।सुख दुख का,उसमें भी दुख जादा सुख कम,ऐसा फेरा टाल नही सकते।तो हम सभी अज्ञान जीव यह प्रारब्ध गती का फेरा कैसे टाल सकते है?
काश। !!!
हम सभी यह कम सुख और जादा दुख का फेरा टाल सकते।राजा हो या रंक हो,देव हो या दानव हो,पशु हो या पक्षी हो,पेड हो या लता हो,साप हो या बिच्छु हो,बाघ हो या सिंह हो...या फिर अदृष्य पिशाच योनी हो।सभी को इस ईश्वरीय कानुन से,सुख दुख से,हानी लाभ से गुजरना ही पडता है।
हरी ओम।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:57 pm] Papa: चलते चलते।
* * * * * * * * *
चौराहें पर गाय काटने
वो डरते नही।
खुला चैलैंज हमे देने से
वो डरते नही।
बाँट बाँट कर गाय को खाने
वो डरते नही।
खुले आम अत्याचार करने
वो डरते नही।
और हम.......?
सोच सोच कर,डर डर कर
फेसबुक,व्हाटस्अप पर
उनका विरोध हम
करते है।
नंगी तलवारे लेकर
सभी एक होकर
वो खुलेआम वो घुमते है।
और हम हमारे ही संतो को
बदनाम करना,जानते है।
वोटों की लाचारी के लिए
हम उनके ही तलवे
चाटते है।
"हम"कौन?"वो"कौन?
जानो पहचानो।
* * * * * * * * *
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:57 pm] Papa: चलते चलते।
---------------------–------
आजादी के बाद, हिंदुओं को बदनाम करने का,
हिंदुओं को दबाने का,
हिंदुओं को नेस्तनाबुत
करने का,
हिंदु धर्म समाप्त करने का,
भयंकर षड्यंत्र,
खेला गया है।
रचा गया है।
भोले भाले ईश्वर प्रेमी,
हिंदुओं को फंसाने का,
क्रुर षडयंत्र,
इस देश में खेला गया है।
जिसने भी यह ,
दुष्ट दुर्योधनी खेल,
खेला है उसे,
समय-हिंदू समाज,
कभी भी क्षमा नही करेगा।
इंतजार रहेगा उस समय का,
जिन्होने सच को बदनाम,
किया और सच को,
समाप्त करने का,
कौरवी खेल खेला।
उनके पापों के घडे अब
भर चुके है।
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: अभिमन्यु !!!!!!
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प्रारब्ध गती विचित्र होती है।देखो ना यह बातझ भी।
प्रत्यक्ष परमात्मा प्रभु,श्रीकृष्ण देहरुप से पांडवों के साथ,
प्रिय अर्जुन के साथ और अर्जुन पुत्र अभिमन्यु के साथ रहकर भी....
अभिमन्यु को प्रारब्ध गती अनुसार,"चक्रव्युह",में नही बचा पाये।
अजब लिला है भगवान की भी।
मगर.....
हिंदुस्थान पर चंद,मुठ्ठीभर मुगल,अंग्रेज और हमारे ही
कुछ लोगो नें आजतक राज किया।
क्या हम सभी अभिमन्यु की तरह,सभी राष्ट्रप्रेमी
"चक्रव्युह",में सचमुच में फंस गए थे,या फिर....
गहरी साजीश से फंसाएं गए थे?
कृष्ण के समय का अभिमन्यु केवल एक ही था,और प्रारब्ध गती अनुसार चक्रव्युह में ही फंसकर उसका अंत हो गया।
मगर चंद मुगलों ने,अंग्रजों ने और आजादी के बाद कुछ हमारे ही लोगों ने,हमारी संस्कृती समाप्त करने के उद्देश्य से,हमारे कुछ विर अभिमन्यु को,ऐसे चक्रव्युह में फंसाया की पुछो मत।
हम बहुसंख्य और वे अल्पसंख्य होकर भी वोही जीतते क्यों थे?हम ही हारते क्योंथे?
सावरकर,सुभाषबाबु जैसे महान,शुर योध्दांओं को किसने और क्यों अटकाया???क्या वजह होगी।उनके जैसे थोर योध्दे,सेनानी,महापुरुषों को,संत-महंतो को,विद्वानों को क्यों और किसने बदनाम किया?
हमारे महान राजा शिवछत्रपती को किसने चोर-लुटारु के व्याख्या में बिठाया??और जिसने महात्माओं कोषड्यंत्र द्वारा चक्रव्युह में फंसाया,वो ही देश के हीरो बन गए???वो ही नायक बन गए।और आज भी वो ही इस देश के नायक के ही रुप में मौजुद है???
क्यों?क्यों?क्यों?
सत्य किसने और क्यों छिपाया???
क्या आजादी के पहले और बाद में भी,हिंदु संस्कृती,हिंदु धर्म नामशेष करने की किसकी यह गहरी चाल या योजना थी?अगर थी,तो किसकी??
आज भी हमारे कुछ महापुरुष जेलों में सड रहे है।
यह चक्रव्युह में फंसाने का और राज करने का,ड्रामा किसने और क्यों खेला?
मेरा लेख पढने वाले सभी प्रिय पाठकों को मैं नम्र निवेदन करता हुं की,इसपर सभी गहराई से सोचो।
क्यों सत्य को जानबुझकर परेशान किया गया?क्यों सत्य को बदनाम किया गया?
भाईयों,अब हमें अभिमन्यु नही होना है।चक्रव्युह में अब नही अटकना है।जिसे चक्रव्युह में फंसाकर बदनाम किया गया उनको न्याय दिलाना है।सत्य को न्याय दिलाना है।और चक्रव्युह में फंसाने वाले,धुर्त-दुष्ट दुर्योधन का हमें पर्दाफाश करना है।
हमारे संस्कृती के लिए मर मिटने वालों के आत्माओं को शांती दिलानी है।
और हमें सत्य की विजय भी करनी है।अब हमें अभिमन्यु नही बनना है।हमें जगज्जैता राम-कृष्ण बनना है।इस देश को विश्व गुरु बनाना है।
क्योंकी हम सभी,सत्य के पुजारी,सत्य-धर्म के पुजारी,प्रारब्ध गती से अटके या लटके अभिमन्यु नही है।हम सभी राम के,कृष्ण के सिध्दांतों पर चलकर ,"यशश्री",खिंच के लाने वाले विर पुरुष है।
हम रोनेवाले नही,हारने वाले भी नही,हम सब केवल और केवल,.....
जी हाँ....फिर से दोहराता हुं...केवल और केवल जीतने वाले ही है।
इसिलीए तो भगवान नें हमें पैदा किया है।
उठो विर जवानों,उठो मेरे भाईयों,समय तुम्हे है पुकारता।माँ भारती-माँ धरती और खुद ईश्वर तुम्हे है पुकारता।
उठो ईशपुत्रों उठो।सनातन पुत्रों उठो।
सत्य की,न्याय की लडाई लडने के लिए और जीतने के लिए भी सुसज्ज हो जावों।
नया युग तुम्हारी प्रतीक्षा में है।
एक बात और,पढकर प्रतिक्रीया जरूर देना।
हरी ओम।
------------------------------
--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: निवेदन।🙏
------------------------------
सनातन के,परमपुज्य श्री
जयंत बालाजी आठवले
गुरुजी से संबंधीत अपने ग्रुप पर है तो कृपया मेरी बात उनतक जरूर पहुंचाना।
मैंने अभी तक "विश्व कार्य",
हेतु माता गायत्री का पाँच कोटी तथा दुसरे मंत्रो का सात कोटी,कुल बारह कोटी जाप पुरा किया है।अनेक देवी देवतांओं के तथा सिध्द पुरूषों के दर्शन,दृष्टांत तथा वरदहस्त मिले है।आशीर्वाद मिले है।
कुछ दिन पहले,जयंत बालाजी आठवले गुरुजी मेरे सपनों में आये थे।और मुझे बोले,"मैं तुझे पहचानता हुं।"और मेरे सर पर हाथ रख दिया।
प्रत्यक्ष रूप से मैंने आजतक कभी देखा भी नही है।
हो सके तो मेरा मेसैज उनतक पहुंचाना।मेरा कोटी प्रणाम उनतक पहुंचाना।
हरी ओम।🙏
*** विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
दोस्तों,मैं जहाँ भी जाता हुं
सभी को आनंद देने के
कोशीश में रहता हुं।
सभी को "चैतन्य",देने का
काम करता हुं।। अगर है कोई उदास
तो उसके चेहरे पर भी
मुस्कुराहट लाने की
मैं कोशीश करता हुं।
जादा मेसैज देता हुं
इसिलिए होते है कोई उदास,
मगर मेरे लेख पढकर
सच्चे लोग होते है
मेरे दोस्त खास।
दुश्मन मेरे होते है
जलकर खाक।
--------–-------–-------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: चलते चलते।
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फेसबुक,व्हाटस्अप पर
आता है केवल मनोरंजन
के लिए कोई।
तो आता है कोई ज्ञान
पाने के लिए।
कोई आता है ज्ञान
बाँटने के लिए।
कोई करता है राजकारण,
कोई समाजकारण
तो कोई बिजनेस फंडा।
किसीकी होती है
समाज जागृती की ईच्छा।
हर तरह के लोग
अनेक तरह के मतप्रवाह
कोई हँसता है तो कोई
रोता भी है।तो कोई...
रूलाता भी है।
कोई हँसाता भी है।
मौन रहकर कोई लेता है
विडीओ और मेसैज का
पुरा ज्ञान।
आदमी बन रहा है
मोबाईल और नेट का
फैन।
कुटूंब में,समाज में
वह तो जी रहा है
अकेला ही।
हो रही है आँख,दिल
दिमाग और बदन की
खराबी।
फेसबुक,व्हाटस्अप ही
बन गया है सभी का जीवन।
-----------------------------
विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: चलते चलते।
------------------------------
अरे बच्चे थे सारे
हार गए कोई बात नही।
तुम सभी क्यों
होते हो उदास?
हार जीत तो बच्चों की है
प्यारे भाईयों
असली जीत तो
पाकीस्तान को
उसकी बुराईयों पर
हराने पर ही मिलेगी।
छोटेसे खेल पर
क्यों हो गए सभी उदास?
पाकीस्तान का
पुरा षड्यंत्रकारी खेल तो
अब हमे सदा के लिए
करना है खल्लास्स.....।
-----------------------------
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: सोचने की बात!!!
-----------------–------------
आद्य शंकराचार्य:- पैदा होते ही ओमकार जाप शुरु।
दुर्देव:- माँ की मृत्यु के बाद,शव का अंतीम संस्कार करने को कोई नही मिला।शव के टुकडे करके ,बोरी में भर के,स्मशान ले जाकर,अकेले ही अंतीम संस्कार करने पडे।
आज:-(उनके मृत्यु के बाद)चार पिठों में अनेक भक्त।
संत ज्ञानेश्वर(महाराष्ट्र):-
किसीने अन्न तक नही दिया।आलंदी में उनको बहिश्कृत किया।बदन पर थुके।
आज:-अनेक मंदिरों पर धन की वर्षा।
तुकाराम:-महाराष्ट्र के महान संत।
उनकी हयात में गधे पर बिठाकर यात्रा(धिंड)निकाली।
आज:-उनके अनेक मंदीरों में भक्तों द्वारा लाखों के व्यवहार।
ऐसे अनेक हिंदु महात्मे है,जिन्हे जीते जी,नरक यातनाएं सहनी पडी।
दुर्देव:-उनके मृत्यु पश्चात अनेक बडे बडे मंदीर बनवाएं गए।
क्या यह विडंबन है???
दुसरी बाजु।
परदेश से आई मदर तेरेसा जैसे संतो को,हमारे ही हिंदु द्वारा अपार प्रेम,सन्मान,मान,धन,प्रसिध्दी प्राप्त।
आज भी हमारे संतो को अपमानजनक जीना और उपहास।
क्यों?क्यों?क्यों?
ऐसा भयंकर विडंबन,वो भी हमारे ही लोगों द्वारा?
यह भयंकर सिलसिला कब तक चलता रहेगा।
क्यों???
हमारे महापुरुषों का उपहास विडंबन और वह भी हमारे ही लोगों द्वारा।
सिधा सा सवाल है।
सोचो!!!
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-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: बैटल !!! !
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लकडी की बैट(तलवार?)
और लुटुपुटु का बैटल।
(युध्द???)
अब ऐसा नही होगा,
बच्चों का खेल अब
नही चलेगा।
अब तो होगी असली लडाई,
अस्त्रों की और शस्त्रों की।
मिट जायेगा अब,
"पापों का कलंक",
फिर से "वहीं पर "होंगे
देवालय और धर्मालय।
फिर से वहाँ पर
गुंजेगी मंगल आरती की
धुन।
ईशत्व का होगा जयकारा।
असुरों का नाश होगा,
ईशतत्व की होगी जीत।
फिरसे बनेगा,"अखंड हिंदुस्थान।"
बस्स,इसके लिए और... थोडा इंतजार बाकी है।
इसके लिए तो अब
असली लडाई
शुरु हो रही है।
क्योंकी,
आसमान से अब
"आग का गोला",आ चुका है।
पापीयों को जलाने के लिए।
कुछ समय का है इंतजार।
------------------------------
--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: **क्यों चिंता करता है।**
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अकेला ही बैठा था घर में।हताश,उदास,निराश बनकर।
तभी भगवान श्रीकृष्ण आये,और मुझे पुछ बैठे,
"ऐसा हताश,उदास,निराश,दुखी होकर क्यों बैठा है अकेला ही?"
तो मैंने कहाँ," भगवन् क्या करुं?दुनीया में इतना दुख है,अन्याय अत्याचार भी है।देखा नही जाता आँखो सें।इससे भी अच्छी मृत्यु लगती है।प्रभो,व्यर्थ जीवनजा रहा है।अधर्म भी आँखों से नही देखा जा रहा है।मुझ से कुछ अच्छे कार्य भी नही बन रहे है।व्यर्थ जीवन जा रहा है।"
तो प्रभु बोले,"क्यों व्यर्थ की चिंता करता है?जो हो रहा है वह ठीक ही हो रहा है।और जो कर रहा है,वह सब मैं ही कर रहा हुं।तु तो केवल निमीत्तमात्र है।तेरे मन में,दिल में,दिमाग में,देह में,आत्मा में और तेरे आसपास मैं ही तो बैठा हुं।जो तु कर रहा है,वह तु नही कर रहा है।यह सब तो मैं ही कर रहा हुं।तेरे हाथों से लिखता हुं।तुझे लिखने की प्रेरणा देता हुं तो,वह भी मैं ही देता हुं।
तो व्यर्थ हताश,उदास क्यों बनते हो?सब कुछ मुझपर छोड और निश्चींत हो जा।जो हो रहा है,वह केवल और केवल मेरी इच्छा से ही हो रहा है।तो तु व्यर्थ क्यों दुखी होता है।"
ऐसा प्रभु मुझको बोलकर अंतर्धान हो गए।
और मैं थोडा आत्मग्लानी से बाहर आ गया।
अब तो मुझे हरी ओम तो बोलना पडेगा ही ना?प्रत्यक्ष प्रभु परमात्मा ही मेरी चिंता करता है।तो फिकर किस बात की?
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*** विनोदकुमार महाजन।
[23/01 8:59 pm] Papa: 👹इनके अनेक एक्टर बडे हो गए।।।
हमारे क्यों नही???
👹इनके अनेक गायक,संगीतकार आगे लाए गए।
हमारी हुनर होकर भी
हमें पिछे हटाते गए।।।
कौन???क्यों???
सोचो।समझो।
👹हम भी इन्हे गले लगाते रहे चले,बडे करते रहे।।।
हमारे को पिछे हटाते रहे।
क्यों?सोचो।समझो।
🤔गहरी चाल पहचानो।
❎आया कुछ दिमाग में?
🌞कब तक,कितने दिनों तक,हम बिना सोचे समझे,
उनपर प्रेम करेंगे???
अपनों को पिछे हटाते रहेंगे???
🐍वक्त बडा कठिण है।
धिरे धिरे सांप आकार से बडा हो रहा है।
⏰समय से पहले जागो।
आगे क्या करना है सोचो।
नही तो?????
---V...K...M...
[23/01 8:59 pm] Papa: 🕉हे ईश्वर पुत्र।🕉
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मेरे सभी प्यारे ईश्वरपुत्रों,
उठो अब,मैं तुम्हे
जगाने आया हुं।
रोम रोम का चैतन्य जगाओ,
तुम्हारा चैतन्य जगाने मैं
आया हुं।
अधर्म का अंधेरा मिटाने,
धर्म की जीत कराने,
सत्य का प्रकाश फैलाने,
मैं आया हुं,यारों।
चलो ऊठो,
उजीयारे की ओर।
तुम सभी हो शुर विर,
साक्षात ईश्वर के पुत्र ।
तुम्हारे अंदर का,
ईश्वरी चैतन्य जगाओ।
आत्मज्ञान का दिपक जलाओ।
भगवान भी है यही चाहता,
तुम सभी बन जाओ अभी
.......नवयुग के....निर्माता।
चलो चले।उठो चले।
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विनोदकुमार महाजन।
🕉 🕉 🕉
[23/01 9:01 pm] Papa: सामाजीक विचारधारा ।
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कुछ आध्यात्मीक,सामाजीक तथा राष्ट्रप्रेमी जागरुक लोगों को छोडकर समाज में झाँकेंगे,तो क्या दिखता है?
देश,समाज,देव,धर्म इससे हमें कोई मतलब ही नही है।समाज से हमें कुछ लेना देना नही है।
सिर्फ हमारे बारे में बोलो।नगद,धन,पैसा,ऐशोआराम और हमारा सुख इसके बारें में बोलो।
बोलो,हमें कितना लाभ मिलता है,हमारा क्या फायदा होगा,मुझे क्या मिलेगा?बाकी सब गया भाड में।
ना हमें समाज से,ना देश से कुछ लेना देना नही है।
भाईयों क्या ऐसी ही विचारधारा समाज में चल रही है या पल रही है?
क्या ये कटुसत्य है?या मैं ही गलत लिख रहा हुं।
स्वार्थ मोह से हटकर सामाजीक मुल्यों के बारे में कोई सचमुच में सोचने को तैय्यार है? अगर है तो कितने प्रतीशत?
देश की या समाज की उन्नती समाज के विचार धारा पर निर्भर रहती है।
आज जो देश में या समाज में जो भयंकर उत्पात हो रहा है,या फिर देश एक भयंकर स्थिती से गुजर रहा है तो उसके लिए कौन जिम्मेवार है?और यह सिलसिला ऐसा ही चलता रहा,बेफिकीरी ,उदासिनता और वैयक्तीक स्वार्थ से हटकर सोचने का अभाव, ऐसी स्थिती पैदा हो गई तो,दो चार जागरुक लोग क्या करेंगे?
कोई समाजसुधारक या क्रांतीकारक कोई विशिष्ठ ध्येयवाद से प्रेरीत होकर समाज में क्रांती की लहर या बदलाव लाना चाहते है,तो कितने लोग उस विचारधारा से सहमत हो जाते है?कितने लोग जुड जाते है?कितने लोगों तक विविध प्रसार माध्यमों द्वारा सही विचार पहुंचते है?
कितने लोग वैयक्तीक स्वार्थ मोह से हटकर उस विचारधारा को स्विकार करते है?कितने लोग उसमें जी-जान से जुड जाते है?
आज संपुर्ण विश्व मानव के सामने उग्र आतंकवाद,बढता जागतीक तापमान,नैसर्गीक असंतुलन,भेदभाव की घिनौनी राजनिती जैसी अनेक जटील समस्यांयें खडी है।आज ही इस भयंकर समस्याओं के बारे में गंभीरता से विचार नही किया गया और कोई ठोस कदम नही उठाया गया तो???
निश्चीत रूप से भविष्य भयावह है,यह बताने के लिए कोई ज्योतीषशास्र्ती की जरुरत नही है।
समय से पहले जागरुक होना और भविष्य को भापकर,सभी के हितों के लिए सुखों के लिए योग्य निर्णय लेना ये सामुहीक जबाबदारी है।
कोई सामुहीक जबाबदारी नही टाल सकता।या जो जगाने की कोशीश में लगातार रहता है,उसे कोई स्विकार नही करता,उस समाज का या देश का भविष्य क्या होगा???
अगली पिढी बस्स शाप ही देती रहेगी की,हमारे पुर्वजों ने जो अनेक गलतीयाँ की थी,उसकी सजा हम भुगत रहे है।
इसिलीए समय से पहले जागना और स्वार्थ मोह से हटकर,वैयक्तीक सुखों की जादा लालसा न करके,समाजहित,देशहित भावी पिढी का हित सामने रखकर ही निर्णय लेना ही उचीत होगा।
मैंने ऐसे भी अनेक लोग देखे है,जो हमेशा कहते आए है,"जाने दो-मरने दो",
"हमें क्या इससे लेना देना",???
जो सही रास्ता दिखाता है या दिखा रहा है उसे भी समाज अगर मुर्ख समझकर हँसता है,ऐसे समाज में प्रगती की उम्मीद रखना भी कैसे योग्य होगा?
जिसे भविष्य में देखने की,या भविष्य के सामाजीक सामुहीक खतरें के बारें में सोचने या देखने की निसर्गदत्त शक्ती है,मगर समाज उसके विचार स्विकार नही कर रहा है,तो......
ये गलती किसकी है?निद्रीस्त समाज की या निद्रा का स्वाँग रचाने वालों की? या जगानेवालों की?
भाईयों ऐसी अनेक गलतीयों की वजह से आज सच्चाई,ईमानदारी,ईन्सानीयत,ईश्
समय,नियती और खुद ईश्वर तो योग्य समय पर सबकुछ ठीक तो जरूर कर ही देगा।मगर जीस ईश्वर ने हमें"ईश्वर पुत्र",बनाकर भेजा है और हम ईश्वरपुत्र ही है,यही बात भुल गए है और सभी का भविष्य अंध:कार में ले जाने की ओर जा रहे है तो दोष किसका है?
भगवान के लिए न सही,समाज के लिए भी न सही,हमारे लिए भी न सही मगर.....
भविष्य के बारे में और हमारी अगली पिढी के बारें में तो हमें सोचना ही होगा।
समाज आज नही जगेगा तो अनर्थ निश्चीत है।इसिलीए समय से पहले हर एक को जागना ही पडेगा।और जागकर कार्यान्वीत भी होना पडेगा।
तो बोलो भाईयों पढ लिया पुरा लेख?तो क्या सोच लिया?सोना है या फिर जागना है?
मैं तो विविध माध्यमों द्वारा लगातार इसी कोशीश में हुं।आगे भगवान की इच्छा।
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--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: भाईयों,मेरे लेख जरूर पढना।प्रतीक्रिया जरुर देना।अगर लेख पसंद आये या ना ही आये तो जरुर बताना।
गलती से कुछ लिखना भुल गया हुं तो भी बताना।
हरी ओम।
--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: चलते चलते।
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क्या करूं दोस्तों ?
बहुत ही बेचैन हुं।
देश की और दुनीया की हालत देखकर,
परेशान हुं।
अंदर का चैतन्य स्वस्थ,
नही बैठने देता।
बुध्दी,कलांएं नवदुर्गा ने दी
इसिलीए सद्गुणों का भी,
दुरुपयोग करता हुं
सभीको जबरन सदा,
जगाने की कोशीश में
रहता हुं।
कोई होता है आनंदी तो
कोई भागता है दूर।
क्या करुं यारों,
मैं भी तो रहता हुं
सदा बेचैन।
मुझसे ना कोई उदास,
दिल में रहती है
यही आंस,बाणी भी मिठास
फिर भी कार्य नही हो रहे
है मुझसे खास।
एक एक दिन व्यर्थ
जा रहा है।
भगवान भी कडी परीक्षा
ले रहा है।
इसीलीए हंसते हुए भी
मन रहता है उदास।
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--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: जादा लिखने की वजह है की देश की,धर्म की बुरी हालात।संत-सत्पुरूषों पर जो हमले हो रहे है,उससे परेशान हुं,बेचैन हुं।
दिन बदिन गंभीर स्थिती बनती जा रही है।
चिंतीत और भयभित हुं।फिर सभी मौन और शांत है,इसिलीए दुखी भी हुं।
किसीको सताना,परेशान करना उद्देश्य नही है।
सभी के आत्माओं की बेचैनीयाँ मुझ तक पहुंचती है,इसीलीए और भी परेशान हुं।
कश्मीर,केरल,बंगाल और भी ऐसी अनेक जगहों का अन्याय अत्याचार देखकर
क्रोधीत हुं।सभी का चैतन्य जगाकर अत्याचार का बिमोड करने की कोशीश में हुं।किसीका दिल दुखाना,ज्यादती करना,परेशान करना मेरा उद्देश्य नही।
पता है मुझे,होते है मुझसे बहुत से नाराज।पर करूं भी क्यां?
मेरे भाई बहनों पर हो रहे अती अत्याचार से बहुत पिडीत हुं।दिल तो करता है,सभी पापीयों को तुरंत भस्म कर दुं।आग सी है अंदर अन्याय के विरुध्द।
मगर क्या करुं।तीसरी आँख खोलकर पापीयों को तुरंत समाप्त करने के लिए,मैं कोई शंकर भगवान नही।
हो सके तो,ज्यादती के लिए मांफ भी करना।
हंसते रहना।मुस्कराते रहना।
गलती हुई तो गालीयाँ भी देना।मगर मुझसे कभी दूर ना जाना।
अंदर आग है पापीयों के लिए।और अमृत है,सभी के लिए।
-- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: पलायनवाद!!!
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भाग रहा है हिंदु,भाग रहा है।अफगाणीस्तान से भागा,पाकिस्तान से भागा,बांग्ला देश से भागा।
भाग जा,भाग जा।जान बचाकर भाग जा।
अब कश्मीर से भाग रहा है,केरल से भाग रहा है,कैराना से भाग रहा है,बंगाल से भाग रहा है।और भी अनेक जगहों से भाग रहा है।
क्यों?????????
आपसी झगडा,बैर,जयचंद जैसे अपने ही कुछ,चंद गद्दार,इमान बेचने वाले हरामी,और जहर सा बन गया आंतरीक जातीयवाद।
और जादा से हो रही बेफिकीरी।
दिन बदिन हिंदुओं की दशा दुर्दशा बनती जा रही है।
हिंदुओं पर कुछ अपने ही नमक हराम दुसरों की मदद से कुठाराघात कर रहे है।
जब तक हिंदु कमजोर रहेगा,अत्याचारी अन्याय करते ही रहेंगे।
जब तक हम शक्तीशाली बनकर अन्याय अत्याचार का कडा विरोध नही करते,तब तक ये हालत ऐसी ही बनी रहेगी।जात पात भुलकर हर एक हिंदु को एक होना होगा,शक्तीशाली भी होना होगा और एक होकर अन्याय का संगठन द्वारा कडा विरोध भी करना होगा।
अब हमें पलायन नही करना होगा,बल्की हमें जो भगा रहे है,उनको सबक सिखानी होगी।कडी से कडी सबक।आईंदा हमारे खिलाफ कुछ षड्यंत्र किया गया तो अंजाम बहुत बुरा होगा,ऐसा अत्याचारीयों को डर महसुस होना चाहिए।
विश्व के सभी हिंदुओं को अब केवल एक ही होना नही है केवल तो,शक्तीसंपन्न ,आर्थीक संपन्न भी बनना है।
सरकार को भी हमें हमारे हो रहे अती अत्याचारों के बारे में अवगत भी कराना होगा,और सरकार से तुरंत जादा से जादा सहायता लेकर,षड्यंत्र कारीयों के पर भी काटने होंगे और सभी मार्गों से हमारी शक्ती भी बढानी होगी।
समय रोने का या पिछे हटने का नही है।कुछ कर दिखाने का है।यह हमारे अस्तीत्व की,आत्मसन्मान की घडी है।
अब पलायन नही होगा।अब हमें जो पलायन करने पर मजबुर कर रहे है,हमारे ही इलाके में हमें परेशान कर रहे है,उनको अब हम पलायन करने पर बाध्य करेंगे।अब हम भागेंगे नही,जो हमें भगा रहे है उन्हे हम एक होकर,शक्तीसंपन्न बनकर भगाएंगे।
बहुत हो चुका इनका ड्रामा।ड्रामेगिरी वालों को अब हम नही छोडेंगे।
हमारे ही इलाके में अब हम चोर बनकर नही रहेंगे।तो हम ही यहाँ के मालीक है,तो मालीक बनकर ही रहेंगे।और जो चोर है उनको उनकी असली औकात दिखा देंगे।
क्योंकी......
बहुत ही अत्याचार किये इन्होने,और बहुत ही सह लिया हमने भी।अब तो आरपार की ही जंग होगी।
जयतु हिंदु राष्ट्रम।
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--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: ।। दिवाकर श्री ।।
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कुछ नाम ही ऐसे होते है की,उनका स्मरण करने से ही मन प्रसन्न एवं आनंदी बन जाता है।
इसी नाम के लिए अपने जीवन में कुछ गिने चुने लोग ही होते है।
बडे आनंद एवं हर्ष के साथ मुझे इसपर गर्व मससुस होता है।
मेरे दादाजी(पिताजी के पिताजी) मेरे "आण्णा",यानी श्री विश्वनाथ नारायण महाजन,जिन्होने मुझे उनके देहतत्व में होकर और देह त्यागने बाद भी जो सच्चा ज्ञान दिया,उसका वर्णन मैं शब्दों से तो नही कर सकता।"स्वर्गीय दिव्य अनुभुती" बस इतने ही शब्द है।
ईश्वर साक्षात क्या होता है,स्वर्ग कैसे होता है,स्वर्गीय प्रेम अमृत कैसा होता है,दिव्यत्व क्या है?यह सब अगर मुझे दिखाया तो मेरे आण्णा नें।
दुसरी मेरी दादी जैसी,"गोजर बाई।"ना रीश्ता ना नाता।बचपन में माँ का देहांत होने के बाद इस देवी तुल्य औरत ने जो माँ का दिव्य प्रेम दिया,इसका वर्णन क्या करुं?
ठीक इसी तरह मेरे दिल दिमाग आत्मा में और एक नाम गुंजता है,वो है,हरीव्दार के महान संत एवं माता भुवनेश्वरी के उपासक,परम वंदनीय श्री,"दिवाकर श्री",जी का।
जी हाँ।
एक माँ,दुसरे सद्गुरु और तीसरा साक्षात खुद ईश्वर ।जिसे इन तीनों के पवित्र प्रेम अमृत मिले उनका जीवन धन्य हो गया।
मेरी माँ के रुप में परजाती की होकर भी मुझे मेरी माँ मिल गई गोजरबाई के रुप में।ब्रम्हज्ञान और दिव्यत्व दिखाने के लिए सद्गुरु आण्णा जैसे दादाजी मिल गए।
और अब ईश्वरी कार्य में,संपुर्ण विश्व पर ईश्वरी सत्ता स्थापीत करने की प्रेरणा और योग्य दिशा देनेवाले और उसे कार्यान्वीत करनी की शक्ती देने वाले,परम दयालु,ईश्वर स्वरुप साक्षात,दिवाकर श्री जी मिल गए।
जिसे तीनों रिश्ते मिल गए उसके जीवन धन्य हो गए।
नीयती और भगवान भी बडे अजीब होते है।दिखते तो नही,मगर उद्देश्य तो साध्य करके ही रहते है।
परम पुजनीय और वंदनीय श्री दिवाकर जी,तो है एक रत्नपारखी।अचुक पारख करते है ।
वैसे एक व्हाटसअप ग्रुप पर उन्होने मेरे कुछ लेख पढे।और मुझे तुरंत संपर्क करके मेरी पुरी उन्होने जानकारी ली।
मैं एक बात जरुर लिखुंगा की,मैंने आज तक अनेक राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय-देश विदेश के अनेक मान्यवरों को,विविध माध्यमों द्वारा संपर्क किया था।उन सभी का शुन्य प्रतीसाद देखकर मैं बहुत व्यथीत हुआ था।
मगर दिवाकर श्री गुरुजी ने मुझे खुद संपर्क भी किया,फोन भी खुद होकर किया,और अंतरराष्ट्रीय संगठन में मुझे,बिना माँगे ही,"मोदी वाहीनी",का,मिडीया का, राष्ट्रीय प्रभारी भी नियुक्त किया।
मेरे और उनके बिच में जो बातचित हो गई,वो अभी तो नही उजागर कर सकता।
मैं तो एक बहुत ही छोटा,देहात में रहनेवाला,छोटे किसान के घर पैदा होनेवाला,हल चलानेवाला,गाँय की सेवा करने वाला,सिधासादा,छोटासा इंन्सान हुं।संयोगवश पत्रकार हो गया।
और मेरे जैसे एक सामान्य व्यक्ती पर पुरा विश्वास करने वाली व्यक्ती
,मेरे अंदाज से ,कोई साधारण हो ही नही सकती।
साक्षात ईश्वर स्वरुप पवित्र-पावन-शुध्द-परमात्म स्वरुप ही हो सकती है।वो है,दिवाकर श्री जी।उनको मैंने उनपर एक लेख लिखने की अनुमती माँगी थी।उन्होने तो अनुमती दि भी नही थी।फिर भी लेख लिख रहा हुं।क्षमस्व्,परमात्मन्।
विश्व कार्य के लिए,मुझसे उनसे बहुत अपेक्षाँएं है।मैं सभी को (इसी जनम में ही)पुरा करके ही रहुंगा।
ईश्वर की अगाध रचना एवं लिला।ऐसे ईश्वर स्वरुप मेरे आण्णा,गोजरमाय और दिवाकर श्री जी को,और प्रत्येक पुण्यात्माओं को मेरा कोटी कोटी प्रणाम।
हरी ओम।
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--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: आपका साथ चाहिए
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🕉 🚩 🙏 🕉
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*विचार प्रवाह*
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* हक के लिए लड़ाई लड़ो।
* लड़ नही सकते तो लिखो।
* लिख नही सकते तो बोलो।
*बोल नहीं सकते तो साथ दो।
*साथ भी नहीं दे सकते तो ,
जो लिख और बोल रहे हैं ,जो लड़ रहे हैं *उनका अधिक से अधिक सहयोग करें।संघर्ष के लिए ताकत दें। ये भी न कर सकें तो कम से कम मनोबल न गिरायें।*
*क्योकि कहीं न कहीं कोई आपके हिस्से की भी लड़ाई लड़ रहा है।*💐
🙏🕉🚩
------------------------------
---. विनोदकुमार महाजन,
पत्रकार,पुणे।
Mb.No.---
+ 91 98903 49751
[23/01 9:01 pm] Papa: ₹/- वोट के बदले नोट।₹/-
हमारे देश में वोट का महत्व बहुत ही बढ गया है।वोट के बदले नोट,यही धारणा बनती जा रही है।वैसे तो जमाना फ्री का आ गया है।मुक्त में चाहिए सबकुछ।
वोट के बदले नोट चाहिए।वोट के बदले एक करोड चाहिए।वोट के बदले घर चाहिए,नोकरी चाहिए,आरक्षण चाहिए।और नही मिला तो ???दादागिरी।
क्या बुरा हाल हो गया देश का?पुरा सिस्टम ही खतरे में आ गया।अगर देश का कल्याण करने वाला प्रधानमंत्री भी देश को मिल गया,और जरा कुछ अच्छी योजना बनाने में देर हो गई तो,दो रूपये की हातभट्टी पिने वाला भी प्रधानमंत्री को गालीयाँ देता है।खरी खरी सुनाता है।मतदार राजा को बिना कष्ट किये ही सबकुछ चाहिए,वोही फोकट में और वोही तुरंत।क्या यही गणतंत्र है?
इससे हो ये गया की,गुणवत्ता की किमत घट चुकी।"खाओ पिओ मजा करो,ऐश करो",वह भी फोकट में,ऐसी धारणा बन गई,बढती गई।
संस्कारों का मुल्य कम होता गया।कुसंस्कारीत समाज बनाने की गहरी चाल बनाई गई।क्योंकी समाज जब ध्वस्त हो जाता है तो देश का,राष्ट्र का पतन होने में देर नही लगती।और आजादी के बाद किसने यह गहरी चाल चली?क्यों?सुसंस्कारीत समाज को असंस्कारीत बनाने की,और अपना निजी फायदा उठाने की योजना किसने बनाई?अमृत वृक्ष का बिज बोने के बजाए विषवृक्ष के बिज किसने और क्यों बोये?
आज सुसंस्कृतों पर असंस्कृत क्यों भारी पड रहे है?क्या यह संस्कृती निर्मुलन की चाल थी?क्यों?
गुणवान व्यक्ती अवगुणी के पास उसका कल्याण करने के लिए जायेगा तो क्या,वह अवगुणी गुणवान को स्विकारेगा?बिल्कुल ही नही।दोष उसका नही है।उसपर जानबुझकर किए गए बुरे संस्कारों का है।
हातभट्टी पिनेवाले के सामने रामायण का पाठ करने से क्या फायदा होगा?अगर असली हिरे या असली विचार लेकर समाज में जायेगा तो काँच के नकली बाजार में असली को कौन मानेगा?
समाज को विवेकानंद की जगह सलमान खान या फिर तैमुर को पैदा करनेवाला सैफ अली खान ही चाहिए तो क्या करें?ये दोष हिरे बेचने वालों का है या फिर काँच के टुकडे बेचने वालों का है।और जब समाज की धारणा ही ऐसी बनाई जाती है,तो वह समाज वह राष्ट्र पतीत होने में क्या देर लगेगी?
आखिर आजादी के बाद कुछ लोगों ने राष्ट्र को भ्रष्ट करके अपना राक्षसी उद्देश्य साध्य करने की किसने बनाई?क्यों बनाई?क्या उद्देश्य था आखिर?
और आज इसका उत्तर क्या है।हल क्या है?असुरक्षीत समाज में सुरक्षितता की कौन जिम्मेवारी लेगा?मतलब समाज में,"वोट के लिए नोट"का माहौल बनाकर अपना दुष्ट विचार साध
य करने की साजीश किसने की है तो,वह समाज असंस्कारीत और और असुरक्षीत ही रहता है।जहाँ सुरक्षितता की कोई भरौसा नही वहाँ विकास भी कैसे होगा और कौन करेगा?
अब मजबुरन समाज को हिरे देनेवाले ही मजबुरन परदेश चले जायेंगे तो परदेश ही समृध्द होगा।और यहाँ काँच का ब्यापार करनेवाले ही बडे हो जायेंगे,उन्हे ही मान सन्मान मिलेगा।और काँच के टुकडे खरीदने वाले भुके,कंगाल ही,दरीद्री ही रह जायेंगे।
देश में आजादी के बाद काँच के ब्यापारींयों की चलती थी।आज थोडा परीवर्तन दिख रहा है।घर घर जाकर असली हिरे का मोल समझाया जा रहा है।
अब "हिंदुस्थान",के भविष्य में क्या लिखा है नियती ने यह समय ही बताएगा।
क्यों हिरे के ब्यापारीयों सहमत हो ना मुझसे?कम से कम हम भी तो तात्वीक मतभेद छोडकर राष्ट्रनिर्माण के लिए अब एक हो जाएं।भाषा गहन है।समझने वालों को ईषारा भी काफी है।
तो आखिर में एक बार फिर हरी ओम तो बोलना ही पडेगा।हरी ओम।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:01 pm] Papa: चलते चलते!!!
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आप कुछ भी ना लिखो,
तो भी मैं लिखता जावुंगा।
आप कुछ भी ना बोलो,
तो भी मैं बोलता जावुंगा।
आप हो गए नाराज,
तो भी मैं लिखता जावुंगा।
आप रहेंगे सदा खुश,मस्त
तो भी मैं लिखता जावुंगा।
कोई हो उदास या फिर,
कोई हो आनंदी,
सभी को सदा के लिए,
जगाने की कोशीश में रहुंगा।
बोअर मत होना यारों,
अंन्दर की आग,
स्वस्थ नही बैठनी देती।
असुरी शक्तीयों का
नंगानाच देखकर
परेशान हुं।
ईश्वरी कानुन की जीत
देखने के लिए मैं
इंतजार में हुं।
आओ सब मिलकर
पृथ्वी का स्वर्ग बनायें,
दिल में अच्छे आरमाँ लेकर
मंजील की ओर बढ जायें।
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विनोदकुमार महाजन।
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