संपूर्ण लेखांक भाग २२

 कृष्ण कृष्ण।।

मन में कृष्ण,
रोम रोम में कृष्ण।
आत्मा में कृष्ण,
कृष्ण ही जीवन।
कण कण में कृष्ण,
जन जन में कृष्ण।
दस दिशाँओं में कृष्ण।
पशुओं में कृष्ण,
पक्षीयों भी कृष्ण।
जहाँ देखो वहाँ,
कृष्ण ही कृष्ण।
जीवन धन्य हो गया,
कृष्ण प्रेम मैने पाया।
कृष्ण की ही सब माया,
कृष्ण नाम मैने पाया।
धन्य हो गया जीवन,
प्रभु चरणों में समर्पण,
देह बन गया।
*विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: ??? क्यों ???
ईश्वर भक्ती करने की,हिंदु धर्म की सेवा करने की आसाराम बापु को सजा।
देशद्रोहीयों को आजादी।क्यों?
राष्ट्रप्रेमी जवान पठानिया को जेल।
पत्थरबाज को खुली छुट।क्यों?
बहुसंख्यक हिंदु होकर भी उनपर अन्याय,अत्याचार।
पाकीस्तान जिंदाबाद नारे लगानेवालों को देश में सन्मान।
क्यों।
आखिर यह नाटक,कब तक चलेगा इस देश में।
क्यों?
बंद करो अब गद्दारों को,राष्ट्रद्रोहीयों को इज्जत देना।अब इन हरामखोरों को तुरंत सजा देने के लिए और राष्ट्रभक्तों की रक्षा के लिए तुरंत सख्त कानुन बनाओ।
भुन भुनकर,चुनचुनकर मारो,कानुन से ही,इन देशद्रोही,हरामखोर,निच,नमकहराम गद्दारों को।
अगर जल्द कानुन नही बनता है तो अब अन्याय से पिडीत जनता को ही अब आगे आना होगा।अब हमें अन्याय नही,न्याय चाहिए।न्याय चाहिए।तुरंत न्याय।
अब तक बहुत अत्याचार सहें है हमने,मगर अब नही सहेंगे।अन्यायी अत्याचारीयों को अब हम माफ नही करेंगे।
बहुत प्रेम किया उनपर हमने भाई समझकर।मगर ऊन्होने बदले में हमें क्या दिया?
अब हम हमारे ही गद्दार जयचंदो को भी सब सिखाएंगे।क्यों???
क्योंकी अब हमारा अस्तीत्व ही खतरे में आ रहा है।
अगर सभी समस्या की जड पाकीस्तान ही है,तो एक ही बाँम्ब से उखाड दो यह जड।अब हम और अत्याचार नही सहेंगे।
क्यों?क्योंकी हम ईन्सानीयत के पुजारी है।और हैवानीयत के कर्दन काल है।
जय हिंद।वंदे मातरम।हरी ओम।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: **जींदगी की लडाई।**
ऐ मेरे दोस्त,कभी भी ना हो
तु ऊदास।
पग पग पर संघर्ष गहरा है।
फिर भी जींदगी की लडाई,
तु लडता जा।
कदम कदम बढता जा।
मंजील के लिए सदा,
मेरे दोस्त तु,
आगे आगे चलता जा।
दिलमें रखना अरमान बडा,
हताश,उदास,नाराज कभी
भी मत बनना मेरे दोस्त।
कदम कदम बढता जा।
चाहे मिले तुझे किसीकी साथ,
या फिर नही देगा कोई,
तुझे साथ,
फिर भी दुखी मत होना
मेरे प्यारे,अच्छे दोस्त।
कदम कदम तु आगे
आगे बढता ही जा।
कभी भी ना रोना,
कभी भी ना रुकना,
कभी भी ना हारना,
मेरे दोस्त तु आगे आगे बढता जा।मंजील की ओर
बढता जा।
चाहे आने दे कितने भी तुफान या आँधिया,
या फिर चाहे हजम करना पडे कितनी भी जहर की,
शिषियाँ,तु कभी भी मत रोना।मेरे दोस्त....
आगे आगे बढता जा।
जब दुख हो दिल में
बहुत गहरा,तो तु मझे
याद जरुर करना।
मेरे दोस्त जीवन की लडाई
तु लडते ही रहना।
मिलेगी एक दिन तुझे
तेरी मंजील।
आयेगा भगवान भी तेरे
अश्रु पोंछने भी जरुर
बस्स..उस पर श्रध्दा अतुट रखना।
जींदगी में कभी हार नही मानना मेरे दोस्त,
जीवन की लडाई लडते रहना।और......
एक दिन जीत के ही दिखाना।
हताश,ऊदास नही होना।
आगे आगे बढते जाना।
हो सके तो कभी,
"विनोदकुमार महाजन"जैसे
यार को कभी याद भी करना...दोस्त.....
आगे आगे बढते ही रहना।
हरी ओम।
*****विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: *और क्या चाहिए?*
मुझे न चाहिए शिष्य,
न चाहिए चेले ना भक्त।
मुझे चाहिए भगवान,
मुझे चाहिए सद्गुरू।
न चाहिए धन,ना दौलत,
न चाहिए ऐशोआराम।
मुझे तो चाहिए,
दोस्तों का सच्चा प्यार।
न चाहिए किर्ती,ना यश,
न बंगला ना गाडी,
मुझे चाहिए मेरे दोस्तों से,
यारी।
मगर दोस्त हो,दिलदार,
यारों का भी यार,
सुख दुख में साथ देने को,
रहे सदा तैय्यार।
न धन आयेगा संग,
संग आयेगा ना सोना चांदी
कृष्ण अर्जुन की तरह,
युगों युगों तक,
अमर रहेगी,दोस्तों की यारी।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: भगवान कहाँ है?🌞
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भगवान कहाँ है?
आपके अंदर ही है।
स्वर्ग कहाँ है?
आपके अंदर ही है।
तिर्थक्षेत्र कहाँ है?
आपके अंदर ही है।
चैतन्य कहाँ है?
आपके अंदर ही है।
अमृत कहाँ है?
आपके अंदर ही है।
भगवान कहाँ है?
मेरे,आपके सभी के अंदर ही तो है।
सबकुछ अंदर ही है तो,
बाहर ढुंढने की क्या जरुरत?
जानो,पहचानो,
ज्ञानचक्षु खोलके,
खुद की पहचान करो।
"अहं ब्रम्हास्मी,"
"सो अहम्,सो अहम्",
आत्मा परमात्मा एक है।
जो "पिंड में,"है वही तो
"ब्रम्हाड ",में भी है।
पंचमहाभुतों का देह
पंचमहाभुतों की सृष्टी।
अंदर आत्मा बाहर परमात्मा।
वही चैतन्य।हम सभी में।
सारे दिशांओं में।
तो मैं कौन?आप कौन?
रोम रोम में भगवान।
कण कण में भगवान।
मैं भी भगवान,प्यारे...
तु भी भगवान।
ज्ञानचक्षु खोलो।खुद को
पहचान लो।
हरी हरी:ओम।
-----------------------------
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: चाहे सुख हो या दुख,
हिम्मत कभी भी मत हारना।
चाहे अमिरी हो या गरीबी,
मंजील कभी भी नही छोडना।
चाहे राजमहल हो या फिर,
गरीब की झोपडी,
ईश्वरी कार्य तो करते ही रहना।
चाहे पंचपक्वान हो या,
सुखी रोटी,
मन संतुष्ट हमेशा रखना।
चाहे यश मिले भी या,
ना मिले,हताश उदास ,
कभी भी न होना।
कार्य में साथ देने वाला,
कोई मिले ना मिले,
अकेले ही मंजील की ओर बढते ही रहना।
दृढ निश्चय से बढेंगे
मंजील की ओर तो,
कोई साथ दे ना दे...
ईश्वर तो जरुर साथ देगा।
ऐ मेरे उदास मन,
हौसले रख बुलंदियों के,
हजम कर सारे विष के प्याले,
एक दिन तु तेरी मंजील तक जरुर पहुचेगा।
राही है तु,चलता जा..
चलता जा.....
ऊदास,हताश न होकर मंजील की ओर बढता जा।
"विश्व-विजेता",बनने के लिए,समय तेरा इंतजार कर रहा है।
बस्स....थोडे धैर्य और...
शांती से...कदम कदम तु..
आगे बढता जा,आगे बढता जा......।
ईश्वरी कानुन की जीत के लिए और हैवानियत की
हार के लिए अविरत तु...
लडता जा...लडता जा...
----*विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:22 pm] Papa: 🕉विश्व विजेता🏆
       हिंदु धर्म।!!!🕉
---------------------------
विश्व के सभी हिंदुओं को मैं,"विनोदकुमार महाजन,"आवाहन करता हुं की,अब....
विश्व विजेता हिंदु धर्म,बनाने के लिए,
अब.......
क्रांती होकर रहेगी,कहने के लिए,
अब...
विश्व क्रांती हिंदु संगठन बनाने के लिए,
अब,शांती से क्रांती करने के लिए,हम सभी को एक होकर...आगे की रणनिती तैय्यार करनी ही है।
नामुमकीन लग रहा है यह सब?
ईश्वरी कृपा प्राप्त करके,नामुमकीन को भी मुमकीन में बदलने की हम सभी क्षमता रखते ही है।
तो देर किस बात की?अभी से कार्य आरंभ करो।
और थोडे सालों बाद ईश्वरी इच्छा से यह सब होनेवाला ही है।संपुर्ण विश्व उसी दिशा में केंद्रीभुत तो हो ही रहा है।जरा चैतन्य जगाके तो देख लो।भविष्य का सारा नजारा,"दिव्य चक्षुओं " को दिखाई देगा।
बस्स.....इस ईश्वरी कार्य के लिए हम सभी को अब जागरुक होकर,कार्यरत होने की जरुरत है।
इसिलीए हमें हमारे,सिध्द और शुध्द,ईश्वरी सिध्दांत पहचानने होंगे।और सभी को बताने भी होंगे।
ईसिलीए सबसे पहले आप के अंदर बैठे भगवान को पहचानना होगा।उसकी आवाज भी सुननी होगी।और दुसरों को बतानी भी होगी।
संपुर्ण विश्व के सत्य सनातनी एक हो गए तो....देखते ही देखते कार्य सफल हो जायेगा।और हम....
कार्य सफल बनाके ही रहेंगे।इसिलीए तो हम (सभी)आये है।कहाँ से??
खुद ही ढुंडो पता लग जायेगा।
"हिंदुमय विश्व,"बनने की,और....
बनाने की,"शुरुआत,"तो..
"ईश्वरी इच्छा से,"हो ही चुकी है।
तो सभी को एक साथ जरुर बोलना ही पडेगा,
बोलो,
सत्य की जय हो।
सत्य सनातन की जय हो।
हिंदु धर्म की जय हो।
ईश्वरी धर्म की जय हो।
मानवता धर्म की जय हो।
हरी ओम।🕉
🏆🏆🏆🏆🏆🏆🏆
👍***
विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:22 pm] Papa: *अजब-गजब*
अपना समझकर हम,
उनसे जी-जान से,
सदैव प्रेम करते रहे।
राम-रहीम एक जानकर,
उन्हे हम ,"पाकीस्तान"का
एक अलग घर दे दिया,
और हमारे भी घर में..
प्रेम से जगह भी दे दी।
हम तो सदियों से है..
बडे ही सहीष्णु,दिलदार और दिलवाले।
प्रेम करते है तो हम....
हमारी "लंगोटी"भी देते रहे।मगर....
हमने उन्हे अलग घर भी दिया,
हमारे घर में भी जगह दी।
बहुत प्रेम भी किया,
मगर वो तो हमें,
दिलदारी से एक हमारा,
हक का,"राम मंदिर"भी ,
नही दे रहे है,और...
हमारे ही कुछ,"जयचंद"
हमें ही"असहिष्णु"होने का
आरोप लगाते है।
वाह रे"कलीयुग",
उलटा चोर कोतवाल को डांटे!!!!
सब गजब हो गया,सब अजब हो गया।
**विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:22 pm] Papa: 🐄.मेरी गौमाता।🐄
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मेरे जीवन एह एक सत्य कथा है।हम जीसे जानवर,पशु कहते है,वे कोई जानवर या पशु नही होते है।मुझे तो लगता है की,हमारा प्रेम पाने के लिए ईसी रुप में जरुर कोई,"दिव्य-आत्माएं,"बहाना बनाकर हमारे सामने आते है।और इनपर प्रेम करने से कभी भी धोका नही देते है।
जब मैं मेरे छोटेसे गांव मे रहता था,तो मेरे घर में एक सफेद रंग की गौमाता थी।बहुत ही शालीन,गरीब और सभी पर प्रेम करने वाली।
मेरे साथ हमेशा प्रेम से बहुत बाते करती थी।मैं उसे खेत में ले जाता,चारा खिलाता,धोता,उसका दुध निकालता था।
मेरी गौमाता बडे ही प्रेम से मुझे,उसकी मुलायम जीभ से हमेशा चांटकर अपना दिव्य प्रेम व्यक्त करती रहती थी।
कुछ कारण वश मेरा गांव छुट गया।मैं शहर चला आया।मेरी गौमाता वहीं गांव में रह गई।
शहर में उसकी याद तो मुझे हमेशा आती थी।कुछ दिनो बाद मेरी गौमाता मेरे सपनों में आई और मुझे बोली,"कितने देर से तुझे ढुंड रही हूं।तु मिल ही नही रहा था।मैं अब स्वर्ग जा रही हूं।तुझे बताने के लिए मैं यहां आई थी।"
और थोडे दिनों बाद सचमुच में मुझे मेरे गांव से एक संदेशा आया,"अपनी गौमाता अब नही रही।उसकी मौत हो गई।"
यह सुनकर मैं बहुत रोया था।
और.........
क्रुर इंसान आज गौमाता को,केवल जानवर समझकर काटकर खा रहा है। हैवानियत की भी कोई हद होती है।और दुख की बात यह है की हमारे ही कुछ "जयचंद,"सत्ता-संपत्ती के लिए,हैवानीयत का साथ देते है?धिक्कार है ऐसे पापींओं का।
जीतने धोके हम इंसानों से खाते है,शायद इतने धोके तो हमें पशु पक्षी भी नही देते है।उनपर पवित्र प्रेम करने से वह केवल और केवल,पवित्र प्रेम ही करते है।धोका कभी भी नही देते।
हरी ओम्।🙏
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******* विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:22 pm] Papa: ** शक्तीसंपन्न हमें तो ,
       होना ही है!!!**
ग्रुप के सभी मान्यवरों,भाई और बहनों हम सभी को अब शक्तीसंपन्न,सामर्थ्यवान तो होना ही है।
क्यों?
क्योंकी,अब हम सभी को मिलकर अब एक नया ईतीहास बनाना है।ईन्सानीयत,प्रेम,भाईचारा,सच्चाई,अच्छाई,ईश्वरी सिध्दांत और कानुन की जीत  में संपूर्ण प्रभु के पृथ्वी पर करनी ही है।इसिलीए तो दयालु प्रभु ने हमें पृथ्वी पर भेजा है।
इसिलीए हम सभी को इसी कार्य के लिए,हरेक को,आर्थीक,शारीरीक,मानसिक स्वस्थ और मजबुत होना ही होगा।इसके सिवाए हम "कार्यसिध्द,"कैसे बन सकेंगे।मोह तो किस बात का हमें है ही नही।फिर भी कार्यपुर्ती के लिए भौतीक साधनों की भी हमें नितांत जरुरत है।इसी कार्य के लिए माता महालक्ष्मीजी के आशीर्वाद की भी हमें जरूरत है।
हॉँ,एक बात तो तय है की काला धन,पाप का पैसा,हराम का पैसा हमें इसी कार्य के लिए चाहिये ही नही।इससे बेहतर ये है की कार्य सफल नही बनेंगे तो भी चलेगा।पवित्र कार्य पुर्ती के लिए हमें पाप का धन नही चाहिए।माता महालक्ष्मीजी की कृपा चाहिए।और अगर हमारे इरादे पक्के है,हौसले बुलंद है तो हम सभी,केवल और केवल,जीतकर ही रहेंगे।
क्या मैंझूट या कोई भ्रम में लिख रहा हूं?बिल्कुल नही।हम सभी को अब,"विश्व-विजेता,"बनने के लिए जीतना ही है।रोना,सोना बिल्कुल बंद।
तो भाईयों और बहनो,"नया-युग,"निर्माण के लिए है सब तैय्यार?
हम सभी मिलकर प्रभु की सुंदर धरती को फिर से सुंदर,वैभवसंपन्न बनाके ही रहेंगे।
हंसो मत मुझे मेरे प्यारे यारों।
जय हिंद।हरी ओम।
आपका,
विनोदकुमार महाजन।🕉💐💐💐
[23/01 9:24 pm] Papa: 👹पॉर्न ❌व्हिडीओ👹
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फिल्म इंडस्ट्री ने ,स्वैराचार दिखाने में हद कर दी थी।टिवी पर भी अनेक स्वैराचारी एवं अनैसर्गीक,हिंसक,अती रंजक,कामनीए दृष्य दिखाते है।अब तो पॉर्न व्हिडीओ ने नेट पर बडा ही हंगामा खडा किया हुआ है।सचमुच में समाज क्या गलत दिशा में जा रहा है?
स्वैराचार,हिंसाचार,भ्रष्टाचार,अत्याचार,अनाचार,दुराचार ईत्यादी अनेक चार के साथ,हेरॉईन,कोकेन ,गर्द,अफिम,चरस,गांजा,दारु,सिगारेट,गुटखा,मटका जैसे अनेक प्रकार के जहर,समाज को खोखला कर रहे है।कानून हाथ पर हाथ पर हाथ धरे बैठा है।समाज भी अंध बन चुका है।अनेक प्रकार के दुर्गुण सभ्यता के विषय बनते जा रहे है।तो दुसरी तरफ सद्गुणी व्यक्तींयों को,पुराने खयालों वाला या फिर मुर्ख समझकर दुर्लक्षीत किया जा रहा है।
दुषण ही भुषण बनते जा रहे है।और भुषण ही दुषण बनते जा रहे है।
परीणाम यह हो रहे है की युवा पिढी बर्बादी की ओर बढ रहे है।समाज बर्बादी की तरफ बढ रहा है।
परीणाम स्वरुप संस्कार,संस्कृती,ईन्सानियत खतरे में पढ रही है।
इससे समाज और समाज मन संवेदन शुन्य बनते जा रहे है।विकृत समाज निर्मीती द्वारा प्रेम,भाईचारा,दया,क्षमा,प्रेम,मानवता समाप्त हो रही है।कुटूंब व्यवस्था समाप्त हो त्रही है।ईश्वरी गुण संपन्न समाज होने के बजाए,असुरी गुणसंपन्न समाज बन रहा है।साधु संतो को तो मानो,मगर असुरी गुणन छोडो,ऐसी विदारक स्थिती पैदा हो रही है।
समाजविघातक,वैयक्तिक स्वार्थ,मोह,अहंकार बढने से इंसान छोटा बनता जा रहा है।ईश्वर को अपेक्षीत परोपकारी समाज,मानव अब संकुचीत,स्वार्थी बन रहा है।
परीणाम????
भयंकर उष्मा,प्रदुषीत जल-वायु-जमीन।जंगल पेड कट रहे है।और-....और-....
निसर्ग चक्र,सृष्टी चक्र धिरे धिरे संतुलन खो रहा है।
समय से पहले जागो इंन्सान!!!!!!नही तो अनर्थ को कौन टाल सकता है???
व्यापक और सर्वसमावेशक हिंदुत्व में आत्मोध्दार के साथ विश्वोध्दार की भी संपूर्ण क्षमता एवं शक्ती है।क्योंकी इसमें पुर्णत्व है।इसिलीए संपूर्ण विश्व को अब,निरर्थक साम्यवाद,समाजवाद,निधर्मीवाद साम्राज्यवाद,विस्तारवाद को त्यागकर विस्रत्व हिंदुत्ववाद को स्विकारना अनिर्वार्य बन गया है।विश्व के सभी समस्याओं का सही हल और योग्य उत्तर केवल और केवल हिंदुत्व में ही है।
क्योंकी........
इसे इंन्सान ने नही बल्की खुद भगवान ने ही बनाया है।
गहन चिंतन,मनन,अभ्यास करके देखो।सत्य स्पष्ट दिखाई देगा।जरुरत है धैर्य और शांती से सोचकर,
कदम आगे बढाने की।
(मैं आभारी हूं मेरे एक दोस्त का,जिसने ग्रुप पर अनजाने में पॉर्न व्हिडीओ डाला।मुझे बहुत बुरा लगा सोचने पर मजबुर हो गया।और अनायास ही यह लेख तैय्यार हो गया।मित्र,बुरा मत मानना।🙏जो होता है भगवान की इच्छा से...
और....जो होता है केवल अच्छे के लिए ही होता है।
हरी ओम।)
🕉🕉🕉🕉🕉⛳⛳----------------------------
---**विनोदकुमार महाजन।


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