लेखांक भाग २९

 Papa: मेरे प्यारे सभी दोस्तों,

मेरे सद्गुरु की परम कृपासे और ईश्वरी कृपा से मैंने हिंदु संस्कृती को विश्व गुरु बनाने के ईश्वरी कार्य के लिए, मैंने लगभग बिस सालों से जादा खडतर तपश्चर्या की है।और मैं मेरा मकसद पुरा करके ही रहुंगा।
मेरे दादाजी(विश्वनाथ नारायण महाजन)ने,(मेरे आण्णा)मुझे उनके स्वर्ग जाने के बाद,अर्थात देह त्यागने बाद भी मुझे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से सदैव सहायता की है।
सपनों मुझे उन्होंने गायत्री मंत्र दिया था।जिसका मैं आजतक पाँच करोड ईक्कीस लक्ष जाप कर चुका हुं।
वैसे तो बचपन से ही मुझे सपनों में अनेक देवी देवता दर्शन देते है।आज भी यही सिलसिला चालु है।मेरी माँ ने भी मुझे मेरे बचपन में उसके मृत्यु के बाद भी,देह धारण करके दर्शन दिये थे।
मेरे दादाजी के गुरु ने मुझे सबसे पहले कुलदेवता का मंत्र सपनों में ही दिया था।जिसका एक करोड जाप मैं कर चुका हुं।सोनारी(परांडा) के कालभैरवनाथ मेरे कुलदेवता है ,जो की बहुत जागृत है।मेरे हाथों पर उन्होने धन दिया था।तभी से मेरी आर्थीक समस्या सदा के लिए समाप्त हो गई।
जागृत हनुमान(भानसगांव),जागृत नारसिंव्ह(कोळे नृसिंहपुर)ऐसे अनेक देवताओं ने मुझे पहले ही सपनों में दर्शन दिये थे।कुछ कारण वश इन देवतांओं के मुझे प्रत्यक्ष दर्शन हो गए।
शेगांव के गजानन महाराज जी का भी मैंनें,"गण गण गणात बोते",यह मंत्र दो कोटी जाप पुरा किया है।गजानन महाराज जी ने मुझे,मेरे सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया है की,"विश्व में तु बहुत ही बडा नाम कमायेगा।"
सज्जनगड के रामदास स्वामीजी ने भी,उनके शिष्य, कल्याण स्वामीजी को मेरे सर पर हाथ रखने को कहा था।उनका हाथ सरपर रखने से ही,मैं बहुत देर तक घुमता था।(दृष्टांत)।
मेरे गाँव की ग्रामदेवता, खंडोबा की पत्नी मुझे मेरे गले में रुद्राक्ष माला डाल रही थी।मगर खंडोबा म्हाळसा को बोला,"उसे रुद्राक्ष नही तुलसी माला चाहिए।यह विष्णु है।"ऐसा कहकर खंडोबा ने मेरे गले में तुलसी माला डाली थी।
कोल्हापूर की माता महालक्ष्मी जी का भी मैंने दो कोटी जाप पुरा किया है।तब माँ ने मुझे मेरे घर रहने को आने का,मेरे हाथ में हाथ देकर वचन दिया था।
माँ मुझे बोली थी,"क्यों चिंता करता है?क्यों रोता है?क्यों परेशान होता है?अब मैं तेरे घर रहने को आई हुं।"बहुत ही मंजुल स्वर में मुझे मेरी माँ बोली।
और भी अनेक देवी देवताओं के जाप मैंने किए है।अत्यंत खडतर जीवन बिताकर मैंने मेरी तपस्या पुरी की है।लगभग तेरा कोटी जाप करके,अनेक देवी देवताओं के,सिद्ध पुरुषों के आशीर्वाद प्राप्त कर चुका हुं।
अब समय आ गया है,प्रत्यक्ष फलप्राप्ती का,और ईश्वरी विश्व कार्य आरंभ का।
विश्व परीवर्तन और ईश्वरी राज्य की स्थापना।सत्य सनातन की विश्व पटल पर जीत।
और मैं मेरे मकसद में कामयाब होकर ही रहुंगा।
यह लेख केवल,"माय मंदीर",के श्रध्दालु भक्तों को समर्पीत है।
क्योंकी,"माय मंदीर",संस्कृती वाहक भी है और संस्कृती रक्षक भी है।
हरी ओम।
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--  विनोदकुमार महाजन।
[29/12/2017 5:29 am] Papa: स्वामी पशुपती जी।
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"सर्वव्यापी हिंदु सेना",के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन्माननीय श्री.पशुपतीजी ने मेरा लेख फेसबुक पर पढा और मुझे तुरंत प्रतीक्रिया दि इसके लिए उनका दिल से आभार।सक्रियता कैसी हो,तथा तुरंत और शिघ्र गति से कैसे कार्य करना चाहीए इसका एक आदर्श उन्होंने तत्परता से दिखाया।
तो अभी नवराष्ट्र निर्माण तथा देश को फिर से गौरवशाली बनाने के लिए "हिंदुस्थान" को विश्व गुरु बनाने के लिए,अब तुरंत कार्यवाही की सख्त जरूरत है।
मैं मेरे हजारों लेखों में भी यह लिख चुका हुं की,देश को अब क्रांती की सख्त जरूरत है।और अब,"क्रांती होकर ही रहेगी।"
परीवर्तन तो सृष्टी का नियम है।और इसके लिए समय करवट बदल रहा है।
खैर.....
इस विषय में स्वामीजी से ,जो की पेशे से डाँक्टर भी है,फोन पर मेरी विस्तृत बात हो गई और उन्होंने मुझे इसपर चर्चा करने के लिए तुरंत दिल्ली बुलाया इसके लिए उनका दिल से आभार।
इस विषय पर मैं स्वामीजी को मैं आश्वस्त करना चाहता हुं की,देश ही नही संपुर्ण विश्व हिलाने की मैं प्रचंड क्षमता रखता हुं।बस कोई तो भी एक सच्चा और ईश्वरस्वरुप साथी तथा साथ देनेवाले की तलाश थी।जो शायद ईश्वरी इच्छा से तथा ईश्वरी कृपा से मिल गया होगा।
मेरे पास एक ऐसी जबरदस्त शक्तीशाली योजना तैय्यार है की संपुर्ण देश ही नही संपुर्ण विश्व को भी हमारे पिछे आना ही पडेगा।देश के सभी टिवी चैनलवाले उनका टि.आर.पी.बढाने के लिए हमारे पिछे दौडेंगे।सभी समाज एवं सभी जातीधर्म के लोग हमारे पिछे आयेंगे।संपुर्ण शक्ती से हमारे पिछे खडे हो जायेंगे।और...
ईश्वरी कार्य के लिए अनेक लोग प्रचंड धन लेकर हमारे पिछे दौडेंगे भी।किसीको कुछ माँगने की जरूरत ही नही पडेगी।क्योंकी कार्य पुर्ती के लिए धन की तो सख्त जरूरत होती ही है।और जिसे प्रत्यक्ष माता महालक्ष्मी जी ने वरदान तथा हाथ में हाथ देकर वचन दिया हो,उसके पिछे तो धन दौडेगा ही।और अनेक देवी देवतांओं ने तथा (अदृष्य) सिध्द पुरुषों ने "वरदहस्त",दिया हो,उसका कार्य तो सफल होकर ही रहेगा।
बस्स... थोडासा इंतजार बाकी है।
ये तो होनेवाला ही था।और होनेवाला भी है।और यही ईश्वरी अंतिम इच्छा भी है।
होनी को कौन टाल सकता है?
प्रत्यक्ष योजना तथा उसकी कार्यवाही के लिए मैं प्रत्यक्ष रुप से दिल्ली आनेपर चर्चा करुंगा।
हरी ओम।
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--  विनोदकुमार महाजन।
[29/12/2017 12:09 pm] Papa: कुलदेवता की उपासना।
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हिंदु धर्म में हर एक घर के लिए अपनी अपनी विषिष्ट कुलदेवता होती है।जो हर एक घर को और हर एक घर के सदस्य को पूजनीय होती है।और हर सदस्य को कुलदेवता की उपासना अनिर्वार्य भी है।क्योंकी कुलदेवता की उपासना तत्काल फलदायी होती है।जितनी श्रध्दा जादा उतनी फलप्राप्ती जल्दी होती है।
कलियुग में गणेश, हनुमान, दत्त, भैरवनाथ उपासना जादा फलदाई होती है।इससे भी जादा फलदाई कुलदेवता उपासना होती है।जिसे कुलदेवता का पता नही है,उनको कालभैरवनाथ उपासना फलदायक होती है।
अनेक संकटों से छुटकारा पाने के लिए, गृहदशा में शांती के लिए भी कुलदेवता की उपासना फलदायक होती है।
इस बारे मे मैं मेरा निजी अनुभव बताता हुं।
जब कुछ कारणवश मेरा घरदार, खेती बाडी,गाँव सबकुछ छूट गया।बाहरी गाँव में प्रचंड नरकयातनाएँ,बनवास,अज्ञातवास, दुख सहना पडा।किसीको कुछ बताना नही,किसी के घर जाना नही,किसीकी सहायता लेना नही।दुखदर्द किसीको बताना नही।ऐसी भयंकर बिकट परिस्थितियों मैं अटक गया था।सारे रास्ते बंद थे।थकाहारा,हताश उदास,निराश मन से जीवन चला था।
साक्षात स्वर्ग तथा स्वर्गीय अमृत और मेरा सबकुछ मेरे सद्गुरु अर्थात मेरे दादाजी भी देहत्याग करके स्वर्ग चले गए थे।अब ना किसी का सहारा या आसरा था।
चारों ओर केवल अंधेरा ही अंधेरा था।
तभी मेरे सद्गुरु ने मुझे मेरी कुलदेवता की साधना करने का दृष्टांत दिया।और मुझे कुलदेवता का एक मंत्र भी मिला।जिसका बाईस लक्ष जाप होनेपर मुझे मेरे कुलदेवता का दृष्टांत हुवा।
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के,परांडा तहसील में सोनारी नाम का एक छोटासा गाँव है।जहाँ पर मेरी कुलदेवता,"कालभैरवनाथ जोगेश्वरी",का जागृत स्थान है।भगवान शिव का यह जागृत अवतार माना जाता है।और अनेक लोगों को वहाँपर आज भी अनुभुती भी मिलती है।
तो मुझे भी इस जागृत शिवअवतारी कालभैरवनाथ ने दृष्टांत दिया।
दृष्टांत ऐसा मिला की,भैरवनाथ की मुर्ती में से एक सत्वगुणप्रधान बालक मुर्ती से तेजी से दौडता हुवा मेरी ओर आया,और मेरे हाथ में धन देकर फिर दौडता हुवा मुर्ती में जाकर एकरुप हो गया।
आश्चर्य की बात यह हो गई की कुछ ही दिनों बाद मेरी सभी आर्थीक समस्यांयें खत्म हो गई।जीवन जिने के लिए अच्छा आर्थीक साधन मिल गया।
आगे चलकर मैंने इस जागृत मंत्र का एक कोटी जाप पूरा किया।
धिरे धिरे दृष्टांत में मेरे दादाजी से और भी मंत्र मिल गए।आजतक सभी का तेरह कोटी जाप हो चुका है।
और आश्चर्य की बात यह हो गई है की,मेरे विश्व कार्य के रास्ते धिरे धिरे खुलते जा रहे है।
अहंकार वश यह लेख नही लिखा है।या मेरा बडप्पन बढाने के लिए नही लिखा है।बल्की, मेरी तरफ से अगर कोई स्वाभीमानी व्यक्ती या कोई ईश्वर भक्त अगर कर्मगतीअनुसार चारों तरफ से घोर संकटों से घिरा हुवा है तो वह व्यक्ती तत्काल अपनी कुलदेवता की कठोर उपासना आरंभ कर दें।तुरंत मार्ग मिल जाएगा।
तुरंत फलप्राप्ती के लिए अगर शुध्द आचरण के साथ,किसीके धन को हाथ भी नही लगाना चाहीए,या अभक्ष भक्षण नही करना चाहिए,या मदीरा प्राशन नही करना होगा।
अगर मन शुध्द और पवित्र है तो खुद भगवान आपकी चौबिसो घंटे चिंता करता है,ऐसी दिव्य अनुभुती आपको मिलेगी ही।और चाहे मुसीबत कितनी भी भयंकर हो,भगवान आपके हमेशा आसपास ही है,ऐसा दिव्य अनुभव आपको जरूर मिलेगा।
हरी ओम।
---------------------------------  विनोदकुमार महाजन।


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