संपूर्ण लेखांक भाग २३

 हम सुमधुर संगीत से,

     सुबह सभी को जगाते
      है।
👹और वो???
      जोर जोर से चिल्ला-
      चिल्लाकर सभी की
      निंद ही हराम कर देते
      है।
🌞हम पशु पक्षीयों में भी
     भगवान मानकर,
      पुजा करते है।
👹और वो...???
      उनको ही काटकर
      खाते है।
🌞हम चारों तरफ पावित्र्य
     मांगल्य बढाते है।
👹और वो...???
      हड्डी मांस की गंदगी
      सभी ओर फैलाते है।
🌞हम सभी ओर पवित्र
     एवं मंगल स्वर्ग बनाते
      है।
👹और वो....???
    चारों तरफ नरक का
     साम्राज्य फैलाते है।
🌞हम कौन है, जानो भी
     पहचानो भी।
👹वो कौन है...???
     समझ भी जावो।
🤔फिर भी हमारे कुछ
     सत्ता-संपत्ती के भुके
      गद्दार चंद जयचंद
     उनके ही पांव चाटते है।
😳ऐसे नमाक हरामों के
     मुंह पर भी हम थुकते
     नही है।
🌞क्योंकी....हम....
     असली है..और..
👹वो...नकली है।
🌞असली👹नकली।
      जानो पहचानो।
....... V...K...M...
[23/01 9:02 pm] Papa: पागल पिशाच!!!
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जी हां,पागल पिशाच!!!
सुना है कभी आपने?नही नां???
पिशाच तो सब ने सुना है।मगर ये पागल पिशाच क्या होता है यार??
पहेली मत बुझाव।साफ साफ कह भी दो ना,दोस्त
ऐसा आप सभी जरूर पुछेंगे।
जी,बताता हुं।
तो बात यह है की,
जब से मोदी राज शुरु हुआ है,तब से......
देश में अच्छे दिन आने की शुरुआत तो हो चुकी है।और....।।।।
देशवासीयों के बुरे दिन धिरे धिरे समाप्त होते जा रहे है।
तो फिर???
तो फिर हुआ युं की,बहुत से चोर लुटारु इनके अच्छे दिन समाप्त हो रहे है,और उनके बुरे दिन शुरु हो चुके है।
सत्ता गई,संपत्ती भी जा रही है।और अगर यदी ये ऐसा ही चलता रहा,तो आगे क्या होगा??ऐसा  भयंकर डर उन्हे खाए जा रहा है।
इसिलीए वो बेचारे तिलमीला रहे है।पहले ही ये तो जनता को परशान करने वाले,खून चुसने वाले,देश डुबोनेवाले पिशाच थे।
अब ये पिशाच पागल हो गए है।आया कुछ समझ में?
इन्हे दुसरा प्रहार कब हुआ पता है?जब सारे हिंदुओं ने एक होकर,मोदीजी और योगीजी को चुना,तब तो इनकी नींद ही उड गई।
तो?????
तो अब ये और जादा पागल हो गए।और किसान आंदोलन,पाटीदार आंदोलन के नाम से,अती डर के मारें आंदोलन शुरु किए।आंदोलन भी इन्सान जैसे नही,हैवान जैसे भी नही,पागल कुत्ते जैसे भी नही,पागल पिशाच जैसे।
मगर.....करूं तो क्या करूं प्यारे,
जनता तो सब जानती है,और सब पहचानती भी है।
पिशाच अब चाहे कितने भी पागल होने दो,कुछ भी फायदा नही।
रक्तपिपासु पिशाचों की दिन अब पुरे हो चुके है।अब इनकी नौटंकी देश समझ चुका है।
बेचारे.....
पागल पिशाच!!!!!
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विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:02 pm] Papa: चलते चलते।
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फेसबुक,व्हाटस्अप
करते है टाईमपास।
जब होता है मन
कभी उदास तो
इससे चाट के लिए
दोस्त मिलते है
कुछ खास।
कभी मारामारी,तो कभी
फेकाफेकी
कभी विडीओ की बात
तो कभी मेसैज खास।
कभी रूलाना कभी हंसाना
सभी बन रहे है
इसका दिवाना।
कभी खुशी कभी गम
दिल में रखता है कोई
बडे अरमान।
फेसबुक व्हाटस्अप का
हो गया जमाना दिवाना।
मुंडी लटकाके बैठते है
सब इसमें,ऐसा ही
होता है नजारा।
हो गई दुनीया पागल
खाने पिने के भी
उड गए होश।
माँडर्न जमाने का सारा
बन गया जोश।
फेसबुक,व्हाटस्अप का
जमाना बन गया
पुरा का पुरा दिवाना।
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---  विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:02 pm] Papa: चलते चलते।
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मैं हुं यारों,मस्त कलंदर
जीता हुं जीना सच्चा बच्चा बनकर।
नही किसीसे नफरत
मैं करता।
सभी से मैं सदा प्रेम ही
करता।
जीता हुं मैं अपने ही
धुन में।
आनंदी रहता हुं मैं
सभी को खुश देखने में।
कभी गाना गुनगुनाता हुं
कभी गीत भी लिखता हुं।
सभी के जीवन में
खुशीयाँ बाँटने का
काम करता हुं।
मुझसे करे कोई प्यार
या फिर नफरत...
सभी को मैं प्यार ही
बाँटता हुं।
छोटा बच्चा बनकर
मैं मस्त खुशीयों से
जीवन जीता हुं।
क्यों?करके मत पुछो
मैं चैतन्य हुं,मैं चैतन्य हुं।
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---  विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: 🕉 हे श्याम मेरे!!!🕉
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हे श्याम मेरे,मेरे सभी
हिंदु भाईयों को,
हिंदु धर्म,संस्कृती और हिंदुओं के देवी देवताओं पर,इन्सानीयत पर प्रेम करने वालें सभी पर,
हे भगवान मेरे,सभी को आरोग्य दे,ऐश्वर्य दे,यश दे,किर्ती दे,दिर्घायु दे।
सब का मंगल कर,कल्याण कर।
पशु पक्षीयों का रक्षण कर।उन सभी को चारा दे,पाणी दे।पेड जंगलो की रक्षा कर।
दुष्ट बुध्दी से प्रेरीत होकर पृथ्वी पर हाहा:कार मचाने वाले,दुष्ट दुरात्माओं को सद्बुध्दी दे।
हे मेरे परमात्मा सभी जीवों में बसे आत्माओं को आत्मज्ञान देकर उनको ज्ञानी कर।
मैं तो स्वार्थबुध्दी से मेरे लिए ही माँगता चला जा रहा हुं।तु तो सृष्टी नियंता है।तो तेरे लिए मैं क्या माँगु?
तेरे लिए बस इतना ही माँगता हुं की,यह उन्मत्त कली का अती भयंकर साम्राज्य,जो तुने ही बनाया है,
इसमें जो पुण्यवान पाप की आग में और दाह में जल रहे है,आत्मक्लैश से जी रहे है उन सभी पुण्यात्माओं के लिए,उनकी रक्षा के लिए,उनकी रक्षा के लिए, तु,मेरे भगवन्,
शिघ्र अती शिघ्र दौडके आ।तेरा गीता का वचन पुरा कर।और सभी पुण्यात्माओं के चेहरे पर ईश्वरी आनंद दे।दुष्ट दुर्जनों से उनकी रक्षा कर।
सत्य की विजय के लिए उन्हे बल दें,शक्ती दे।
सभी सजीओं की तेरे प्रती भक्ती जागृत कर।नास्तीकों को भी आस्तीक बना दे तु।
हे मेरे भगवान।
💐💐💐💐🙏🕉🚩
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विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: चलते चलते।
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पहले तो तुम सभी
राम के भक्त थे,
कैसे तुम बदल गए?  किसने तुम्हे बदला दिया?
तुम रावण भक्त कैसे बने?
क्या रावण ही तुम्हारा
आदी है?
फिर रावण भी तो
शिवभक्त ही था।
तुम उससे भी कैसे
भटक गए?
तुम्हारे यहाँ भी अभी भी
शिवलींग ही है।
तो ऊसको भी तुमने
ढक क्यों दिया?
क्या दुनीया को तुम
सच्चाई नही बताना चाहते?
तुम्हारे पुरखे भी सब
रामभक्त ही थे।
तो तुम कैसे भटक गए?
एक लुटारु के
चंगुल में फंसकर
क्या तुम भी इमान खो बैठे?
डर के मारे तुम
जमीर भी अपना भुल गए?
घर आओ वापीस मेरे
राम के दुलारे।
तुम्हारा नया घर भी
अब........
टुटने वाला है प्यारे।
इसिलीए तो अपने
पुराने घर वापीस आजा,
समझने वाले समझ गए
ना समझे वो अनाडी है।
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--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: चलते चलते।
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अरे ओ इन्सान,
तु क्यों बन रहा है
हैवान?
दरींदगी भी शर्म करें
ऐसा नीच क्यों है तेरा
आचार?
खुद भगवान भी
मानता है माँ जीसे
तु ले रहा है उसके प्राण!!!
क्या तुझे दुसरा कोई
अनाज नही मिलता?
याद रख हैवान
भगवान जब क्रोधीत होंगे
तो मिटा देंगे तेरे
नामोनिशान।
ऐ इन्सान संभल जा अब भी,
नही तो
क्रोधीत हो उठेंगे,
अब भगवान!!!!
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विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: प्रभुजी,आपने फोन करके मुझे हरीद्वार आने का निमंत्रण दिया।बहुत ही आनंद हो गया।भगवान को और कहाँ ढुंडते है।वो तो आप जैसे महान व्यक्यीयों में बसा होता है।
आपके स्फुर्ती देने से ईश्वरी कार्य में बहुत ही आत्मबल मिलता है,और उदासी कोसों दुर भाग जाती है।
जल्द से जल्द हरीद्वार आने की कोशीश करुंगा।
आप पर व्हाटस्अप पर लेख लिखना चाहता हुं।अनुमती दिजीए।
हरी ओम।
🙏🙏🙏🕉🕉🕉
विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: चलते चलते।
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राष्ट्रद्रोही शक्तीयों का
जमकर विरोध करो।
पाकिस्तान जिंदाबाद
बोलने वालों को,
कानुन से कठोर दंड करो।
गोहत्यारौं को फांशी चढाओ,
देशविरोधी टि वी चैनलों को बैन करो।
देशविरोधी नारे लगानेवाले
नीच नमकहरामों को
देश के बाहर निकालो।
हमारी थाली में खाकर,
उसी थाली में
छेद करनेवालें गद्दारों को
सबक सिखाओ।
राष्ट्रद्रोही ताकदों का अब
मेरे प्यारे राष्ट्रप्रेमीयों
आर्थीक बहिष्कार कर दो।
जब नही होगा पैसा पास
तो ये नमकहरामी
आयेंगे रास्ते पर
इसका करो विश्वास।
शांती से मार्ग से क्रांती करो।
दुष्टात्माओं से देश बचाओ।
विषवृक्ष का अब निर्मुलन ही कर दो।
आपस में झगडा
जाती पाती का पगडा,
अब यारों बंद करो।
येक होकर देश में
पल रहे साँपो को भगाओ।
विनोदकुमार महाजन का
ये संदेशा देश के
कोने कोने में फैलाओ।
मेरे प्यारे देशभक्त,ईश्वरभक्तों को
नीच हरामीयों से अब
बचाओ यारों,जाग जाओ
जाग जाओ यारों।
देश बचाओ गे तो
संस्कृती बचेगी।
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------ विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: * नेवला और साँप!!!*
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भाईयों कहानी तो अजब की है।पुरी पढनी तो पडेगी ही।
एक था नेवले का गाँव।बहुत ही सुंदर।सभी पर प्रेम करने वाले नेवले।परोपकारी।एक दिन हुआ ये की एक नेवले का एक हरे साँप से दोस्ताना हो गया।साँप की मिठी मिठी बाणी से नेवले का साँप पर भाई जैसा प्रेम हो गया।और उस साँप को वह नेवला अपने घर ले आया।
अतीथी आया घर में,इसीलीए सभी नेवले उसपर सच्चा प्रेम भी करने लगे।
अब हैरानी की बात तो देखो,साँप ने भी नेवले का मायावी रुप धारण किया।
सभी को लगने लगा,ईश्वर भी कितना दयालु है,
मगर.....यह साँप हर दिन जब अपने बिल में जाता था, तो यही सोचता था की,इन सभी मुर्ख नेवलों को मैं येक दिन जरुर साँप बनाके ही रख दुंगा।
धिरे धिरे समय बितता गया।कुछ नेवले धिरे धिरे साँप में बदल भी गए।
यह सब कब हुआ,कैसे हुआ किसीके समझ में भी नही आया।
साँप जब भी बिल में जाता था,तो सभी को नापता था और अपना आकार भी धिरे धिरे बढाता था।
जो नेवला साँप नही बनता उसे खा जाने के लिए,धुर्त,चालाक साँप

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अपनी नितीयाँ बनाता रहता था।
जो नेवले साँप नही बने उन्हे खा रहा था।उपर से उसने जिसको भी जहरीला साँप बनाया था,वे भी नेवले के संस्का र भुल कर धिरे धिरे साँप के रास्ते से जा रहे थे।सभी नेवले को खा रहे थे।
नेवले का पुरा घर धिरे धिरे साँप के कब्जै में जा रहा था।
है ना हैरान करने वाली बात दोस्तों?
आया कुछ समझ में?
चलो जाने भी दो।जो समझ गए ठीक हो गया।ना समझे वो भी ठीक ही हो गया।
तात्पर्य:-- हमारे आस पास भी ऐसे साँप हमें खा जाने के लिए हमेशा घुमते फिरते रहते है।
ज्ञान:--अत:एव ,"अखंड सावधान",रहकर की जीवन बिताना चाहिए।नही तो कभी भी कुछ भी हो सकता है।
(साँपो ने हमारी दुर्बलता का फायदा उठाकर अनेक घरों पर कब्जा कर लिया है।अथ एव,सशक्त बनो,एक बनो,आपसी संघर्ष,बैर,झगडा छोड दो।समय बहुत ही कठीण है---सावधान!!!!)
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-----  विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: * अब तो शिवाजी राजे...
ही चाहिए ।*
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आज के समय में देश भयंकर स्थिती से गुजर रहा है।आज देश को फिर से शिवाजी राजे जैसे आदर्श पुरुष की तथा ईश्वरी अवतार की फिर से जरुरत है।
ऐसा पुण्यात्मा ही आज की भयंकर स्थिती को कठोर न्यायप्रियता और कठोर अनुशासन के कारण देश को सही दिशा दे सकता है।और गुनहगारों को कठोर और तुरंत शासन करके,देश की स्थिती में तुरंत सुधार ला सकता है।
आज ऐसे ही राजा की नितांत जरुरत है।
अफजल खान जैसे उन्मत्त पापीयों की आंत निकालने वाला,स्वकीय खंडोजी पाटील के तुरंत हात पैर कलम करने वाला राजा आज चाहिए।
खराब होती जा रही न्यायव्यवस्था को अपने एक ही आदेश से,तुरंत संपुर्ण न्यायव्यवस्था को ठीक करने वाला राजा चाहिए।
गरीबों का,किसानों का,सभी जन जातीयों पर,मानवता पर प्रेम करने वाला राजा आज चाहिए।
ईश्वरी सिध्दांतों की पुनर्स्थापना करने वाला,जंगल,पेड,सजीवों पर प्रेम करने वाला अवतारी पुरुष आज फिर से चाहिए।
जनता भी बार बार होनेवाले चुनाओं को,उसके गंभीर समस्याओं को ऊबग चुकी है।जनता को अब स्थैर्य चाहिए।और तुरंत कठोर कायदा कानुन बनाकर,जनता को स्थैर्य देनेवाला एक आदर्श नेता चाहिए।
देश इंतजार में है ऐसे थोर अवतारी पुरुष के आने के।
राजे,
फिरसे आईये,
इस पावन भुमी पर फिर से
जनम लिजीए राजे,
लौट के आईये।
तब तुरंत जनता को न्याय मिलेगा,गो-हत्यारों को तुरंत फाशी होगी।गुंडागर्दी करके आम जनता को पिडने वाले पापीयों को तुरंत सजा होगी।और...
गद्दार राष्ट्रद्रोहीयों पर तुरंत अंकुश लग जायेगा।
बिकाऊ मिडीया ठिकाने पर आयेगा।
राजे,फिर से अब आ भी जाना।समय बहुत कठीण है।सत्य-सनातन फिर एक बार संकट में है।
अब तो तुम्हे आना ही पडेगा।उन्मत्त पापीयों का तुरंत सफाया करने के लिए,अब लौटके तुम्हे आना ही पडेगा।
साधु संतो की,पुण्यवंतो की रक्षा के लिए,अब....
आना ही पडेगा।
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---  विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: इस नेहरु,इंदिरा और राजीव के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का गुनाह क्यों नही लगाया जा सकता??
मैं देहली सुप्रीम कोर्ट में जाने को तैय्यार हुं।बोलो,सबुत कोई देगा और सहायता करेगा तो...
केस लडना आसान हो जायेगा।अब केवल फेसबुक व्हाटस्अप पर केवल चर्चा नही तो कृती की जरुरत है।
है कोई तैय्यार???
***विनोदकुमार महाजन,पत्रकार,
पुणे।🙏
[23/01 9:08 pm] Papa: 🕉 भगवान का भी सोचो।
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चौ-यांशी लक्ष योनीयों में से जादा और अच्छा विचार  करने की क्षमता ,ईश्वर निर्मीत केवल मनुष्य प्राणी में ही है।क्या भला क्या बुरा?क्या अच्छा क्या गलत?क्या सही यही एक इंसान ही सोचता है।
बाकी जीव तो अज्ञान ही है।फिर भी उन्हे प्रेम की भाषा समझ सकती है।
येक मनुष्य प्राणी मात्र को ही भगवान ने जादा बुध्दी क्यों दी?
मकसद साफ है भगवान का।इस बुध्दी द्वारा सच और झुट का पर्दाफाश करके,इंन्सान सच का स्विकार करें और झुट का त्याग करें।
तो सच क्या है?अंतीम सत्य क्या है?
ईश्वर और उसकी प्राप्ती ही अंतीम सत्य है।इसीलीए अनेक आध्यात्मिक मार्गों से ईश्वर की खोज और उसे प्राप्त करना ही मनुष्य जन्म का उद्दैश्य है।
ईश्वर की प्राप्ती करते करते,येक दिन खुद ईश्वर स्वरुप बनकर,ईश्वरीय कार्य करना ही,मनुष्य जन्म का उद्देश्य है।और आर्य सनातन संस्कृती भी यही सिखाती है।बुध्दी-मन द्वारा आत्मा की और उससे आगे परमात्मा की खोज करके,केवल और केवल परोपकार के लिए ही जीवन समर्पीत करना।
सो--अहम्।सो--अहम्।
अहं ब्रम्हास्मी।
एक बार खुद की खोज और सही पहचान हो गई तो,खुद ईश्वर स्वरुप बन गया,ईश्वरी शक्ती से एकरूप हो गया,सिध्द या महासिध्द बन गया तो-स्वार्थ,मोह,अहंकार का त्याग होता है और स्थितप्रज्ञता द्वारा खुद ही ईश्वर बन जाता है।और उसकी सोच,नजर सब बदल जाते है।और उसे सभी प्राणीयों में भगवान ही नजर आता है।गाय,बैल,साँप,बिच्छु,सभी सजीवों में आत्मतत्व यानी भगवान का रुप यानी मेरा ही रुप नजर आता है।सभी भगवान के यानी मेरे बच्चै।और सभी बच्चों पर माँ जैसा प्यार जड जाता है।
आपस में द्वेश-बैर-बर्बरता-हिंसा-अमानवियता भगवान को,मतलब मुझे सहा नही जाती।मैंसुसंस्कारों का,अच्छाई का,सच्चाई का पुरस्कर्ता बन जाता हुं।और बुराई-हैवानीयत-असुरी सिध्दांतो का जमकर विरोध करने लगता हुं।
मगर होता ये है की अज्ञान वश इंन्सान भगवान को माँगता ही रहता है।और प्रारब्ध गती अनुसार भगवान कुछ दे न सका तो ,वह प्राणी दुखों से चिंतीत होकर रोता रहता है।और ईश्वर को ही कोसता रहता है।
तब भगवान मन में हंसकर बोलता है,"अरे प्राणी,मैं तो तेरी परीक्षा लेने के लिए,तेरे प्रारब्ध को पुरा करने के लिए और...
मेरी कडी परीक्षा में उत्तीर्ण होकर तुझे नर का नारायण बनाने के लिए ही मैं तुझे संकट देता हुं।मगर तु तो संकटों से डरकर दिन रात दुखी मन से रोता ही रहता है।मगर ऐ प्राणी-सुख-दुख तो मेरी माया का खेल है।रोत रहेगा-तो जनम जनम तक सत्य की ,यानी मेरी खोज में,घुमता ही रहेगा।अज्ञान छोड दें,चर्मचक्षु बंद करके अंदर देख,ओम-सोहम्,का ध्यान लगा प्राणी,
दिव्य ध्यान,दिव्य नाद,दिव्य अनुभुती तुझे महसुस होगी।इसिलीए स्वार्थ-मोह-अहंकार से हटकर,बिल्कुल छोटा बच्चा बनकर मेरी गोद में आना,संपुर्ण समर्पीत भाव से मुझे शरण आना।बस्स...हो गया काम।सबसे पहले चंचल मन निष्पाप-निरागस होना चाहिए।छोटा बच्चा बनकर जीना चाहिए।
सभी प्राणीयों में मुझे ही देखकर उनपर भी मेरे जैसा ही प्रेम करना चाहिए।"
भाईयों ऐसा ही बोलता है मेरा प्रभु परमात्मा हर एक प्राणी को।उसे सुनने को आत्मा की तैय्यारी जरुरी है।
बोलो--है ऐसा दिव्य ज्ञान,
"दुसरें रास्तों से?"
तो भटक और अटक क्यों रहे हो ईधर उधर।
।। स्व धर्मे निधनं श्रेया:।।
।। परधर्मो भयावह:।।
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आया कुछ समझ में यारों?अपने सही रास्ते से आ जावो।
हरी हरी:ओम।
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---  विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: ** छोटासा बच्चा.....
        बनकर जीओ....**
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जींदगी क्या है?सुख दुख का एक मेला है।सुख कम दुख जादा।
सुखों की घडियाँ कब आकर निकलती है,समझ में ही नही आता।
और दुखों के पहाड समाप्त ही नही होते।
दुख के कष्टदायक अनेक
जहर के सागर पार करने के बाद,थोडा बहुत आनंद का अमृत मिलता है।मगर अनेक विष के सागर से भी,दो बुंद अमृत भी काफी आनंद देते है। आखिर हर जीव तो अमृत के लिए ही,मतलब.....
सुख,शांती,आनंद,आरोग्य,ऐश्वर्य ,किर्ती,यश के लिए ही,प्रयत्नशिल रहते है।
सुख सबको चाहिए,दुख किसी को भी नही चाहिए।
दिव्य अनुभुती सबको आनंदीत करती है।
अगर हरेक को अगर दिव्य अनुभुती चाहिए,तो चाहे सुख हो या दुख;लाभ हो या हानी,सदा आनंदी ही रहना चाहिए।
हंसते-खेलते जीवन जिना चाहिए।बिल्कुल छोटा बच्चा जैसा।चाहे उमर कौनसी भी हो।निष्पाप,निष्कपट मन से सभी पर,सजीवों पर,सृष्टी पर,भगवान पर,पशु पक्षीयों पर ,शुध्द पवित्र,निरपेक्ष प्रेम तो हमेशा करते ही रहना चाहिए।तभी ह्रदय में दिव्य अमृत सागर उत्पन्न होता है।और हमेशा के लिए खुश रखता है।कितने भी आने दो तुफान-या फिर आने दो कितनी भी आँधियाँ।खुशीयाँ कभी भी कम नही होती।
इससे ही स्थितप्रज्ञता मिलती है।ऐसी ही दिव्य अनुभुती में अपने ह्रदय में,स्वर्ग के सभी देवता और साक्षात स्वर्ग भी रहता है।
खुशियों से जीवन भर जाएं यही स्वर्ग है,और
दुखों से जीवन भर जाएं यही नरक है।
तो यही पर स्वर्ग है और यही पे नरक भी है।हमें स्वर्ग में रहना है या नरक में ये भी हमारे ही हाथ में है।छोटा सा बच्चा बनकर जिओगे तो यही स्वर्ग है।और.....
असुरी गुणों से सभी को केवल और केवल पिडा ही देंगे तो, नरक भी यहीं पर है।
हमें स्वर्ग में रहना है या नरक में,यह तो हमें ही तय करना है।
हरी ओम।
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**विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: रामदास स्वामी!!!
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महाराष्ट्र के सज्जनगड पर वास करने वाले रामदास स्वामी खुद हनुमान जी का अवतार थे।खुद राम जी ने उन्हे देहरुप से प्रकट होकर दिक्षा दी थी।
जब अस्मानी सुलतानी का भयंकर अग्नीप्रकोप था उसी समय अनेक सिध्द पुरुषों ने अवतार धारण करके धर्म बढाया तो नही था,मगर बचाया जरुर था।शिवाजी महाराज भी उसी समय प्रकट हुए थे।
रामदास स्वामी खुद हनुमान जी का अवतार थे,और आश्चर्य देखो खुद हनुमान जी भी दोपहर को रामदास स्वामी के साथ बैठकर भोजन करते थे।
इतना होने के बावजुद भी,रामदास स्वामीजी को बारह कोटी रामनाम का जप करना पडा था।और बारह साल पाणी में खडा रहकर माता गायत्री के मंत्र का उन्होने पुरश्चरण किया था।
अब आश्चर्य देखो,इतना होने के बावजुद भी अधर्म पुरी तरह से हटाने में स्वामीजी को यश नही मिला था।
राजे शिवाजी उन्होने "शक्ती" देने के बावजुद भी शिवाजी महाराज को आखिरी पल तक देहली जीतने में कामयाबी नही मिली थी।
ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते है की,भगवान दिनरात साथ होकर भी,सत्य को पुर्ण रुप से यश नही मिल सका था।
अभिमन्यु के साथ प्रत्यक्ष देहरुप में होकर भी,अभिमन्यु की मृत्यु भगवान टाल नही सके थे।
क्यों????
अभिमन्यु का प्रारब्ध बदलने की शक्ती भगवान के हाथ में होकर भी,उन्होने ऐसा नही किया।
क्यों????
समय की माँग और भगवान की अगाध रचना एवं लिला।
उसकी रचना वो ही जाने।
अब देखो,दुसरा उदाहरण।
शेगाव के संत एवं महासिध्द अवतारी पुरुष गजानन बाबा!!!
रामदास स्वामीजी का ही अगला अवतारी देह।
उन्हे भी सिध्द पुरुष बनने के लिए,"गण गण गणात बोते",इस महामंत्र का अनेक दिन जाप करना पडा था।
राम अवतार में भगवान थे,उसके बार कृष्ण अवतार में आये।दोनों ही देह अवतार में,ईश्वरी कानुन के अनुसार ,देह धारण करने के पुरे नियमों का पालन भी करना पडा,और प्रारब्ध गती अनुसार अनेक दुखों का सामना भी करना पडा था।और मनुष्य समुह के सामने अनेक आदर्शों को भी सामने रखना पडा था।
अरे मेरे भगवान तु ऐसा क्यों करता है?,अगाध लिला क्यों रचाता है?,ऐसा मैंने उसे सवाल किया तो,
व्यंकटेश स्तोत्र में उत्तर देता है,
"नाना नाटक सुत्र धारीया।"
अक्कलकोट स्वामी दत्त अवतारी।
गुरु दत्तात्रेय,  श्रीपाद श्री वल्लभ,  नृसिंह सरस्वती ऐसे पहलें अवतारों में,बृम्हा-विष्णु-महेशजी का अद्भुत अवतार होने के बावजुद भी अनेक सालों तक,चिंटीयों के वारुल में अनेक सालों तक गुप्त रुप से रहना पडा था।
जब प्रकट होने का समय हो गया,तो भी ब हुत ही अद्भुत तरीके से प्रकट हो गए।
हे भगवन्,हे सृष्टीनिर्माता प्रभो,तेरी तो लिला अपरंपार!!!!
क्या आज भी पापों का अती भयंकर उन्माद,आतंक,हाहा:कार देखकर,ऐसा लगता है की,
क्या सचमुच में पापों का अंत करने के लिए,भगवान का प्रकट होने का समय नजदीक आया है???
उसकी अगाध लिला मैं येक अज्ञान जीव क्या जानू?क्या समझुं?
क्या उसने उन्मत्त कली को पृथ्वी पर भेजा था,तो सत्य को बाँध के रखा था???
क्या सत्य की रक्षा के लिए,उन्मत्त कली को हराने के लिए,प
रभु परमात्मा फिर से प्रकट होंगे???
ना मैं जानु,ना पहचानु!!!
"नेती नेती",कहकर वेद भी थक गए उसके सामने,तो मैं कौन हुं?
परमात्मा क्या सोच रहा है,या क्या योजना बना रहा है,मैं क्या जानूं???
हरी हरी:ओम।
--------------------------------
------* विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:08 pm] Papa: 🦋 चलते चलते।🦋
--------------------------------जिंदगी है एक सफर,
है सुहाना..कहाँ कल
क्या हो है किसने जाना।
चल उठ ऐ हिंदु भाई
अब हमें है हिंदु राष्ट्र बनाना,कहाँ कल...
क्या हो ए किसने जाना।
दुनीया की तु परवा ना कर,
हिंदुस्थान के लिए तु
कुछ तो भी कर।
ए जीवन है मेरे प्यारे
दो दिनों का मेला।
चल उठ हिंदु भाई अब,
हमें है नया ईतीहास बनाना।
कहाँ कल क्या हो ए
किसने जाना।
सदीयों से रहे हम,
मोगल अंग्रेजों के गुलाम
अब करना है हमें
हिंदुराष्ट्र का ऐलान।
देखता रहेगा हमें पुरा जमाना।
अब हमें है भाई केवल,
हिंदु राष्ट्र ही बनाना।
माथे का कलंक अब हम
धो डालेंगे।
सचमुच हम नया ईतीहास
बनायेंगे।
यहाँ अब हमें हिंदुराष्ट्र है
बनाना।
कल आनेवाला है यारों,
हिंदुओं का जमाना।
उटलरी उटलरी उ$$$
हा हा हा.....
(किशोर कुमार के  लोकप्रीय गाने पर आधारीत)🦋
🦋                 🦋
----------------------------
---  विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: Name: vinodkumar Mahajan...
At.and,p:Kari,
Ta,Barshi,
Dist, Solapur,
St,Maharashtra.
Pin,413303.
Mb.09890349751.
(Grape farmer).
Now working in Pune,
Journalist,writter,poet, social worker..
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
------–--------------
अधर्म का अंधेरा
बढ रहा है,
सच्चाई का दिपक जलाओ,
अंधेरा धिरे धिरे,
भाग जायेगा।
------------------------------
---विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
-------------------------
पापीयों अती पाप
ना करों,
जब तुम्हारे पाप के घडे
भर जायेंगे,
तो एक दिन फुट तो,
जायेंगे ही,
तब तुम्हारे हाथ में,
रोने के सिवा,
कुछ न रहेगा।
-----–---------------------
----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
----------------------------
भगवान दिखता नही है,
फिर भी भगवान
सबकुछ देखता है,
सबकुछ सुनता भी है।
पुण्यवंतो की रक्षा करने,
और पापीओं को लाठी मारने वो कभी चुकता ,
नही है।
बस उसे इंतजार
रहता है समय का।
------------------------
----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
---------------------------
सभी मित्रों खुश रहो,
जीवन में कामयाबी की
ओर बढो।
आपका जीवन बने,
खुशबुदार गुलाब जैसा,
दिन आपका हो,
मंगल मंगल मय ऐसा।
हरी हरी:ओम।
-----------------------
----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
-------------------------–-
वो घुमते है पैसों की थैलीयाँ लेकर,
जग बदलने के लिए।
और हम घुमते है
प्रेमभरा दिल लेकर।
वो घुमते है तलवार
लेकर जग बदलने।
और हम कोशीश में रहते
है सदा प्रेम से दुनीया जीतने।
वो ऐसा क्यों करते है
पता नही,
मगर हम तो सहिष्णु बनकर सभी के ह्रदयों में,
राज नही करते तो....
हम सभी के ह्रदय में
सदा के लिए
वास करते है।
क्योंकी सत्य को पहचान कर;हम......
अनादी,अनंत,ईश्वर के साथ,"सनातन"की
हम पुजा करते है।
सनातन क्या है,यह जिसे
पता नहीं,वो हमें
गालीयाँ देते है।
फिर भी हम उनसे भी और सभी से केवल और केवल,
शुध्द ईश्वरी प्रेम ही
करते है,और...
जब तक उन्हे हम,
"अंतीम सत्य,"बताकर
उनका भी जीवन सुखी
नही बनाते तब तक हम
भी उनपर,हमारे सत्य-धर्म अनुसार,
प्रेम ही करते रहेंगे।
क्योंकी,हम हम ही है।
-------------------------------
----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
---------------–------------
🌞हम कौन है ये जानो पहचानो,
👹वो कौन है ये भी,
जानो पहचानो।
हम ईश्वरी कानुन का,
पालन कर रहे है।
और वो???
ईश्वरी कानुन को,
तोड मरोड रहे है।
सृष्टी संतुलन हम,
बनाये हुए है।
और वो..सृष्टी संतुलन...
बिगाड रहे है।
हमको भी जानो,
उनको भी पहचानो।
👹विनाष की ओर ले
जानेवालों का साथ छोडो,
🌞सबका जीवन संवारने
वालों के साथ,,सदा के.लिए...
जीवन जोडो।
क्या भला ,क्या बुरा..
पहचानो यारों...।
चलते चलते जींदगी,
सभी की संवारों यारों।
💐💐💐💐💐💐
-----------------------------
----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
----------------------
उन्नीस साल की
हो रही है तैय्यारी।
ईलक्शन जीतने को
हो रही है 'कुनीती'जारी।
सारे चोर एक हो रहे है।
'हिंदुत्व'को हराने की,
हो रही है तैय्यारी।
बहुत ही "गहरी"साजीश
बनाने की योजना है जारी।
जरा उनके अंदर ...
झाँक के देखो।
जो घर घर पहुंच रहे है
भगवाधारी.......
उन्हे लडाने की योजना
बन रही है भारी।
ईश्वरपुत्रों,सावधान रहो।
अतृप्त आत्माओं की
चाल है,बहुत ही गहरी।
जीतने की उनकी अभी से
हो रही है जोरों से तैय्यारी।
"तुम"भी गाफिल मत रहना
ईतीहास से बडी 'सिख'लेना...
हमेशा के लिए सावधान ही रहना,
गाफिल कभी भी मत होना,आपस में मत लड
लडना,
बुंद बुंद से शक्ती बढाना
जोरों से तैय्यारी में
जुट चुकी है..
      रावणसेना
होशियार!!!होशियार!!!
सदा के लिए ,हर
      रामसैनीक
रहे होशियार!!!!
--------------------------विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
------------–-------------------
ना डर कानुन का है,
ना डर समाज का है।
कोई कुछ भी करें,बोले,
ये तो इंडीया है।
खून के बदले दे दो मौत,
राष्ट्रद्रोह के बदले
तुरंत लगा दो फाशी,
करदो सख्त कानुन,
हैवानों पर खौप बिठा दो।
पाकीस्तान जींदाबाद
बोलने वालों को मारो
तुरंत गोली
तब उतरेगी हरामीयों की
नशा सारी।
कर दो कानुन सख्त तुरंत
देश की है यही पुकार,
कानुन का राज लाओ,
देश बचावो,देश में...
गद्दारों को अब
फाशी की ही सजा सुनवावो।
---------------------------------
-----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
---------------------------------
एक दिन जरुर आयेगा,
बुढापे की वजह शरीर
थक जायेगा।
उस वक्त कोई ना काम
आयेगा।
एक दिन ऐसा भी आयेगा,
जब ये देह भी
मिट्टी में मिल जायेगा।
मृत्यु तो आनी ही है,
हर सजीवों की सच्ची
कहानी है।
इसिलीए.....
ऐसी करणी होगी करनी
मरकर भी हम जींदा रहे,
सदकिर्ती कमाकर
हम अमर रहे।
------------------------------
----विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: 🚩मेरे हिंदु साथियों
      चलो रामराज्य की ओर!!!!!!!🚩
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विश्व में मौजुद मेरे सभी हिंदु साथियों,और......
हिंदु धर्म पर प्रेम करने वाले
मेरे सभी भाईयों,प्रणाम।
यह कोई सपना नही वास्तव है।
विश्व के  र कोने में फैले हुए मेरे हिंदु भाईयों की जरुरत को पहचानते हुए,हम अब शिघ्र अती शिघ्र एक शक्तीशाली संगठन बना रहे है।हिंदुओं के संगठन तो बहुत है,मगर मुसीबत कोई हिंदु फंसा हुआ है तो तत्काल उसे सहायता करनेवाला संगठन नही है।अगर कोई हिंदु बांधव देश-विदेश में कोई मुसीबत में फंसा हुआ है...अकेला लड रहा है...अकेला है...बिमार है..आर्थीक परेशानी में है...या फिर कश्मीर,केरल,बंगाल जैसे समस्याँओं में फंसा है तो उन्हे तत्काल सभी प्रकार की सहायता करने के लिए,तुरंत उस व्यक्ती तक पहुंचने के लिए,विश्व के हर कोने में हमें,सुरक्षा केंद्र खडे करने है।"हेल्पलाईन सेंटर"।
यह केवल नाम के नही तो प्रत्यक्ष कार्यवाही करने के सेंटर खोलने है।इसके लिए हमें अनेक हिंदु संगठनों की,हिंदु धर्म पर प्रेम करनेवाले सभी विश्व सामाजीक तत्वों की,और केंद्र तथा राज्य सरकारों के सहायता की जरुरत होगी।
ईन्सानीयत के नाते कोई भी व्यक्ती कौनसे भी धर्म,पंथ,जात से हो अगर मुसीबतों में फंसा है तो उसे तुरंत सहायता प्रदान कर दी जायेगी।
कोई लेखक है,पत्रकार-कवी-गायक-अभिनेता या फिर ईश्वरी कृपा से अच्छा हुनर रखता है,और....
अंधेरे में भटक रहा है,तो उसे भी ,व्यापक हिंदुत्व के नाते जीवन में अच्छा स्थैर्य तथा नाम देने के लिए हमारा ,"विश्व क्रांती हिंदु संगठन",सहायता प्रदान करेगा।
भगवान के घर भेद नही है।भेद है तो सिर्फ सुर और असुर वृत्ती का है।ईश्वरी सिध्दांतो का हम पुरस्कार करेंगे और हैवानीयत का जमकर विरोध करेंगे।
योजना बनाकर कार्यान्वीत करने का समय नजदीक आया है।
आवो मेरे सभी प्यारे भाईयों इस पवित्र ईश्वरी कार्य के लिए तन-मन-धन से जीवन समर्पीत करते है।
याद रखिए ,मर तो एक दिन हर एक को जाना ही है,एक न एक दिन यह काया मिट्टी से एकरूप होनेवाली ही है।यह ईश्वरी कानुन है और अंतीम सत्य भी है।तो फिर...क्यों....
न हम सभी कुछ ईश्वरी कार्य करके,एक अच्छी किर्ती पिछे छोड दें???
बुरा ना मानों यारो,राम को भी जाना पडा और रावण को भी देह छोडना पडा।
मगर........
रामजी की......
आज भी....
पूजा की जाती है।और....
रावण के पुतले जलाये जाते है।
मैं कोई अवास्तव बिल्कुल नही लिख रहा हुं।और न ही मेरे इच्छा से कोई लिख रहा हुं।अब.....
"युगपरीवर्तन"तो अटल ही है।अगर हम कार्य नही भी करेंगे,तो भी जागृत ईश्वरी ईच्छा से और कोई तो भी दुसरा यह कार्य करने वाला ही है।
मेरे विचारों से सहमत हो तो तुरंत जुड जाओ।असहमत हो तो भी,हंसकर बात छोड दो।
हरी ओम।
--------------------------------
---- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: चलते चलते।
-----------------------------
भगवा हमारा भगवान है,
जान से हमें वो प्यारा है।
भगवा(न) में भी भगवा है,
निकलता सुरज भी ,   भगवा है,डुबता भी भगवा है।
अग्नी भी भगवा ही है।
सजीवों के लहु का
रंग भी भगवा है।
भ-ग-व-आ-न में भी
भगवा है।
भगवा हमारा हमे सदा
जी-जान से भी प्यारा है।
--–-----------------------------
---विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: __× दस्तुर!!!×___
-----------------------------
वाह रे दुनीया तेरी तो
हद ही हो गई।
पिलाया था अमृत मैंने
मेरे सगेसंबंधीयों को,
उन्होने ही मुझे.जहर की बोतले पिलाई।
और जिन्हे उनको
जहर पिलाया था,
उनको उन्होने प्रेम से
अमृत की  शिशीयाँ पिलाई।
वाह रे दुनीया तेरी तो
हद ही हो गई।
इतना जहर पिने के बाद भी....मैं मरा नही
सारी की सारी जहर की
बोतले हजम कर दी!!!
कैसे???
मेरे सद्गुरु की दिव्य शक्ती
जो जनम जनम से
मेरे साथ है,
उन्होने ने मेरी सभी
जहर की बोतले भी
खाली कर दी।
गुरुमंत्र का अमृत जो,
मुझे मेरे गुरु ने पिलाया
उसने ही सभी जालीम
जहरों की सारी शक्ती ही
समाप्त कर दी।
ऐसा है गुरु का महीमा
अपरंपार!!!
माता गायत्री का महीमा
अपार!!!!
जिसे सद्गुरु की कृपा
मिल गई,जीवन नौका
उसकी तर गई।
चाहे दुनीया का दस्तुर
हो कितना भी उलटा,
सद्गुरु कृपा से होता है,
सब कुछ सुलटा।

--------------------------------
--- विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:12 pm] Papa: एक काणा लड़का एक अंजली नाम की लडकी से चुपके-चुपके बहुत प्यार करता था

एक दिन उसने अंजली से कहा:- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ।

अंजली बोली:- पर मैं तुमसे प्यार नहीं करती मैं तुमसे शादी भी नहीं कर सकती तुम बहुत गरीब हो, एक आंख से काणे भी हो और मेरी जो इच्छा है इसे पूरा नहीं कर पाओगे ।
😾😾😾😾😾😾😾😾😾
लड़का बोला:- मैं कोशिश करूंगा तुम्हारी हर इच्छा पूरी करने की।
🚶🏃🚶🏃🚶🏃🚶🏃🚶🏃
पर अंजली ने एक ना सुनी और वहां से चली गई ।
.
.
फिर कुछ साल बाद उस अंजली की शादी एक बिजनेसमैन से हो
गई ।
👫👫👫👫👫👫👫👫👫

उस की हर इच्छा पूरी होती थी, उसका पति बहुत बड़ी फैक्ट्री का मैनेजर था ।
👮👮👮👮👮👮👮👮👮

एक दिन फैक्ट्री में पार्टी थी तो उसमें अपनी पत्नी अंजली को भी लेकर गया और फिर उसने अपनी पत्नी अंजली को अपने बॉस से मिलवाया
🗣👤🗣👤🗣👤🗣👤🗣👤🗣👤🗣👤🗣👤

उसकी पत्नी देख कर हैरान हो गई, क्योंकि वह वही काणा लड़का था जिसने उसे प्रपोज किया था 😇😇🙃

फिर उसके पति ने अपने बॉस के बारे में बताया यही मेरे बॉस है और मेरे बॉस 5,000 करोड़ का टर्नओवर हर साल करते हैं ।

फिर उस अंजली के पति को उसके एक दोस्त ने बुला लिया ।
और अंजली वहीं अपने पति के बास के सामने रुक गई

अंजली बोली:- आप वही हो ना जो मुझसे शादी करना चाहते थे ?
.
.
.
.
लड़का बोला:- हां मैं वही हूं ।
..
..

..

..
फिर अंजली बोली:- मैंने बहुत बड़ी गलती की जो आप पर विश्वास नहीं किया आई एम सॉरी

लड़का बोला:- कोई बात नहीं ।
फिर अंजली बोली:- आपने शादी की?

लड़के ने कहा:- नहीं अब मेरा कोई शादी करने का इरादा नहीं है
*अब लड़की मन ही मन पछता रही थी*
.
.बोध=~~जैसा आँखों को दिखता वैसा नही होता।
आत्मज्ञानी पुरुषों की भी यही स्थिती होती है।उपर से वह बावले लगते है,अंदर से ईश्वर से एकरूप हो गए होते है।अत:एव=~~~
चर्मचक्षु से नही,ज्ञान चक्षु से जानो पहचानो।
हरी ओम।🙏🕉
------------------------–-- ----
V.....K.....M......
[23/01 9:15 pm] Papa: ।।हम हिंदु अब और....
अत्याचार नही सहेंगे।।
--------------–----------------
इस देश में हम हिंदु ही बहुसंख्यंकं है।बहुसंख्यंकं होकर भी हमने आजतक मुगल,अंग्रेज और अनेक परकीय आक्रमकों के अती अत्याचार सह लिए है।मगर अब हम अती अत्याचार तो क्या,छोटासा अत्याचार भी नही सहेंगे।अब यहाँ केवल और केवल हिंदु हितों का विचार करने वाली सरकार राज करेगी।मैं एक आध्यात्मिक कट्टर हिंदुत्ववादी हुं।सभी धर्म,जाती,पंथ पर इतना ही नही तो पशु पक्षीयों पर,पेड जंगलो पर,गाय भैंसो पर,साप बिच्छु पर,सृष्टी पर,भगवान पर,ईन्सानीयत पर,मानवता पर प्रेम करता हुं।करता ही रहुंगा।भारत भुमी पर,धरती माता पर हम सभी हिंदु जी जान से प्रेम करते है।इसिलीए हमें कोई मानवता का पाठ पढायें और खुद हैवानियत का रास्ता स्विकारे,ऐसा हम कभी नही होने देंगे।
सभी समाजवादी,साम्यवादी,निधर्मीवादी मेरे भाईयों को मैं एक नम्र निवेदन करता हुं की,विनावजह वे हिंदुधर्म को,देवी देवतांओं को,ऋषी मुनींयों को,साधु संतों को बदनाम ना करें।सत्य छोडकर झुटी कहावते लदा कर विना वजह हिंदु धर्म को कोई बदनाम ना करें।याद रखिए ये हिंदुस्थान था,है और रहेगा।हमारी संस्कृती,सभ्यता,शालीनता,सहिष्णुता को कोई कृपया बदनाम ना करें।बहुत सह लिया।बहुत हो गया।अब झुटी ड्रामेबाजी बंद करके हिंदु हितों के बारे मे सोचो।अगर जानबुझकर हम पर कोई अन्याय अत्याचार करेगा,हमे,हमारे धर्म को बदनाम करने की कोई कोशीश करेगा,तो अब हम अत्याचार बर्दाष्त नही करेंगे।शांती के मार्ग से इसका विरोध करके हम अब एक नई क्रांती लायेंगे।
सभी हिंदुंओं से मैं नम्र निवेदन करता हुं की,अगर कोई व्यक्ती जानबुझकर हमारे संस्कृती,सभ्यता और देवी देवतांओं का विडंबन करता है,तो तुरंत उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करें।हम शांती से अत्याचार का विरोध भी करेंगे और भारतीय संविधान ने हमें जो न्याय माँगने के मौलिक अधिकार दिए है,उससे भी कानुनन न्याय भी माँगेगे।
अपेक्षा करता हुं तुरंत न्याय भी हमें मिलेगा।कृपया हिंदु धर्म को बदनाम करने का षड्यंत्र कोई ना चलाए।क्योंकी अन्याय पिडीत हिंदु अब एक हो रहा है।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:15 pm] Papa: अगर आपमें हिम्मत है तो,
आप काल को भी हरा सकते हो।
अगर आप में हिम्मत है तो,
नशीब,प्रारब्ध,समय को भी हरा सकते हो।
अगर आप में हिम्मत है तो,
नामुमकीन को भी मुमकीन में बदल सकते हो।
जी हाँ,यकीनन बदल सकते हो।
हिम्मत,हौसला,कठोर प्रयत्न,परीश्रम,अतुट विश्वास;
सद्गुरु चरणों पर तथा ईश्वरी शक्ती पर प्रचंड विश्वास,श्रध्दा,प्रेम,आत्मीयता;तथा....
अहंकार शुन्य समर्पीत जीवन आप सभी को
जीवन में जो चाहिए वह सब कुछ मिला देने की क्षमता रखते है।
मगर मन में चाहिए,शांती और विश्वास,दृढ निश्चय
और समय का इंतजार करने की शक्ती।
फिर देखो कमाल,ना तुम्हे प्रारब्ध,नशीब आडे आता है।और नाही काल कुछ बिगाड सकता है।
जिसके हौसले बुलंद होते है,वह तो जीतकर ही रहता है।
फिर संघर्ष,लडाई चाहे कितनी भी घनघोर हो,कितनी भी कठीण हो।
जीत तुम्हारी तय है,पक्की है।जी हाँ,यह मेरा अनुभव है।
फिर ईश्वर चाहे लेने दो,
कितनी भी कठोर सत्वपरीक्षा,या लेने दे कितनी भी कठोर अग्नीपरीक्षा।
मेरी जीत की कहानी आप सुनेंगे तो आप सभी भी हैरान रह जायेंगे।और मुझपर विश्वास भी नही करेंगे।
मैंने जीवन की लडाई जीत ली है।कैसे???
राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कार्य के समय आप सभी को धिरे धिरे सभी वास्तव पता चल जायेगा।
तकरीबन चालीस साल अग्नी,प्रारब्ध,नशीब,काल,ईश्वरी परीक्षांयें जला रहे थे।
मगर सद्गुरु कृपा से काल हार गया,मैं जीत गया।
पहेली नही वास्तव है यह।
अब मेरी भगवान को यही प्रार्थना रहेगी की,आप सभी भी जीवन की लडाई केवल और केवल जीतकर ही रहें।
हारना,थकना अब बोलना नही।ऊदास दिल पर काबु रखकर,मंजील की ओर बढते जाना है।
जीत सभी की पक्की है।जीत सभी की निश्चीत है।
मगर......इसके लिए...
दिल में अरमान भी बडे चाहिए।हौसले भी बुलंद चाहिए।और सद्गुरु चरणों पर,ईश्वरी शक्ती पर और अपने आप पर शक्तीशाली...जीहाँ...
प्रचंड विश्वास चाहिए।फिर जीत एक सौ एक प्रतीशत है।हरी ओम।
***-----------
विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:15 pm] Papa: *** । खुश रहो। ***
टेंन्शन।टेंन्शन।टेंन्शन।
जिधर देखो उधर टेंन्शन।विनावजह आदमी क्या दिन बदिन गुस्सैला हो रहा है।जिधर देखो उधर झगडा,गुस्सा।ठंडे दिमागवाला,कूल माईंडेड है या नही कोई।विनावजह का टेंन्शन और झगडा।
खुश कोई दिखता ही नही है।क्या वजह???
आत्मसंतुष्टी का अभाव।स्वार्थ,मोह,अहंकार,इर्षा,निंदा,द्वेष,मत्सर इत्यादी तमोगुणी की वृध्धी और सत्वगुणप्रधानता की कमी।
यही तो वजह है टेंन्शन बढने की।दिन बदिन इंन्सान छोटा होता जा रहा है।ईशत्व कम होता जा रहा है।असुरी वृत्तीयाँ बढ रही है।"मैं बहुत बडा।मुझसे सब छोटे।"-ऐसी वृत्ती बढ रही है।क्या यही कलियुग है???
सभीको जन्म-मृत्यु देनेवाला भगवान कितना बडा है ऐसी सोच ही तारक है।नही तो सब मारक है।
बाप बेटे में झगडा,भाई बहन में झगडा।भाई भाई में झगडा,पती पत्नी में झगडा।मेरा पैसा,मेरा धन,
मेरा-तेरा इस झुटे माया के चक्कर में फंस गया इंसान।बन रहा है हैवान।
शांती समाप्त,सुख समाप्त,आनंद समाप्त।
ईश्वरी चिंतन यही तो सब जडों का उत्तर भी है और रामबाण दवाँ भी है।
जो ईश्वरी भजन में लगे है वे सचमुच से ऐसे टेंन्शन से दूर भी है,सुखी भी है और आनंदी भी है।और सभी को आनंद का अमृत बांटने का प्रयास भी कर रहे है।
सुखी रहने के लिए टेंन्शन खलास होना चाहिए।और इसके लिए ईश्वरी साधना तो चाहिए ही चाहिए।
सब सुख चाहिए तो ईश्वर को अपना लो।केवल और केवल दुख ही चाहिए तो ईश्वर को याद भी न करो।आखिर आपको क्या चाहिए यह तो आपके ही हाथ में है।
जीवन का सिधा सा मंत्र अपनाओ।ईश्वर के शरण में जाओ।खुद सुखी हो।सभी को सुखी करो।समाज को भी सुखी करो।
या फिर,ईश्वर को छोड दो,और जीवन भर दुखी रहो।रोते रहो।झगडते रहो टेंन्शन में रहो।
अब आप मुझे पुछेंगे की भगवान कहाँ है?अरे प्यारे,वो तो आप सभी के अंदर ही है।जरा खुद को टटोलके तो देख,अंदर जरा झाँक के तो देख।तुम्हारा भगवान तो तुम्हारे अंदर ही,"युगों युगों",से मौजुद है।खुद को पहचान प्राणी,खुद को ही जान।
"तु ही तेरे भाग्य का विधाता है"।
हरी ओम।रोम रोम में राम।कण कण में है भगवान।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:15 pm] Papa: 💐आध्यात्म।💐
यह आध्यात्म होता क्या है?
आद्य आत्मा।आदी आत्मा।
जीहाँ,सबके अंदर मौजुद जो मौजुद आत्मतत्व,चैतन्य तत्व।इसकी जो पहचान कराता है वही आध्यात्म है।और जो धर्म आद्य आत्मा को पहचानने की शिक्षा देता है वही असली एवं सच्चा धर्म होता है।
तो आद्य आत्मा का और परम-आत्मा का सही ,सच्चा ज्ञान कौनसा धर्म देता है?आप ही सोचो और मुझे बताओ भी।
सभी प्रणीयों में पंचमहाभुतों का देह,सभी में एकसमान आत्मतत्व,जन्म-मृत्यु सभी को,सभी के जन्म मृत्यु का बराबर का हिसाब भगवान के सुपर काँपुटर द्वारा।है ना कमाल का भगवान?
इतना नही तो आहार,निद्रा,भय,मैथुन याने की पुनर्उत्पादन का सुत्र भी एक समान।
कमाल की माया रची रे तुने भगवान।।।सब अजब।अजब तेरी लिला।गजब तेरी माया।
सभी सजीवों को तुने माया के मोहजाल में बाँध के रखा रे।।।
देखो,हर सजीव अपनी संतान पर और  र संतान अपनी माँ पर कितना प्रेम करता है?
गाय का बछडा भी बोलता है,"अम्मा",और माँ भी बोलती है"हाँ मैं माँ",।
अद्भुत है नजारा।चौ-यांऐंशी लक्ष योनी क्या तैय्यार की।उसमें भी एक समान धागा रखा।
जन्म के बाद मृत्यु।और मृत्यु के बाद फिर से योनी बदलकर नया जन्म।
आत्मज्ञानी सिध्दपुरुष,महापुरुष इच्छाधारी ईश्वरी पावन आत्मे।जब पाप बढेगा।तो स्वइच्छा से बार बार जनम लेकर पापों का नाश करने वाले।
तो सोचो,ऐसा सही-सच्चा ज्ञान देनेवाला असली धर्म कौनसा?जो खुद ईश्वर निर्मीत भी भी है।तो हम ऐसे ईश्वर निर्मित धर्म में पृथ्वी पर,कुछ ईश्वरी कार्य करने के लिए,ईश्वरी इच्छा से ही पृथ्वी पर आयें है।तो व्यर्थ का समय क्यों गवांएं???तो चलो शुरु करते है,आज से और अभी से,इसी पल से,सत्य धर्म के जीत के कार्य का आरंभ।अब तो कुछ बोलो ना।।।करेंगे कार्यारंभ??या फिर सोते ही रहेंगे??या फिर धन-वैभव-मान-सम्मान-यश-किर्ती कमाने के चक्कर में प्रभु कार्य को भूल ही जायेंगे??
जनम लेना और एक दिन मर जाना यह तो सभी योनीयाँ भी करती है,सिवाय मनुष्य के।मनुष्य जन्म तो कुछ कर दिखाने के लिए ही है बंदे।तो फिर क्यों एक एक दिन व्यर्थ गवांएं???
अंतीम सत्य और सत्य सनातन के लिए तैय्यार हो जावों यारों,अब तैय्यार हो जावों।यही समय की पुकार है।जाग प्राणी जाग।ईश्वर के लिए जाग।हरी ओम।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:15 pm] Papa: ₹/- वोट के बदले नोट।₹/-
हमारे देश में वोट का महत्व बहुत ही बढ गया है।वोट के बदले नोट,यही धारणा बनती जा रही है।वैसे तो जमाना फ्री का आ गया है।मुक्त में चाहिए सबकुछ।
वोट के बदले नोट चाहिए।वोट के बदले एक करोड चाहिए।वोट के बदले घर चाहिए,नोकरी चाहिए,आरक्षण चाहिए।और नही मिला तो ???दादागिरी।
क्या बुरा  हाल हो गया देश का?पुरा सिस्टम ही खतरे में आ गया।अगर देश का कल्याण करने वाला प्रधानमंत्री भी देश को मिल गया,और जरा कुछ अच्छी योजना बनाने में देर हो गई तो,दो रूपये की हातभट्टी पिने वाला भी प्रधानमंत्री को गालीयाँ देता है।खरी खरी सुनाता है।मतदार राजा को बिना कष्ट किये ही सबकुछ चाहिए,वोही फोकट में और वोही तुरंत।क्या यही गणतंत्र है?
इससे हो ये गया की,गुणवत्ता की किमत घट चुकी।"खाओ पिओ मजा करो,ऐश करो",वह भी फोकट में,ऐसी धारणा बन गई,बढती गई।
संस्कारों का मुल्य कम होता गया।कुसंस्कारीत समाज बनाने की गहरी चाल बनाई गई।क्योंकी समाज जब ध्वस्त हो जाता है तो देश का,राष्ट्र का पतन होने में देर नही लगती।और आजादी के बाद किसने यह गहरी चाल चली?क्यों?सुसंस्कारीत समाज को असंस्कारीत बनाने की,और अपना निजी फायदा उठाने की योजना किसने बनाई?अमृत वृक्ष का बिज बोने के बजाए विषवृक्ष के बिज किसने और क्यों बोये?
आज सुसंस्कृतों पर असंस्कृत क्यों भारी पड रहे है?क्या यह संस्कृती निर्मुलन की चाल थी?क्यों?
गुणवान व्यक्ती अवगुणी के पास उसका कल्याण करने के लिए जायेगा तो क्या,वह अवगुणी गुणवान को स्विकारेगा?बिल्कुल ही नही।दोष उसका नही है।उसपर जानबुझकर किए गए बुरे संस्कारों का है।
हातभट्टी पिनेवाले के सामने रामायण का पाठ करने से क्या फायदा होगा?अगर असली हिरे या असली विचार लेकर समाज में जायेगा तो काँच के नकली बाजार में असली को कौन मानेगा?
समाज को विवेकानंद की जगह सलमान खान या फिर तैमुर को पैदा करनेवाला सैफ अली खान ही चाहिए तो क्या करें?ये दोष हिरे बेचने वालों का है या फिर काँच के टुकडे बेचने वालों का है।और जब समाज की धारणा ही ऐसी बनाई जाती है,तो वह समाज वह राष्ट्र पतीत होने में क्या देर लगेगी?
आखिर आजादी के बाद कुछ लोगों ने राष्ट्र को भ्रष्ट करके अपना राक्षसी उद्देश्य साध्य करने की किसने बनाई?क्यों बनाई?क्या उद्देश्य था आखिर?
और आज इसका उत्तर क्या है।हल क्या है?असुरक्षीत समाज में सुरक्षितता की कौन जिम्मेवारी लेगा?मतलब समाज में,"वोट के लिए नोट"का माहौल बनाकर अपना दुष्ट विचार साध
य करने की साजीश किसने की है तो,वह समाज असंस्कारीत और और असुरक्षीत ही रहता है।जहाँ सुरक्षितता की कोई भरौसा नही वहाँ विकास भी कैसे होगा और कौन करेगा?
अब मजबुरन समाज को हिरे देनेवाले ही मजबुरन परदेश चले जायेंगे तो परदेश ही समृध्द होगा।और यहाँ काँच का ब्यापार करनेवाले ही बडे हो जायेंगे,उन्हे ही मान सन्मान मिलेगा।और काँच के टुकडे खरीदने वाले भुके,कंगाल ही,दरीद्री ही रह जायेंगे।
देश में आजादी के बाद काँच के ब्यापारींयों की चलती थी।आज थोडा परीवर्तन दिख रहा है।घर घर जाकर असली हिरे का मोल समझाया जा रहा है।
अब "हिंदुस्थान",के भविष्य में क्या लिखा है नियती ने यह समय ही बताएगा।
क्यों हिरे के ब्यापारीयों सहमत हो ना मुझसे?कम से कम हम भी तो तात्वीक मतभेद छोडकर राष्ट्रनिर्माण के लिए अब एक हो जाएं।भाषा गहन है।समझने वालों को ईषारा भी काफी है।
तो आखिर में एक बार फिर हरी ओम तो बोलना ही पडेगा।हरी ओम।
***विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:15 pm] Papa: सावधान!!!!!!
अभी अभी मैंने तकरीबन चार व्हाटस्अप ग्रुप डिलीट किये है।वजह जानते हो?जब मैंने ग्रुप पर मौजुद सदस्यों की सुची देखी तो मैं हैरान रह गया।क्योंकी उसमें मौजुद कोड थे,+15,+92,+96,+98
ये सारे कोड तो परदेश से है।+92 वाले नंबर जो की पाकीस्तान है,ऐसे नंबर वाले सदस्य जब ग्रुप पर मौजुद देखकर मैं भी भौंचक्का रह गया।मैं अनेक ग्रुप पर हिंदुत्ववादी लेख लिखता हुं।मतलब+92 वाले भी पढते है।साजीश।
मुझे अज्ञात नंबर से कोई फोन आये जब मैं आँनलाईन था।मतलब विडिओ काँलिंग करके मेरा भाषण ओ एक तो रिकार्ड करना चाहते थे।या फिर मेरा फोटो लेना चाहते थे।वजह क्या हो सकती है?
मैंने भी उलटा फोन किया और कुछ बोले बिना वो क्या बोलता है ये सुना।मेरी शुन्य प्रतिक्रिया देखकर उसने फोन काट दिया।
तो सभी ग्रुप एडमिन को मैं सुचीत एवं सावधान करना चाहता हुं की,+91 कोड के सिवाय और परिचीत के सिवाय किसी को भी ग्रुप पर न लें।कुछ भी हो सकता।अत:सावधान।
लव्ह जिहाद,मोबाईल डाटा हँग और हैक करना जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
मेरे भी व्हाटस्अप के अनेक ग्रुप है।मेरे भी ग्रुप पर कोई परदेश से है।अनेक विआयपी भी मौजुद है।कोई सदस्य नरेंद्र मोदीजी के नजदिकी भी है।                            जब तक
यकीन न हो कृपया एडमिनजी किसीको ग्रुप पर एड नाकरों।अगर कुछ गलत पोष्ट हुआ तो तुरंत उसे ग्रुप से हटा दो।ध्यान रहे अनेक देशविघातक शक्तिंयाँ अनेक रुपों से,माध्यमों से,नामों से सक्रीय हो गई है।ऊनका उद्देश्य साफ है अराजक फैलाना।
भाईयों और बहनो सावधान हो जाईये।
***विनोदकुमार महाजन,पत्रकार,पुणे।
[23/01 9:20 pm] Papa: * हम सोते ही रहेंगे!!!*
(सभी जागृतों की क्षमा मांगकर🙏)------
चाहे कितने भी बाबर,
आते रहेंगे।
मंदिरों को नष्ट करते रहेंगे।
मस्जीदों को बनाते रहेंगे।
हम तो सोते ही रहेंगे।
चाहे...... कोई,"शक्तीमान,"आयें,
हमे जगाने की वह,
लाख कोशीश भी करेंगे।
हम सोते ही रहेंगे।
उलटा,"शक्तीमान,"को ही,
हम सबक सिखाएंगे।
उसको हम जलायेंगे,
नही तो जमीन में,
दफनायेंगे।
तुर्क गया,अफगान गया,
म्याँनमार ,पाकीस्तान गया।बांग्ला भी गया।
अब भी हम नही जागेंगे,
यारों हम तो मस्त,
सोते ही रहेंगे।
कश्मीर,कैराना खतरें में ,
केरल,बंग भी खतरे में,
जगह जगह हम,मजबुर
बनकर केवल सोते ही रहेंगे।
हम भुल गए है,क्षात्रतेज..
शिवाजी का,महाराणा का।
सावरकर और सुभाष का।
हम भुल गए है तेज,
देवी देवतांओं का...
बस्स करो यार,
कुछ न कहो हमें,
बस हमें सोने दो।और...
सोने ही दो ना।!!!
चाहे फटे आसमान,
चाहे आने दो लाख तुफान,
हम तो सोते ही रहेंगे।
सोना हमारा हक है।
अगर जागेंगे तो भी,
आपस में ही लड लडकर,
समाप्त होते जायेंगे।
तु छोटा मैं बडा कहके,
हम हमारे ही,लोगों में
झगडते ही रहेंगे।
अगर भगवान भी हमें..
जगाने आयेगा तो...
उसे भी हम, स्वर्ग में भगाएंगे।
बस्स....हम तो सोते ही...रहेंगे।
सोना हमारा जन्मसिध्द
अधिकार है।
----------------------
**विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: मोदीजी क्या कोई चोर है???
--------------------------
जब से मोदीजी जैसे प्रखर राष्ट्रभक्त सर्वोच्च सत्ता स्थान पर आये है,आजादी के बाद ,अत्यंत भयंकर,पाप करने वाले काले कौवे बहुत ही कांव कांव कर रहे है।
क्यों इनके पेट में आखिर इतना दर्द हो रहा है?
जाहिर बात है।आजादी के बाद इन्होने ना जनता का हित किया,नाही देश का।इतना देश लुटा इन्होने।गरीबों का खून तक पी गए ये मच्छर।और अब पाप के घडे भर रहे है,तो ये मोदी के नाम से जोर जोर से चिल्ला रहे है ये चोर।
मोदीजी तो अब कह रहे है,न खाऊंगा,नही खाने दुंगा।
इसिलीए ये पैसे खाने वाले राष्ट्रद्रोही तिलमिला रहे है।और मोदी को बदनाम कर रहे है।
मगर अब इनकी एक नही चलने वाली है।नया राज आ गया है।भारतीयों को अब सभी धर्म,जात,पंथ को सचमुच में न्याय मिल रहा है।देश बदल रहा है।गरीब भी सुखी होने लगा है।और मोदीजी का और भाजपा का स्थान पक्का हो रहा है।इसिलीए ये तिलमिला रहे है।
सत्ता तो गई।नोटबंदी के बाद इनका कालाधन भी बर्बाद हो गया।भविष्य में सत्ता आने की कोई भी उम्मीद नही।
तो क्या करें बेचारे।रोने के सिवाए इनके हाथ में अब कुछ भी नही रहा।मोदी को दिन रात गाली देना,शंख करना,और रोते रहना।
इनके हाथ में अब बचा ही क्या है रोने के बजाए।
केवल देश में ही नही तो विश्व में भी क्रांती की लहर चल रही है।सत्य की जीत हो रही है।नया युग आरंभ।हो रहा है।
मुर्गा झांकने से सुरज थोडे ही उगने के लिए रुकने वाला है?
चाहे कितना भी बदनाम करो मोदी को,जनता सब जानती है।
और ईश्वर भी सब पहचानता है।सच्चाई के पिछे हमेशा भगवान खुद रहता है।
इसिलीए कहावत है,"सत्य परेशान हो सकता है,परास्त नही।"
और सत्य कीअखंड विजय का समय ईश्वरी इच्छा से,और ईश्वरी कृपा से आरंभ हो चुका है।
"सत्यमेव जयते,"केवल नाम के लिए नही,तो सच्चाई की जीत के लिए भी।
------------------
*विनोदकुमार महाजन,
पत्रकार,पुणे।
[23/01 9:20 pm] Papa: 🦋क्या आपको....🦋
    एक.......अच्छी सी..
     🎸फिल्म.....🎸
👍बनानी है....?👍
-------------------------------
काम कौनसा भी करो,मगर उसमें अपने प्राण डालकर नवनिर्माण करो।भगवान को सामने रखकर काम करो।फिर...
चारों तरफ से यश तुम्हारे पिछे जरुर दौडेगा।
अब फिल्म निर्माण की ही बात देखो।अगर आपके पास अच्छा पैसा है।समाज में मानसन्मान,प्रतिष्ठा,धन चाहते हो,तो एक अच्छी सी फिल्म निर्माण जरुर करो।मगर फिल्म समाजविघातक नही,समाजसुधारक फिल्म बनाओ।क्योंकी मिडीया चाहे वह प्रिंट हो,ईलेक्ट्रोनीक्स हो,फिल्म हो,किताब लिखना हो,एन जी ओ चलाना हो,या राजनैतीक पार्टी निकालना हो,तो...
अगर उद्देश्य पवित्र है,तो आपको ईश्वर भी सहायता करता है।
मैं अब थोडा मेरा परीचय शॉर्ट में देता हूं।
मुझे समाज प्रबोधन के लिए विश्व रिकार्डेड ,अनेक भाषाओं में,अनेक फिल्म निर्माण करनी है।समाज परीवर्तन यही मेरा उद्देश्य है।
आज तक मैंने कुछ किताबें,अनेक अखबारों में अनेक विषयों पर अनेक लेख,कथांएं,कविताएं लिखी है।मेरे एकपात्री प्रयोग को,थिएटर शो के लिए,महाराष्ट्र शासन का,प्रयोग परीनीरीक्षण मंडल का,प्रमाणपत्र प्राप्त है।
अनेक माध्यमों से,अनेक साधनों से मैं,अनेक दिनों से एक...
सुसंस्कारीत समाज निर्मीती का प्रयत्न कर रहा हूं।
उसमें फिल्म निर्माण द्वारा भी कोशीश रहेगी।एक आदर्श फिल्म निर्माण।
मैं जानता हूं की,आज समाज में कुछ ऐसे साधन गलत तरीके से गुजर रहे है।इसपर अब कानुनी अंकुश आने की जरुरत आ पडी है।
ईश्वरी कानुन,प्रेम,भाईचारा,सद्भाव,ईन्सानियत की जीत के लिए सभी रास्तों से गुजरना अब जरूरी हो गया है।
सभी कलांओं द्वारा इसका मुल्य अब संपुर्ण विश्व को बताने की जरुरत आ गई है।
क्योंकी विश्व बहुत ही तेज गती से,विनाश की ओर बढ रहा है।इसे रोककर,
एक अच्छा समाज निर्माण करने की जिम्मेदारी अब,भारत पर और भारतीय समाज पर आ पडी है।संपुर्ण विश्व को अब,आदर्श भारतीय समाज के आदर्श सिध्दांतो की सक्त जरुरत आ पडी है।
लेख तो बहुत बडा हो रहा है।फिर भी.....
अब.......
चाहे फिल्म निर्माण हो या एक आदर्श समाज निर्माण हो,पावित्र्य तो रखना ही होगा।और एक विश्व व्यापक बडा आंदोलन खडा करना ही होगा।क्यों भाईयों,मंजुर है ना?तो चलो कुछ कोशीश तो जरुर करते है।
कहते है की,कोशीश करने वालों की हार नही होती।
तो आओ मेरे साथ।
जो साथ देंगे उनका भी स्वागत है।नही देंगे उनका भी स्वागत है।
तो बनानी है फिल्म?बनानी है करीअर?बनाना है भारत को,"विश्व-गुरु,"?
तो संकल्प करो।आज से अभी से।हम सब मिलकर एक नया समाज बनाके ही दिखाएंगे।
मेरे विचारों से जो सहमत नही है,उनका भी अभिनंदन।जो साथ देंगे उनका भी अभिनंदन।
कहते है,संकल्प में बहुत शक्ती होती है।तो चलो आज सब मिलकर एह एक आदर्श और शुभ संकल्प तो,सब मिलकर करते है।
भगवान जब चाहेगा,उसी वक्त संकल्प पूरा करेगा ही।और भगवान को अब संकल्प पूरा करना ही पडेगा।
क्यों???
ऐसा सवाल मत पुछों दोस्तों।अब समस्या नही देखनी है हमें।बल्की विश्व में जो आज अनेक समस्यांएं खडी है,उसका हल हमें देखना है।
एक,"संतुलीत विश्व,"के लिए,ईश्वरी कानुन का स्विकार करने वाले युग के लिए।देखो ना......
गाय,बैल,सांप,बिच्छु,कुत्ते,बिल्लीयां,पशु ,पक्षी,पेड,फुल,फल भी(ईंन्सान के सिवाय सब योनीयां)ईश्वरी कानुन से ही चलते है।तो इंन्सान को क्या हर्ज है भई?बिल्कुल नही।
और एक महत्वपुर्ण बात मैं कोई महात्मा,ज्ञानी नही हूं।एक सिदा सादा,भोलाभाला ,ईश्वर ने बनाया एक छोटासा इंन्सान हूं।कोशीश तो करता हूं की,प्रभु की सुंदर धरती फिर से सुंदर क्यों न हो जाय।
कुछ गलत या नियम बाह्य लिखा है तो क्षमस्व।
हरी ओम।
मुझे हंसो मत यारों।
---------------------------------
🙏🦋🎸👍💐🕉
***
विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: ** छोटासा बच्चा.....
        बनकर जीओ....**
-------------------------------
जींदगी क्या है?सुख दुख का एक मेला है।सुख कम दुख जादा।
सुखों की घडियाँ कब आकर निकलती है,समझ में ही नही आता।
और दुखों के पहाड समाप्त ही नही होते।
दुख के कष्टदायक अनेक
जहर के सागर पार करने के बाद,थोडा बहुत आनंद का अमृत मिलता है।मगर अनेक विष के सागर से भी,दो बुंद अमृत भी काफी आनंद देते है। आखिर हर जीव तो अमृत के लिए ही,मतलब.....
सुख,शांती,आनंद,आरोग्य,ऐश्वर्य ,किर्ती,यश के लिए ही,प्रयत्नशिल रहते है।
सुख सबको चाहिए,दुख किसी को भी नही चाहिए।
दिव्य अनुभुती सबको आनंदीत करती है।
अगर हरेक को अगर दिव्य अनुभुती चाहिए,तो चाहे सुख हो या दुख;लाभ हो या हानी,सदा आनंदी ही रहना चाहिए।
हंसते-खेलते जीवन जिना चाहिए।बिल्कुल छोटा बच्चा जैसा।चाहे उमर कौनसी भी हो।निष्पाप,निष्कपट मन से सभी पर,सजीवों पर,सृष्टी पर,भगवान पर,पशु पक्षीयों पर ,शुध्द पवित्र,निरपेक्ष प्रेम तो हमेशा करते ही रहना चाहिए।तभी ह्रदय में दिव्य अमृत सागर उत्पन्न होता है।और हमेशा के लिए खुश रखता है।कितने भी आने दो तुफान-या फिर आने दो कितनी भी आँधियाँ।खुशीयाँ कभी भी कम नही होती।
इससे ही स्थितप्रज्ञता मिलती है।ऐसी ही दिव्य अनुभुती में अपने ह्रदय में,स्वर्ग के सभी देवता और साक्षात स्वर्ग भी रहता है।
खुशियों से जीवन भर जाएं यही स्वर्ग है,और
दुखों से जीवन भर जाएं यही नरक है।
तो यही पर स्वर्ग है और यही पे नरक भी है।हमें स्वर्ग में रहना है या नरक में ये भी हमारे ही हाथ में है।छोटा सा बच्चा बनकर जिओगे तो यही स्वर्ग है।और.....
असुरी गुणों से सभी को केवल और केवल पिडा ही देंगे तो, नरक भी यहीं पर है।
हमें स्वर्ग में रहना है या नरक में,यह तो हमें ही तय करना है।
हरी ओम।
------------------------------
**विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:20 pm] Papa: 🌞आकाशात पतितं तोयं
यथा गच्छती सागरम्।।
🌞सर्व देव नमस्कारहा
केशवं प्रतीगच्छती।।
---------------------------------
🕉अती परिचयात अवज्ञा
संतत गमनादनादरो भवती।।
🕉मलये भिल्ल पुरंध्री
चंदनतरुकाष्ठम इंधनं कुरुते।।
---------------------------
🙏      🕉  🌹   🕉 🙏
--------------------
V.....K.....M.....
[23/01 9:22 pm] Papa: ***सुपरहिट फ़िल्म चाहिए???*******फ़िल्म निर्माताओं की संख्या हरदिन तो बढ़ रही है।मगर रेकॅार्ड ब्रेकिंग कितने फिल्में बनती है?पैसा इनव्हेस्ट करना बिजनेस के नाते ठीक तो है।मगर वही पैसा वापस आता है या नहीं इसकी कोई गॅरंटी नहीं है।वजह क्या है?फ़िल्म निर्माण एक जबरदस्त तंत्र है।इस तंत्र का अभ्यास करके फिल्म निकालने वाले"बॅाक्स आॅफिस"पर फेल नहीं हो सकते।राजकपुर,व्हि.शांताराम,दादा कोंडके,सचिन,महेश कोठारे,सुषमा शिरोमणि इन्होंने कौनसा तंत्र अपनाया?जिसे भी यह जबरदस्त तंत्र अपनाकर रेकॅार्डेड फ़िल्म बनानी है कृपया मुझे संपर्क करें।अनेक भाषाओं में अनेक विषयों पर फिल्म निकालकर यशस्वी करने की मैं निश्चित क्षमता रखता हूं।इसके लिए करना ये है कि जैसे मैं कहूं वैसे ही फिल्म बननी चाहिए।निर्मिति तंत्र,दिग्दर्शन,कथा,पटकथा,संवाद लेखन,गीत रचना,गायन,अभिनय,संगीत,संगीत के अनेक प्रयोग,फोटोग्राफी और अन्य अनेक प्रकार से फिल्म सुपर हिट हो सकती है।कैसे???यशस्वी निर्माताओं ने कौनसी केमिस्ट्री अपनाईं?निर्मिति में दोष क्या हो सकते है?दोष कैसे निकालने होंगे?रेकॅार्डिंग,डबिंग,मार्केटिंग,कास्ट सिलेक्शन कैसे करना चाहिए?कौनसा लेखक,गीतकार,गायक,संगीतकार,कलाकार क्या जादू कर सकता है?सभी के बारे में अभ्यास पूर्ण थिंकिंग होकर फिल्म निकालेंगे तो सुपर हिट हो सकती है।यशस्वी लोगों ने यह तंत्र ईश्वरी कृपा से प्राप्त किया।मगर किसिको बताया नहीं।मैं भी यह तंत्र खूब जानता हूं।नाम,पैसा,शोहरत कमाने वाले और यशस्वी जीवन जीने की इच्छा करने वाले कृपया संपर्क करें।देखते है कौन है"मुकद्दर का सिकंदर।"***विनोद कुमार महाजन।पत्रकार।व्हाटसअप नंबर +919890349751.(फेसबुक पर तकरीबन चौबीस ग्रुप पर तीस देशों में चार लाख लोगों तक और व्हाटसअप पर मेरे अनेक ग्रुप पर यह मैसेज जायेगा।ईश्वर की मुझपर भी कितनी कृपा है और नशिब भी क्या कहता है ये मैं भी तो देखता हूं।)
[23/01 9:22 pm] Papa: ।। कलंकायन।।
अथ...

                ...इती।
तत्.सत्...
श्रीकृष्णार्पणमस्तु।
[23/01 9:22 pm] Papa: ।। कलंकायन।।
।।अथ...

          🕉🕉🕉

                ...इती।।
तत् सत्.....

।।श्रीकृष्णार्पणमस्तु।।
[23/01 9:22 pm] Papa: सभी पदाधिकारियो की अनुमति से  विनोद कुमार महाजन को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया जाता हैं। क्रांतिकारी सेना आप पर विश्वास करती हैं।आप सेना का विस्तार करेंगें।
[23/01 9:22 pm] Papa: "क्रांतिकारी सेना,"के सभी पदाधिकारीयों को मैं,विनोदकुमार महाजन,नम्र निवेदन करता हूं की,मै फिल्म बनाने की बहुत दिनों से कोशीश में लगा रहा हूं।मगर अभी तक फायनान
सर नही मिल रहा है।ग्रुप में अगर कोई फायनान्स की क्षमता रखता है तो कृपया मुझे संपर्क किजीए।
पैसा एवं सन्मान की गारंटी देता हूं।समाजकार्य करने के लिए भी धन की नितांत आवश्यकता होती है।अपना संगठन राष्ट्रीय स्तर पर बढाना है तो धन की जरुरत होगी ही।
फिल्म निर्माण द्वारा अच्छी आय मिल सकेगी।जिसका फायदा समाज परिवर्तन द्वारा इंन्सानियत की जीत के लिए भी होगा।
**--विनोदकुमार महाजन।
(1 )राष्ट्रीय महासचिव,
क्रांतिकारी सेना।
(2)ओल इंडिया प्रेसिडेंट,
(मिडीया शक्ती)
आजाद मजदुर किसान पार्टी।
(3)महाराष्ट्र ब्युरो चिफ,
दै.चर्चा आज की।
🙏🙏🙏
[23/01 9:22 pm] Papa: सभी पदाधिकारीयों को मैं,विनोदकुमार महाजन,नम्र निवेदन करता हूं की,मै फिल्म बनाने की बहुत दिनों से कोशीश में लगा रहा हूं।मगर अभी तक फायनान
सर नही मिल रहा है।ग्रुप में अगर कोई फायनान्स की क्षमता रखता है तो कृपया मुझे संपर्क किजीए।
पैसा एवं सन्मान की गारंटी देता हूं।समाजकार्य करने के लिए भी धन की नितांत आवश्यकता होती है।अपना संगठन राष्ट्रीय स्तर पर बढाना है तो धन की जरुरत होगी ही।
फिल्म निर्माण द्वारा अच्छी आय मिल सकेगी।जिसका फायदा समाज परिवर्तन द्वारा इंन्सानियत की जीत के लिए भी होगा।
**--विनोदकुमार महाजन।
(1 )राष्ट्रीय महासचिव,
क्रांतिकारी सेना।
(2)ओल इंडिया प्रेसिडेंट,
(मिडीया शक्ती)
आजाद मजदुर किसान पार्टी।
(3)महाराष्ट्र ब्युरो चिफ,
दै.चर्चा आज की।
🙏🙏🙏
[23/01 9:24 pm] Papa: पांडवों को बनवास और अज्ञात वास में,तथा श्रीराम को भी बनवास में बहुत ही यातनांएं और दुख-दर्द झेलने पडे।हरेक ईश्वरी महात्माओं को ऐसी दुखदायक स्थिती से गुजरना ही पडता है।
आपके मन के अंदर चल रहे द्वंद्व शांत करने के लिए ही एह लिखना पडा।
*विनोदकुमार महाजन।
[23/01 9:24 pm] Papa: खालील लिंक ओपन करा. पृथीचा गोल अवतरेल. त्या वर असंख्य हिरवे बिंदू आहेत. तूम्ही ज्या बिंदू ला टच करणार त्या शहरातिल रेडीओ स्टेशन सूरू होईल. ...जबरदस्त आहे

http://radio.garden/live
[23/01 9:24 pm] Papa: ईश्वरी शक्ती !!!!!

ईश्वरी शक्ती !!!!!

ईश्वरी शक्ती !!!!!

और केवल......

ईश्वरी ही शक्ती  !!!!!

जबरदस्त,शक्तीशाली !!!!!

सामर्थ्यसंपन्न,शक्तीमान!!

✅✅✅✅✅✅✅

विनोदकुमार महाजन !!!!!
[23/01 9:26 pm] Papa: यह न्युज सच्ची हो सकती है।उत्तर प्रदेश ही नहीतो संपूर्ण देश में ऐसी बुरी हालत पैदा हो रही है।महाराष्ट्र में भी ऐसा ही हाल है।मैंखुद भी ऐसी गंदी और निच हरकतों से परेशान हूं।मैं एक खडतर तपस्वी होकर ईश्वरी शक्ती से एकरुप हो गया हूं।मगर ऐसी दुष्ट हरकतों से मैं परेशान हूं।ना कोई व्यक्ती या संगठन या कानून मेरी सहायता कर सकता है।मगर....सर्व शक्तीमान भगवान और मेरे तपोबल ऐसे पापीयों को एक दिन जला देंगे।
फिर भी अब महिला उत्पीडन के साथ साथ पुरुष उत्पीडन कानून भी सक्ती से बनाने की जरुरत आ पडी है।अनेक नेक और अच्छे पुरुंषों का करीअर ऐसी दुष्टता से खतरे में आ रहा है।
इस ग्रुप के कितने मान्यवर मेरे पिछे खडे होते है,मैंभी देखुंगा।
हमारे महापुरुषों को भी ठीक इसी तरह से उत्पीडीत किया जा रहा है।
भगवान आयेगा तो उसे भी शायद इसका सामना करना पडेगा और हल भी निकालन पडेगा।ताकी कोई पुण्यवान व्यक्ती ऐसी बुरी स्थिती में न फंस जाये।
**विनोदकुमार महाजन,
पत्रकार,पुणे।


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