--*  दो दिन का मेला । *--

जीवन है एक दो दिन का,
मेला रे,मनवा दो दिन का मेला रे।
रिश्ते नाते कोय नही तेरा
रे,जगत में कोय नही,
तेरा रे।
दो दिन का मेला रे।
पैसों का ही सब झमेला,
रे मनवा ,कोय नही तेरा रे।
कोडी कोडी धन कमाया,
संग नही आय,
रुपैय्या रे,मनवा
कोय नही तेरा रे।इस मेले में पगले रटले ईश्वर का
नाम पगले,
बस प्रभु ही होय तेरा रे,
मनवा जगत में,
प्रभु ही होय तेरा रे।
जनम जनम का रिश्ता
उसका है रे पगले,
आँखे खोल के देख जरा,
बाकी सबकुछ झुटा है
माया का मेला,
जगत में कोय नही तेरा
रे,मनवा कोय नही
तेरा रे।
***रचना,
       विनोदकुमार महाजन।

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