झंझावात
*एक झंझावात आयेगा...* ✍️ २७७२ *विनोदकुमार महाजन* 🚩🚩🚩🚩🚩 बिगडा हुवा सृष्टी संतुलन , निष्पाप जीवों के हड्डीयों के जगह जगह पर बिखरे मलबे , पशुपक्षीयों की खून की नदीयाॅं... *यह सब क्या दर्शाता है ?* संपूर्ण विश्व पर आसुरीक शक्तियों ने नियोजन बद्ध तरीकों से , कब्जा किया हुवा है ! ईश्वर की सुंदर धरती का सैतानी दिमाग के छोटेसे इंन्सान ने और उसके विनाशकारी छोटेसे दिमाग ने ... ईश्वरी सिध्दांतों को त्यागकर , सत्य को त्यागकर , ईश्वर निर्मित सत्य सनातन को त्यागकर , आसुरीक सिध्दांतों को जबरन थोपा है और हाहा:कार मचाया है ! *और ईश्वर ?* अल्प बुध्दी मनुष्य प्राणी के यह काले कारनामे , मुक बनकर , खुले आंखों से देख रहा है ! ईश्वर के हजारों हाथ और हजारो आंख य:कश्चित, अहंकारी , उन्मादी , उन्मत्त मनुष्य प्राणी को थोडे ही दिखाई देंगे ? वह तो पग पग पर अधर्म बढाता ही रहेगा और ईश्वरी सिध्दांतों को बारबार ललकारता ही रहेगा ! मगर अंत में उन्मत्त , हाहा:कारी रावण , दुर्योधन , कंस , हिरण्यकश्यपू जैसे महाराक्षसी कृत्य करने वालों का अंत कैसा हुवा , यह तो सब सनातनी जान...