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बिना मांगे

 *किसीको कुछ भी ना माॅंगो*  ✍️२७९३  *विनोदकुमार महाजन* 💰💰💰💰💰 बिना माॅंगे मोती मिले  माॅंगे मिले ना भीक... ऐसी एक पुरानी कहावत है ... जो किसीको कुछ माॅंगता ही नहीं है खुद ईश्वर भी उसको प्रसन्न होता है ! इसिलिए स्वयं ईश्वर से भी कुछ ना माॅंगो ! अगर हमारी योग्यता होगी तो ईश्वर भी हमें भरभरके देगा ! इसके लिए समय का इंतजार तो चाहिए ही ! उतावलेपन सर्वनाश कर सकता है ! मेरे दादाजी हमेशा कहते थे , " *न मागे तयाची रमा* *( लक्ष्मी ) होय* *दासी ! "*  इसिलिए घर में कुछ नहीं है तो घर में भूखे रहो , मगर किसीको कुछ ना माॅंगो ! जो किसी को कुछ भी माॅंगता नहीं है उसीका आत्मबल हमेशा उंचा रहता है ! और उसका जीवन भी स्वाभिमान से भरा हुवा तथा उंचा होता है ! इसिलिए जीवन में आगे बढना है , बहुत तरक्की करनी है तो हमेशा वृतस्थ और निरपेक्ष तो रहना ही पडेगा ! इसके साथ ही हमेशा मौन और एकांत भी ईश्वरी शक्तियों से जोड देता है ! कठीण मुसिबतों में मौन रहना ही उचित रहता है ! ऐसे समय में ईश्वर भी बहुत कडी परीक्षा लेगा ! चार चार दिन शायद भूखा भी रहना पडेगा ! मगर अंत में ? जो चाहिए वह सबकुछ देगा ...

नफरत

 *हिंदुओं को ही हिन्दुओं* *से नफरत* *है ?*  ✍️ २७९२ हिन्दुओं को ही हिन्दुओं से कुछ लेना देना नहीं है ... हिंदुओं को ही गुणवंत हिन्दुओं से भी कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही मुसिबत में फॅंसे हुए हिन्दुओं से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही तडप तडप कर मरनेवाले असहाय मजबूर बेबस हिन्दुओं से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही पुण्यपुरूष हिन्दुओं से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही राष्ट्रप्रेमी हिन्दुओं से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही हिन्दुओं के देवी देवताओं के अपमान से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही हिंदुराष्ट्र बनाने में कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही हाहाकारी अधर्मी हिंदू धर्म पर प्रहार करनेवालों से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही आदर्श हिंदू धर्म से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही हिंदू धर्म को सदीयों से बरबाद करने वालों से कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही हिंदू धर्म भयंकर मुसिबत में है इससे कुछ लेना देना नहीं है ... हिन्दुओं को ही हिंदू धर्म से नफरत है ? हिन्दुओं को ही हिंदू देवीदेवताओं स...

विकास

 *आर्थिक विकास और* *आत्मिक* *विकास...* ✍️ २७९१  _विनोदकुमार_ _महाजन_  💰🕉️💰🕉️ आर्थिक विकास भौतिक सुखों को दर्शाता है ! तो आत्मिक विकास आध्यात्मिक उंचाईयों तक ले जाता है ! अभी के समय में आर्थिक विकास तो हो रहा है , मतलब इंन्सान धन से अमीर तो बन रहा है ! मगर क्या सामुहिक सामाजिक तौर पर आत्मिक विकास हो रहा है ? आर्थिक संपन्नता तो आ रही है मगर मन की गरीबी बहुत ही बढ रही है ! क्योंकी संकुचित विचार सरनी इसमें प्रबल होती जा रही है ! आर्थिक विकास उच्च कोटी की जीवनशैली तथा सुख लोलूप , भोग विलासी जीवन बनाने में सहाय्यभूत होती है ! मगर आत्मिक विकास नहीं हुवा तो कितना भी धन वैभव होने पर भी मन को शांत और प्रसन्नचित्त नहीं रख सकता है ! मन को शांत , संयमीत रखने के लिये आत्मिक विकास महत्वपूर्ण होता है ! इसिलिए समाज में आज लोग धन से अमीर तो बन रहे है मगर मन से भिकारी , कंगाल बनते जा रहे है ! क्योंकी धन के लालच के कारण मन की शांती ही खो बैठी हैं ! आर्थिक विकास में उपरी दिखावा जरूर होता है ! मगर राजमहल भी मन को शांत करेगा इसका कोई भरौसा नहीं होता है ! मगर आत्मिक विकास में उपरी दिखावे की ...

भ्रम और प्रेम

 *भ्रम और प्रेम*  ✍️ २७९०  *विनोदकुमार* *महाजन* 🩷🩷🩷🌹 वैसे  हम सभी भी किसी न किसी पर तो प्रेम करते ही है ! आजीवन ! निरंतर ! सच्चा प्रेम ! कोई माॅं से तो कोई पिता से , कोई ईश्वर से तो कोई सद्गुरू से ! प्रेम बिना जीवन ही अधूरा है ! मैं भी सभी से प्रेम करता हूं ! शुद्ध पवित्र निरपेक्ष निष्पाप प्रेम ! सद्गुरू पर , ईश्वर पर , ईश्वर की धरती पर , मित्रों पर , पशुपक्षीयों पर , वृक्ष बेली पर...! वैसे तो प्रेम किसीके जीवन का महत्वपूर्ण मुद्दा होता है ! कोई व्यक्ती दूर चली जाती है तो उसके बिना जीवन ही व्यर्थ , निरर्थक लगने लगता है ! मेरे साथ भी अनेक बार ऐसा ही हुवा ! बचपन में मेरी माँ गुजर गई तो मैंने उसकी याद में  खाना पिना ही छोड दिया ! मगर मेरी माँ ने मुझे उसकी मृत्यू के बाद भी सदेह दर्शन देकर मुझे मेरे सरपर हाथ रखकर शांत किया था ! और मुझे मेरे दादाजी मेरे आण्णा के पास सौंप दिया था ! मेरे आण्णा के दिव्य और स्वर्गीय प्रेम से मेरा संपूर्ण जीवन ही तृप्त हो गया था ! मगर मेरे आण्णा का भी जब देहावसान हुवा तो मैं अनेक सालोंतक दिनरात उनकी याद में सुदबूध खोकर रोता रहता था ! न...

पात्र

 तुम्हे जो चाहिए वह सबकुछ देने की शक्ती ईश्वर में होती है ! मगर तुम्हारा पात्र भी उसी योग्यता का होना जरूरी होता है ! विनोदकुमार महाजन

साधू और गोमाता

 साधू और गौमाता का शाप ??  ✍️ २७८९  विनोदकुमार महाजन 🔱🔱🔱🔱 जी हाँ  दोनों का शाप महाभयंकर होता है ! साधू और गौमाता का शाप ! धरती भी दोलायमान होगी ऐसे शाप से ! एक महासिध्दयोगी  करपात्री जी महाराज ? गौहत्या बंदी आंदोलन तेज करने के लिये निकले ? और ?? महाभयंकर पाप हुवा ! अनेक गौमाताओं को और साधुओं को गोलियों से भूना गया ! और ? जब करपात्री महाराज ने शाप दिया तो क्या हुवा ? गौमाता और साधुओं की हत्या करने ? वाला ? गोलीयों से छलनी होकर ? अकाल मृत्यू मर गया ! उसकी अगली पिढी की भी यही दुर्दशा हो गई ! यही शक्ती होती है शाप में ! आज ? अनेक जगहों पर भगवे को , भगवा पहनने वाले साधुसंतों को , गौमाताओं को भयंकर बुरे तरीकों से तडपाया जा रहा है ! संपूर्ण विश्व में संस्कृती संवर्धन करनेवाले साधु संतों को जेल भेजनी की कोशिश हो रही है , अनेक झूटे आरोप लगाकर उन्हे बदनाम , बरबाद किया जा रहा है ! मगर ? थोडे दिनों में यह सबकुछ बदलेगा ! अदृश्य रूप से स्वयं ईश्वर प्रतिशोध लेगा ! अपने भक्तों के और गौमाताओं के अश्रू स्वयं ईश्वर ही पोंछता है ! और प्रतिशोध भी लेता है ! साधू संत सज्जन और गौमा...

युगपुरुष

 _ठंडे दिमाग का_   _आध्यात्मिक_ _युगपुरुष ???_  ठंडे दिमाग का और क्रूर मगर आध्यात्मिक सनातनी विश्व पर राज करेगा , अधर्म का नाश करके धर्म की पुनर्स्थापना करेगा !  जिसे महादेव का और अनेक देवीदेवताओं का वरदान प्राप्त होगा ! यह समय भी नजदिक है ? ( फ्रेंच भविष्य वेत्ता : - नोस्त्रैदमस )  " युनिव्हर्स " भी अपनी शुध्दी प्रक्रिया बहुत तेज और जल्दी से करेगा ! युगपरिवर्तन की घडी !!  _विनोदकुमार_ _महाजन_

बदलेगा

 चारों ओर अती भयावह हो रहा है ! इंन्सान इंन्सान रहा ही नहीं है , हैवान बन गया है ! सबकुछ ? बदलेगा अब !! विनोदकुमार महाजन

अती तीथे माती

 विद्वान, गुणवंत आणी चांगल्या माणसांच जगणंच जणू या देशात मुश्किल झाले आहे.चौफेर कोंडी अन् मुस्कटदाबी. बदलतील हेही दिवस बदलतील. अती तिथं माती. विनोदकुमार महाजन

दुसऱ्या चे दु:ख

 दुस-याला खाऊ पिऊ घालण्यात , दुस-यांच्या दु:खात आनंद देण्यात , इतरांचे अश्रू पुसण्यात , दुस-यांना आनंद देण्यात , इतरांच्या संकटात धावून जाण्यात ज्यांना परमोच्च आनंद वाटतो तो दिव्य पुरूष असतो व त्याचेजवळ अखंड देवीदेवता वास करतात. म्हणूनच सत्पुरुषांच्या व संत महात्म्यांच्या संगतीत आपल्याला नेहमीच परमानंद वाटतो. गजानन महाराज की जय. विनोदकुमार महाजन

अब रणकंदन होगा

 *अब तो भीषण* *रणकंदन होगा...*  अब तो रण कंदन होगा ,  रण कर्कश भी होगा , शिव का तांडव होगा ,   उन्मत्त , उन्मादीयों का संहार होगा !  *भीषण रण होगा !*  हाहा:कारीयों का अंत होगा ! पापीयों का सर्वनाश होगा ! गौमाताओं को अभय होगा ! अत्याचारीयों का अंत होगा ! सत्य का बोलबाला होगा ! अब भयंकर रण कंदन होगा ! कल्की राज का अब आगमन होगा ! संपूर्ण विश्व पर सत्य सनातन का राज होगा ! सत्य सनातन का ही राज होगा ! अब तो भीषण रणसंग्राम होगा ! पाप का अंत होगा !  *हर हर महादेव*   *जय श्रीकृष्ण*   *विनोदकुमार* *महाजन*

स्वानुभव

 तुमची सद्गुरू चरणावर व ईश्वरावर अतूट श्रद्धा विश्वास व प्रेम असेल तर तुम्हाला जे पाहिजे असेल ते अगदी नक्कीच मिळत.स्वानुभवाचे बोल.ईश्वरी शक्तिची आपणही दिव्य अनुभूती घ्या.हर हर महादेव. विनोदकुमार महाजन

भागो हिंदू भागो

 *भागो हिंदू भागो...* ✍️ २७८४ 🏃🤫🫣🤔 भागो हिंदू भागो जहाँ भी रास्ता दिखाई देगा ,  वहाॅं भागो दस दिशाओं से भागो पाय लगाकर भागो भागना हमारा दाईत्व है भागना ही हमारे नशीब में है  फिर भी मत जागो ... भागम् भाग भागम् भाग  आपस में लडते लडते मरो  बॅंटते रहेंगे कटते भी रहेंगे  मगर नहीं जागेंगे हरगीज नहीं जागेंगे अफगानिस्तान से भागे  पाकिस्तान से भागे  बांगलादेश से भी भागे अब केरला से भाग रहे है  पश्चिम बंगाल से भी भाग रहे है  देश के अनेक कोने से भी भाग रहे है  भागते रहो भागते रहो  ना हिंदू का कोई तारणहार है ना हिंदू का कोई वाली  नितदिन अत्याचार सहते सहते ही मर जाना  यही इनका नशीब है फिर भी ? एक नहीं होंगे ? अन्याय , अत्याचार का डटकर मुकाबला नहीं करेंगे  सत्ता और संपत्ती के लालच में  जातिपाती के झगडे में  आपस में ही लड लडकर मरेंगे  मगर फिर भी कभी नहीं जागेंगे  हरगीज नहीं जागेंगे  कट जायेंगे  मिट जायेंगे  मर जायेंगे  मगर...?? हुश्श... नहीं जागेंगे  एक जींदा लाश बनी कौम को ...

रूक्ष

 ज्याच्यावर तुम्ही जीवापाड प्रेम केलं त्याला तुमच्याशी कांहीही घेणंदेणं नाही,हाच कलियुगाचा न्याय आहे.म्हणून ? रूक्ष रहा पण कुणावरही प्रेम करू नका.आत्म्यावरचं शुद्ध पवित्र प्रेम. विनोदकुमार महाजन

हिंदुनों विचार करा

 *खुरटलेली झाडं* ✍️२७८३  *विनोदकुमार महाजन*  🪾🪾🪾🪾🪾 होय मित्रांनो ,  *खुरटलेली झाडं.*  हल्ली काय झालंय माझ्या हिंदू बांधवांना ? कांहीच कळत नाही. अनेक जागृत हिंदू बांधवांना ही कळत नाही की , अगदीच खुरटलेल्या झाडासारखीच वागतात आपली माणसं . तेजोहीन , सत्वहीन , संकुचित विचारांचे , कोत्या मनाचे , कोत्या वृत्तीचे , स्वाभीमान शून्य , लाचार , हीन , दीन , हताश , उदास , मजबूर , असहाय , गलितगात्र असा बव्हंशी का झालाय बरं *माझा बांधव ?*  मान्य आहे की , आमचा बांधव , रोजी रोटीतच एवढा अडकला आहे की , त्याला धर्म , संस्कृती याबद्दल अधिक विचार करायला ही वेळ नाही. सकाळी कामावर जाणार.संध्याकाळी दमुन भागुन येणार आणी चार घास घाऊन झोपणार. आमच्याकडे मनुष्य बळ आहे पण धन बळ नाही. दुसरा एखादा श्रीमंत हिंदू देशही नाही की जो आमच्या बांधवांना सहकार्य करेल. बरं , घरोघरी जाऊन समाज जागृती करण्यासाठी कार्यकर्त्यांची फौज निर्माण करावी तर त्याला ही मर्यादा. कारण कार्यकर्त्यांची रोजी रोटी कुणी चालवायची ? हा ही महत्वपूर्ण प्रश्न आहेच. एके काळी घरोघरी जीथं सोन्याचा धूर निघायचा तो समाज आज दारी...

स्वधर्मे

 *स्वधर्मे निधनं श्रेय:* ✍️ २७८२  *विनोदकुमार महाजन* 🌞🌞🌞🌞  भगवान *श्रीकृष्ण* कहते है  " *स्वधर्मे निधनं श्रेय:*   *परधर्मो भयावह: "*  मतलब ? स्वधर्म अर्थात खुद का धर्म अर्थात ? वैदिक सनातन हिंदू धर्म  में जन्मे हुए हर व्यक्ती को अपना धर्म जानसे भी प्यारा होता है ! वही सत्य धर्म और आदर्श जीवन पद्धती का वरदान होता है ! इसिलिए इसी धर्म में आनंद से जीवन जीना ही असली जीवन होता है !  *सनातन धर्म मतलब ?*  उच्च कोटी की आदर्श जीवन प्रणाली, जीसमें  " *वसुधैव कुटुंबकम् "*  की आदर्श जीवन पद्धती स्विकार की जाती है ! जो संपूर्ण मानवता , भूतदया सिखाती है ! और जो आदर्श संस्कृती द्वारा ईश्वराधिष्ठित जीवन यापन भी सिखाती है ! इसिलिए हिंदू धर्म ना कभी तलवार के धार पर बढाने की जरूरत है ना ही धन बाॅंटकर ! यह तो एक अटूट ईश्वरी सिद्धांत है ! इसिलिए इसी धर्म के लिये और उसकी रक्षा के लिये मर मिटना भी  यथोचित माना जाता है ! " *स्वधर्मे निधनं श्रेय "*  तो दूसरी ओर भगवान कहते है ?  *परधर्मो भयावह:*  यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण जीवन प्रण...

रक्त पिपासू

 उपद्रवी व रक्त पिपासू ढेकणं , झुरळं , डास लगेच एकाचे हजारो होतात.त्याला लगेच फवारा मारावा लागतो.समजलं का कांही ??? विनोदकुमार महाजन

सावधान

 *खतरे की घंटी बज चुकी* *है...* ✍️ २७८१ 🫣🫣🫣🫣🫣 जी हाँ साथीयों  साजीश गहरी है चाल भयंकर है  *सावधान हो जाईये !* खतरे की घंटी बज चुकी है ! टुलकीट गैंग देश में भयंकर अराजक फैलाने के लिये सक्रीय हो गई है !  *संकट गहरा है !* संपूर्ण तबाही का नया प्लाॅन तैय्यार होकर ,  *मार्केट में खुले आम*  घूम रहा है ! विषय है   *सवर्ण विरूद्ध गैरसवर्ण* मोदिजी योगीजी ने संकट की गहराई पूर्ण रूप से भाॅंप ली है ! इसिलिए वो मौन हो गये है ? दोनों में से एक पक्ष लेंगे तो ? भयंकर बदनामी और अगले विधानसभा और लोकसभा के सभी चुनावों पर गहरा असर ??? २४ में क्या हुवा था ?  *संविधान खतरे में का* झूटा प्रपोगंडा फैलावर , समाज मन को संपूर्ण रूप से संभ्रमित और प्रभावित करके , मतदान प्रक्रिया पर , गहरा असर पडा था ! परिणाम क्या हुवा था ? चारसो पार तो दूर ? स्पष्ट बहुमत तक जाने में भी अनेक बाधाएं उत्पन्न हो गई ! अब मुद्दा सवर्ण और गैर सवर्ण का बनाया जा रहा है ! जो अगले उत्तर प्रदेश विधानसभा और पश्चिम बंगाल विधानसभा पर और भविष्यकालीन लोकसभा चुनावों पर गहरा असर करेगा !  *इसिलिए...

हम तुमसे प्रेम करते रहे

 *हम? तुमसे प्रेम करते* *रहे..? तुम ?* *नफरत का बीज बोते* *रहे...* 👆❓ ✍️ २७८०  *विनोदकुमार महाजन*  ⁉️❓⁉️❓ जी हाँ साथीयों हम *उनपर* हमेशा  सच्चा प्रेम करते रहे और वो ? *हमपर हमेशा* नफरत का बीज बोते रहे ?  *सदीयों से !* सदीयों से हम असली भाईचारा निभाते रहे ! और वो ? सदीयों से भाईचारे की आड में हमारा घात करते रहे !  *कौन ?*  *सोचो समझो जानो* *जागो असलियत* *पहचानो !* भाईचारे में हम हमारा ही अस्तित्व खोते रहे ! सदीयों से वो हमें भाईचारे के आड में भगाते रहे !  *अभी भी नहीं समझे ?*  *अभी भी अनाडी ही* *हो ?* हर जगहों से हमारे मठ मंदिर गिराए गए ! ? हमारे आदर्श संस्कृती के नामोनिशाण मिटाते गए ! ? जगह जगह पर हमारे आदर्शों को जमीनदोस्त करते गए ???  *और फिर भी हम* *भाईचारा निभाते रहे !*🤫  *आज तक अभी तक*  यही सिलसिला लगातार चलता आ रहा है !  *फिर भी हम आज भी ?* भाई समझकर प्रेम करते रहे ! तुम्हारे आदर्शों की लगातार पूजा करते रहे ! और तुम ? हमारे आदर्श श्रद्वास्थानों पर *मौका* *मिलते ही* हमले करते रहे ! ? तुम *कावेबाज ,* *धोकेबाज , षड्यं...

गोमाता

 गौमाता की जो रक्षा करेगा , वही देश पर राज करेगा... गौमाता का हत्यारा ?, गौ श्राप से ही , समाप्त होगा !! विनोदकुमार महाजन

आत्मविश्वास

 *जीवन में परिस्थितियाँ कैसी*  *भी हों,*  *उत्साह और आत्मविश्वास को*  *कभी कम नहीं होने दें,!,,,*                 🩷 *विनोदकुमार महाजन 🌹*

सुखी

 *मी सुखी होत आहे...* ✍️ २७७९  *विनोदकुमार महाजन*  🌹🌹🌹🌹🌹 होय मित्रांनो , आपण दररोज आपल्या मनाला हे नक्की सांगायचं.  *मी सुखी होत आहे.* एवढं वाक्य जरी तुम्ही म्हणत असाल तर नक्कीच तुम्ही वरचेवर सुखी व्हालच व्हाल.  *प्रयत्न करून तर बघा.* याला कांहीं पैसा वगैरे नाही हो लागत. " माझ्यावर दररोज सद्गुरूची , ईश्वराची कृपा होत आहे.  *माझे दुःख हळूहळू* *संपत आहे.* माझ्या आसपासची , माझ्यावर खरं प्रेम करणारी सगळी माणसं सुखी होत आहेत " असही म्हणा. स्वतः पेक्षा इतरांच्या सुखासाठी प्रार्थना करणारी निस्वार्थी माणसं देवाला खूपच प्रिय असतात. म्हणूनच तो त्यांचं लवकर ऐकतो. " मला वरचेवर सुख , समाधान , शांती , आनंद मिळतो आहे. मला लवकरच मला हवे असणारे धनही मिळणार आहे "  *अशीही प्रार्थना करा.*  *प्रार्थनेत खूप मोठी शक्ती* *असते.*  " मी तर सुखी होणारच पण माझ्या बरोबर येणाऱ्या प्रत्येकाला मी सुखी आनंदी करणार " ही मनाची धारणा ठेवा. एवढंच नाही तर, मनात असंही म्हणा की, " मला दुःख, त्रास,कष्ट देणा-यांनाही सुखी कर भगवंता. त्यांच्या चुका माफ करून त्यांना सन्मार्ग दाखव ....

आनंदी जीवन

 जहाँ तुम्हारी सच्चाई,अच्छाई का मोल नहीं , जहाँ तुम्हारे प्रेम और अश्रुओं की कीमत नहीं उस जगह पर मत रहिए , उस जगह पर मत जाईये ! यही आनंदी जीवन का रहस्य है ! विनोदकुमार महाजन

चक्रव्यूह

 *आयुष्य एक चक्रव्यूह* *आहे* ✍️२७७८  *विनोदकुमार महाजन*  🎡🎡🎡🎡🎡  *होय मित्रांनो ,* आपले आयुष्य हे खरोखरीच एक चक्रव्यूह आहे. अगदी जन्मल्यापासून ते अखेरपर्यंत हे चक्रव्यूह भेदन करण्याचा आपण प्रयत्न करत असतो. प्रत्येक सुखदुःखात एक आशेचा किरण घेऊन आपण एक नव्या जीवनाची , नव्या क्षितीजाची अगदी दररोज आतुरतेने वाट पाहत असतो.  *पण काय करावे ?* एका चक्रव्यूहातून बाहेर पडले की दुसरे चक्रव्यूह तयारच असते. चक्रव्यूहातच आपले अख्खे जीवन अडकून पडलेले असते. अनेक संकटांचे चक्रव्यूह. जीवनात एवढी चक्रव्यूह येतात की ती भेदन करता करता आपल्या *नाकी नऊ येते.* आता *नाकी नऊच का* येते ? हे पण कळत नाही.नाकी *आठ ,सात का बरे* नसावे ? असो , हे एक पुन्हा वेगळेच चक्रव्यूह. आता या चक्रव्यूहात पुन्हा अडकून पडायला नको. असो. तर असं आहे तर हे अख्या आयुष्याचं चक्रव्यूह आणी चक्रव्यूहाचं गणीत. हे चक्रव्यूहाच गणीत भलतंच भयंकर वाटतंय नाही का ? सुटकाच देत नाही. अगदी कांहीही करा. अभिमन्यू पण चक्रव्यूहातच अडकला.आणी शेवटी त्यातच संपला. पण आपण मात्र कोणत्याही चक्रव्यूहात मुळीच अडकायचं नाही. नाही म्हणजे ना...

अमीरी गरीबी

 *भुलभुलैय्या अमीरी* *गरीबी का...* ✍️ २७७७  *विनोदकुमार महाजन*  💰🌈💎💎💎 भुलभुलैय्या से चलती है दुनियादारी ! कोई अमीर है तो कोई गरीब ! हर एक का सपना होता है अमीर बनने का ! गरीब को भी लगता है , हम जरूर अमीर बनेंगे ! क्योंकी गरीबी है एक शाप ! अमीरी में होती है  शान ए शौकत , एक विलासी जीवन ! मगर फिर भी अमीरी में होता है दिखावा , भपका , अवडंबर , सबसे मैं बडा की अहंकारी वृत्ती ! भुलभुलैय्या का जीवन सारा ! हाय फाय जीवन जीने की चाहत ! करोडों का बंगला , गाडी , नौकर , चाकर आंखों को चकाचौंध कर देती है ! फिर भी संत कबीर कहते है और अनुप जलोटा बहुत ही बढीया ढंग से गाते है... " *जो सुख नाही अमीरी* *में , मन मेरा* *लागा फकिरी में* " धन चाहिए , धन वैभव की खनखनाहट चाहिए ! मगर आखिर धन के लिये भी होता है , " *नशीब अपना अपना "* धन वैभव तो केवल मनुष्यों को ही लगता है ! बाकी पशुपक्षी तो धन वैभव ना होकर भी मस्त होकर आनंदी जीवन जीते है ! रास्ते पर खाना , रास्ते पर ही सोना ! राजमहल तो इंन्सानों को लगता है ! हाँ धन तो चाहिए ही चाहिए ! मगर दो नंबर वाला नहीं बल्की माता महालक्ष्मी की कृपा वाल...

देव धावत येतो

 *तुम्ही फक्त* *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* *म्हणा...* ✍️ २७७६ ✅✅✅✅✅ आपल्या आयुष्यात आपण बरेच दुःख भोगत असतो. ब-याच वेळा ते दु:ख असह्य देखील होते. तर अनेक वेळा आपण अनेक प्रकारची सुखेही भोगत असतो. पण जर ही सुखदु:खे आपण ईश्वराला सदैव साक्षी ठेवून भोगली तर नक्कीच आपले आयुष्य समाधानाने भरून उरते. प्रत्येक वेळी, प्रत्येक सुखदुःखात आपण जर सगळेच ईश्वराच्या चरणावर अर्पण केले तर आपला मनावरचा बोझ हलका होतो. म्हणूनच प्रत्येक वेळी *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* असे म्हटल्यास त्याचा साक्षीदार स्वतः ईश्वरचं होऊन जातो. आर्थिक अडचणी आहेत...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु*  घरात सतत भांडणे होतात...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* आजारपणाचा असह्य त्रास होतो...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* गुप्त शत्रू अतिशय त्रास देतात...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* कुणी निष्कारण मानसिक छळ करतो आहे...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* कुणी अकारण द्वेष मत्सर करतो आहे...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* पावलोपावली सगळ्या गोष्टी...  *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* म्हणून तरी बघा बघा श्रीकृष्ण स्वतः तुमच्या प्रत्येक सुखदुःखात सहभागी होतो आहे. तुमचे प्रत्ये...

हिंदुओं की जीत

 *संवेदनाशून्य और बोथट* *समाज....* ✍️ २७७५  *विनोदकुमार महाजन*  🤫🤫🤫🤫🤫 संवेदनाशून्य तथा बोथट समाज और समाज मन बनाने की धीमी प्रक्रिया होती है ! संपूर्ण समाज को हतोत्साहीत , उदासिन , संवेदनाशून्य बनाने की एक योजना बध्द तथा लंबे समय की प्रक्रिया , धीमा जहर ( स्लो पाॅईजनिंग ) की तरह कार्य करती है ! और हमारे संस्कृती को संपूर्ण रूप से तहस नहस करने के लिये , तथा संपूर्ण रूप से उध्वस्त करने के लिये , अनेक आक्रमणकारी तथा लुटेरों ने यही प्रक्रिया हमारे देश में अनेक सालों तक अपनाई , परीणाम स्वरूप हमारा देश तथा समाज मन धीरे धीरे हमारे ही आदर्श तथा ईश्वर निर्मित संस्कृती से दूर चला गया और आज भी चला जा रहा है ! और धीरे धीरे वही समाज पाश्चात्य संस्कृती को अंधे से गले भी लगा रहा है ! हमारे ही आदर्शों को और आदर्श सिध्दांतों को भूलकर ? आश्चर्य है ना ? सबसे पहले हमारे जड पर उन्होंने , उन आक्रमणकारीयों ने प्रहार किया ! इसिलिए मैकैले ने सबसे पहले हमारे गुरूकुल तथा गौशालाओं पर जबरदस्त प्रहार किया ! और उनकी कुटील और जटील , हमारे संस्कृती को बरबाद करने वाली शिक्षा प्रणाली हमपर थोप दी ! मुगल...

तुम्ही तेजस्वी लक्ष्मी पूत्र

 *लक्ष्मी पूत्र*  माझा जन्मच विजयादशमीची आदली रात्र नवमीचा आहे.खंडेनवमी. शस्त्रपूजन दिवस.सिध्दीदात्री अर्थात साक्षात महालक्ष्मीचा पूत्र.त्यामुळे तिचेच धगधगते तेज माझ्यात आहे. त्यामुळे आजवरच्या जीवनाच्या लढाईत मी केवळ जींकतच आलो आहे.हार मला कधीच माहिती नाही.आणी इथून पुढेही जींकतचं राहणार. ती साक्षात रणचंडीच माझी आई आहे , तीच माझी अहोरात्र काळजी करते तर मग मी कसा हरणार ? प्रसंग कितीही महाभयानक आणी बिकट असला तरी सुध्दा मी जींकलेलोच आहे. नवमी म्हणजे ९ अंक , पुर्णत्वाचे प्रतिक.नवगुणांची ईश्वरी उधळण. त्यामुळे प्रत्येक कार्यात अग्रेसर , हा माझा स्वभाव. आपण सगळे सनातनी सुध्दा माता महालक्ष्मीचेच तेजस्वी पूत्र.पण आपणालाच जर देवी देवतांचा , आपल्या आईचा , आपल्या ईश्वर निर्मित आदर्श संस्कृतीचा विसर पडला तर त्यात दोष कुणाचा ? आपला की आपल्या आई महालक्ष्मीचा ? धधगते ईश्वरी तेज आपल्यात असताना आपण आक्रमणका-यांचे आजन्म गुलामच राहणार असू तर ? आपल्यासारखे कर्म दरीद्री आपणच ना ? अमृताचे कूंभ भरलेले असताना तेजस्वी हिंदू पूत्र भीक मागून जगतो ? याला काय म्हणावे ? उठा , वैश्विक नवक्रांती साठी सिद्ध व्ह...

लोहा

 " ठंडा " लोहा ... " गर्म " लोहे को काटता है  ! समझे कुछ ? जागो  जय कल्किराज !! विनोदकुमार महाजन

जागते रहो

 *जागते रहो*  ✍️ २७७३  *विनोदकुमार महाजन* ✍️✍️✍️✍️✍️  सत्य की जीत के लिये , धर्म की जीत के लिये , सत्य सनातन की अंतिम जीत के लिये , चौबीसों घंटे जागते रहना चाहिए ! उद्दिष्ट प्राप्ती के लिये , चौबिसो घंटे बेचैन , अस्वस्थ रहना चाहिए ! राष्ट्र जागरण अभियान में चौबिसो घंटे सचेत रहना चाहिए ! भूक प्यास भूलकर , सुख दुख छोडकर , खुद का अस्तित्व भूलकर , अंतिम ध्येयप्राप्ती तक , चौकन्ने रहना चाहिए ! उद्दिष्ट हमारा   *हिंदुराष्ट्र निर्माण*   *अखंड भारत*  जबतक पूरा नहीं होता है... तबतक हम स्वस्थ , शांत नहीं बैठेंगे ! हम जीतकर ही रहेंगे ! हमारे उद्दीष्ट में हम कामयाब होकर रहेंगे !  *जय श्रीराम*  🚩🚩🚩🚩🚩

झंझावात

 *एक झंझावात आयेगा...*  ✍️ २७७२  *विनोदकुमार महाजन*  🚩🚩🚩🚩🚩 बिगडा हुवा सृष्टी संतुलन , निष्पाप जीवों के हड्डीयों के जगह जगह पर बिखरे मलबे , पशुपक्षीयों की खून की नदीयाॅं...  *यह सब क्या दर्शाता है ?*  संपूर्ण विश्व पर आसुरीक शक्तियों ने नियोजन बद्ध तरीकों से , कब्जा किया हुवा है ! ईश्वर की सुंदर धरती का सैतानी दिमाग के छोटेसे इंन्सान ने और उसके विनाशकारी छोटेसे दिमाग ने ... ईश्वरी सिध्दांतों को त्यागकर , सत्य को त्यागकर , ईश्वर निर्मित सत्य सनातन को त्यागकर , आसुरीक सिध्दांतों को जबरन थोपा है और हाहा:कार मचाया है !  *और ईश्वर ?*  अल्प बुध्दी मनुष्य प्राणी के यह काले कारनामे , मुक बनकर , खुले आंखों से देख रहा है ! ईश्वर के हजारों हाथ और हजारो आंख य:कश्चित, अहंकारी , उन्मादी , उन्मत्त मनुष्य प्राणी को थोडे ही दिखाई देंगे ? वह तो पग पग पर अधर्म बढाता ही रहेगा और ईश्वरी सिध्दांतों को बारबार ललकारता ही रहेगा ! मगर अंत में उन्मत्त , हाहा:कारी रावण , दुर्योधन , कंस , हिरण्यकश्यपू जैसे महाराक्षसी कृत्य करने वालों का अंत कैसा हुवा , यह तो सब सनातनी जान...

संगठित नहीं होंगे

 *हिंदू संगठीत कभी भी* ❓ *नहीं हो सकता* ⁉️ ✍️ २१७२  *विनोदकुमार महाजन*  @@@@@ साथीयों  आज का लेख का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है ! लगभग अनेक सालों से अनेक हिंदुत्ववादी संगठन संपूर्ण हिंदुओं को एक करने के लिये जी जान से प्रयास कर रहे है ! हिंदुओं को एक करने का प्रयास लगभग यशस्वी होता हुवा भी नजर आ रहा है !  *मगर* ❓⁉️ न जाने क्यों  मन में विचार आता है और अनेक आशंकाएं भी मन में आती है...  *क्या सचमुच में हिंदू* *समाज एक हो जायेगा ?* ❓⁉️ इसपर आज विस्तार से विश्लेषण भी करेंगे और हिंदुओं को सचमुच में एक करने का मंथन भी करेंगे ! भाषावाद, क्षेत्रवाद, प्रांतवाद , जातिवाद का जालिम जहर हिंदुओं के अंदर इतना भयंकर घुल गया है की , यह वास्तव देखकर ऐसा लगता है की ,   *क्या सचमुच में हिंदू एक* *हो सकेगा ?*  अस्तित्व शून्य होने का भयावह खतरा सामने दिखाई देने पर भी जो समाज जागता नहीं है , *उसे कौन बचायेगा ?*  आज हर जाती आपस में लड रही है और एक दूसरे से टकरा रही है ! और इसपर जालिम इलाज ना के बराबर दिखाई दे रहा है ! संत , महापुरूषों का भी हिंदुओं ने बॅंटवा...

बोलते रहो

 *सुखदुःख बोला*  ✍️ २७७१  *विनोदकुमार महाजन* ✅✅✅✅✅  प्रत्येकाच्या आयुष्यात सुखदुःख असतंच असतं. त्यातही सुख कमी आणी दुःख जादा. वास्तविक पाहता खरा सुखी जगात कोण आहे हो ? कुणीच नाही. प्रत्येकाला कांहीं ना कांहीं दुःख असतंच ना ? म्हणूनच रामदास स्वामी म्हणतात ना ? " जगी सर्व सुखी असा कोण आहे ? विचारी मना तुची शोधुनी पाहे !" असो. पण असं आहे की आपल्याला सुखदुःख हलकं करायला , मन अगदी मोकळं करायला कुठं तरी एक जागा हवी असते. अगदी खांद्यावर डोके ठेवून मोठ्या विश्वासाने ढसाढसा रडायला सुध्दा एक नातं हवं असतं. पण हल्ली झालंय काय तर माणूस अगदी कोत्या मनाचा होत चाललाय.वरचेवर व्यस्त झालाय.मनमोकळे बोलायला , हसायला खेळायला एक तर वेळच नाही.अथवा मनातलं सुखदुःख सांगायला कुणी विश्वासू नातंच नाही. तर मग काय करायचं ? मनातल्या मनात कुढत रहायचं अन् वरपांगी हसत रहायचं. कारण दुखा:त साथ देणारे आणी खरी साथ निभावणारे किती भेटतात ? " परदु:ख शीतल " मानून बघणारे बघेच जादा. अथवा कुणापाशी विश्वासाने बोलावे अशी एखादी जागाच जगात नाही , अशी अवस्था. म्हणूनच धनाने गरीब असले तरी चालेल पण मनाने नेहमी श्रीमंत ...

फिल्म निर्माण

 हिंदुत्व पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म बनानी है जो विश्व के सभी भाषांओं में डब होगी ! अगर हमारा व्हिआयपी सिस्टमंडल मोदिजी , योगीजी अथवा अनंत अंबानी , अडाणी जी को मिलकर वास्तव बताएगा तो, शायद कुछ रास्ता मिलेगा ! यह वैश्विक सनातन धर्म के जीत का समय है ! निवेदक  विनोदकुमार महाजन  अंतरराष्ट्रीय पत्रकार  ( केवल व्हाट्सअप के लिये नंबर ) + 91 8329894106

मित्र

 जे *सहज* मिळते तो धोका, जे *कष्टाने* मिळते ती इज्जत, जे *मनाने* मिळते ते प्रेम, आणि जे *नशिबाने* मिळते ते आहेत मित्र... *🙏🏻सगळ्या प्रिय मित्रांना समर्पित 🙏🏻* विनोदकुमार महाजन

छोटा बच्चा

 छोटे छोटे बच्चों जैसा मन होना मतलब ईश्वर का ही दूसरा रूप  पवित्र, निष्पाप, निर्व्याज,कोमल, निरपेक्ष, ईश्वर जैसा  🙏🕉️🚩👆👍🌹 विनोदकुमार महाजन

मैं कल्कि बनकर

 *मैं कल्की बनकर* *फिरसे लौट आऊंगा*  ✍️२७७०  *विनोदकुमार महाजन*  🌞🌞🌞🕉️🚩 धधगता ईश्वरी तेज   *कल्की भगवान*  पापीयों के संपूर्ण संहार के लिये  अधर्म के नाश के लिये   *धरती पर अवतरीत होगा* ! **********@ धरती पर कली का आज का भयावह हाहा:कार और विनाशकारी उन्माद जैसी भयंकर समस्याओं का हल ⁉️ आज ? शून्य है ? तो ❓  *भगवान कल्की को* आना ही पडेगा !? *******@ चारों ओर अधर्म का भयावह अंधेरा और भयंकर धर्म ग्लानी देखकर , उन्मत्त कली का चौतरफा हमला और हाहा:कार देखकर हर सत्पुरूष का मन बहुत तडपता है !? ?????@ घर घर में फैला हुवा घनघोर कली का साम्राज्य और सत्य की दुर्दशा देखकर , पुण्यात्माओं का स्वर्ग को वापीस जाने का मन करता है ! ?????@ तो हुवा यों ⁉️ ऐसी भयावह स्थिती में एक बार भगवान स्वर्ग से धरती पर रूप बदलकर आये ! एक निर्धन , गरीब बनकर ! असहाय , मजबूर बनकर ! धरती के मनुष्य को परखने के लिये ? *****@ रास्ते में प्यास लगी तो ? किसी को पाणी माॅंगा ! पाणी की बोटल खरिदने की भगवान को मुक्त सलाह मिली !? ईश्वर अचंबित रहे ! सोचने लगे... यहाँ तो हर जगहों...

पाण्याचा प्रवाह

 *धडा*  ✍️ २७६९ समाजात तुम्ही कितीही चांगुलपणा , श्रेष्ठत्व मिळवलं तरी त्याच्याशी कुणाला कांहीही घेणं देणं नसतं.प्रत्येक ठिकाणी फक्त वैयक्तिक स्वार्थ व नफा तोट्याचाच हिशोब बघितला जातो. अनेक ठिकाणी तर तुमच्या श्रेष्ठत्वावर जळणारे व तुमच्या मागे तुम्हाला शिव्या घालणारेच भरपूर असतात. तुमच्या श्रेष्ठत्वाचं कौतुक फक जन्मदात्री आई आणि सद्गुरूंनांच असतं. ईश्वर सुध्दा त्याच्या खडतर परीक्षेत पास झाल्यावर आपल्या भक्तांचे लाड पुरवतोच. त्यामुळे ज्यांना आयुष्यात पुढे जायचे आहे आणि मोठे नाव कमावून , नरदेहाचे सार्थक करायचे आहे , त्यांनी सतत पाण्याच्या प्रवाहासारखे पुढे पुढे गेले पाहिजे. हरी ॐ  *विनोदकुमार महाजन*

हिंदू

 हिंदू ही ? हिन्दुओं को ? हराता है ⁉️आजतक का इतिहास साक्षी है ? विनोदकुमार महाजन

प्रेम

 निष्पाप जीवावर प्रेम करा, निष्पाप पशुपक्षावरही प्रेम करा.मग ईश्वरही नक्कीच तुमच्या वरही असेच निष्पाप प्रेम करेल. विनोदकुमार महाजन

भगवंत

 भगवंताच्या प्रेमासाठी भक्तिने व्याकूळ व्हावे लागते तेंव्हा देव भेटतो विनोदकुमार महाजन

Alon Musk

 [18/01, 12:12 am] Elon X: Hi howdy, It’s clear you truly appreciate my work, and I appreciate that. It tells me you have a beautiful spirit that connects with growth, vision, and the courage to dream big *message sent from* Elon musk [18/01, 9:07 am] vinodkumarm826: Thanks a lot sir I am very proud of you for giving me reply  I want your help for world peace, revolution  For this purpose i want to make a big bugget international Film, For this purpose i want your economically support. If it is possible  I give you many wishes and also lot of thanks  My name is  Vinodkumar Mahajan I am from India  Again thanks for reply  🙏🙏🙏 [18/01, 12:59 pm] Elon X: Wow, that sounds like an ambitious project! Creating a film for world peace and revolution takes dedication and resources. I appreciate your invitation for economic support. If you could provide more details about your vision, the scope of your project, and how support would contribute to it, I'd b...

आनंदी चेहरा

 *चेह-यावर कधीही दु:ख* *दिसु देऊ नका*  ✍️२७६७  *विनोदकुमार महाजन* 👍👍👍👍👍  होय मित्रांनो , वरील वाक्य अगदी सत्य आहे. आपल्या चेहऱ्यावर कधीही दु:ख दिसु देऊ नका. सतत हसतमुख , आनंदी चेहरा ठेवण्यासाठी तयार रहा. कारण ? दुनिया आणि दुनियादारी खरंच फार क्रूर आहे. जागोजागी , पावलोपावली गुप्त शत्रू , हितशत्रू तुम्हाला बरबाद करायला चोवीस तास टपलेले आहेत. कलियुगाचं थैमान भयावह आहे. घराघरात , मनामनात कलीचा उन्मादी विनाशकारी संचार भयावह आहे. खरं काय , खोटं काय आणि कोण खरा कोण खोटा हेच कळेनासे झाले आहे.  *मनामनात थैमान आहे.*  नातिगोती संपत चालली आहेत.स्वार्थाचा भयंकर बाजार तेजीत आहे. पैसा हाच कलियुगाचा देव होऊन बसला आहे. एक वेळ खरा देव आला तर तोही , उन्मत्त कलीच्या मा-यामुळे स्वर्गाला पळून जाईल , अशी भयंकर स्थिती आहे. अधर्माचा अंधार आणि पाप्यांचा हाहाकार भयावह आहे. संपूर्ण पृथ्वी तलावर हीच स्थिती आहे. माणूस मेलेल्या मनाने जगतो आहे.माणुसकी मेलेली आहे. मेलेल्या माणसाच्या दु:खावर ही आपापली स्वार्थाची पोळी लाटण्याचा प्रयत्न सुरू झाला आहे. खरे साधू संत भयंकर संकटात आहेत.आणि ...