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देश तुम्हाला माफ करणार नाही

 देश तुम्हाला कधी माफ करणार नाही  आंदोलनाच्या नावावर तुम्ही सगळा देश जाळायला निघालाय. देश तुमची पापे बघतोय रे... देश तुम्हाला नक्कीच कधीही माफ करणार नाही.

मोदिजी

 मोदिजी ने देश का भ्रष्टाचार खतम किया  मोदिजी ने नक्षलवाद खतम किया  मोदिजी ने दहशतवाद खतम किया  मोदिजी ने आतंकवाद खतम किया  समाजवाद , साम्यवाद , निधर्मीवाद इस देश में पहले से ही नहीं थे  इस देश में सिर्फ और सिर्फ हिंदुत्ववाद ही था  मोदिजी ने हिंदुत्ववाद और हिंदुत्ववादीयों को पुनर्जीवीत किया... फिर भी कुछ हिंदुओं को ही मोदिजी की इतनी भयंकर एलर्जी क्यों है भाई...

सबस्क्राईबर

 सबस्क्राईब करो  इनाम पाओ  हम एक ऐसी योजना  बना रहे है जो हर  एक हजार सबस्क्राईबर होने के बाद  सबस्क्राईबर का लकी ड्रॉ निकालकर इनाम देंगे  सबस्क्राईब करने के बाद स्र्किन पर दिखाई देने वाले नंबर पर व्हाट्सअप करे

काॅक्रोच

 एक काॅक्रोच  होगा तो  चप्पल से मारा जाता है , फिर काॅक्रोच कितना भी बडा क्यों न हो और बहुत जादा काॅक्रोच... हीट से मारे जाते है ...हीट्ट... सुपर फिट्ट....हा हा हा हा  अब आगे बहुत ही मजा आयेगा  इसिलिए काॅक्रोच से दोस्ती ? मतलब जीवन की तबाही  काॅक्रोंचो से दूर रहेंगे  सुरक्षीत जीवन जीयेंगे

पेपर लीक

 पेपर लीक तो  एक बहाना है  मोदीजी तो असली  निशाना है  रातकिडे आयेंगे  किरकिर किरकिर  करते करते  नामशेष हो जायेंगे  मोदिजी तो और भी  मजबूत हो जायेंगे आगे आगे देखिए  होता है क्या हा हा हा हा हा

पैसा खतम्

 पैसा खतम्  दोस्ती भी खतम्  रिश्ते भी खतम्  यही दुनिया का दस्तुर है मेरे प्यारे दोस्त  यही तो दुनियादारी है  गोलमाल है भई  सब गोलमाल है

श्रेष्ठ कौन

 *प्रेम श्रेष्ठ या पैसा ?* ✍️ २९०४  *विनोदकुमार महाजन* 🩷🪙🩷🪙🩷 साथीयों  आपके हिसाब से प्रेम श्रेष्ठ है या पैसा ? शायद आपके हिसाब से पैसा श्रेष्ठ हो सकता है ! और कलियुग का न्याय भी यही है ! जिसके पास पैसा ? वह राजा... फिर पैसेवाला दुर्गुणी भी क्यों न हो ? मगर मान तो पैसेवालों को ही मिलेगा ! पैसा बोलता है ! और जिसके पास पैसा नहीं है मगर वह दिलवाला है , सच्चे मन का है , बुध्दीमान है , गुणवंत भी है और ? पुण्यवान भी है मगर निर्धन है तो ? उसे कौन पुछेगा ? पहले... " विद्वान सर्वत्र पूज्ययेत "  ऐसी कहावत थी ! मगर अब ?  " धनवान सर्वत्र पूज्ययेत "  यही सामाजिक स्थिती बन गई है ! इतना ही नहीं , निर्धन को कोई लडकी तक नहीं देता है...क्यों ? क्योंकी गरीब सुदामा के पास आखिर क्या मिलेगा ? चाहे वह सच्चा दिलवाला हो या सच्चा कृष्ण भक्त हो...? यही तो दुनियादारी है ? इसिलिए दुनिया भी प्रेम से नहीं बल्की पैसो से चलती है ! जी हाँ...पैसों से ! " अमीर को रामराम...गरीब तेरा क्या काम...? " ऐसी ही आज की लगभग सामाजिक स्थिती है ! फिर धन पाप हो या पुण्य का... कौन देखता है...? मगर फिर ...