Posts

Showing posts from November, 2025

जींकायचं

 जींकायचं म्हटलं की  दु:ख भोगावं लागतचं  राम जींकला पण खूप दुःख भोगलं रामानं  कृष्णही जींकला पण अवतार कार्य समाप्ती पर्यंत खूप भोगलं. जय जय रामकृष्ण हरी  विनोदकुमार महाजन

अदृश्य जगत

 *क्या तंत्र से जीवन* *बरबाद हो सकता है ??* ✍️ २७३४ 🏴‍☠️🏴‍☠️🕉️🕉️🚩 तंत्र मार्ग...एक जबरदस्त शक्तिशाली अदृश्य शक्तियों का अदृश्य जगत...! क्या सचमुच में ऐसी तांत्रिक शक्तिमान और अदृश्य क्रियाएं होती है ? जी हाँ ! जैसे ? हमारा आत्मा अदृश्य है , हमारी श्वास भी अदृश्य है , इसी प्रकार से ब्रम्ह शक्तियां भी अदृश्य है , जिसे निराकार ब्रम्ह भी कहते है ! क्या तांत्रिक क्रियांओं द्वारा मनुष्य जीवन में असंभव को संभव में बदला जा सकता है ? जी हाँ ! क्या तंत्र मार्ग वास्तव में होता है ? जी हाँ ! स्मशान विद्या यह एक तंत्र मार्ग की महत्वपूर्ण शाखा है ! मंत्र शक्तियों द्वारा भूत , पिशाच्च , प्रेतों को वशीभूत करके , अनेक प्रकार के अच्छे बूरे कार्य किए जाते है ! क्या मैंने खुद कभी भूत देखे है ? जी हाँ ! और मैंने ईश्वर भी देखा है ! तो यह अदृश्य शक्ती होकर भी दृश्य में कैसे दिखाई देती है ? कुछ समय के लिये पंचमहाभूतों का आधार लेकर अनेक चित्र विचित्र प्रकार के आकार धारण करना ! क्या किसीका जीवन तांत्रिक क्रियांओं द्वारा बरबाद किया जा सकता है ? जी हाँ ! अदृश्य शक्तियों द्वारा किए गये अदृश्य कार्य इसका प...

निराधार

 *निराधार सेवा संस्थान*  ( सेवाभावी संस्थान ) ✍️ २७३३ 💔💔💔❤️🌹 वास्तव में दुनिया में लगभग सभी मनुष्य प्राणी साधारणतः सुख कम और दुख जादा भोगता है ! कोई आर्थिक परेशानियों से तंग है तो कोई बिमार है ,  तो कोई अनाथ - निराधार है ! केवल ईश्वर का ही सहारा ! तो किसीका प्रेम असफल रहता है या फिर एकतर्फा प्रेम में कोई फॅंस जाता है तो भी ऐसे व्यक्ती आजीवन दुखी ही रहते है ! दुख के अनेक कारण होते है ! सुखदुख बाॅंटने के लिये भी कोई स्थान नहीं है तो ?  और भी जादा दुख ! करें तो क्या करें ? ऐसी स्थिती में व्यक्ती समाज में , रिश्तेनातों में अकेला पड जाता है ! रोने के लिये भी कोई जगह नहीं होती है... तब वहीं व्यक्ती अंदर से संपूर्ण रूप से टूट जाता है , हताश , निराश होकर , अकेले जीवन जीने की लगातार कोशिश करता रहता है ! जिसपर पवित्र प्रेम किया , वहीं अगर घात करते है तो और मुसिबतों का दौर आरंभ हो जाता है ! किसी को पती ने छोड दिया है तो किसी को पत्नी ने छोड दिया है ! किसी को माँ का साया है मगर बाप नहीं , बाप है तो माँ नहीं , ऐसी स्थिती में संबंधित व्यक्ती मानसिक आधार होने के कारण , जीवन की ...

पैसा वाटणारा

 *पैसा वाटणारा कंगाल ?*  ✍️ २७३२ 💰💰💰💰💰 दोन्ही हातांनी पैसे वाटणारावर , दुस-याच्या दु:खात धावून जाणारावर ,जेंव्हा दुसऱ्या कडे पैसे मागण्याची वेळ येते, आणि त्याला कोणीच पैसे देत नाही, मदत ही करत नाही , उलट त्याला टाळतात,त्यावेळी त्याची अवस्था काय होत असेल ? शरद ? भाऊ  ❓ पण याही परिस्थितीवर विजय मिळवून जो पुन्हा जिद्दीने लढून, परिस्थिती वर मात करून , अब्जाधीश होतो तोच खरा विजेता ?❓ पण अशी उदाहरणे लाखात एक असतात. मग असा अब्जाधीश झालेला व्यक्ती पुन्हा तो खरेच दोन्ही हाताने पैसा वाटेल का ?  *अनुत्तरित यक्षप्रश्न ⁉️*  💎💎💎💎💎  *विनोदकुमार महाजन*

पैसा

 पैसों से चलती है दुनिया  पैसों से बोलती है दुनिया  यहाँ पैसों का ही सब बाजार है , प्रेम का यहाँ कोई न मोल है ! पैसा बोलता है !! पैसा चलता है !! विनोदकुमार महाजन

गुलाब का फूल

 *धूल का फूल ?* ✍️ २७३१ 🌹🌹🌹🌹🌹 बहुत ही सुंदर  गुलाब का फूल है मगर मिट्टी में गिरा है तो क्या फायदा ? असली कोहीनूर हीरा है मगर मिट्टी में पडा है तो भी क्या फायदा ? बहुत ही गुणवंत , ज्ञानी , बुध्दीमान व्यक्ती है  मगर उसकी बहुत अवहेलना है तो भी क्या फायदा ? बहुत ही सुंदर स्त्री है मगर दारीद्र्य से जूंझ रही है, तो भी क्या फायदा ? गुलाब का फूल ईश्वर के चरणों पर समर्पित करने से ही खिल उठता है ! कोहीनूर जैसा असली रत्न भी उंचे स्थानों पर रहने से ही उसकी कीमत बढती है ! गुणवंत , बुध्दिवंत व्यक्ती को उच्च स्थान ही शोभा देता है ! बहुत ही सुंदर स्त्री है मगर ऐसी स्त्री भी अमीरी में ही शोभायमान दिखती है ! ठीक वैसे ही यह देश भी बहुसंख्यांक हिन्दुओं का है , मगर हर हिंदू ही अनेक जटिल बेडियों में लटकाया गया है तो ? बहुसंख्यांक हिन्दुओं का भी क्या फायदा ? हिंदुराष्ट्र बनाकर , बहुसंख्यांक हिन्दुओं को यथोचित न्याय मिलने से ही , सनातनी हिन्दुओं की कीमत बढ सकती है !  *राधे राधे तो बोलना ही* *पडेगा !*  मंजूर है तो बोलिए   *राधे राधे*  💎💎💎💎💎  *विनोदकुमार महा...

वराह

 *विष्णू के वराह अवतार* *की पूजा से* *सैतान भागेगा* ✍️२७३०  *विनोदकुमार महाजन*  ⁉️⁉️⁉️⁉️⁉️ सैतान ❓ हैवान ⁉️ भगाने का आसान तरीका हर राष्ट्रप्रेमी भारतीयों को , आज से और अभी से अपनाना है ! कैसे ??? हर मकान , दुकान , स्टाॅल पर , आफीस में बस्स्... विष्णू भगवान के वराह अवतार की एक सुंदर सी फोटो लगानी है... बस्स् हो गया काम... वराह अवतार देश की सारी गंदगी देखते ही देखते हटा देगा ! और हाँ... उपर से हर जगहों पर हमारे भगवान का  प्यारा प्यारा  भगवा ध्वज भी लहराना है ! वराह अवतार पर  तीन बार  9 9 9 ऐसा भी जरूर लिखना है ! क्योंकी 9 अंक में पुर्णत्व भी है ! और हमारे रामजी का जन्म भी नवमी ( 9 ) का ही है ना ? और मेरा भी 👍 हर 9 अंक के निचे  नवदुर्गा , नवचैतन्य , नवजीवन जरूर लिखना है ! मेरे इस लेख की लींक खोलेंगे ना ? तो इसका जो चाहिए वैसा फोटो भी मिलेगा ! ऐसे महत्वपूर्ण फोटो से करो संपूर्ण देश में  नवक्रांती का ऐलान ! सैतान भगाव देश बचाव ! राक्षस भागेगा देश बचेगा ! बोलो विष्णू भगवान के वराह अवतार की जय !! 🚩🚩🚩🚩🕉️

निराधार

 निराधार सेवा फाऊंडेशन  नफरत नहीं प्रेम मिलेगा  विनोदकुमार महाजन

स्वर्ग

 जहाँ मैं जाता हूं वहाॅं स्वर्ग निर्माण करता हूं और सभी को स्वर्गीय आनंद और सुख देता हूं ! क्योंकी स्वर्ग के देवताही  निरंतर मेरे पास रहते है ! जय श्रीकृष्ण !! विनोदकुमार महाजन

कबतक जहर बोओगे ?

 *कबतक नफरत* *फैलाओगे ???*  ✍️ २७२९ 👆👆⁉️⁉️❓ " हम ? " भाईचारा निभाते रहेंगे ? फिर भी " तुम ? " हमें जमीन में तफनाने की कोशिश करते रहेंगे ?  " तुम ? " हमें नेस्तनाबूत करने का षड्यंत्र करेंगे तो भी ? तुम बुरे नहीं  मगर " हम ? " उसी षड्यंत्र का विरोध करेंगे तो ? हम बुरे ?? " तुम " हमें बदनाम करके हमारे जीवन में निरंतर मुसिबतें डालेंगे ? तो भी तुम ? बुरे नहीं ? मगर " हम " उसी बदनामी का मुंहतोड जवाब देंगे तो हम ? बुरे ?? " हम " तुमसे निरंतर सच्चा प्रेम करेंगे ? मगर " तुम " बदले में हमसे निरंतर नफरत करेंगे ? " तुम ? " हमें जीवनभर जहर ही जहर देते रहेंगे ? फिर भी ' हम ? " सदैव ईश्वरीय , दिव्य ,प्रेमामृत ही बांटते फिरेंगे ? फिर भी तुम ? अच्छे ? और हम बुरे ? कौनसा न्याय है ये भई ??? फिर भी" तुम ? " अच्छे ? और " हम ? " बुरे ?? अरे ? कितने दिनों तक ? कपट ? विश्वासघात ? करते रहोगे ? सुधरो ... नहीं तो ? तुम्हारा ? तुम सब षड्यंत्र कारीयों का भयंकर बुरे तरीकों से सर्वनाश होगा...होकर ...

तुम्हारे ही तलवार से

 *तुम्हारे ही तलवार से तुम्हे* *मारेंगे...? वो ?* ✍️ २७२८  *विनोदकुमार महाजन*  ⁉️⁉️⁉️⁉️ " उनका माईंड सेट " पक्का है... वो तुम्हे मारेंगे चूनचूनकर मारेंगे मौका मिलते ही मारेंगे सबको मारेंगे निती बनाकर , प्लैनिंग बनाकर मारेंगे तुम्हारे तलवार से भी तुम्हे मारेंगे आजतक यही होता आ रहा है  और तुम ? झूटे मायाजाल में फॅंसकर , झूटे भाईचारे के चक्कर में फॅंसकर  उनकी संपूर्ण सहायता करते रहेंगे... बोलो फिर भी वो तुम्हे मारेंगे ही मारेंगे इतिहास साक्षी है जी हाँ  समय हाथ में आने तक इंतजार करेंगे ठंडे दिमाग से शक्तिशाली रणनिती बनाएंगे तुम्हे अजमायेंगे तुम्हारे शक्ती का बारबार अंदाज लेंगे समय प्रतिकूल रहेगा तो ? भाईचारे की झूटी रणनिती बनाकर , साॅंग रचाकर , उपर से मिठी मिठी बाते करके तुम्हारे खात्मे का अंदर ही अंदर प्लॅन बनाकर , समय का इंतजार करेंगे  जैसे ही समय अनुकूल होगा वो तुम्हे खतम कर देंगे तबाह कर देंगे जी हाँ  एक बार नहीं सौ बार सोचो यही उनकी असलीयत है यही उनकै जीवन का अंतिम मकसद भी है मारो ,काटो , नेस्तनाबूत करो.. संपूर्ण तबाह करो  मौका मिलते ही बरब...

कसाई अन् बोकड

 *कसायाला बोकड* *कापल्याचे दुःख होईल* *का ?* ✍️ २७२७ 💁‍♂️💁‍♀️💁 होय मित्रांनो  माझा तुमच्या सगळ्यांना एक प्रश्न आहे. त्याचं उत्तर तुम्हाला द्यावचं लागेल. खरंच मित्रांनो  कसायाला बोकड कापल्याचे दुःख होईल का हो ? भयंकर विषारी साप चावून एखादा व्यक्ती मेला तर त्या सापाला तो व्यक्ती मेल्याचे दुःख होईल का हो ? हो कींवा नाही ते तुम्हीच सांगा. अहो  महाभारतामध्ये अभिमन्यूला चक्रव्यूहामध्ये अभिमन्यू चा अंत झाल्यावर सुध्दा त्याच्या प्रेताला सुध्दा क्रूरपणाने हसुन लाथा घालणारे सुध्दा होतेच ना ? कौरव पांडवांच रक्त कांहीं वेगळं होतं का ? कशासाठी घडले एवढे सगळे भयानक महाभारत ? महाभारत श्रीकृष्णाने घडवले की , पांडवांनी , कौरवांनी की दुर्योधनाने ? की ईश्वरी शक्तिलाच असह्य होऊन सर्वनाश करावा लागला ? एवढा संवेदनाशून्य समाज कसा काय बनू शकतो ? मी समाजात आजही अशी क्रूर माणसं बघितली आहेत की , एखादा मरून पडला तर त्याच्या प्रेताला सुध्दा लाथा घालतील.अन् वर पुन्हा त्या प्रेताला सुध्दा हसतील... प्रेतावरचं लोणी खाणे  ही म्हण आपल्याकडे सर्वश्रुतच आहेच की. पण प्रेतालाही लाथा घालणं ? श्वास ...

पति पत्नी विवाद

 *पति पत्नी विवाद , विसंवाद* *कारणमीमांसा और* *उपाय !!* ✍️ २७२६  *विनोदकुमार महाजन* 👫 🤔🤫🤦‍♂️🙊 भारतीय संस्कृती विश्व में सबसे महान है ! क्योंकी हमारे संस्कृती में सभी प्रकार की समस्याओं का यथोचित हल निकालने के लिए अनेक प्रकार के आध्यात्मिक साधनाओं का यशस्वी उपाय बताया जाता है ! पति पत्नी का रीश्ता भी हमारे संस्कृती में महान समझा जाता है ! इसिलिए पति पत्नी को लक्ष्मी नारायण का दर्जा दिया जाता है ! मगर सचमुच में क्या पति पत्नी में लक्ष्मी नारायण जैसा उच्च कोटी का प्रेमभाव , दोनों तरफ से आदर्श आचरण , आदरभाव ,स्नेहभाव तथा विश्वास सचमुच में होता है ? यह मुलभूत प्रश्न है और इसपर आज हम विस्तृत चर्चा करने का प्रयास करेंगे ! पति पत्नी जीवन रथ के दो पहिया है ! और सृष्टि पुनरुत्पादन के ईश्वरीय कार्यों में दोनों का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है ! बिजारोपण किया और काम हो गया ऐसा नहीं है ! इसमें दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है ! और दोनों के उच्च कोटी के प्रेमभाव से संपूर्ण जीवन भी आनंदित हो उठता है ! और यही संस्कार अगली पिढी में भी परिवर्तीत होते है ! इसीलिए सुखी वैवाहिक जीवन क...

मंत्रोपचार

 *मंत्रोपचार*  ( यशस्वी जीवन के लिए ! ) ✍️ २७२५  *विनोदकुमार महाजन*  🌞🌞🌞🌞🌞 अध्यात्म ... सनातन हिंदू धर्म का आत्मा है ! जो अध्यात्म संपूर्ण मानव समुह , सजीव सृष्टी तथा विश्व कल्याण के लिये, एक अद्भुत ईश्वरी वरदान है ! जिसमें अनेक असंभव कार्यों को संभव में बदलने की दिव्य तथा चमत्कारी शक्तियों का और सभी के अखंड कल्याण का भंडार है ! वैदिक सनातन हिंदू संस्कृती में हर समस्याओं का समाधान भी है और सुखी जीवन का विस्तृत विवेचन भी है ! अध्यात्म से साधारण मनुष्य भी यशस्वीता की नई नई उडाने भर सकता है और जीवन में अनेक ऊंचाईयों तक पहुंच सकता है ! नर का नारायण और नारी की नारायणी बनने की सर्वश्रेष्ठ क्षमता इसी सनातन संस्कृती में है ! और वैश्विक कल्याण के लिए , संपूर्ण जीवन समर्पित कर सकता है ! इसिलिए वैदीक सनातन हिंदू संस्कृती विश्व में महान है ! ईश्वर निर्मित अध्यात्म में....मंत्रोपचार का विधी है , यह भी सभी मनुष्य प्राणीयों के लिये , सुखी जीवन के लिये , दिर्घायुष्य , आरोग्य प्राप्ती , ऐश्वर्यप्राप्ती , यशप्राप्ती , सुख , समाधान , शांती के लिए नवसंजीवनी देनेवाला एक आश्चर्यकारक ...

देव

 देव जीथे राहतो तीथे सुख शांती समाधान आनंद नांदत असतो. जिथून देव निघून जातो तिथले सुख शांती समाधान आनंद ही निघून जातो. विनोदकुमार महाजन

घेणंदेण

 ज्याला तुमच्याशी, तुमच्या ईश्वरी कार्याशी कांहीही घेणंदेणं नाही, त्याच्याशी तुम्ही पण  कांहीही घेणंदेणं ठेवू नका  विनोदकुमार महाजन

प्रेम

 शुद्ध, समर्पित, निरपेक्ष प्रेम हे बहाणे   चुका ,दोष शोधत नाही.कोणत्याही.         परिस्थिती मध्ये ते शुध्दच राहतं . शुध्दसोन्यासारखं. विनोदकुमार महाजन

दिस जातील

 *हेही दिवस जातील* *मित्रा ...!*  ✍️ २७२४ 🩷🩷🩷🩷💎 ज्याला आपण आपला मानला, ज्याच्यावर जीवापाड प्रेम करून,आपला जीव प्रसंगी धोक्यात घालून,मोठमोठ्या संकटातून त्याला सोडवलं,त्यांनंच जर आपल्याला संपवण्यासाठी, आपलं नरड धरलं तर,दोष कुणाचा ? आपल्या कर्मगतीचा ? की काळाचा ? आणि याला उत्तर काय आहे ? जवळ जवळ प्रत्येकाच्या च जीवनात असे महाभयंकर प्रसंग येत असतात काय ? अशावेळी तमाशा बघणारेही खूश असतात.आणी त्यांना मनोमन आनंदाच्या उकळ्या फुटत असतात. त्यांच्याकडे कदाचित हास्याचे फवारे ही असू शकतात. पण ते हे विसरतात की , एक दिवस आपल्यावरही अशीच वेळ येणार आहे. म्हणून संकटात एखाद्याला आधार देता येत नसेल तरी चालेल पण त्याच्या डोळ्यात अश्रू येतील असे तरी वागू नये. अशावेळी मन स्थिर ठेवून, सद्गुरु वचनावर व ईश्वरी शक्तिवर विश्वास ठेवून मार्गक्रमण केले तर, पुढील जीवन उत्कर्षदायी होते. प्रसंगावधान व धैर्य अशा प्रसंगी खूप महत्वपूर्ण ठरते. कदाचित आपल्याला भयंकर मोठ्या संकटातून सोडवून यशाकडे नेण्यासाठी ही ईश्वराची अदृश्य योजनाही असू शकते. म्हणूनच अशा भयंकर प्रसंगात, भांबावून अथवा गांगारून न जाता,हार न मानत...

कौनसा कृष्ण चाहिए

 *आज संपूर्ण विश्व को*   *आध्यात्मिक श्रीकृष्ण की* *नहीं* *बल्की राजनैतिक* *श्रीकृष्ण की सख्त* *जरूरत है....* ✍️ २७२३ 🚩🚩🚩🚩🚩 जी हाँ ... आज केवल भारत देश को ही नहीं बल्की संपूर्ण विश्व को श्रीकृष्ण के सर्वश्रेष्ठ राजनिती की जरूरत है ! जो सदा के लिये सत्य सनातन की , हिंदू धर्म की जीत कर सकें ! आज मुरलीधर नहीं सुदर्शन चक्र धारी श्रीकृष्ण की जरूरत है ! जो संपूर्ण धरती से ही पापों का अंधेरा सदा के लिये मिटा सके और संपूर्ण पापी , अधर्मीयों का संपूर्ण नाश कर सके ! आज हर हिन्दुओं को भी आध्यात्मिक तथा बांसुरीवाला श्रीकृष्ण पूजने की नहीं बल्की सुदर्शनचक्र धारी श्रीकृष्ण को पूजने की सख्त जरूरत है ! हर एक हिंदू को श्रीकृष्ण का अंश धारण करके , कृष्ण निती के अनुसार चलकर सत्य की जीत करनी होगी ! समय आने पर साम , दाम , दंड , भेद अथवा छल , कपट करके भी सत्य की जीत करना अनिर्वार्य होगा ! जैसे को तैसा ऐसी सर्वश्रेष्ठ कृष्ण निती ! कितना घनघोर महाभारत का युद्ध हुवा , कितने कौरव अथवा कौरव सेना अथवा पांडव सेना मारी गई , इसका कोई भी शोक , मोह ना करके , संपूर्ण यदुवंश का भी नाश देखने के लिये भी...

माझा कृष्ण

 *कुणी काळा कृष्ण म्हणो...* ✍️ २७२२ ✅✅✅✅✅ कुणी म्हणे गोविंद कुणी म्हणे गोपाल कृष्णाला नांवे किती ? कुणी म्हणे सावळा कुणी म्हणे काळा कृष्णाची रूपे किती ? कुणी म्हणे रूक्मिणी पती कुणी म्हणे सत्यभामेचा पण रमतो कसा हा राधेच्या घरी ? कुणी म्हणे मिरेचा कुणी म्हणे राधेचा कुणी म्हणे अर्जुनाचा कुणी म्हणे सुदाम्याचा प्रत्येकाच्या ह्रदयात हा काळा राहतो कसा ? कुणी म्हणे सुदर्शन चक्र धारी  कुणी म्हणे मधुर मुरलीवाला कुणी म्हणे श्रीकृष्ण: शरणं मम् लिला तरी अगाध हा दावितो किती ? कुणी म्हणे कपटी कुणी म्हणे नाटकी कुणी म्हणे महाभारत रची कुणी म्हणे अंतरज्ञानी सगळ्यांच्याच ह्रदयात हा कान्हा राहतो कसा ? कुणी म्हणे माखनचोर कुणी म्हणे नंदकिशोर कुणी म्हणे रणछोडदास श्रीकृष्णाची सांगा येड्यांनों नांवे किती ? सगळ्यांनाच हा कसा वेडा करी ? कुणी म्हणो काळा कुणी म्हणो सावळा पाप्यांचा हा युगेयुगे संहार करी भक्तांचे आपल्या सदैव रक्षण करी माझा श्याम तुमचा श्याम सगळे मिळून बोलू जयजय राधेश्याम श्रीकृष्ण : शरणं मम् श्रीकृष्ण : शरणं मम् 🙏🙏🙏🙏✅  *विनोदकुमार महाजन*

हवाहवासा

 *जो सतत हवाहवासा...*   *वाटतो....!!* ✍️२७२१ --------------- प्रेम म्हणजे नेमके काय असते....? एखादा व्यक्ती सतत आपल्याजवळ असावा , त्याच्याशी मनमोकळेपणाने , हक्काने बोलावे , गप्पा माराव्या , आपले सगळे सुखदुःख त्याला सांगावे . त्यानें हळुवारपणे आपल्या दु:खावर फूंकर घालावी , आपल्या प्रत्येक दु:खात त्याने खंबीर साथ द्यावी , आपण त्याच्यावरून व त्याने आपल्यावरून जीव ओवाळून टाकावा... हेच तर ते खरं प्रेम असते . शुध्द , पवित्र , निरपेक्ष . नातं कोणतंही असो , प्रेम मात्र पवित्र असावं , त्यात धोका ,छल ,कपट नको , असं प्रेम सतत हवंहवंसं वाटतं.... अगदी सगळ्यांना...मला , तुम्हाला...सगळ्यांना . पण साधारणतः घडतं काय तर ? आपण एखाद्यावर सतत ,चोविस तास पवित्र प्रेम करतो . आणी समोरचा रूक्ष निघतो . त्याला आपल्या प्रेमाशी , मनाशी कांहीच घेणदेणं रहात नाही . एकतर्फी प्रेम... म्हणून प्रेम हे दोन्हीकडूनही असावं लागतं . तर त्याची तळमळ कळते , आत्मीयता कळते . आणी अशी माणसं एकमेकाला आयुष्यभर हवीहवीशी वाटतात . भावाभावाचं प्रेम , मित्रप्रेम ,नवरा बायकोचं प्रेम  हे असंच असावं . पण....? कलियुगात असं श...

पालथ काळीज

 *पालथ्या काळजाची* *माणसं....?*  ✍️ २७२० 🙊🤦‍♂️🤦‍♂️🤔🙊 खरंच जगात पालथ्या काळजाची माणसं असतात का हो ? हो असतात . आणी अशा माणसांशी  वागणं , बोलणं म्हणजे महाभयंकर संकट . विशेषतः दुष्ट , मुर्ख , मंदबुद्धी , पागल , व्यसनाधीन अशी माणसं अशीच असतात . असतातच असतात . हेकेखोर . स्वतःच खोटं असल तरी खरंच मानणारी . व खोटसुध्दा पुढं रेटून नेणारी . पालथ्या काळजाची . त्यांना कितीही समजावून सांगा , कितीही उच्च कोटीचे प्रेम करा , अशा माणसांवर कांहीच फरक पडत नाही . उलट अशी माणसं आपल्यालाच उपदेश करतात , आपल्याशीच भयंकर हुज्जतच घालतात .  पालथ्या घड्यावर पाणी . म्हणून अशा माणसांच्या नादी नाही लागलेल बरं . अशापासूंन नेहमी चार हात लांब राहीलेलचं बरं . ।। दुर्जनंम् प्रथमंम् वंन्दे ।। हेच खरं . आपल्याला समाजात अशी माणसं नेहमीच भेटत असतात . यांना दुरूनच नमस्कार केलेला बरा . मुर्खाच्या नादी कधीही लागूं नये . दुष्टांच्या व कपटी लोकांच्या तर ? मुळीच नादी लागू नये . तत्वज्ञान शहाण्याला सांगावं . एकवेळ दगडालाही पाझर फुटेल असं म्हणतात . पण पत्थरदिल माणसं म्हणजे.... महासंकट . एखाद्या दगडाला शेंदूर ...

मोठी माणसं

 *मोठी माणसं ?* ✍️ २७१९ 🤔🤔🤔 ------------------------ जो मनानं मोठा आहे तो मोठा . जो विचाराने मोठा आहे तो मोठा . जो स्वकर्तृत्वाने मोठा आहे तो मोठा . जो इतरांचं सुखदुःख समजावून घेतो तो मोठा . जो इतरांच्या सुखदु:खात सहभागी होतो तो मोठा . जो समाजाचं सुखदुःख समजावून घेऊन त्यांना आधार देतो तो मोठा . धनाने मोठा आहे पण मनाने छोटा तर ? तो मोठा कसा होईल ? म्हणुन धनाने मोठं असणं किंवा होणं महत्वाचं नाही तर मनानं मोठं , श्रीमंत होणं महत्वाचं आहे . त्यामुळे सगळेच धनी लोकं समाजातील सुखदुःख समजावून घेतात का ? समाजाला योग्य मार्गदर्शन करून सामाजिक सलोखा , आत्मीयता वाढवतात का ? म्हणूनच आत्मकेंद्री श्रीमंती घातक असते तर समाजामुख श्रीमंती तारक असते . आज समाजामुख श्रीमंत कमी आणि आत्मकेंद्री श्रीमंतच जादा दिसताहेत . श्रीमंत असावं . श्रीमंत असणं गुन्हाही नाही . पण परदु:ख शितल असणारी श्रीमंती नको तर परदु:ख समजावून घेणारी श्रीमंती असावी . मी बरेच श्रीमंत बघितले . पण बरेचसे मनाने कंगाल बघितले . धनाने आणि मनाने श्रीमंत असणारे विरळा . असे धनवान, आपण त्यांना शंभर फोन करा , मेसेज पाठवा , उत्तर देणार नाहीत....

आत्मियता

 *आत्मीयता संपली आहे* *का ?* ✍️लेखांकन : - २७१८ 💁💁‍♀️💁‍♂️ मित्रांनो , खरंच जगातुनच प्रेम , आत्मीयता , ममत्व , स्नेह , आपुलकी , माया , वात्सल्य संपत चालले आहे का ? मानसाची मने रूक्ष , एकाकी बनत चालली आहेत का ? घराघरायुन वात्सल्य , आत्मियता संपत चालली नव्हे तर , मनामनात दूरावे निर्माण होतं चालले आहेत का ? एकमेकांच्या सुखदु:खाबद्दल खरंच कुणाला कांहीच वाटेनासे झाले आहे ? एकमेकांपासून दूर राहण्यातचं समाज मनातील ब-याच घटकांना आनंद वाटतो आहे का ? मानसाची मनं बोथट , संवेदनाशून्य बनत चालली आहेत का ? संवेदनशीलता पार हद्दपारच होत चालली आहे का ? हा काळाचा प्रभाव आहे की डाॅलरचा की समाजरचनेचा ? की सामाजिक आत्मकेंद्री पणाचा ? समाजात वरपांगी दिखावा जसा वाढतो आहे तशीच मनामनाची उदासिनता , घालमेल ही खरंच वाढते आहे ? नात्यागोत्यात दुरावा का वाढतो आहे ? सामाजिक तेढ , नात्यागोत्यातील तेढ वरचेवर का वाढत आहे ? आणि यावर उत्तर काय आहे ? आत्मकेंद्री स्वभाव वाढत जाऊन , आत्मसंशोन , अंतर्मुखता कमी होत चालली आहे का ? माझ्या लहानपणीचा काळ हा खरंच स्वर्णीम काळ होता . माणसाची मनं मोठी होती , त्यामुळे माणसंही एकम...

लक्ष्मी भगवंत

 जो भगवंताचा व माता महालक्ष्मीचा अंश घेऊन धरतीवर येतो तो आपले धर्म कार्य पूर्ण करूनच परत जातो . लक्ष्मी भगवंत की जय . विनोदकुमार महाजन