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बालयोगी जी का नारा

 *परमपूज्य संत पं.लक्ष्मण बालयोगी जी द्वारा संपूर्ण देश में *अगस्त क्रांति का नारा...**  साथीयों, अब लक्ष्मण बालयोगी जी तथा उनके संपूर्ण सहयोगियों द्वारा संपूर्ण देश में अगस्त क्रांति का नारा दिया है। यह क्रांति की आवाज बुलंद करने के लिए, आवो सब मिलकर,कंधे से कंधा मिलाकर एक नवराष्ट्र निर्माण की ओर तथा चैतन्य दाई समाज निर्माण की ओर तेजिसे आगे बढते है।  *कदम से कदम मिलाते चलेंगे*   *क्रांति के गीत गाते चलेंगे*  इसके साथ ही संपूर्ण दुनिया में *हिंदुत्व का*   *अलख जगाने के लिए*  संपूर्ण विश्व में भी वायुगती से आगे बढते है।  *अगस्त क्रांति 2021:*  की माँगे १)हिंदू महापंचायत के तीन सुत्रीय मांगों यथा भारत में एक राष्ट्र एक संविधान लागू करना, भारत को धर्म सापेक्ष राष्ट्र घोषित करना एवं सभी समुदायों के धार्मिक प्रतिष्ठानों को एकीकृत करके राष्ट्रीय धार्मिक न्यास बोर्ड का गठन करना। २)भारत, श्री लंका ,नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े सनातन धर्म-संस्कृति से जुड़े हुए धरोहरों व स्मारकों का जीर्णोद्धार क...

शिवरायांचा आदर्श कृतीत यावा

 *छत्रपती शिवरायांचा आदर्श आचरणात यावा* छत्रपती शिवरायांना माँसाहेब जिजाऊ यांनी हिंदवी स्वराज्याचे धडे बालपणीच दिले.त्यामुळे बालपणीचे ते उच्च संस्कार आणी ते आदर्श संस्कारांचे धन शिवरायांना आयुष्य भर पुरले. हिंदवी स्वराज्य निर्मितीमधून एक सुसंस्कारित तथा आदर्श वादी समाज निर्मिती हात्यांचा ध्यास होता.व त्यांनी तो ध्यास अव्याहतपणे आयुष्य भर सांभाळला. जीवाचे राण करून अन् रक्ताचा थेंब न् थेंब त्यांनी हिंदवी स्वराज्य निर्मितीसाठी घालवला.स्वकियांचा विरोध, सामाजिक अज्ञान ,आर्थिक चणचण, कमी मनुष्यबळ, साधनांचा अभाव एवढे सगळे असुनही त्यांनी उच्च कोटींचा ध्येयवाद स्विकारला.आणी ध्येयपूर्तीसाठी अव्याहतपणे अथक परिश्रम घेतले. आजच्या सामाजिक अव्यववस्थेकडे एक नजर टाकली तर काय दिसते ? समाजातील सुंदोपसुंदी संपवून समाज एकसंध करण्यासाठी पुन्हा एकवार राजे शिवछत्रपती यांचे आदर्श स्विकारणे आणी ते अमलात आणणे ही आजची काळाची गरजच नव्हे तर तशी नितांत आवश्यकता आहे. उच्च कोटींच्या ध्येयवादाने पेटून उठणे अन् त्यासाठी संपूर्ण आयुष्य समर्पित करणे अत्यावश्यक आहे. आम्ही  शिवाजी महाराज की जय अथवा जय भवानी जय शिवाज...

सुभाष बाबूजी का अधूरा सपना

 *सुभाष बाबू जैसी उँची उडान भरनी है...*  -------------------------------------- सुभाषचंद्र बोस... एक जबरदस्त व्यक्तित्व। जागतीक उँची उडान और गरूड़ भरारी लेने की जबरदस्त क्षमता वाला अलौकिक व्यक्तित्व। हम उनके कार्यों से कोंसो दूर है।  *फिर भी,*  उनके आदर्शों को,उनके सिध्दांतों को आदर्श मानकर, सुभाष बाबूजी से एक जबरदस्त प्रेरणा लेकर,  *आसमान में*  उँची उडान, उँची छलांग, उँची गरूड़ भरारी लेने की कोशिश करेंगे... तो... उसमें दिक्कत क्या है ? मैं भी बचपन से ऐसा सपना जरूर देखता था।सुभाष बाबू के आदर्श सिध्दांतों पर चलकर,  *एक आदर्श सिध्दांत स्थापित करने का*  मेरा बचपन का सपना रहा है। और उसी दिशा में मैं निरंतर प्रयास रत रहता हुं। इसके लिए मेरे दादाजी ने मुझे हरपल प्रोत्साहित भी किया, मार्गदर्शन भी किया और आशिर्वाद भी दिया। बचपन से मेरे पंखों में उँची उडान भरने के लिए हमेशा मेरे दादाजी, मेरे आण्णा शक्ति भरते आये है। और शायद उनके ही आशिर्वाद से यह सपना पूरा होने का समय भी ईश्वरी इच्छा से नजदीक भी आया है, ऐसी मेरी धारणा है। जीवन में कभी भी हार ना मानने की और च...

सब्र का फल मिठा होता है

 पत्रकार साथीयों, गंगा का महत्त्व कौन नही जानता है ? गंगातीर्थ,गंगाजल हमारे जीवन का अभूतपूर्व हिस्सा है।गंगाजल से नहाने के लिए परम सौभाग्य चाहिए ही।मगर कम से कम गंगाजल का तीर्थ प्राशन करना भी परम सौभाग्य का लक्षण माना जाता है। हमारे दो टिव्ही चैनल बिएनएन और सीएनएन भी गंगाजल जैसे पवित्र समझे जाते है। वैश्विक क्रांती के लिए संपूर्ण समाज, देश तथा संपूर्ण विश्व हमारे चैनल का बहुत दिनों से बेसब्री से इंतजार कर रहा है। मगर कोरोना जैसी महामारी और भी कुछ अन्य कारणों की वजह से हमारा, अपना,हम सभी का चैनल शुरू करने में थोडी दिक्कते जरूर आई है।मगर कार्य रूका नही है। चैनल के डायरेक्टर श्री.अजयकुमार पांडेय जी तथा एडिटर इन चिफ श्री.विनोदकुमार महाजन चैनल लाँच करने के लिए हर दिन,हर पल,दिनरात एक करके,जी तोड मेहनत कर रहे है।मेहनत तो जरुर रंग लायेगी ही।और मेहनत का फल भी मिठा ही होगा। हमारे पत्रकार साथीयों, आप सभी भी एक आँस लगाकर बैठे है की हमारा न्यूज चैनल कब आरंभ होगा। साथीयों, अच्छे कार्यों के लिए और उसकी सफलता के लिए बाधाएं,रूकावटें तो आती ही है।अनेक मुश्कीलों का सामना करने के बाद ही दिव्य मंजील भी...

खणखणीत अग्रलेखासाठी

 दणदणीत अग्रलेख, खणखणीत आतील पानावरील लेख,ज्वलंत बातमीपत्रासाठी वाचा, सा.सावधान हिंदुस्थान --------------------------------------- वाचक मित्रांनो, दर आठवड्याच्या प्रत्येक अंकात आम्ही आपणास वेगळे अग्रलेख, भरीव बातम्या, आतील पानावरील खणखणीत लेख देण्याचा प्रयत्न करत असतो. वास्तविक पाहता सोशल मिडिया आणी आँनलाईन बातमीपत्र यामुळे प्रिंट मिडिया अथवा छापील वृत्तपत्र घेऊन वाचणे म्हणजे वरचेवर दुर्मीळच होत चालले आहे.पण आमचे मुख्य संपादक अलखनाथ बापू यांनी हे धाडस केले आहे हे खरोखरीच कौतुकास्पद तर आहेच. शिवाय वाचन संस्कृती शी तुटत चाललेला वाचक अथवा समाज पुन्हा वाचनसंस्कृती कडे वळावा हा प्रयत्न नक्कीच समाजात नवीन पायाभरणी करण्यासाठी कौतुकास्पद विषय आहे. अलखनाथ बापूंचा पत्रकारीतेचा अनुभव तसा फार जुना आहे.दिल्लीमधून त्यांनी एक हिंदी साप्ताहिक यशस्वीपणे चालवून दाखवले आहे.आणी विशेष म्हणजे वयाच्या ब्याऐंशी व्या वर्षी अनेक व्याप सांभाळून, वीस वर्षांच्या मुलांना लाजवेल असे जबरदस्त कार्य बापू दिवसरात्र एक करून करत आहेत ही विषेश उल्लेखनीय बाब आहे.न थकता,न हारता अव्याहतपणे ही व्यक्ती पायाला भिंगरी लावून क...

कितना पैसा कमाया ?

 *कितना पैसा कमाया ???* --------------------------------------- आजकल, विशेषता हमारे हिंदु समाज में एक चर्चा हमखास होती है... चाहे वह घर हो,आँफिस हो,चौराहा हो... बस्स,एक ही सवाल  *कितना पैसा कमाया ?* कितनी गाडीयाँ,जमीन, बंगले, सोना, रो हाऊसेस,प्लाँट,पैसा कमाया ? सुबह शाम, दिन रात बस्स,एक ही सपना, जीवन का एक ही मकसद। पैसा, पैसा और पैसा। उसने इतना कमाया,इसने इतना कमाया।  *जीवन का केवल एक ही सार और एक ही लक्ष रह गया है शायद... पैसा।* जीवन का कुछ और भी उद्दीष्ट है यह सहसा समाज भूल ही गया है ऐसा लगता है। इसके आगे देव,देश,धर्म के बारें में बहुअंश समाज भारी मात्रा में उदास दिखता है।अथवा ऐसी सोच भी ना के बराबर होती है।  *देव धर्म करने के लिए बुढापा है ना ।* ऐसी ही सामाजिक धारणा सी बन गई है।  *धन जीवनोपयोगी अत्यावश्यक साधन है,मगर अंतिम साध्य नही है...यही विचार समाज भूल गया है।* और ऐसी धारणा होने के नाते पैसा ही ईश्वर बन गया है। खावो पिवो ऐश करो ऐसा भोगवादी समाज बनता जा रहा है।और परिणाम ऐसा होता जा रहा है की,धन के वास्ते रिश्ते नाते भी टूटते हुए नजर आ रहे है।इसलिए विभक्त क...

सुभाष बाबू जैसी उडान

 *सुभाष बाबू जैसी उँची उडान भरनी है...*  -------------------------------------- सुभाषचंद्र बोस, एक जबरदस्त व्यक्तित्व। जागतीक उँची उडान और गरूड़ भरारी लेने की जबरदस्त क्षमता वाला अलौकिक व्यक्तित्व। हम उनके कार्यों से कोंसो दूर है।  *फिर भी,*  उनके आदर्शों को,उनके सिध्दांतों को आदर्श मानकर, सुभाष बाबूजी से एक जबरदस्त प्रेरणा लेकर,  *आसमान में*  उँची उडान, उँची छलांग, उँची गरूड़ भरारी लेने की कोशिश करेंगे... तो... उसमें दिक्कत क्या है ? मैं भी बचपन से ऐसा सपना जरूर देखता था।सुभाष बाबू के आदर्श सिध्दांतों पर चलकर,  *एक आदर्श सिध्दांत स्थापित करने का*  मेरा बचपन का सपना रहा है। और उसी दिशा में मैं निरंतर प्रयास रत रहता हुं। इसके लिए मेरे दादाजी ने मुझे हरपल प्रोत्साहित भी किया, मार्गदर्शन भी किया और आशिर्वाद भी दिया। बचपन से मेरे पंखों में उँची उडान भरने के लिए हमेशा मेरे दादाजी, मेरे आण्णा शक्ति भरते आये है। और शायद उनके ही आशिर्वाद से यह सपना पूरा होने का समय भी ईश्वरी इच्छा से नजदीक भी आया है, ऐसी मेरी धारणा है। जीवन में कभी भी हार ना मानने की और चौब...